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गुरुवार, 21 मई 2015

शादी का सीजन से फूलों की बढ़ी मांग

गांव से भी आने लगी शादी व्याह पर फूलों की मांग
 अग्रिम बुकिंग के बगैर नहीं हो रही फूलों की आपूर्ति                       रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
   शादी का सीजन के चलते इन दिनों फूलों की बिक्री खूब हो रही है। शहर में फूलों का कारोबार करने वाले व्यवसायी ग्राहकों की अग्रिम बुकिंग पर ही प्रति दिन कोलकाता और महाराष्ट्र से फूल मंगा कर आपूर्ति कर रहे हैं। एकाएक फूलों की अधिक मांग आ जाने से विक्रेताओं को अपने ग्राहकों की मांग पूरी कर पाने में असमर्थता जाहिर करनी पड़ रही है।
    इन दिनों वैवाहिक कार्यक्रम के लिए शहरी अंचल के अलावा ग्रामीण अंचल से भी फूलों की मांग आ जाने से बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। बताया जा रहा हे कि ग्रामीण अचंल में भी धूमधाम से वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान ताजा फूलों का ही उपयोग किया जा रहा है।गांव में सम्पन्न परिवार के लोग एक दूसरे को देख कर ताजा फूलों की साज सज्जा पर खूब जोर दे रहे हैं। शादी मंडप, गाड़ी डिजाइन के अलावा अन्य साज सज्जा में लोग अब फूलों का अधिक प्रयोग करने लगे हैं। यहां फूलों का व्यवसाय करने वाला प्रदीप बोआल का कहना था कि पहले वह अकेले ही इस व्यवसाय को संभाल लेता था, लेकिन अब  गांव और शहरों से फूलों के कई कई आर्डर आ जाने से उसे अपने साथ दर्जन भर से अधिक सहयोगी रखने पड़ रहे हैं। दूसरे शहरों के फूल व्यवसायी भी यहां पहुंच कर आर्डर लेकर शादी व्याह में फूलों की आपूर्ति करने लगे हैं। अनेक लोग इस व्यवसाय में जुड़ जाने के बाद भी दिन प्रति दिन फूलों की मांग में बढ़ोत्तरी हो रही है।
   शहर में इन दिनों गेंदा, रजनीगंधा, गुलाब, ग्लेडी,गेटलस, जरबेरा की मांग काफी अधिक देखी जा रही है। कोलकाता और नागपुर से फूल मंगाने के कारण यहंा प्रति नग के अनुसार फूलों की कीमत बोली जा रही है। इन दिनों 10 रुपए में बिकने वाली गेंदा लरी के दाम बढ़ कर 20 से 30 रुपए बोले जा रहे हैं। इसी तरह रजनीगंधा 10रुपए, गुलाब 10 से 30 रू.,गेटलस 30 से 40 रुपए एवं जरबेरा 20 रुपए में बेचा जा रहा  है। फूल व्यवसायियों का कहना है कि शादियों में ज्यादातर लोग मांेगरा, गेंदा और गुलाब की मांग कर रहे हैं।
                                             ग्रामीण अंचल में भी फूलों की खपत
    यहां के फूल व्यवसायी प्रदीप का कहना था कि अब ग्रामीण अंचल से भी फूलों की मांग बढ़ गई है। गांव के सरपंच तथा अन्य लोग उन्हे फूलों के साथ गांव चल कर सजाने की भी जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। फूल विक्रेता का कहना था कि शहरों की तरह गांवों में भी फूलों की खपत बढ़ जाने से उन्हें आपूर्ति करने में कई बार काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस फूल विक्रेता का कहना था कि शहरों में वैवाहिक मंडप सजाने के लिए अलग अलग दर ले रहे हैं। विवाह का मंडप 1 हजार से लेकर 5 हजार रुपयों में सजा कर तैयार किया जा रहा है। गाडियों की साज सज्जा में भी लोग मोल भाव नहीं करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि गाड़ी सजाने में भी 2 हजार से 5 हजार तक का खर्च आने लगा है।  
                                                आर्टिफिशियल फूलों ने बनाई जगह
     फूल विक्रेताओं का कहना था कि बाहर के बाजार में फूलों की मांग बढ़ जाने से उनका मुनाफा कम हो गया है। कई बार पहले की बुकिंग पर फूलों की आपूर्ति करने में उन्हे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ जा रहा है। फूल विक्रेता का कहना था कि इन दिनों फूलों की कमी के चलते वैवाहिक गाड़ी सजाने तथा स्टेज के काम में आर्टिफिशियल फूल तथा चुनरी कपड़े का अधिक इस्तेमाल होने लगा है। ताजा फूलों की मांग बढ़ जाने के बाद आर्टिफिशियल फूलों ने अपनी अच्छी जगह बना ली है।


