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सोमवार, 30 जुलाई 2012

आजादी के 64 साल बाद भी अंधविश्‍वास का सहारा


गरम सलाखों से गला
दाग कर हो रहा उपचार 
  नन्हे बच्चे भी प्रभावित 
रमेश शर्मा 
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में शिक्षा का व्यापक प्रचार प्रसार के बाद भी यहां के ग्रामीण अचंल के लोग अंध विष्वास की जकड़ से नहीं निकल पाए हैं। यहां इलाज के नाम पर गले में लोहे की गरम सलाखों से जला कर पेट दर्द एवं गला दर्द का उपचार किया जाता है। जिले में पत्थलगांव तहसील अन्तर्गत के ग्रामीण अचंल में पेट दर्द के मरीजों का उपचार का तरिका को देखकर रोंगटे खड़े हो सकते हैं। यहां पेट दर्द के बाद गला दर्द की रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप से मुड़ाबहला गांव के पाकरडाढ़ मुहल्ले में अनेक लोग पीड़ित होने से इस गांव में दहशत का माहौल बन गया है। जुलाई माह में यहां पेट दर्द एवं गला दर्द की शिकायत यत के बाद एक महिला सहित दो लोगों की मौत हो जाने से गांव के लोग इसे दैविय प्रकोप मानकर झाड़फुंक से उपचार करा रहे हैं। मुड़ाबहला के सरपंच हीरालाल ने बताया कि गांव के समीप कुकरगांव में शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र होने के बाद भी पेट दर्द एवं गला दर्द से पीड़ित मरीजो का गरम लोहे तथा तांबे के सिक्के को आग में जला कर उससे मरीज के गले में दाग कर इलाज किया जा रहा है। पिछले दो दिनों में 4 नन्हे बच्चों सहित 37 लोग इस बीमारी की चपेट में आने के बाद यहां अंधविश्‍वास के चलते उनके गले पर गरम लोहे की सलाख से दाग दिया गया हैं।
गरम सलाखों से गला दाग कर किया गया पीड़ितों का उपचार
 पत्थलगांव ब्लॅाक मेडिकल अधिकारी डा. जे मिंज को रविवार को इस बीमारी की जानकारी मिलने के बाद प्रभावित गांव में स्वास्थ्य कैंप लगा कर मरीजों का उपचार शुरू किया गया है। प्रभावित गांव पाकरडाढ़ में तैनात गला कान के विशेषज्ञ चिकित्सक बसंत कुमार सिंग ने सोमवार को बताया कि गला व पेट दर्द की बीमारी से पीड़ित सभी मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है। उन्होने बताया कि इन मरीजों की जांच के बाद वे पूरी तरह से स्वस्थ्य पाए गए हैं। डा.सिंग ने कहा कि मौसमी बुखार सर्दी खांसी की वजह से गांव के लोग अंधविष्वास में उलझ गए हैं। इसी वजह यहां  मरीजों का झाड़ फूंक अथवा गला में दाग कर इलाज कराया जा रहा था।उन्होने बताया कि गांव में लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। तथा किसी भी तरह की बीमारी की षिकायत पर इन सभी ग्रामीणों को स्वास्थ्य विभाग की सेवाऐं लेने को कहा गया है।
                     गरम लोहे की सलाख से इलाज
    मुड़ाबहला के सरपंच हीरा साय ने बताया कि विगत 4 जूलाई को इस मुहल्ले में मानकुंवर पति मनसुख 30 वर्ष की पेट दर्द व गला दर्द के बाद अचानक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 26 जुलाई को इसी तरह पेट दर्द व गला दर्द की षिकायत के बाद केशर पिता धनसाय नागवंषी 8 वर्ष की भी मृत्यु हो चुकी है। उन्होने बताया कि पिछले तीन दिनो से गांव में पेट दर्द एवं गला दर्द से पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। इसके पहले पेट दर्द व गला दर्द से दो लोगों की मौत होने से गांव में दहशत का वातावरण बन गया था। इसी वजह यहां झाड़ फूंक करने वालों की मदद ली जा रही हैं। मुड़ाबहला का पाकरडांढ़ मुहल्ले में जमलसाय का परिवार के सभी 6 सदस्य पेट दर्द व गला दर्द की बीमारी से पीड़ित हैं। जमलसाय ने अपने 4 नाबालिक बच्चों का गला दाग कर इलाज कराया है।इसी तरह तीन साल की दशमती पिता राधे तथा नौ वर्षिय नन्दकुमार पिता धरम साय सहित 37 पीड़ितों का भी गला दाग कर इलाज किया गया है। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि गांव में झाड़फूंक का काम करने वाले विष्णु यादव, मुनेश्‍वर नाग और शांतु नाग व्दारा इस तरह से पीड़ित मरीजों का लोहे की सलाख अथवा तांबे के सिक्के को आग में लाल करके उससे गला में दाग कर उपचार किया गया है।

    मुड़ाबहला के समीप पाकरडाढ़ के आंगनवाड़ी केन्द्र में स्वास्थ्य विभाग का शिविर में गरम सलाखों से दागे जाने के बाद दयाराम, सदानंद, लोहरा, धरमसाय, नन्दकुमार, मुक्ता, कृष्णा, कौशल्या,  सुषिला, सुषमा, हारावती पार्वती बाई रमिला, ढ़ोली बाई करमबती सोनकुमारी, अमरसाय का उपचार किया जा रहा है।
                        पानी की होगी जांच
     मुड़ाबहला गांव में पेट दर्द और गला दर्द की बीमारी से अनेक लोग पीड़ित होने के बाद आज गांव में पानी की जांच के लिए हेण्‍ड पम्प से नमूने भी लिए गए हैं।चिकित्सकों का कहना है कि गांव में आज इस तरह की बीमारी से पीड़ित एक भी नया मरीज नहीं आया है। पुराने मरीजों को भी आवश्‍यक दवा मुहैया कराने के बाद यहां स्थिति नियंत्रण में है।

     

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

बिना द्रोणाचार्य के चल रही स्कूल

कन्या हाई स्कूल पत्थलगांव
पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
  छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पत्थलगांव का कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल की छात्राओं को बीते पांच वर्षो से गृह विज्ञान विषय के शिक्षको के बगैर ही अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड रही है। इस शासकीय स्कूल में इस वर्ष अन्य महत्वपूर्ण विषयों के भी षिक्षकों की कमी से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।कषक्षकों का अभाव के कारण इस स्कूल में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है इसके बाद भी शिक्षा अधिकारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस स्कूल की सुध नहीं ले रहे हैं।
   सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहॉं  की 2 छात्राओं ने बगैर शिक्षकों के गृह विज्ञान की पढ़ाई में अपने बलबूते से स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोस्ताहन का पुरूस्कार प्राप्त कर चुकी है। यहां  की छात्राओं की गृह विज्ञान विषय को लेकर काफी रूचि के बाद भी शासकीय कन्या हाई स्कूल में बीते पांच वर्षो से गृह विज्ञान विषय के शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हो रही है। इंदिरा गांधी कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल के प्राचार्य एम टोप्पो ने बताया वर्ष 2007 से यहॉं  गृह विज्ञान विषय की कक्षाऐं प्रारम्भ की गई हैं। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने यहॉं  पर जल्द ही गृह विज्ञान विषय के शिक्षकों को पदस्थ करने का आश्वासन दिया था।पर पांच साल का लम्बा समय व्यतित हो जाने के बाद भी इस स्कूल में गृह विज्ञान के शिक्षक पदस्थ नहीं हो पाए हैं। उन्होने बताया कि नए षिक्षा सत्र में यहॉं  पर गणित, विज्ञान, भौतिक, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय के षिक्षकों का भी टोटा हो गया है। इस स्कूल में 16 षिक्षकों की पदस्थापना के विरूध्द केवल 8 षिक्षकों से ही काम चलाना पड़ रहा है। प्राचार्य ने बताया कि यहॉं  कामर्स विषय की कक्षाऐं नहीं होने के बाद भी इस स्कूल में कामर्स विषय के दो व्याख्याताओं की पदस्थापना कर दी गई है। उन्होने बताया कि ऐसे विपरित हालात में यहॉं  पर छात्राओं को शिक्षा देने का काम किसी चुनौती से कम नहीं है। श्री टोप्पो ने बताया कि गृह विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं होने के बाद भी यहॉं  की छात्राओं ने अपने बलबूते पर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
             लाखों के कम्प्यूटर कचरे में
  कन्या हाई स्कूल में छात्राओं को कम्पयूटर की शिक्षा देने के लिए पांच साल पहले भेजे गए लगभग 50 कम्प्यूटर सेट बगैर उपयोग के ही यहॉं  कचरे के ढ़ेर में बदल गए हैं। प्राचार्य श्री टोप्पो का कहना है कि स्कूल में कम्प्यूटर के जानकार शिक्षक नहीं होने से यहॉं  सभी महंगे उपकरण बीगड़ चुके हैं। इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है पर यहॉं  की व्यवस्था को सुधारने की अब तक कोई पहल नहीं हो पाई है। श्री टोप्पो ने बताया कि यहॉं  अभी भी 8 शिक्षकों की कमी है। इस दिशा में उच्च अधिकारियों व्दारा निदान नहीं करने से स्कूल की समस्या यथावत बनी हुई है। कन्या स्कूल की छात्राओं ने बताया कि वे कम्प्यूटर की शिक्षा लेना चाहती हैं पर उन्हे अपने स्कूल में कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। 
             बगैर शिक्षक के 2 छात्राओं को ज्ञान पुरस्कार
   कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल में वर्ष 2008 में कु नौमी ने गृह विज्ञान विषय में उत्कृष्ट अंक अर्जित कर 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर इस छात्रा को मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार रू.का नगद पुरूस्कार प्राप्त हुआ था। वर्ष 2010 में भी यहॉं  की छात्रा कु.अमिला ने 12 वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उसे भी मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार रू.का नगद पुरस्कार मिल चुका है।

