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शनिवार, 10 मई 2014

मॉं जैसा विराट हृदय और कहाँ

श्रीमती पुष्पा लकड़ा अनाथ बच्चा संजू के साथ
       मदर्स डेः  संडे स्पेशल स्टोरी    
    ममता की छाँव में कभी नहीं रहता भेदभाव
      रमेश शर्मा / पत्थलगांव
     मां केवल अपने ही बच्चों के लिए विराट हृदय नहीं रखती है , बल्कि उसकी ममता की छांव में पलने वाला दूसरे बच्चे को भी कभी परायेपन का अहसास नहीं हो पाता। इस दुनिया में मां का विराट हृदय के अलग अलग किस्सों के पीछे मां का दृढ़ विश्वास और सुखद अनुभूति के साथ अपनापन का सुखद अहसास भी रहता है। तभी मां को पूरी दुनिया में सर्वोच्च स्थान दिया गया है।
     यहाँ पाकरगांव में 3 साल पहले प्रसव के दौरान अपनी मां का साथ छुट जाने के बाद एक नन्हे शिशु को नहीं मालूम था कि उसका पिता शांतिप्रकाश बेक भी उसके पालन पोषण की जिम्मेदारी नहीं उठाएगा। पाकरगांव में गरीबी के बीच जीवन यापन करने वाला शांतिप्रकाश बेक का परिवार में तीन साल पहले अचानक नन्हे शिशु की किलकारी सुनाई दी थी। श्री बेक की पत्नी श्रीमती जीवन्ती ने अपने प्रथम प्रसव के दौरान सुन्दर और स्वस्थ्य शिशु को जन्म देने के बाद उसका दुखद निधन हो गया था।
    इस महिला का पति पहले से ही शराब के सेवन का आदि था। प्रसव के बाद उसकी पत्नी की असामयिक मौत के बाद वह अपने घर की जिम्मेदारी सम्हालने के बजाए बगैर किसी को कुछ बताए वह अचानक घर से गायब हो गया। शांतिप्रकाश बेक अपने सप्ताह भर के नन्हे बच्चे को अकेला छोड़ कर घर से गायब हो जाने के बाद नन्हे शिशु के सिर पर कोई भी सहारा नहीं था। सबसे दुखद पहलू यह रहा कि बेक परिवार में नन्हे बच्चे के आगमन के बाद वहाँ एक बार भी खुशियां नहीं मनाई गई थी।
श्रीमती पुष्पा अपने दो बेटे व एक बेटी के बीच संजू के साथ
  महज एक सप्ताह के बाद इस नन्हे बच्चे का पिता भी घर छोड़ कर अचानक गायब हो जाने से आस पास के लोग स्तब्ध रह गए थे। दो चार दिन के नन्हे बच्चे की पास पड़ोस के लोगों ने देख रेख कर दी थी। लेकिन इस बच्चे को अपना कर उसका लालन पालन करने के लिए कोई भी आगे नहीं आ रहा था। नन्हे बच्चे की परवरिश करने का सवाल को देख कर जब सभी खामोश हो गए तो पाकरगांव की श्रीमती पुष्पा लकडा नामक इस महिला ने साहस का परिचय दिया।
   श्रीमती पुष्पा लकड़ा के दो बेटी और दो बेटों का अपना भरा पूरा परिवार होने के बाद भी उसने अनाथ बच्चे को अपने साथ रखने का प्रस्ताव दिया था। अनाथ बच्चे के लिए श्रीमती पुष्पा लकड़ा का प्रस्ताव सुन कर गांव के सभी लोगों ने एक स्वर से अपनी सहमति दे दी थी। श्रीमती पुष्पा लकड़ा ने पिछले तीन साल से इस नन्हे बच्चे को स्नेह ,ममता, और वात्सल्य देने में कोई कमी नहीं छोड़ी है। इसी के फलस्वरूप संजू नामक इस बच्चें के जीवन में फिर से खुशियॉं भर गई हैं।
          बड़ा होकर कुछ बन जाए, तभी मिलेगा लक्ष्य
    श्रीमती पुष्पा लकड़ा का कहना है कि उसके चार बच्चों से भी अधिक संजू प्यारा लगता है। उसका कहना था कि यह बालक बड़ा होकर कुछ बन जाएगा, तभी उसे कुछ सकून मिल सकता है। इसके पहले वह अपना लक्ष्य को अधूरा ही मानती है। पुष्पा लकड़ा ने अपने चारों बच्चों की तरह संजू को भी प्यार देने में कोई कमी नहीं रखी है। बल्कि संजू को तो वह एक पल के लिए भी अपनी आंखों से दूर नहीं होने देती है। श्रीमती पुष्पा लकड़ा की बड़ी बिटिया स्मृति लकड़ा इंजीनियरिंग कालेज बिलासपुर में व्दितीय वर्ष की छात्रा है। श्रीमती लकड़ा पाकरगांव में अपने बेटे स्माइल, सुलेखा और इनुश की तरह 3 वर्षीय संजू को भी हर वक्त अपने ही साथ रखती है। श्रीमती लकड़ा का पति लचन लकड़ा का कहना है कि उन्हे अपने घर में संजू कभी भी पराया नहीं लगता है। इस परिवार में संजू के आने से इनकी खुशियंा दोगुनी हो गई हैं ।
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मदर्स डे पर ..... मां की ममता
            माँ की ममता
भास्कर न्यूज/ पत्थलगांव
     विदेशी संस्कृति की देन के बाद भी मदर्स डे को लेकर कोई विवाद नहीं रहता है। दरअसल मां वह शब्द है जो किसी भी व्यक्ति के जीवन में सबसे ज्यादा अहमियत रखता है। यहाँ अन्नू शर्मा का कहना है कि उसकी नन्ही परी को एक छींक भी आती है तो वह मां को ही याद करने लगती है। उसकी परेशानी और हर मुश्किल घड़ी में उसे मां का पूरा सहयोग मिलता है। अन्नू शर्मा का कहना है कि मां की ममता के आगे सभी खुशियॉं बौनी हो जाती हैं।

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