रविवार, 9 जून 2013

पर्यटन में नई पहचान देने वाला कैलाश गुफा बदहाली का शिकार

 नुकीले पत्थर और गड्ढों की सड़क देख कर सैलानियों की संख्या घटी
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा
   जशपुर जिले को पर्यटन के क्षेत्र में अलग पहचान देने वाला प्रमुख दर्षनीय स्थल कैलाश गुफा तक पहुंचने वाली सड़क की बदहाली और भारी अव्यवस्था के चलते इस पर्यटन स्थल पर पहुंचने वाले बाहर के सैलानियों का अब मोह भंग होने लगा है।गर्मी के दिनों में यहॉं  बाहर के सैलानियों की अच्छी खासी भीड़ और कैलाशगुफा के झरने पर छोटे बच्चों का शोर अब सुनाई नहीं देता है।
   बगीचा बतौली मुख्य सड़क के बाद कैलाश गुफा पहुंचने वाली 14 कि.मी. की उबड़ खाबड़ सड़क पर जगह जगह नुकीले पत्थर और गड्ढो के चलते यहॉं  पहुंचने वाले सैलानियों की मुश्किलेंबढ़ गई हैं। बगीचा बतौली की पक्की सड़क छोड़ने के बाद ग्राम मैनी से गुफा पहुंचने के लिए कच्ची सड़क पर पत्थरों की भरमार और बड़े बड़े गड्ढों के चलते कैलाश गुफा पहुंचने से पहले ही सैलानियों का मन खिन्न हो जाता है। महज 14 कि.मी.की दूरी को दो घंटो में तय करने से बाहर का सैलानी इधर दूसरी बार आने का नाम नहीं लेता है। इन दिनो कैलाश गुफा पहुंचने की जर्जर सड़क पर सुधार कार्य नहीं होने से यह रास्ता पहले से भी बदतर हो गया है। यहॉं  पर बीच रास्ते में वाहन खराब होने के बाद दूर दूर तक मदद मिलने की उम्मीद नहीं है।
   लगभग 14 कि.मी.लम्बी कच्ची सड़क पर पहुंचने के बाद बीएसएनएल का टावर की ठप्प हो जाने से सैलानियों की परेषानी में कई गुना इजाफा हो जाता है। चारो ओर ऊंची पहाड़ियां तथा दूर दूर तक फैली हरियाली के साथ झरनों का रमणीय दृष्य को देखने के लिए पहले सैलानियों का यहॉं  हर समय मेला लगा रहता था। कैलाश गुफा में प्राचीन षिव मंदिर का आकर्षण के चलते भी यह पर्यटन स्थल दूर दूर तक अपनी पहचान बना चुका है।यहॉं  पर सैलानियों की सुविधा पर ध्यान नहीं देने से यहॉं  की रौनक अब कम होने लगी है।कैलाश गुफा आश्रम के पुजारी का कहना था कि इस स्थल पर आवागमन के साधन का अभाव तथा सड़कों की दुर्दषा के चलते सैलानियों की भीड़ पर विपरीत असर पड़ा है। उन्होने बताया कि कैलाशगुफा के आस पास रेस्ट हाउस बना कर इस स्थल को विकसित किया जा सकता है।इस दिषा में सार्थक प्रयास होने चाहिए। 
रायगढ़ से यहॉं  पहुंचे पर्यटक कमल किषोर शर्मा ने बताया कि इस धार्मिक और रमणीय स्थल पर वे एक दशक पहले आए थे।उस समय यहॉं  की कच्ची सड़क की हालत आज से काफी अच्छी थी।श्री शर्मा ने कहा कि इस खूबसूरत पर्यटन स्थल को विकसित करने की दिषा में जिला प्रषासन को ठोस योजना बनानी चाहिए। यहॉं  पर पर्यटकों की भीड़ सिमटने लगी है। कैलाश गुफा का प्राचीन षिव मंदिर के आसपास काले बन्दरों का उत्पात भी बढ़ गया है। इस रमणीय स्थल पर प्रमुख आकर्षण का केन्द्र के रूप में काफी उंचाई से गिरने वाला झरना को माना जाता था। इन दिनों लगभग 40 फीट की ऊँचाई से गिरने वाली पानी की मोटी धारा भी अब लुप्त होकर यहॉं  पानी का पतला झरना ही रह गया है।यहॉं पर पत्थरों में काई और कचरे की भरमार रहने से कोई भी सैलानी यहॉं  नहाने का आनंद नहीं ले पाता है। कैलाश गुफा में साफ सफाई का अभाव और हर समय काले बन्दरों का उत्पात के चलते यहॉं  पहुंचने वाले सैलानी जल्द से जल्द वापस लौटने में ही अपनी भलाई समझ रहे हैं।
           लोक निर्माण विभाग नहीं करता सड़क की देखरेख
 लोक निर्माण संभाग पत्थलगांव के कार्यपालन अभियंता प्रभु किन्डो ने बताया कि कैलाश गुफा पंहुचने वाली कच्ची सड़क प्रधान मंत्री सड़क योजना विभाग को हस्तांतरित हो जाने के बाद इस सड़क की उनके द्वारा देख रेख नहीं की जा रही है।श्री किंडो ने बताया कि इस सड़क पर सरगुजा जिले की सीमा तक 7 कि.मी दूर क्षेत्र के लिए उन्होने कार्य योजना तैयार की है। इस सड़क पर नया आबंटन मिलने के बाद यहॉं  पक्की सड़क तैयार की जाएगी।  