रविवार, 1 जुलाई 2012

निजी स्कूलों की मनमानी से पालको को आया पसीना

एक निजी शाला की तस्‍वीर
 पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
  छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों व्दारा मनमाना शुल्क वसूलने की ढ़ेरों शिकायतों के बाद भी शिक्षा अधिकारी चुप्पी साध कर बैठे हैं। निजी स्कूलों की शैक्षणिक शुल्क के नाम पर लूट खसोट से पालकों को राहत देने के लिए शिक्षा विभाग के सचिव का कड़ा रुख अपनाए जाने के निर्देशों के बाद भी इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
   यहां पर ज्यादातर निजी स्कूलों में शिक्षा को व्यवसाय के रूप में बदल देने से पालकों की परेशानी बढ़ गई है। निजी स्कूल संचालित करने वाले एक स्कूल में तो भवन निर्माण के नाम पर भी स्कूली छात्रों से शुल्क वसूली करने का मामला सामने आया है। इस स्‍कूल में संचालक का मनमाने रवैए के बारे में शहर के कई पालकों ने षिक्षा अधिकारी को शिकायत की है। मगर धीमी गति से जांच के कारण ऐसी शि कायतों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
     ब्‍लॉक शिक्षा अधिकारी बी एस पैंकरा ने बताया कि यहां एक निजी स्कूल में भवन निर्माण के नाम पर भारी भरकम शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में कई पालकों ने उनके पास मौखिक शिकायत की है। इस वजह संचालक के विरूध्द कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होने बताया कि इन दिनो निजी स्कूलों में यूनीफार्म, पुस्तक व अन्य गतिविधियों का संचालन के नाम पर मनमाने  ढंग से छात्र छात्राओं से फीस वसूली की लगातार शिकायतें मिल रही है।इस तरह की अवैध वसूली के बारे में पालकों से लिखित षिकायत का मामला सामने आने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के विरूध्द कड़ी कार्रवाई के साथ स्कूल की मान्यता को भी रदद करने की कार्रवाई की जाएगी।श्री पैंकरा ने बताया कि निजी स्कूलों को शिक्षा नियमों का पालन करने की कड़ी हिदायत दी जा चुकी है।
        यहां के पालकों का कहना है कि निजी स्कूलों पर नकेल कसने के सभी उपाय बेकार साबित हो रहे हैं। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की सरकार के इस फैसले पर षिक्षा अधिकारियों को कड़ाई से क्रियान्वयन कराना चाहिए। पालक नत्थूराम शर्मा तथा प्रहलाद रोहिला ने कहा कि बंदियाखार स्थित अग्रंजी माध्यम का निजी स्कूल में भवन निर्माण के लिए 2000 रू. शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैं। इस स्कूल के सूचना पटल पर इस आषय का नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है। इन पालकों ने कहा कि निजी स्कूल प्रबंधन के मनमाने रवैए पर रोक लगाने के लिए पहले भी कानून बनाए गए हैं, पर शिक्षा अधिकारियों व्दारा इन नियमों को अनदेखा करने से पालकों को राहत नहीं मिल पाती है। उन्होने कहा कि निजी स्कूलों का मनमाना रवैया में रोक लगनी चाहिए।
                निजी स्कूलों में नहीं हो रहा नियमों का पालन
     पत्थलगांव में दर्जन भर से अधिक निजी स्कूलों का सचंालन किया जा रहा है। इनमें ज्यादातर स्कूलों में शिक्षा विभाग के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन व्दारा मनमानी फीस की वसूली पर अंकुश लगाने के लिए अभी तक शिक्षा अधिकारियों ने ठोस उपाय नहीं किए गए है। पिछले दिनो यहंा षिक्षा अधिकारी ने  स्कूलों के प्रबंधन को अधिक शुल्क वसूली पर रोक लगाए जाने संबधी आदेश दिया था। स्कूल षिक्षा विभाग के सचिव क ेआर पिस्दा व्दारा जारी इस आदेष में कहा गया है कि निजी स्कूलों में षिक्षा को व्यवसाय के रूप सचंालित करने की षिकायत पर त्वरित जांच के बाद दोषियों के विरूध्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा निजी स्कूलों में लाभ नहीं और हानि नही ंके सिंध्दात को अनदेखा करने पर इनके विरूध्द कार्रवाई करने को कहा गया है। निजी स्कूलों से आय व्यय, षुल्क निर्धारण और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सात दिनों के भीतर देने को भी कहा गया था ।  स्कूलों के मनमाने रवैए पर अकुंष लगाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति गठित कर संबंधित स्कूलों का निरीक्षण करने का आदेष अब फाईलों में सिमट कर रह गया है। पालकों का आरोप है कि निजी स्कूलों में वार्षिक शुल्क में वृध्दि के पूर्व पालक समिति से सहमति  नहीं ली जा रही है । शुल्क का निर्धारण युक्तिसंगत नहीं होने से पालकों की परेशानी बढ़ गई है । निजी स्कूलों में पुस्तक,यूनिफार्म,बस ,विकास शुल्क के नाम पर जगह जगह अतिरिक्त फीस वसूली करने के बाद भी स्कूल सचंालक के विरूध्द  कार्रवाई  नहीं होने से यहां के पालकों में आक्रोश व्याप्त है।
                    इनका पालन अनिवार्य
  •    प्रत्येक निजी स्कूलों को हर साल ऑडिटेड आय व्यय का ब्यौरा जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा।
  •   मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जिला षिक्षा अधिकारी को देनी होगी।
  •    हर स्कूल को प्रति वर्ष के लिए निर्धारित शुल्‍क का प्रारूप का प्रकाशन किया जाएगा।
  •  शुल्क बढ़ाने से पहले पालकों की सहमति लेना अनिवार्य है।

