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गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

सोल्लास मनाया गया क्रिसमस

बुनियादी प्रशिक्षण संस्था में क्रिसमस की खुशियां
 पत्थलगांव  रमेश शर्मा
  प्रभु यीशु का जन्मोत्सव बुधवार को यहाँ मसीहजनों ने काफी धूमधाम के साथ मनाया। शहरी और ग्रामीण अंचल के मसीही लोग काफी बड़ी संख्या में प्रातः गिरजाघर पहुंच कर विशेष प्रार्थना के कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद दिन भर क्रिसमस की बधाइयों का सिलसिला चलते रहा।


     क्रिसमस का त्योहार पर अन्य समुदाय के लोगों ने भी प्रभु यीशु के अनुयायियों को ईसा मसीह के जन्मोत्सव के अवसर पर उनके घर पहुंच कर बधाइयां दी। बंदियाखार स्थित कैथोलिक गिरजाघर में मंगलवार को देर रात तक यीशु जन्मोत्सव के कार्यक्रम होते रहे। यहाँ मसीही लोगों ने जलसा का कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया था। यहाँ पर प्रस्तुत की गई लघु नाटिका में प्रभु यीशु के अवतरण का दृश्य प्रस्तुत करते हुए संदेश दिया कि मानवता के उत्थान के लिए ही प्रभु यीशु का अवतरण हुआ था। इस कार्यक्रम में बंदियाखार चर्च के प्रमुख तथा अन्य गणमान्य लोग काफी संख्या में उपस्थित थे। यहाँ आयोजित जलसा कार्यक्रम में दूर दराज के ग्रामीण अचंल से भी हजारों मसीहीजन पहुंचे थे। आधी रात को प्रभु यीशु क जन्म के बाद नन्हा बालक के घास की चरनी में लाकर रख दिया गया था। यहाँ पर लोगों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी।
           सजाई गई चरनी और गौशाला
      क्रिसमस के दिन यहाँ प्रातः से ही चहल पहल बढ़ गई थी। बुनियादी प्रशिक्षण संस्था सहित अन्य मिशन संस्थान के प्रांगण में भी प्रभु यीशु की जन्मस्थली के प्रतीक स्वरूप घास-फूस से बनाई गई चरनी व गौशाला की आकर्षक साज सज्जा कर आराधना की गई। इसमें प्रभु के जन्म के समय मौजूद गडरियों व मजिसियों की भी झांकी बनाई गई थी। यहाँ बीटीआई की वयोवृद्ध सिस्टर विनिता ने बताया कि प्रभु यीशु मसीह के जन्म का कोई निर्धारित समय उल्लेखित नहीं है, लेकिन मान्यता है कि कड़कड़ाती ठंड में आधी रात को प्रभु यीशु का जन्म हुआ था। इसी के अनुसार 24 दिंसबर की रात को प्रभु का अवतरण माना जाता है और 25 दिसंबर को विश्वभर में क्रिसमस पर्व को सेलिब्रेट किया जाता है। 
विकलांग बच्चों के साथ केक काट कर मनाई खुशियां
     विकलांग बच्चों के साथ केक काट कर मनाई खुशियां
  यहाँ विकलांग सेवा केन्द्र के बच्चों के साथ केक काट कर क्रिसमस डे सेलीब्रेट किया। राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ के अलावा अनेक लोग उपस्थित थे। यहाँ पर सिस्टर रूथ ने कहा कि प्रभु यीशु दया, प्रेम   क्षमा व करूणा के प्रतीक हैं। उन्होने मानव समाज के उद्धार के लिए खुद का बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि विकलांग बच्चों के साथ इस त्यौहार की खुशियों को आपस में बांटने से और भी आनंद बढ़ जाता है। सिस्टर अर्पणा बरूआ ने कहा कि प्रभु यीशु ने अपने महान जीवन दर्शन के जरिए पूरी दुनिया को मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होने अपना पूरा जीवन सत्य, अंहिंसा, दया, करूणा और परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। प्रभु यीशु के विचार उपदेश आज भी प्रासंगिक और प्रेरणा दायक हैं। इस कार्यक्रम में कनाडा के नागरिक ग्लेन यदु, गौरव यदु ने विकलांग बच्चों के साथ क्रिसमस के त्योहार का केक काट कर उन्हे बधाइयंा दी। यहाँ पर क्रिसमस के मौके पर सभी उपस्थित लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी।

     

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