               हरियाली फैलाने की योजना
     पर्यटन के क्षेत्र में जशपुर जिले को अलग पहचान देने वाली कैलाश गुफा के आस पास वन विभाग ने प्लांटेशन लगाने की योजना पर काम शुरू किया है।यहॉं  के वन परिक्षेत्र अधिकारी सुरेश कुमार गुप्ता ने बताया कि कैलाश गुफा का घाघी जगंल के आस पास 180 हेक्टेयर क्षेत्र में वृक्षारोपण की तैयारी की गई है।यहॉं  पर हरियाली को बढ़ाने से इस स्थल की सुन्दरता में इजाफा हो सकेगा।

गुरुवार, 25 अप्रैल 2013

हेंडपंपों ने दम तोड़ा


हेंडपंप खराब होने की जानकारी मिलते ही पहुंच जाती है मैकेनिकों की टीम
 सुधार कार्य के लिए दो मोबाइल टीम तैनात
 पत्थलगांव/  रमेश शर्मा
  जल स्तर में लगातार हो रही गिरावट के चलते आए दिन लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के दफतर में बन्द हेन्डपम्पों की शिकायत दर्ज हो रही है। यहॉं पर खरकटटा, खारडोढ़ी, जामजुनगानी, भ्‍ कुकरगांव तथा काडरो क्षेत्र में जल स्तर में गिरावट के चलते ज्यादा हेंडपम्प बन्द होने की बात सामने आई है।
 लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग ने इस समस्या का त्वरित निराकरण के लिए मैकेनिकों की दो अलग अलग मोबाइल टीम तैनात की है। दूर दराज के गांवों में हेंडपंप खराब होने पर यहॉं जनपद कार्यालय तथा लोक स्वास्थ्य कार्यालय में षिकायत दर्ज करने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा दूरभाष पर भी मिलने वाली षिकायत की पुष्टि करने के बाद तत्काल हेंडपंप संधारण करने वालों को रवाना किया जा रहा है। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहायक अभियंता सीबी सिंह ने बताया कि गर्मी की शुरूवात होने के बाद विभिन्न ग्राम पचंायतों से 200 से अधिक हेंडपंप बिगड़ने की षिकायतें मिल चुकी हैं। श्री सिंग ने बताया कि ग्रामीण अचंल से हेंडपंप बिगड़ने की षिकायत के बाद तीन दिन से एक सप्ताह के बीच में सुधार कार्य करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्‍होंने बताया कि जल स्तर में गिरावट के बाद हेंडपंप में अधिकतम दस पाइप लगाए जाते हैं लेकिन कई गांवों में पेयजल की समस्या को देखते हुए 12 पाइप लगा कर हेंडपंप से पानी निकल रहा है। श्री सिंह ने बताया कि बीते तीन वर्षो में यहॉं भू जल स्तर में गिरावट की समस्या तेजी से बढ़ी है। उन्‍होंने बताया कि भू जल स्तर में तेजी से हो रही गिरावट रोकने के लिए वे ग्राम पंचायतों के जनप्रतिनिधि तथा ग्रामीणों को जल सरंक्षण के उपाय पर ध्यान देने की भी सलाह दे रहे हैं।