शुक्रवार, 8 जून 2012

अस्पताल की मशीनों को इलाज की जरूरत


सोनोग्राफी
बीएमओ डा.जेम्स मिंज के पास मरीजों की कतार
अस्‍पताल के कई  उपकरण खराब
 पत्थलगांव/  रमेश शर्मा छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पत्थलगांव का सिविल अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों को कृत्रिम श्‍वास देकर उपचार के लिए लाई गई कीमती वेंटिलेटर मशीन तथा हृदय रोगियों के काम में आने वाली टीएमटी व सोनोग्राफी मशीन का सुधार नहीं होने से इन मशीनों का इस वर्ष भी उपयोग हो पाने की सम्भावना नहीं है।
    नागलोक के नाम से चर्चित इस अचंल में सर्पदंश के मरीजों के लिए जीवन रक्षक वेंटिलेटर मशीन के अलावा सिविल अस्पताल में अनेक महंगे सवास्थ्य उपकरण यहंा कचरे के ढेर में पड़े हुए हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि मरीजों को नया जीवन देने में सहायक इन महंगे स्वास्थ्य उपकरणों का एक बार भी इस्तेमाल नहीं हो पाया है। ब्लॅाक मेडिकल अधिकारी जेम्स मिंज का कहना है कि पत्थलगांव सिविल अस्पताल में आठ वर्ष पहले भेजे गए ज्यादातर स्वास्थ्य उपकरण अब कंडम हो चुके हैं।इन स्वास्थ्य उपकरणों का सुधार के लिए कई बार संबंधित कम्पनी के इंजीनियर और उच्च अधिकारियों को पत्र लिख कर अवगत कराया जा चुका है। मगर यहां पड़े उपकरणों की कोई भी सुध नहीं ले रहा है।
बेंटिलेटर मशीन
टीएमटी
 मानसून आने के बाद बरसात की पहली फुहार पड़ते ही सिविल अस्पताल में सर्पदंश के मरीजों का तांता लग जाता है।बीते वर्ष पत्थलगांव के सिविल अस्पताल में सर्पदंश से पीड़ित 24 मरीजों का उपचार कर उन्हे नई जिन्दगी मिली थी। बीएमओ डा.मिंज का कहना है कि बरसात का मौसम आते ही वे लोग सर्पदंश के मरीजों को लेकर सतर्क हो जाते हैं।उन्होने बताया कि यहॉं रायगढ़ जिले के लैलूंगा और धर्मजयगढ़ विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्र से भी सर्पदंश के कई मरीज पहुंच जाते हैं। ऐसे मरीजों को अस्पताल में तत्काल भर्ति कर उनका उपचार शुरू कर दिया जाता है। डा.मिंज ने बताया कि बरसात में सर्पदंश की अधिक घटनाओं के मददेनजर यहंा एनटी स्नेक वेनम दवा का तो पर्याप्त भंडारण कर लिया गया है, पर सर्पदंश के गम्भीर मरीजों को बचाने के उपयोग में आने वाली वेंटिलेटर मशीन की कमी दूर नहीं हो पाई है। यहॉं के चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश की घटना के बाद विलम्ब से आने वाले मरीजों को कृत्रिम संास देकर बचाया जा सकता है। ऐसे समय में वेंटिलेटर मशीन जीवन दायिनी साबित होती है।पत्थलगांव का सिविल अस्पताल में आठ साल पहले इन मषीनों की आपूर्ति की गई है।स्वास्थ्य उपकरण आपूर्ति करने वाली कम्पनी ने इन मषीनों को चालू किए बगैर ही लाखों रू.का भुगतान प्राप्त कर लिया है।
                जरनेटर मशीन और सौर उर्जा प्लेट भी खराब 
      पत्थलगांव का सिविल अस्पताल प्रारम्भ से ही अव्यवस्था का षिकार रहा है।यहंा पर स्वास्थ्य उपकरणों की बदहाली का मरीजों को ही खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार यहंा मरीज का आपरेशन से पहले बेहोश करने वाली किमती मशीन भी खराब पड़ी है। इसके अभाव में मरीजों का आपरेशन में परेषानी का सामना करना पड़ता है।बताया जाता है कि यहंा छैः माह पहले लाखों रू.का जरनेटर बीगड़ जाने के बाद इसका आज तक सुधार नहीं हो सका है। इस अस्पताल में भर्ति होने वाले मरीजों को गर्मी के दिनों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। इसी तरह सिविल अस्पताल में इमरजेंसी विद्युत सुविधा मुहैया कराने के लिए लगभग एक करोड़ रू.की लागत से सौर उर्जा प्लेट लगाई गई हैं। सौर उर्जा प्लेट का इंटरनल वायरिंग का काम लम्बे समय से अधूरा होने के कारण इस सेवा का मरीजों को लाभ नहीं मिल पाया है। 

             नागलोक के दो अस्पतालों को मिलेगी नई बेंटिलेटर मशीन
     सीएमओ डा.भारत भूषण बोर्डे ने बताया कि पत्थलगांव सिविल अस्पताल में बीगड़े हुए स्वास्थ्य उपकरणों की कमी को जल्द ही दूर कर लिया जाएगा। उन्होने बताया कि इस अस्पताल में नया जरनेटर खरीदने की स्वीकृति मिल चुकी है।जल्द ही पत्थलगांव सिविल अस्पताल में नया जरनेटर उपलब्ध करा दिया जाएगा। डा.बोर्डे ने बताया कि जिले में सर्पदंश की अधिक घटना वाला क्षेत्र फरसाबहार और पत्थलगांव अस्पताल में मरीजों का उपचार के लिए कृत्रिम सांस देने वाली वेंटिलेटर मशीन की आवष्यकता है।इसके लिए राष्‍ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन को पत्र लिखा गया है। सर्पदंश प्रभावित दोनो अस्पतालों के लिए जल्द ही नई बेंटिलेटर मशीन प्राप्त हो जाऐंगी। डा.बोर्डे ने बताया कि नागलोक क्षेत्र में पदस्थ स्वास्थ्य कर्मियों को बेंटिलेटर मशीन का सचंालन करने के लिए अपोलो अस्पताल में भेज कर प्रशिक्षण दिलाया जाएगा।

गुरुवार, 7 जून 2012

मानसून को मनाने किसानों ने की पूजा


मानसून के लिए पूजा करते किसान
 देरी से किसान चिंतित
 पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/ 
 रमेश शर्मा
      आषाढ़ का महीना शुरू होने के बाद अब अचंल के किसान राहत देने वाली मानसून की बारिश का बेसब्री से इंतजार करने लगे हैं।
   किसानों का कहना है कि यदि आषाढ़ की शुरुआत के साथ मानसून आ जाता है तो उत्तम खेती होती है। इस वर्ष आषाढ़ का महीना शुरू होने के बाद भी मानसून का अता पता नहीं होने से गांव में किसानों की चिंता बढ़ने लगी है। बुधवार को ग्राम पचंायत खुंटापानी के ग्रामीणों ने आसमान में पानी के मेघा को  जल्दी बुलाने के लिए सरना स्थल पर कई घंटे तक पूजा अर्चना की। इन ग्रामीणों का मानना है कि गांव का प्राचीन सरना देव की पूजा अर्चना करने से जल्द बारिश हो जाती है।
      खुंटापानी गांव का मुखिया शिवचरण सिंह ने बताया कि आषाढ़ का महीना प्रारम्भ हो जाने के बाद भी आसमान में पानी वाले मेघा का नामोनिषान नहीं दिखाई दे रहा है। लगातार चिलचिलाती धूप, तपिश,  उमस और रात को भी भीषण गर्मी से किसानों का खेती का काम पिछड़ने लगा है। षिवचरण का कहना था कि किसानों ने अपने खेतों में हल चला कर खाद डालने का काम पूरा कर लिया है। अब किसानों को केवल पानी वाले बादलों का बेसब्री से इन्तजार है। इन किसानों का कहना था कि यदि आषाढ़ की शुरुआत में ही बारिश हो जाती है तो अच्छी फसल होती है।
     नवतपा समाप्त हो जाने के बाद भी मानसून का आसार नहीं दिखने से इन किसानों के माथे पर चिन्ता की लकिरें स्पष्ट दिखाई पड़ रही थी। इन दिनो भीषण गर्मी के चलते गांव में सभी तालाब, कुंए और हेण्डपम्प सूख चूके हैं। किसानों को अपने मवेषियों को पानी पिलाने में भी काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।प्रति वर्ष मानसून की देरी और अल्प वर्षा के चलते कई किसान खेती के कामकाज से विमुख हो गए हैं। किसानों का कहना था कि बारिश में देरी के चलते फसल की गुणवत्ता पर भी विपरित असर पड़ता है। यदि समय पर मानसून आ जाता है तो किसानों की खुषी दोगुनी हो जाती है।
     ग्राम पचंायत खुंटापानी में बुधवार को गांव के बाहर सरना स्थल पर सुबह से ही चहल पहल बढ़ गई थी। सरना स्थल पर सभी छोटे बड़े किसान पहुंचने के बाद स्थानीय बैगा मनीराम ने यहंा पर पेड़ों की पूजा शुरू की थी। सरना स्थल पर पहुंचने वाला प्रत्येक किसान अपने घर से एक मुट्ठी चांवल लेकर पहुंचा था। मिटटी के नए घड़े में पानी लाकर यहंा प्राचीन परम्परा के साथ गांव में हरियाली की कामना के लिए काफी धूमधाम के साथ पूजा की जाती है। 
मानसून का इंतजार , बारिश के लिए ग्रामीणों ने की पूजा
  गरजो मेघ , बरसो मेघ .... 
     यहां पर पूजा करने वाले बैगा मनीराम ने बताया कि इस सरना स्थल पर जब भी पानी वाले मेघा के लिए पूजा की गई है तो महज एक सप्ताह के भीतर बारिश अवष्य हुई है। यहंा के ग्रामीणों का कहना था कि इस बार मानसून आने में देरी हो रही है।इसी वजह किसानों की चिन्ता बढ़ते जा रही है। किसानों का कहना था कि धान की खेती के लिए इस समय बारिश का होना बेहद जरूरी है। गांव के किसान इन दिनों बारिश के लिए इन्द्रदेवता को टकटकी लगाए बैठे हैं। मगर अभी आसमान में बारिश वाले मेघ का कहीं पता नहीं लग पाया है। इस गांव के बुजुर्ग किसान बहादुर राम ने बताया कि मानसून के पहले हवा की दिषा से बरसात होने का संकेत मिल जाता है। इस बार हवा का रूख से भी मानसून का पता नहीं चल पाया है। थक हार कर इन किसानों ने अपनी प्राचीन परम्परा की सुध ली है। सरना स्थल पर एकत्रित सभी किसान एक ही बात के लिए दुआ कर रहे थे  गरजो मेघ बरसो मेघ...
 रमेश शर्मा

