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मंगलवार, 17 दिसंबर 2013

भ्रष्टाचार की कहानी बन गया तमता बाँध


तमता बाँध की सूखी नहर
लोकार्पण पत्थर

] नहरें भी हो गई जीर्ण-शीर्ण
  रमेश शर्मा पत्थलगांव/
       तमता जलाशय की नहरों से किसानों को पानी देने के लिए जलसंसाधन अधिकारियों की कभी ना  तो  कभी हाँ के चलते यहां रबी फसल की खेती का काम में गति नहीं आ रही है। तमता बाँध के भरोसे रबी की फसल लेने वाले पांच गांवों के हजारों किसानों को जलसंसाधन अधिकारियों का ढुलमुल रवैया के चलते इन दिनों खासा परेशान होना पड़ रहा हैं। तमता मुख्य बाँध पर विशेष मरम्मत कार्य के लिए 1 करोड़ रूपयों का आबंटन मांगा गया है। छह माह पहले तैयार इस प्रस्ताव को अभी तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। 
       तमता जलाशय का मुख्य बाँध में बड़े पैमाने पर हुआ घटिया निर्माण कार्य के चलते तीन बार मरम्मत कार्य के बाद भी यहां की सुरक्षा पर सवालिया निशान लगा हुआ है। बीते वर्ष तमता बाँध से पानी का रिसाव बढ़ जाने के बाद जलसंसाधन विभाग ने यहां 10 लाख रूपये खर्च करके विशेष मरम्मत का कार्य कराया था। इसके पहले वर्ष भी तमता सिंचाई बाँध का एक हिस्सा की मिटटी धंस जाने से लाखों रूपये खर्च कर आनन फानन में मरम्मत का काम कराया जा चुका है। इस बाँध की बार बार मरम्मत के बाद भी यहां मुख्य बाँध स्थल पर गिटटी धसकने और मिटटी बैठने का सिलसिला बन्द नहीं हो पा रहा है। इसी वजह स्लूस के नीचे गिट्टी बह जाने के बाद वहां लोहे की राड दिखने लगी हैं। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मुख्य बाँध पर स्लूस का 60 मीटर हिस्सा पर तत्काल मरम्मत कार्य शुरू नहीं कराने से यहां पर बाँध का खतरा दूर नहीं हो पाएगा।
       लगभग 7 करोड़ रूपयों की लागत से बनाया गया तमता जलाशय का 6 जून 2002 को तत्कालीन मुख्य मंत्री अजीत जोगी ने लोकार्पण किया था। इस बाँध का निर्माण के दौरान कार्य की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देने से यह बाँध अब जलसंसाधन विभाग के लिए परेशानी का सबब बन गया है। तमता का मुख्य बाँध स्थल पर मिटटी भराव के दौरान जमकर लापरवाही बरते जाने से अब यहां हर समय खतरे के बादल मंडराने लगे हैं।
        मुख्य बाँध स्थल पर घटिया निर्माण पर पर्दा डालने के लिए जनसंसाधन विभाग के पत्थलगांव अनुविभागीय अधिकारी ने बाँध का जिर्णोध्दार के नाम से लगभग एक करोड़ रूपयों का विशेष मरम्मत का प्रस्ताव तैयार किया है। इस कार्य के लिए ट्रीपल आर योजना के तहत केन्द्र सरकार से आबंटन की मांग की गई है।

सिंचाई सुविधा को लेकर
 चिंतित किसान
       जलसंसाधन अनुविभागीय अधिकारी एसके धमिजा ने बताया कि तमता बाँध को बचाने के लिए विशेष मरम्मत की कार्य योजना को इस वर्ष स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस वजह किसानों को रबी फसल के लिए नहरों से पानी देने के लिए फिर स तैयारी शुरू कर दी गई है। उन्होने बताया कि इसके पहले बाँध के जिर्णोध्दार का काम को देखते हुए इस बार किसानों को रबी फसल के लिए पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं लग रहा था। श्री धमिजा ने बताया कि इस वर्ष अधिक बारिश के चलते तमता बाँध में खतरा का अंदेशा व्यक्त कर नहरो से अधिक पानी को छोड़ दिया गया था। इससे ग्राम बालाझर के आस पास कई जगह नहरें क्षतिग्रस्त हो गई। इनकी मरम्मत के लिए जिला प्रशासन से आंबटन की मांग की गई है। तमता क्षेत्र के 5 गांव के 1100 से अधिक किसानों को सिंचाई सुविधा के लिए बनाया गया बाँध की नहरों पर बार बार मरम्मत का काम कराने के बाद भी यहां के किसानों को सिंचाई का समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है।
 
      बाँध व नहरों की मरम्मत कार्य की जांच होनी चाहिए
       तमता के समीप भैंसामुड़ा के सरपंच अमीरसाय ने बताया कि इस बाँध से 861 हेक्टेयर खरीफ और 659 हेक्टेयर रबी फसल को सिंचाई देने का प्रावधान के सभी आंकड़े बोगस हैं। उन्होने कहा कि बगैर सिंचाई सुविधा के ही तमता बाँध की नहरों में नरेगा तथा अन्य योजनाओं से मरम्मत का काम करा कर जमकर भ्रष्टाचार किया जा रहा है। श्री साय ने कहा कि तमता मुख्य बाँध की तरम्मत और नहरों की मरम्मत के दस्तावेजों की जांच करने से यहां वित्तीय अनियमितता का बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है। यहां के अन्य किसानों में भी तमता बाँध से सिंचाई का पानी देने के लिए कभी ना तो कभी हां कहने की बात से आक्रोश व्याप्त है।






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