     जल सरंक्षण के बोस उपायों की जरूरत
  जिला पंचायत की पूर्व सदस्य श्रीमती ललिता पैंकरा ने बताया कि इन दिनों जल स्तर में तेजी से होने वाली गिरावट के चलते कुंऐं और तालाब का जल स्तर कम होने के साथ साथ हेंडपंप की सेवा पर भी विपरित असर पड़ रहा है। उन्‍होंने बताया कि चन्दागढ़ भैंसामुड़ा, खरकटटा, खारडोढ़ी क्षेत्र में भू जल स्तर में कमी आने की अधिक षिकायतें मिल रही हैं। श्रीमती पैंकरा का कहना था कि पानी की दिनो दिन बढ़ती समस्या के मददेनजर अब प्रत्येक व्यक्ति को जल संरक्षण के काम में अपनी भागीदारी देने का समय आ गया है। उन्‍होंने कहा कि भू जल स्तर की गिरावट को रोकने के लिए ठोस पहल नहीं होने से यह समस्या गम्भीर रूप ले सकती है। उन्‍होंने कहा कि महात्मा गांधी रोजगार गांरटी योजना के तहत प्रत्येक गांव में कुंए छोटी डबरी और तालाबों का निर्माण के काम को प्राथमिकता से कराने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि जल ग्रहण सरंक्षण की दिषा में भी सार्थक पहल करनी होगी अन्यथा भू जल स्तर की गिरावट विकराल समस्या का रूप धारण कर सकती है।

शनिवार, 11 अगस्त 2012

गाजर घास फैला रही बीमारी, किसानों को परेशानी



गाजर घास के साथ
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा/ 
 जशपुर जिले में बारिश के दिनों में जगह जगह उग गई गाजर घास लोगों के लिए परेषानी का सबब बन गई है।घर के आस पास आबादी क्षेत्र के अलावा खेतों में भी गाजर घास बहुतायत में देखी जा रही है। फसल के बीच में स्वतः उगने वाली गाजर घास से फसल प्रभावित होने पर किसानों को इससे अच्छी खासी परेषानी का सामना करना पड़ रहा है।
  शहर में जगह जगह उग चुकी गाजर घास की सफाई के लिए नगर पंचायत ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस क्षेत्र में गाजर घास अधिक मात्रा में उग चुकी है वहां रहने वालों को चर्म रोग की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उदयानन अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया का कहना है कि गाजर घास को उखाड़ कर गडडे में दबा देने से ही राहत मिल सकती है। उन्होने कहा कि यह घास पषुओं के साथ साथ मनुष्य के लिए भी नुकसानदायक है। शहर के ज्यादातर मुहल्लों में इन दिनो गाजर घास का प्रकोप फैल गया है। गलियों में सड़क के किनारे तथा घरों के आस पास काफी बड़ी तादाद में गाजर घास उग जाने से लोगों को आने जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