मंगलवार, 22 मई 2012

परंपरा को जीवित रखने का अनूठा प्रयास


कोषाध्यक्ष जगनलाल अग्रवाल

प्रबंधक प्रहलाद रोहिला
बुजुर्गो के सेवा कार्य से सैकड़ो मुसाफिरों को मिलता है लाभ
पत्थलगॉंव / रमेश शर्मा
      शहरों में गरीब यात्रियों के ठहरने का सहारा ध्‍ार्मशाला  की परम्परा भले ही अब लुप्त होने लगी है। मगर जशपुर जिले के पत्थलगांव में  के समाजसेवियों व्दारा इस पुरानी परम्परा का आज भी बेहतर ढंग से सचंालन किया जा रहा है। बस स्टैण्ड यहॉं पर स्थित हरियाणा ध्‍ार्मशाला  को व्यावसायिक उपयोग से अलग रखकर  सेवा और मदद की भावना को ही सबसे उपर रखा गया है।
     पत्थलगांव में 40 साल पहले  पर हरियाणा से आकर बसने वाले बुजुर्गो ने आपस में धनराषि एकत्रित कर इस ध्‍ार्मशाला  की नींव रखी थी।  दानदाताओं की लम्बी कतार के साथ निःस्वार्थ भावना से यंहा का काम में सहयोग देने वालों के चलते इस ध्‍ार्मशाला  की दूर दूर तक पहचान बन गई है। पत्थलगांव की धर्मशाला से गरीबों को ठहरने का सहारा के अलावा कम खर्च पर वैवाहिक कार्यक्रम पूरे करने वालों को अच्छी खासी मदद  मिल जाती है। इस ध्‍ार्मशाला  से होने वाली मामूली आय के साथ अन्य दानदाताओं की आर्थिक सहायता को शामिल कर दूर दराज से आने वाले यात्रियों को अच्छी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महंगाई के बदलते दौर में भी  ठहरने वाले यात्रियों को महज 50 रू. और 10 रू. में कमरा उपलब्ध कराया जा रहा है।
       के प्रबंधक प्रहलाद रोहिला का कहना है कि ध्‍ार्मशाला  में सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रबंधक मंडल ने  पर यात्रियों के लिए कुछ आवश्‍यक नियम बनाऐं हैं। सभी यात्रियों से इन नियमों का पालन करना अनिवार्य रखा गया है। इसके अलावा  साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होने कहा कि आपराधिक घटनाओं के मददेनजर  ठहरने वाले का पहचान पत्र की कड़ाई अवष्य की गई है। श्री रोहिला ने बताया कि कभी कभी परिस्थितिवश मुसाफिर से ठहरने की शुल्क को भी माफ कर दिया जाता है।
व्यवस्थापक नत्थूराम शर्मा
     हरियाणा से आए हुए बुजुर्गो ने वर्ष 1968 के दौरान जिस उद्देश्‍य को लेकर पत्थलगांव में हरियाणा ध्‍ार्मशाला  की नींव रखी गई थी उस मदद की भावना को आज भी पूरे विष्वास के साथ जारी रखा गया है। चार दषक पहले निर्मित यह ध्‍ार्मशाला  की पिछले दिनों काफी जर्जर हालत हो जाने से इसका पुनः जीर्णोंध्दार कराया गया है। मौजूदा समय में  पर यात्रियों को ठहरने के लिए आधुूनिक सुविधाओं का पूरा खयाल रखा गया है।
                        धर्मशाला में सुविधा विस्तार की बृहद योजना
       हरियाणा ध्‍ार्मशाला  के कोषाध्यक्ष जगनलाल अग्रवाल ने बताया कि इस ध्‍ार्मशाला  में पुराने कमरे और शौचालयों को हटाकर नई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यात्रियों के लिए चौबीस घन्टे बिजली पानी जैसी जरूरी सुविधाओं के बदले   पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है। गर्मी के दिनों में यात्रियों कूलर, पंखों की व्यवस्था के साथ ठंड के दिनों में गददे, कम्बल जैसी सुविधाओं का भी बेहतर प्रबंध किया गया है। शहर के दानदाताओं व्दारा हरियाणा ध्‍ार्मशाला  में आर्थिक मदद कर अपने बुजुर्गो के नाम षिलालेख पर दर्ज करा दिए हैं। ध्‍ार्मशाला  के व्यवस्थापक नन्थुराम शर्मा ने बताया कि इस ध्‍ार्मशाला  सचंालन के लिए कभी भी व्यावसायिक दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाता है। वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान पहले आओ पहले पाओ का नियम रखा गया है। उन्होने कहा कि मंहगाई के इस दौर में ज्यादातर शहरों में गरीब यात्रियों के ठहरने की पुरानी ध्‍ार्मशाला  का नाम भले ही लुप्त हो गया है पर  की ध्‍ार्मशाला  में सभी सदस्यों का सहयोग से यात्रियों को निरतंर सुविधा मिल रही है। उन्होने बताया कि इस धर्मशाला में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही बदलाव करने की योजना है। इसके लिए ध्‍ार्मशाला  व्यवस्थापक मंडल ने बृहद कार्य योजना बनाई है। श्री शर्मा ने कहा कि आज महंगाई के दौर में ध्‍ार्मशाला  संचालन का काम  थोड़ा कठिन अवश्‍य है पर  ठहरने वाले गरीब यात्रियों की दुवाओं से काफी सुखद अहसास होता है। श्री शर्मा ने बताया कि लम्बे समय के बाद भी ध्‍ार्मशाला  का सचालन में रूकावट नहीं आने के पीछे इसके सदस्यों की एकता, आपसी भाईचारा तथा सेवा की भावना प्रमुख कारण है।  ध्‍ार्मशाला  व्यवस्थापक मंडल के संरक्षक धर्मपाल अग्रवाल व्दारा आय ब्यय की आडिट के बाद ही नई योजना को स्वीकृति दी जाती है।
     गरीब यात्रियों को इस अनजाने शहर में महंगे होटल और लॉज की दिक्कत के कारण उसे ध्‍ार्मशाला  का काफी बड़ा सहारा मिल जाता है। ध्‍ार्मशाला  में ठहरने का बेहद कम खर्च के बाद गरीब यात्री खाने पीने की महंगाई का आसानी से मुकाबला कर लेते हैं। पत्थलगांव ध्‍ार्मशाला में प्रति दिन 50 से 150 यात्रियों को ठहरने का लाभ मिल रहा है। छोटा व्यवसाय करने वाले लोग बेफिकर होकर पत्थलगांव ध्‍ार्मशाला  पहुंचते हैं।

बुधवार, 16 मई 2012

कश्‍मीरियों की पहली पसंद जशपुरी चिरोंजी

चिरोंजी की गुठली
चिरोंजी ने ग्रामीणो को बनाया मालामाल
 देश के महानगरों की मांग से कीमत बढ़ी
 पत्थलगांव/  रमेश शर्मा
   छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इस वर्ष चिरोंजी वनोपज की बम्फर पैदावार के साथ स्थानीय खरीददारों व्दारा काफी उँची कीमत देकर खरीदी शुरू करने से यहंा के ग्रामीणों को अच्छी आमदनी हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस फसल से मिलने वाली नगद आय से वे शादी व्याह के मौके पर दिल खोल कर खर्च कर पा रहे हैं। इस अचंल में गर्मी के मौसम कई बार रूक रूक कर हुई बे मौसम की बारिश भी चिरोंजी की फसल के लिए वरदान साबित हुई है।
             यहॉं के ज्यादातर ग्रामीण इन दिनो भोर की पौ फटते ही जगंल का रूख कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन दिनों उनका पूरा परिवार जगंल पहुंच कर वनोपज संग्रहण के काम में व्यस्त है। जगंलों में तेन्दू पत्ता संग्रहण के साथ ग्रामीणों को चिरोंजी वनोपज से अच्छी खासी आमदनी हो रही है। छत्तीसगढ़ की सूखी मेवा के नाम से देश के महानगरों में बिकने वाली चिरोंजी वनोपज की इस बार यहॉं आवक से मांग अधिक है। यहॉं पर बाहर के व्यापारियों से चिरोंजी की मांग बढ़ जाने से स्थानीय खरीददार ग्रामीणों से पांच सौ रू. प्रति किलो की दर पर खरीदी करने लगे है। ग्रामीणों ने बताया कि चिरोंजी वनोपज की यह किमत पहली बार देखने को मिल रही है।
चिरोंजी
           चिरोंजी के अनुपात में गुठली की खरीदी
  वनोपज चिरोंजी के स्थानीय खरीददारों व्दारा सग्रंहणकत्र्ताओं से सीधे चिरोंजी की गुठली खरीद लेने की वजह से अब ग्रामीणों को चिरोंजी गुठली सूखाकर उसका दाना निकालने का झंझट से भी छुटकारा मिल गया है।बताया जाता है कि यहॉं पर चिरोंजी दाने का भाव इन दिनो 500 रू. प्रति किलों पहुंच गया है।यहॉं पर चिरोंजी व्यवसायी विजय श्री अग्रवाल ने बताया कि चिरोंजी गुठली में 20 प्रतिशत दाना निकलता है। इसी अनुपात पर गुठली के दाम 100 रू.प्रति किलो कर दिए गए हैं। उन्होने बताया कि इससे पहले चिरोंजी दाना महज 150 से 200 रू.प्रति किलो की दर पर खरीदा जाता था। उस समय चिरोंजी दाना सग्रंहणक व्दारा ही निकालना पड़ता था। इस काम में ग्रामीणों को अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ती थी। पर अब जगह जगह चिरोंजी गुठली से दाना निकालने के आटोमैटिक प्लांट लग जाने से अच्छी क्वालिटी का माल तैयार होने लगा है।
चिरोंजी का फूल
कश्‍मीरियों की मांग से बढ़ी कीमत
  जशपुर जिले में अच्छी किस्म की चिरोंजी फसल देश के महानगरों में पहंुचने के बाद अन्य जगह की फसल के मुकाबले में 25 रुपए अधिक दर पर हाथों हाथ खरीद ली जाती है। इस वर्ष जशपुर जिले की चिरोंजी खरीदने के लिए उत्तर प्रदेश,और दिल्ली के अलावा श्रीनगर कष्मीर के बड़े व्यवसायियों ने भी यहॉं से माल के अगाउ सौदे कर लिए हैं। इसी वजह यहंा चिरोंजी के दाम में लगातार तेजी का रूख बन गया है। यहॉं के व्यापारियों का कहना है कि अभी चिरोंजी के दाम में 100 से 150 रू. और तेजी की सम्भावना है। छत्तीसगढ़ की सूखी मेवा के लिए बाहर के व्यापारियों की मांग बढ़ने का स्थानीय ग्रामीणों को अच्छा लाभ मिल रहा है।
रमेश शर्मा



मंगलवार, 15 मई 2012

आखिर किस काम का ब्लड स्टोरेज सेंटर

दानदाताओं के बाद भी खून के लिए भटक रहे मरीज


खाली पड़ा ब्लॅड स्टोर
 खून के जरूरतमंद मरीज
 
 
 पत्थलगॉंव /               रमेश शर्मा
     आदिवासी बहुल जशपुर जिले का पत्थलगांव सिविल अस्पताल में ब्लड स्टोरेज की सुविधा के बाद भी यहॉं जरूरतमंद मरीजों को खून के लिए दर दर भटकना पड़ रहा है।साल भर पहले यहॉं लायंस क्लब के सहयोग से ब्लड स्टोरेज सेंटर खोला गया था। मरीज की जरूरत के वक्त यहॉं अक्सर खून के अभाव के कारण मरीज के परिजनों को ही खून के लिए दानदाताओं की तलाश करनी पड़ती है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि आठ माह पहले यहॉं की विभिन्न समाजसेवी संस्था के सदस्यों ने 76 यूनिट खून दान दिया था। विभिन्न ग्रुप का एकत्रित इस बेशकीमती खून को अम्बिकापुर स्थित शासकीय ब्लड मदर बैंक में जमा किया गया था। अब पत्थलगांव के मरीजों को खून की जरूरत पड़ने पर वहॉं स्टॅाक नहीं का बहाना कर वापस लौटा दिया जा रहा है। यहॉं खून के अभाव में मरीजों को बाहर भेजने पर गरीब तबका के मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
डा.जेम्स मिंज ब्लॅाक मेडिकल अधिकारी पत्थलगांव

      पत्थलगांव ब्लॅाक मेडिकल अधिकारी डा.जे मिंज का कहना है कि यहॉं पर जब भी मरीजों के लिए खून की जरूरत पड़ती है उस समय अम्बिकापुर के मदर बैंक से स्टॅाक में ब्लड नहीं होने का बहाना कर यहॉं के स्वास्थ्य कर्मचारी को वापस लौटा दिया जाता है। ऐसे हालात में यहॉं मरीज को जीवन रक्षक खून के लिए स्वयं अपने रिष्तेदार अथवा अन्य दानदाताओं की तलाश करनी पड़ती है। कई बार मरीज के लिए समय पर खून उपलब्ध नहीं होने पर मरीज को बाहर भेजना पड़ जाता है। त्थलगांव  सिविल अस्पताल की इस समस्या से अक्सर गरीब मरीजों को परेषानियों का सामना करना पड़ता है।
                         मदर ब्लॅड बैंक से समय पर नहीं मिलता खून
     सड़क दुर्घटना अथवा अन्य गम्भीर मरीजों के लिए महज खून की व्यवस्था नहीं हो पाने से कई बार विकराल स्थिति भी निर्मित हो जाती है। पत्थलगांव में ब्लड स्टोरेज सेंटर के टेक्निषियन भक्त वात्सल्य शर्मा ने बताया कि यहॉं समाजसेवी संस्था के सदस्यों से एकत्रित खून को अम्बिकापुर के मदर बैंक में जमा कराया गया था। उन्होने बताया कि 76 यूनिट ब्लड के बदले अब तक केवल 4 यूनिट ब्लड ही वापस मिल पाया है। श्री शर्मा ने बताया कि ब्लड मदर बैंक में खून की जरूरत पड़ने पर आवष्यक दस्तावेज के साथ एक कर्मचारी को भेजा जाता है। पर वहॉं हर बार स्टॅाक खत्म होने का बहाना कर खाली हाथ लौटा दिया जाता है। पत्थलगांव ब्लड स्टोरेज सेंटर में खून जांच तथा सभी सुविधा होने के बाद भी यहॉं खून के लिए एक माह की समयावधि होने के कारण वे यहॉं अधिक समय तक खून नहीं रख पाते हैं।
                              खून देने को तैयार दानदाता
     पत्थलगांव सिविल अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों को समय पर खून नहीं मिल पाने की निरंतर षिकायतों के बाद यहॉं की समाजसेवी संस्था तथा अन्य दानदाताओं ने रक्तदान के लिए मुंह नहीं मोड़ा है।पत्थलगांव में ब्लॅड स्टोरेज सेंटर खोलने में सहयोग देने वाली समाजसेवी संस्था लायंस क्लब के उपाध्यक्ष विजय अग्रवाल ने बताया कि उन्होने यहॉं सिविल अस्पताल में रक्त दानदाताओं के नाम पते दर्ज करा दिए हैं। उन्होने बताया कि सिविल अस्पताल में मरीज के लिए खून की जरूरत पर उनके सदस्य हर समय खून देने को तैयार रहते हैं। श्री अग्रवाल ने बताया कि जरूरतमंद मरीजों के लिए अग्रिम खून उपलब्ध कराने के लिए उनके सदस्य आज भी पीछे नहीं हैं ,पर मदर ब्लड बैंक से जरूरतमंद लोगों को समय पर खाली हाथ वापस नहीं लौटाना चाहिए।
    यहॉं सिविल अस्पताल में शनिवार को ग्राम आमाडोल की महिला मरीज को उसके परिजनों ने लाकर भर्ति कराया था। डा.जे मिंज व्दारा इस मरीज का परीक्षण के बाद इसे खून की कमी की बात कही थी। इस मरीज की जीवन रक्षा के लिए तत्काल बी पाॅजिटिव खून की जरूरत बताई गई थी। सिविल अस्पताल में इस मरीज की जरूरत का खून उपलब्ध नहीं रहने से मरीज के परिजनों को काफी भाग दौड़ करनी पड़ी। इसके बाद भी इस मरीज के परिजन खून की व्यवस्था नहीं कर सके थे।यहॉं मरीज के परिजनों ने बताया कि सिविल अस्पताल में खून उपलब्ध कराने के नाम पर अवैध वसूली भी की जाती है। सिविल अस्पताल के वरिष्ठ डाक्टर बसंत सिंह ने इस आरोप को खारिज कर दिया। उन्होने बताया कि यहॉं प्रतिदिन तीन से चार मरीजों को खून की जरूरत पड़ती है। पर खून उपलब्ध नहीं होने से उन्हे मरीज को अक्सर बाहर के अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ जाता है। डा.सिंह का कहना था कि यहॉं की समस्या के प्रति मदर ब्लॅड बैंक को ध्यान देने की जरूरत है।
          अम्बिकापुर स्थित मदर ब्लॅड बैंक में यहॉं के जरूरतमंद मरीजों को खून नहीं मिलने की बात से उच्चाधिकारियों के पास कई बार लिखित षिकायत की जा चुकी है।पर ब्लॅड बैंक का रवैया में आज तक कोई सुधार नहीं हुआ है। 
          