  शहर में जशपुर मुख्य मार्ग के किनारे, सिंचाई कालोनी, रेस्ट हाउस मुहल्ला, बिलाईटांगर तथा वार्ड क्रमांक 7 और 8 में गाजर घास का सबसे ज्यादा प्रकोप देखा जा रहा है। बेलघाटी मुहल्ला में रहने वाले गुरूचरण सिंह भाटिया ने बताया कि उनके मुहल्ले में घरों के आसपास तथा सड़क के किनारे गाजर घास उग जाने से लोगों को काफी परेषानी का सामना करना पड़ रहा है।यहंा के किसान गणेशचन्द्र बेहरा ने बताया कि गाजर घास फसल के बीच में उग जाने से फसल की पैदावार में भी कमी आती है।उन्होने बताया कि खेतों में काम करने वाले मजदूर गाजर घास के सम्पर्क में आने से उनके व्दारा चर्म रोग की शिकायत की जाती है।श्री बेहरा ने बताया कि गाजर घास के बीज काफी सुक्ष्म होने के कारण स्वतः उग जाते हैं। उन्होने बताया कि गाजर घास का फूल आने से पहले इस उखाड़ कर नष्ट करने से ही थोड़ी राहत मिल पाती हैं।
 सिविल अस्पताल के चिकित्सक बसंत सिंह का कहना है कि गाजर घास के पौधों से बचकर रहना चाहिए। इसके सम्पर्क में आने से एलर्जी, एक्जिमा जैसे रोगों की सम्भावना बनी रहती है। उन्होने कहा कि बरसात के दिनों में यह वनस्पति घर के आस पास तथा खेत खलिहानों में काफी बड़ी तादाद में स्वतः उग जाती है।
     फूल लगने से पहले नष्ट करें
  वन मंडल अधिकारी चन्द्रषेखर तिवारी ने बताया कि वनस्पति विज्ञान में गाजर घास का नाम पार्थेनियम है। मगर क्षेत्रिय भाषा में इसे गाजर घास कहा जाता है। इस पौधे का मूल स्थान मैक्सिको वेस्टइंडिज तथा मध्य व उत्तरी अमेरिका माना जाता है। इस घास में फूल लगने से पहले ही इसे नष्ट करके त्वचा के रोगों से बचा जा सकता है। गाजर घास का प्रत्येक पौधा पांच हजार सुक्ष्म बीज पैदा कर सकता है। उन्होने बताया कि भारत में पहली बार गाजर घास महाराष्ट्र के पूर्वी क्षेत्र में 1964 में देखने को मिली थी। ऐसा माना जाता है कि अमेरिका,कनाडा से आयातित गेंहू के साथ इसका आना हुआ है।


शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

बिना द्रोणाचार्य के चल रही स्कूल

कन्या हाई स्कूल पत्थलगांव
पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
  छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पत्थलगांव का कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल की छात्राओं को बीते पांच वर्षो से गृह विज्ञान विषय के शिक्षको के बगैर ही अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड रही है। इस शासकीय स्कूल में इस वर्ष अन्य महत्वपूर्ण विषयों के भी षिक्षकों की कमी से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।कषक्षकों का अभाव के कारण इस स्कूल में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है इसके बाद भी शिक्षा अधिकारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस स्कूल की सुध नहीं ले रहे हैं।
   सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहॉं  की 2 छात्राओं ने बगैर शिक्षकों के गृह विज्ञान की पढ़ाई में अपने बलबूते से स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोस्ताहन का पुरूस्कार प्राप्त कर चुकी है। यहां  की छात्राओं की गृह विज्ञान विषय को लेकर काफी रूचि के बाद भी शासकीय कन्या हाई स्कूल में बीते पांच वर्षो से गृह विज्ञान विषय के शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हो रही है। इंदिरा गांधी कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल के प्राचार्य एम टोप्पो ने बताया वर्ष 2007 से यहॉं  गृह विज्ञान विषय की कक्षाऐं प्रारम्भ की गई हैं। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने यहॉं  पर जल्द ही गृह विज्ञान विषय के शिक्षकों को पदस्थ करने का आश्वासन दिया था।पर पांच साल का लम्बा समय व्यतित हो जाने के बाद भी इस स्कूल में गृह विज्ञान के शिक्षक पदस्थ नहीं हो पाए हैं। उन्होने बताया कि नए षिक्षा सत्र में यहॉं  पर गणित, विज्ञान, भौतिक, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय के षिक्षकों का भी टोटा हो गया है। इस स्कूल में 16 षिक्षकों की पदस्थापना के विरूध्द केवल 8 षिक्षकों से ही काम चलाना पड़ रहा है। प्राचार्य ने बताया कि यहॉं  कामर्स विषय की कक्षाऐं नहीं होने के बाद भी इस स्कूल में कामर्स विषय के दो व्याख्याताओं की पदस्थापना कर दी गई है। उन्होने बताया कि ऐसे विपरित हालात में यहॉं  पर छात्राओं को शिक्षा देने का काम किसी चुनौती से कम नहीं है। श्री टोप्पो ने बताया कि गृह विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं होने के बाद भी यहॉं  की छात्राओं ने अपने बलबूते पर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
             लाखों के कम्प्यूटर कचरे में
  कन्या हाई स्कूल में छात्राओं को कम्पयूटर की शिक्षा देने के लिए पांच साल पहले भेजे गए लगभग 50 कम्प्यूटर सेट बगैर उपयोग के ही यहॉं  कचरे के ढ़ेर में बदल गए हैं। प्राचार्य श्री टोप्पो का कहना है कि स्कूल में कम्प्यूटर के जानकार शिक्षक नहीं होने से यहॉं  सभी महंगे उपकरण बीगड़ चुके हैं। इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है पर यहॉं  की व्यवस्था को सुधारने की अब तक कोई पहल नहीं हो पाई है। श्री टोप्पो ने बताया कि यहॉं  अभी भी 8 शिक्षकों की कमी है। इस दिशा में उच्च अधिकारियों व्दारा निदान नहीं करने से स्कूल की समस्या यथावत बनी हुई है। कन्या स्कूल की छात्राओं ने बताया कि वे कम्प्यूटर की शिक्षा लेना चाहती हैं पर उन्हे अपने स्कूल में कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। 
             बगैर शिक्षक के 2 छात्राओं को ज्ञान पुरस्कार
   कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल में वर्ष 2008 में कु नौमी ने गृह विज्ञान विषय में उत्कृष्ट अंक अर्जित कर 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर इस छात्रा को मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार रू.का नगद पुरूस्कार प्राप्त हुआ था। वर्ष 2010 में भी यहॉं  की छात्रा कु.अमिला ने 12 वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उसे भी मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार रू.का नगद पुरस्कार मिल चुका है।