गुरुवार, 10 मई 2012

परंपरागत सरहुल त्योहार से पर्यावरण का संदेश


पत्थलगॉंव /                     रमेश शर्मा
       वनवासियों के प्रत्येक तीज त्यौहारों में प्रेरणादायक संदेश के साथ आपसी भाईचारे की भावना को मजबूती मिलती है। इन्ही में से एक वनवासियों का वर्षो पुराना सरहुल पर्व भी है, जिसमें  गांव गांव से लोग इकट्ठा होकर पेड़ और धरती की पूजा करके पर्यावरण संरक्षण के काम में अनोखी मिसाल कायम कर रहे हैं।

     उक्त बातें पूर्व मंत्री गणेशराम भगत ने 
गुरुवार को पत्थलगांव में आयोजित सरहुल पर्व के दौरान वनवासियों की एक विषाल जनसभा में कही । 10 मई 2012 को भीषण गर्मी के बाद भी पत्थलगांव में आयोजित सरहुल पर्व में शामिल होने के लिए दूर दराज के गांवों से काफी बड़ी संख्या में आदिवासी इकट्ठा हुए थे। इन ग्रामीणों ने पालीडीह के आम बगीचा में घंटो तक लोक नृत्य तथा गीत गाकर एक दूसरे को सरहुल त्योहार की बधाई दी।ग्रामीण अपनी प्राचीन परम्परा के अनुसार साल वृक्ष के फूल भेंट कर इस त्योहार की बधाई दे रहे थे।पालिडीह का आम बगीचा में एकत्रित वनवासियों ने दोपहर 1 बजे गणेशराम भगत की अगुवाई में एक विषाल रैली भी निकाली। लगभग दो कि.मी.लम्बी इस रैली में शामिल वनवासियों ने यहंा तहसील कार्यालय के समीप प्राचीन सरना में जाकर पूजा अर्चना की। बाद में यह रैली बेहद अनुशासित ढंग से पालिडीह का प्राचीन सरना स्थल पर पहुंची। वनवासियों के इस पूजा स्थल में आसपास के गांवों से आए 31 बैगाओं के व्दारा आदिवासियों की संस्कृति से पेड़ों की पूजा कराई गई। सरहुल की रैली में ज्यादातर ग्रामीण अपने हाथों में झंडे लिए हुए थे। इसमें आदिवासियों के नगाड़ों की गूंज तथा नृत्य का दृष्य काफी मनोहारी लग रहा था।सरहुल की रैली में नगाड़ों की गुंज दूर दूर तक सुनाई पड़ रही थी।
     पालिडीह सरना से रैली वापस लौटने पर आम बगीचा में जनसभा का आयोजन किया गया। इसमें अनेक वनवासी नेताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस सभा में गणेशराम भगत ने कहा कि  हमारे बुजुर्गो के अच्छे अनुभव को नई पीढ़ी के बीच में बांटने के लिए ही वनवासियों के तीज त्यौहारों का आयोजन होता है।वनवासियों की प्राचीन संस्कृति में आपसी भाईचारा को जीवित रखने का पाठ पढ़ाया गया है।श्री भगत ने कहा कि सरहुल त्योहार में पेड़ पौधों को काटने के बजाए उनकी पूजा करने की बात कही गई है।उन्होने कहा कि ग्रामीण एवं किसानों के लिए हरियाली का सदैव महत्व रहा है। इस त्यौहार के माध्यम से वनवासी बगैर शासकीय मदद के  वनों की रक्षा करने का सन्देश को दूर दूर तक पहुंचाते हैं। इसी वजह वनवासियों का सरहुल त्योहार अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा की मिसाल बन गया है। उन्होने कहा कि वनवासियों व्दारा सरहुल का त्यौहार को वर्षो से मनाया जा रहा है।आदिवासियों के इन प्राचीन त्यौहारों की बदौलत दूर दराज के ग्रामीणों में भी भाईचारा कायम है। कुछ लोगों व्दारा आदिवासियों के बीच में धर्मान्तरण की दीवार खड़ी करके उन्हे कमजोर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।पर वनवासी समाज में जागरूकता आने के बाद वे लोग सजग हो गए हैं।प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करने वालों को इन आदिवासियों ने बाहर का रास्ता दिखला दिया है।
सरहुल रैली में गणेशराम भगत भीषण
 गर्मी में ग्रामीणों की विशाल रैली
  
वनवासियों की एकजुटता से नक्सलियों ने रास्ता बदला
     श्री भगत ने कहा कि वनवासियों में आपसी भाईचारा और एकजुटता के कारण वे बड़ी से बड़ी समस्या का आसानी से हल ढूंढ़ लेते हैं।उन्होने कहा कि वनवासियों की एकजुटता के चलते नक्सलियों को भी वापस भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है।श्री भगत ने कहा कि जशपुर जिले से लगा हुआ सरगुजा जिले का केरजू गांव के आसपास नक्सलियों ने डेरा डाल दिया था। यहंा के वनवासियों ने इपनी एकजुटता का परिचय देकर इन नक्सलियों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर कर दिया।इसी तरह जशपुर जिले में भी राज्य की सीमा से लगे सरहदी गांवों में आदिवासियों की एकता के कारण नक्सलियों को अपना रास्ता बदलना पड़ गया है।यहंा वनवासियों के महापुरुष बिरषा मुण्डा तथा रामपुर के जगमोहन बाबा का भी स्मरण किया गया।इन महापुरुषों की वीर गाथा को याद कर नक्सलियों से मुकाबला करने की बात कही गई।वनवासियों की सभा में अखिल भारतीय कल्याण आश्रम के अध्यक्ष जगदेवराम, रामप्रकाश पाण्डेय सत्यप्रकाश तिवार शैलेन्द्र ठाकुर  बगीचा के मुकेश शर्मा, केशव यादव, चन्द्रदेव यादव सरगुजा के संजय गुप्ताबलदेव जोशी, श्रीमती रामवती जायसवाल, रोशन प्रताप साय रम्मू शर्मा, विशु शर्मा सुरेन्द्र कुमार चेतवानी ,राजेश अग्रवाल सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

                     मधु मख्खियों का हमला में बाल बाल बचे गणेशराम
    पालिडीह का सरना में गुरूवार को दोपहर तीन बजे सरहुल पूजा कर वापस लौटते वक्त वनवासियों की रैली पर अचानक मधुमख्खियों ने हमला बोल दिया था।इस हमले में पूर्व मंत्री गणेशराम भगत बाल बाल बच गए। श्री भगत की सुरक्षा में तैनात पुलिस जवान सुधीर भगत, मनोहर राम तथा जशपुर के रामप्रकाश पाण्डेय पर मधुमख्खियों ने कई जगह हमला कर उन्हे घायल कर दिया। इन घायलों को पत्थलगांव स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ति कराया गया जंहा उपचार के बाद छुटटी दे दी गई। इस रैली में दो बच्चों सहित दर्जन भर ग्रामीणों पर भी मधुमख्खियों नेे हमला कर उन्हे घायल कर दिया था।सरहुल पूजा के आयोजक रोशन प्रताप तथा विषु शर्मा ने इन्हे भी उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ति कराया ।यहंा स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों का तत्काल उपचार शुरू किया। जिससे घायलों को राहत मिल सकी।

सोमवार, 7 मई 2012

मिलावटी चीजें बाजार में, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग गहरी नींद में



        कैमिकल से बनता है सरसों तेल व शुध्द घी
       
पत्थलगांव/                    रमेश शर्मा 

मिलावटी दूघ विक्रेता
  मिलावट खोरो पर स्वास्थ्य विभाग का श‍िकंजा नहीं कस पाने से यहॉं ज्यादातर खादय सामग्री में जमकर मिलावट का खेल हो रहा है।प्रति दिन उपयोग में आने वाली इन खादय सामग्री के भाव देखने के बाद  इसमें मिलावट की बात सहज ढंग से उजागर हो जा रही है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के हितों का सरंक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
     इन दिनों बाजार में चना दाल का भाव 50 रू. प्रति किलों की दर पर बिक रही है।पर इसी चना दाल का शुध्द बेसन महज 40 रू. प्रति किलो में आसानी से मिल जा रहा है।किराना की दुकानों में इसी तरह आटा, खादय तेल तथा  शुध्द बेसन जैसी खादय सामग्री के मुंहमांगे दाम देने के बाद भी उपभोक्ताओं को धीमा जहर खरीदना पड़ रहा है।यहॉं पर अमृत भोग बेसन का पैकेट चना दाल से भी कम दाम पर मिल रहा है। शुध्द बेसन के इस पैकेट पर वनज 500 ग्राम तथा इसकी किमत 20 रू. दर्शाई गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बेसन के पैकेट पर इसके निर्माता का कहीं भी नाम पता नहीं दिया गया है। खादय सामग्री के इन्ही पैकेटों से होटलों में आलू चाप, सेव ,भजिया बना कर ग्राहकों के सामने परोसा जा रहा है। होटल मालिकों का कहना है कि बाजार में मिलावटी सामग्री बेचने वालों पर स्वास्थ्य विभाग की पकड़ नहीं होने से उन्हे इस तरह के मिलावटी खादय सामग्री से काम चलाना पड़ रहा है।
शुध्द बेसन का पैकेट

    इसी तरह दूध, पनीर तथा अन्य खादय सामग्री में भी जमकर मिलावट हो रही है। दूध में कई घातक तत्व की मिलावट के साथ इसकी बिक्री होने से छोटे बच्चों को इसका अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शहर में इन दिनो उपभोक्ताओं व्दारा दूध विक्रेताओं को उनकी मुंहमांगी किमत देने के बाद भी शुध्द दूध नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि बाजार में दूध की किमत 30 रू.से लेकर 40 रू. प्रति लीटर होने के बाद भी उपभोक्ताओं को मिलावटी दूध से काम चलाना पड़ रहा है।यहंा के उपभोक्ता महेन्द्र सोनी ने बताया कि बाजार में पैकेट बन्द खादय सामग्री में जमकर मिलावट होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग व्दारा इस ओर कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होने कहा कि इन दिनों चाय, मसाला, खादय तेल ,शुध्द घी के नाम पर उपभोक्ताओं को धीमा जहर परोसा जा रहा है।यहॉं पर उड़ीसा से घटिया तेल के ड्रम लाकर उसमें कैमिकल डाल कर उसे देखते ही देखते सरसों तेल का रूप दे दिया जाता है।इस मिलावटी सरसों तेल को एक किलो तथा अन्य पैक डिब्बों में भर कर दुकानदार धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं। इन सामग्री के डब्बों पर इसके निर्माता का नाम पता नहीं होने के कारण इसके निर्माता पर स्वास्थ्य विभाग का षिकंजा नहीं कस पाता है।  महेन्द्र सोनी ने कहा कि  इन दिनों बाजार में घटिया खादय सामग्री के विरूध्द में कड़ाई पूर्वक अभियान चलाने की जरूरत है। 
                          क्या कहता है स्वास्थ्य विभाग 
      मिलावटी खादय सामग्री बेचने वालों पर शिकंजा कसने के लिए जिले में 36 दुकानदारों से विभिन्न खादय सामग्री के सेम्पल भरे गए थे। इनमें 11 सेम्पल मानक स्तर से कम पाए जाने पर उन्हे नोटिष दिया गया है। दूध विक्रेताओं व्दारा भी मिलावट करने की कई जगह से षिकायतें मिली हैं। उनके विरूध्द जल्द ही अभियान चला कर कार्रवाई की जाएगी।
                   भारत भूषण बोर्डे, जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी 


मंगलवार, 1 मई 2012

शहीद जवान का परिवार उपेक्षा का शिकार

शहीद की विधवा श्रीमती सीमा
 कुजूर अपने दो बच्‍चों के साथ 

 सुकमा कलेक्टर अपहरण कांड 
  पत्थलगांव/ जशपुर रमेश शर्मा        
       सुकमा कलेक्टर अलेक्स पॉल मेनन को अगवा करने से पहले नक्सलियों की गोलियों से शहीद हाने वाला जवान किशुन कुजूर का परिवार पिछले एक सप्ताह से षासकीय नुमाईदों से मिलने वाली आर्थिक सहायत की बाट जोह रहा है पर अभी तक किसी भी अधिकारी ने इस शहीद के परिजनों के कच्चे घर में पहुंचकर दस्तक नही दी है। सुकमा कलेक्टर की रिहाई के लिए समुचे प्रदेश में कैंडल जलाकर उनके  सकुशल वापस लौटने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है पर इसी कलेक्टर की सुरक्षा में तैनात शहीद जवान किशुन कुजूर का परिवार अपने कच्चे घर में अंधरे के बीच अकेला बैठा हुआ है।सरकारी अमला की उपेक्षा से दुखी शहीद की माँ श्रीमती जेरमीना का कहना है कि उसे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन प्रशासनिक अमला की उपेक्षा से काफी दुख पहुंचा है। जेरमीना ने कहा कि उसका छोटा बेटा भी पुलिस सेवा में कार्यरत है। अपने बड़े बेटे के शहीद होने के बाद सरकारी उपेक्षा से पीड़ित इस महिला ने छोटा बेटा आमोद कुजूर की नौकरी से त्यागपत्र दिलाने का मन बना लिया है।
       बीते सप्ताह ग्राम सुराज अभियान के दौरान सुकमा कलेक्टर श्री मेनन की सुरक्षा के लिए तैनात यह शहीद नक्सलियों की गोलियों का षिकार बन गया था। कलेक्टर को अगवा करने के बाद इस शहीद का शव जशपुर जिले में बगीचा के समीप उसके पैत्रृक गंाव सेमरडीह भेजा गया था। इसके पहले परिजनों को अपने जवान बेटे की मौत की खबर भी नही थी। शहीद के पिता अब्राहम ने आज बताया कि अचानक गांव में पुलिस अधिकारियों की गाड़ियों का काफीला और तिंरगे में लिपटा हुआ ताबुत जब उसके घर के सामाने पहूंच तो उसे अनहोनी कि आषंका हो गई थी। अब्राहम ने बताया कि उसके दोनो बेटे पुलिस सेवा में तैनात है इसलिए वह समझ नही पा रहा था कि इस ताबुत में कौन से बेटे का शव है।
   जब उसे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशुन कुजूर अब उनके बीच नही रहे तो अब्राहम का पूरा परिवार फफक फफक कर रोने लगा था।छोटे से गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई थी। इस खबर को सुनते ही पुरा गांव उसके घर पर इकट्ठा हो गया था। पुलिस कर्मियों ने दुख की इस घड़ी में उसके परिवार को ढाढस बंधाया और शहीद के अंतिम संस्कार करने में मदद की थी। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी ने अब्राहम कुजूर को 25 हजार रू.नगद राशि का लिफाफा दिया था। यह लिफाफा इस घर में आज भी ज्यों का त्यों रखा हुआ है। शहीद जवान के परिवार के पास उसके आंसू पोछने के लिए अब कोई भी नही है।
               कांग्रेस नेताओं ने भी मुंह फेरा
    जवान किशुन कुजूर के पिता अब्राहम ने बताया कि सबसे बड़ी बिडम्बना तो यह है कि  बगीचा जशपुर मुख्य मार्ग पर मेरा गांव है मगर आज तक कोई भी अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उनका हालचाल जानने नही पहुंचे हैं।अब्राहम ने बताया कि कांग्रेस विधायक शक्राजित नायक एवं रामपुकार सिंह सहित अन्य कांग्रेसी नेता वादा निभाओं आन्दोलन के तहत बगीचा पहुंचे थे। पर इन नेताओं ने भी उनके पास आकर बातचीत करने की जरूरत नहीं समझी।इसके पहले कांग्रेस के नेता वोट के लिए कई बार उसके घर पहुंच कर दस्तक दे चुके हैं। दुःख की घड़ी में कांग्रेसी नेताओं का इस तरह मुंह फेर लेना ठीक नहीं है।अब्राहम के परिजनों का कहना हैं कि शहीद के परिवार को क्या आर्थिक सहायता मिलती है। इस बारे में उसे कुछ भी पता नही है।