रविवार, 1 जुलाई 2012

निजी स्कूलों की मनमानी से पालको को आया पसीना

एक निजी शाला की तस्‍वीर
 पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
  छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों व्दारा मनमाना शुल्क वसूलने की ढ़ेरों शिकायतों के बाद भी शिक्षा अधिकारी चुप्पी साध कर बैठे हैं। निजी स्कूलों की शैक्षणिक शुल्क के नाम पर लूट खसोट से पालकों को राहत देने के लिए शिक्षा विभाग के सचिव का कड़ा रुख अपनाए जाने के निर्देशों के बाद भी इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
   यहां पर ज्यादातर निजी स्कूलों में शिक्षा को व्यवसाय के रूप में बदल देने से पालकों की परेशानी बढ़ गई है। निजी स्कूल संचालित करने वाले एक स्कूल में तो भवन निर्माण के नाम पर भी स्कूली छात्रों से शुल्क वसूली करने का मामला सामने आया है। इस स्‍कूल में संचालक का मनमाने रवैए के बारे में शहर के कई पालकों ने षिक्षा अधिकारी को शिकायत की है। मगर धीमी गति से जांच के कारण ऐसी शि कायतों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
     ब्‍लॉक शिक्षा अधिकारी बी एस पैंकरा ने बताया कि यहां एक निजी स्कूल में भवन निर्माण के नाम पर भारी भरकम शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में कई पालकों ने उनके पास मौखिक शिकायत की है। इस वजह संचालक के विरूध्द कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होने बताया कि इन दिनो निजी स्कूलों में यूनीफार्म, पुस्तक व अन्य गतिविधियों का संचालन के नाम पर मनमाने  ढंग से छात्र छात्राओं से फीस वसूली की लगातार शिकायतें मिल रही है।इस तरह की अवैध वसूली के बारे में पालकों से लिखित षिकायत का मामला सामने आने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के विरूध्द कड़ी कार्रवाई के साथ स्कूल की मान्यता को भी रदद करने की कार्रवाई की जाएगी।श्री पैंकरा ने बताया कि निजी स्कूलों को शिक्षा नियमों का पालन करने की कड़ी हिदायत दी जा चुकी है।
        यहां के पालकों का कहना है कि निजी स्कूलों पर नकेल कसने के सभी उपाय बेकार साबित हो रहे हैं। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की सरकार के इस फैसले पर षिक्षा अधिकारियों को कड़ाई से क्रियान्वयन कराना चाहिए। पालक नत्थूराम शर्मा तथा प्रहलाद रोहिला ने कहा कि बंदियाखार स्थित अग्रंजी माध्यम का निजी स्कूल में भवन निर्माण के लिए 2000 रू. शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैं। इस स्कूल के सूचना पटल पर इस आषय का नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है। इन पालकों ने कहा कि निजी स्कूल प्रबंधन के मनमाने रवैए पर रोक लगाने के लिए पहले भी कानून बनाए गए हैं, पर शिक्षा अधिकारियों व्दारा इन नियमों को अनदेखा करने से पालकों को राहत नहीं मिल पाती है। उन्होने कहा कि निजी स्कूलों का मनमाना रवैया में रोक लगनी चाहिए।
                निजी स्कूलों में नहीं हो रहा नियमों का पालन
     पत्थलगांव में दर्जन भर से अधिक निजी स्कूलों का सचंालन किया जा रहा है। इनमें ज्यादातर स्कूलों में शिक्षा विभाग के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन व्दारा मनमानी फीस की वसूली पर अंकुश लगाने के लिए अभी तक शिक्षा अधिकारियों ने ठोस उपाय नहीं किए गए है। पिछले दिनो यहंा षिक्षा अधिकारी ने  स्कूलों के प्रबंधन को अधिक शुल्क वसूली पर रोक लगाए जाने संबधी आदेश दिया था। स्कूल षिक्षा विभाग के सचिव क ेआर पिस्दा व्दारा जारी इस आदेष में कहा गया है कि निजी स्कूलों में षिक्षा को व्यवसाय के रूप सचंालित करने की षिकायत पर त्वरित जांच के बाद दोषियों के विरूध्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा निजी स्कूलों में लाभ नहीं और हानि नही ंके सिंध्दात को अनदेखा करने पर इनके विरूध्द कार्रवाई करने को कहा गया है। निजी स्कूलों से आय व्यय, षुल्क निर्धारण और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सात दिनों के भीतर देने को भी कहा गया था ।  स्कूलों के मनमाने रवैए पर अकुंष लगाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति गठित कर संबंधित स्कूलों का निरीक्षण करने का आदेष अब फाईलों में सिमट कर रह गया है। पालकों का आरोप है कि निजी स्कूलों में वार्षिक शुल्क में वृध्दि के पूर्व पालक समिति से सहमति  नहीं ली जा रही है । शुल्क का निर्धारण युक्तिसंगत नहीं होने से पालकों की परेशानी बढ़ गई है । निजी स्कूलों में पुस्तक,यूनिफार्म,बस ,विकास शुल्क के नाम पर जगह जगह अतिरिक्त फीस वसूली करने के बाद भी स्कूल सचंालक के विरूध्द  कार्रवाई  नहीं होने से यहां के पालकों में आक्रोश व्याप्त है।
                    इनका पालन अनिवार्य
  •    प्रत्येक निजी स्कूलों को हर साल ऑडिटेड आय व्यय का ब्यौरा जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा।
  •   मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जिला षिक्षा अधिकारी को देनी होगी।
  •    हर स्कूल को प्रति वर्ष के लिए निर्धारित शुल्‍क का प्रारूप का प्रकाशन किया जाएगा।
  •  शुल्क बढ़ाने से पहले पालकों की सहमति लेना अनिवार्य है।

सोमवार, 7 मई 2012

मिलावटी चीजें बाजार में, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग गहरी नींद में