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

कांग्रेस का विरोध पर भाजपा का विकास भारी; विष्णुसाय



              फिर आजमा सकते हैं विधानसभा में भाग्य
पत्थलगांव / 
     सांसद विष्णुदेव साय का कहना है कि यदि उनकी पार्टी का निर्देष मिलेगा तो वे पुनः विधानसभा का चुनाव लड़ने को तैयार हैं।श्री साय ने कहा कि भाजपा के विकास कार्यो से कांग्रेस के नेता बुरी तरह से बौखला गए हैं।चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच में पैठ बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने विरोध का रास्ता अपनाया है।पर जनता की जागरूकता के कारण कांग्रेस के विरोध से भाजपा को चुनाव में रंच मात्र भी अंतर नहीं पड़ेगा।श्री साय ने कहा कि मिषन 2013 का अभियान के  लिए भाजपा ने भी अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। 
    भाजपा सांसद विष्णुदेव साय ने पत्थलगांव में कहा कि मिषन 2013 के लिए भाजपा ने विकास को अपना प्रमुख हथियार बनाया है।उन्होने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता विरोध करने में बेषक आगे निकल सकते हैं,पर विकास की दौड़ में भाजपा की बराबरी करने में उन्हे काफी वक्त लगेगा।श्री साय ने कहा कि प्रदेष में कांग्रेस सरकार के मुकाबले में भाजपा के विकास कार्य बोलने से नहीं अपितु देखने से महसूस हो रहे है।श्री साय ने कहा कि 108 संजीवनी सेवा आज गांव के जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस दिषा में भाजपा सरकार आगे भी काम करती रहेगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वास्थ्य बीमा तथा स्मार्ट कार्ड बना कर प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मुहैया कराया जाएगा।श्री साय ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकत्र्ता निचले स्तर तक विकास कार्यो के बारे में मतदाताओं को अवगत करा रहे हैं। उन्होने कहा कि भाजपा सरकार के कामकाज से प्रदेष में महिलाऐं काफी सन्तुष्ट हैं।इस वर्ग के लिए मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की सरकार ने काफी अच्छा काम किया है। श्री साय ने कहा कि कांग्रेस ने सुराज अभियान को विफल करने का पूरा प्रयास किया था पर ग्रामीण जनता ने कांग्रेस नेताओं को नकारते हुए विकास को महत्व दिया है। इन सब बातों को देखते हुए कांग्रेस का विरोध उनकी पार्टी के बीच में ही सीमट कर रह जाएगा।
   उन्होने कहा कि बिजली के मामले में पूरे देष में छत्तीसगढ़ की स्थिति बेहतर है।भाजपा सरकार गांवों के बाद पारे टोलों में बिजली पहुंचा कर किसानों को आत्म निर्भर बनाने की दिषा में तेजी से काम कर रही है।किसानों की बेहतरी के लिए अलग से बजट बना कर हर पहलू पर काम किया जा रहा है।श्री साय ने कहा कि जनता की जागरूकता के कारण कांग्रेस के विरोध से चुनाव में उनकी पार्टी को रचं मात्र भी अंतर नहीं पड़ेगा।उन्होने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा अच्छे लोगों को चुनाव में उतारेगी। 
                   पत्थलगांव विधानसभा में होगा भाजपा का कब्जा
   श्री साय ने दावा किया कि इस बार कांग्रेस के कब्जे वाली पत्थलगांव विधानसभा में भी भाजपा की जीत सुनिष्चित है।उन्होने कहा कि लम्बे समय से यहंा पर कांग्रेस का कब्जा होने से विकास की अनेक योजनाओं से स्थानीय लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है।श्री साय ने कहा कि राजनीति में केवल अच्छी छवि होना पर्याप्त नहीं है बल्कि जनता की भलाई के लिए सक्रिय होकर काम करना भी बेहद जरूरी है।उन्होने कहा कि कटनी गुमला सड़क का चैड़ीकरण और डामरीकरण के लिए केन्द्र सरकार से पर्याप्त आबंटन लाने के बाद भी कांग्रेस विधायक इस काम को नहीं करा पा रहे हैं।पत्थलगांव विधानसभा में सक्रिय और जूझारू जनप्रतिनिधि के अभाव में इस तरह की अनेक योजनाओं के लाभ से पत्थलगांव के लोग कई वर्षो से वंचित हैं।श्री साय ने कहा कि जषपुर जिले में भाजपा के लोग अति उत्साह का प्रदर्षन नहीं करते हैं पर पर चुनाव के दौरान सभी एक जुट होकर अच्छे परिणाम दिखा देते हैं।    

सोमवार, 23 अप्रैल 2012


कलेक्टर की  रिहाई के लिए गिरजाघर में विशेष प्रार्थना
 शहीद सुरक्षा कर्मियों को दी गई श्रध्दांजलि
पत्थलगांव/
     नक्सलियों के कब्जे से सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॅाल मेनन की जल्द से जल्द सकुशल रिहाई के लिए रविवार को यहंा का बड़ा गिरजाघर में सैकड़ो मसीहीजनों ने विशेष प्रार्थना की । पत्थलगांव गिरजाघर के प्रमुख पुरोहित निर्मल मिंज ने इस घटना में कलेक्टर के दो सुरक्षा कर्मियों की निर्मम हत्या पर भी गहरा दुःख व्यक्त किया। इस घटना में शहीद होने वाले दो सुरक्षा कर्मी किसुन कुजूर एवं अमजद खान की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए गिरजाघर में मसीहीजनों ने दो मिनट का मौन रख कर उन्हे श्रध्दाजंलि अर्पित की।
फोटो/ रविवार को पत्थलगांव गिरजाघर में विशेष प्रार्थना सभा  
    पत्थलगांव गिरजाघर के प्रमुख पुरोहित श्री मिंज ने कहा कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों को कभी भी परमेष्वर का आषीष प्राप्त नहीं हो पाता है। उन्होने कहा कि नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़ कर षंाति का मार्ग अपनाना चाहिए। गिरजाधर में आयोजित प्रार्थना सभा में छोटे बच्चे, महिलाऐं और अन्य मसीहीजनों ने नक्सलियों से जल्द से जल्द  कलेक्टर श्री मेनन की रिहाई की अपील की । मसीहीजनों का कहना था कि सुकमा के कलेक्टर  जनता की भलाई के काम में डियूटी कर रहे थे।ऐसे निर्दोष व्यक्ति पर किसी भी तरह का जुल्म उचित नहीं है।
    शनिवार को नक्सलियों व्दारा सुकमा कलेक्टर श्री मेनन को अगवा कर लेने की खबर को टीवी पर देखने के बाद यहॉं के गिरजाघर में रविवार विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा की जानकारी मिलते ही आज तड़के गिरजाघर का हाल मसीहीजनों से खचाखच भर गया था।गिरजाघर की प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से भी छोटे बच्चे महिलाओं की काफी भीड़ पहुंच गई थी।
                        राहा में भी शोकसभा एवं प्रार्थना
         रायगढ़ अम्बिकापुर हेल्थ एसोसियेशन की संचालक सिस्टर एलिजाबेथ ने नक्सलियों के कृत्य की कड़े शब्दों में आलोचना की।उन्होने कहा नक्सलियों की इंसानियत खतम हो चुकी है। रविवार को राहा में भी सुकमा कलेक्टर श्री मेनन और उड़ीसा से अगवा किए गए विधायक की जल्द रिहाई के लिए प्रार्थना की गई। यहॉं पर नक्सली हिंसा में शहीद होने वाले कलेक्टर के दो सुरक्षा गार्डो को भावभीनी श्रध्दाजंलि प्रदान की गई। राहा में आयोजित प्रार्थना सभा में बीटीआई प्रिंसिपल अर्पणा बरूवा के अलावा मसिहि संस्था के अनेक स्टाफ मौजूद थे।
    सुकमा कलेक्टर की सकुशल रिहाई के लिए यहां आसपास के ग्रामीण अचंल के गिरजाघरों में भी विशेष प्रार्थनाऐं की गई। पाकरगांव के सरपंच नेहरू लकड़ा ने बताया कि शनिवार को घटित इस घटना से मसीही समाज काफी क्षुब्ध है। उन्होने बताया कि रविवार को पाकरगांव के समीप करंगाबहला गिरजाघर तथा आसपास के तारागढ़,केराकछार,बारबन्द,तामामुंडा,डेमूपारा,व्यौराडांड़ गिरजाघर में भी विशेष प्रार्थना कर के मसीहीजनों ने सुकमा कलेक्टर की जल्द रिहाई करने की अपील की गई।