        कैमिकल से बनता है सरसों तेल व शुध्द घी
       
पत्थलगांव/                    रमेश शर्मा 

मिलावटी दूघ विक्रेता
  मिलावट खोरो पर स्वास्थ्य विभाग का श‍िकंजा नहीं कस पाने से यहॉं ज्यादातर खादय सामग्री में जमकर मिलावट का खेल हो रहा है।प्रति दिन उपयोग में आने वाली इन खादय सामग्री के भाव देखने के बाद  इसमें मिलावट की बात सहज ढंग से उजागर हो जा रही है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के हितों का सरंक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
     इन दिनों बाजार में चना दाल का भाव 50 रू. प्रति किलों की दर पर बिक रही है।पर इसी चना दाल का शुध्द बेसन महज 40 रू. प्रति किलो में आसानी से मिल जा रहा है।किराना की दुकानों में इसी तरह आटा, खादय तेल तथा  शुध्द बेसन जैसी खादय सामग्री के मुंहमांगे दाम देने के बाद भी उपभोक्ताओं को धीमा जहर खरीदना पड़ रहा है।यहॉं पर अमृत भोग बेसन का पैकेट चना दाल से भी कम दाम पर मिल रहा है। शुध्द बेसन के इस पैकेट पर वनज 500 ग्राम तथा इसकी किमत 20 रू. दर्शाई गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बेसन के पैकेट पर इसके निर्माता का कहीं भी नाम पता नहीं दिया गया है। खादय सामग्री के इन्ही पैकेटों से होटलों में आलू चाप, सेव ,भजिया बना कर ग्राहकों के सामने परोसा जा रहा है। होटल मालिकों का कहना है कि बाजार में मिलावटी सामग्री बेचने वालों पर स्वास्थ्य विभाग की पकड़ नहीं होने से उन्हे इस तरह के मिलावटी खादय सामग्री से काम चलाना पड़ रहा है।
शुध्द बेसन का पैकेट

    इसी तरह दूध, पनीर तथा अन्य खादय सामग्री में भी जमकर मिलावट हो रही है। दूध में कई घातक तत्व की मिलावट के साथ इसकी बिक्री होने से छोटे बच्चों को इसका अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शहर में इन दिनो उपभोक्ताओं व्दारा दूध विक्रेताओं को उनकी मुंहमांगी किमत देने के बाद भी शुध्द दूध नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि बाजार में दूध की किमत 30 रू.से लेकर 40 रू. प्रति लीटर होने के बाद भी उपभोक्ताओं को मिलावटी दूध से काम चलाना पड़ रहा है।यहंा के उपभोक्ता महेन्द्र सोनी ने बताया कि बाजार में पैकेट बन्द खादय सामग्री में जमकर मिलावट होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग व्दारा इस ओर कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होने कहा कि इन दिनों चाय, मसाला, खादय तेल ,शुध्द घी के नाम पर उपभोक्ताओं को धीमा जहर परोसा जा रहा है।यहॉं पर उड़ीसा से घटिया तेल के ड्रम लाकर उसमें कैमिकल डाल कर उसे देखते ही देखते सरसों तेल का रूप दे दिया जाता है।इस मिलावटी सरसों तेल को एक किलो तथा अन्य पैक डिब्बों में भर कर दुकानदार धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं। इन सामग्री के डब्बों पर इसके निर्माता का नाम पता नहीं होने के कारण इसके निर्माता पर स्वास्थ्य विभाग का षिकंजा नहीं कस पाता है।  महेन्द्र सोनी ने कहा कि  इन दिनों बाजार में घटिया खादय सामग्री के विरूध्द में कड़ाई पूर्वक अभियान चलाने की जरूरत है। 
                          क्या कहता है स्वास्थ्य विभाग 
      मिलावटी खादय सामग्री बेचने वालों पर शिकंजा कसने के लिए जिले में 36 दुकानदारों से विभिन्न खादय सामग्री के सेम्पल भरे गए थे। इनमें 11 सेम्पल मानक स्तर से कम पाए जाने पर उन्हे नोटिष दिया गया है। दूध विक्रेताओं व्दारा भी मिलावट करने की कई जगह से षिकायतें मिली हैं। उनके विरूध्द जल्द ही अभियान चला कर कार्रवाई की जाएगी।
                   भारत भूषण बोर्डे, जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी