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शनिवार, 27 जून 2015

सिविल अस्पताल में होने लगे सफल आपरेशन

सफल आपरेशन के बाद बिहानुराम
 मांझी की चिकित्सकों व्दारा देख रेख
15 सालों से अनुपयोगी मशीन, उपयोगी बनी
रमेश शर्मा/पत्थलगांव/ 
   शहर का सिविल अस्पताल में 15 सालों से बेकार पड़ी लाखों रुपयों की लागत वाली सी आॅर्म मशीन में आवश्यक सुधार कर इस मशीन को उपयोगी बना लेने से यहां आर्थोपेडिक्स मरीजों का सफल आपरेशन होने लगा है। बीते सप्ताह यहां शल्य चिकित्सा कर हड्डी में राॅड डालकर इंटर लाकिंग का सफल आपरेशन किया गया। स्वास्थ्य अधिकारी डा.जेम्स मिंज का कहना है कि पूरे जिले में अब तक का यह पहला आपरेशन है।
          सिविल अस्पताल में सर्व सुविधायुक्त आपरेशन थियेटर तैयार कर लेने के बाद इस मशीन का उपयोग कर अलग अलग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल दो लोगों का आर्थोपेडिक्स सर्जन डा. प्रफुल्ल चैहान की टीम के व्दारा सफल आपरेशन किया जा चुका है। बीएमओ डा.जेम्स मिंज ने बताया कि सिविल अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने से यहंा पर पड़ोसी रायगढ़ और सरगुजा जिले से भी जटिल समस्या वाले मरीज आने लगे हैं।उन्होंने कहा कि सिविल अस्पताल में मरीजों का उपचार के लिए अन्य जरूरी सुविधा बढ़ाने की भी तैयारी की गई है। इस क्रम में डेंटल मरीजों का उपचार की भी सुविधा बढ़ाई जा रही है।डा.मिंज ने बताया कि सिविल अस्पताल में डेंटल चिकित्सक अनूप भगत की पदस्थापना हो जाने के बाद 15 जून से यहां डेंटल संबंधित सघन चिकित्सा की भी शुरुआत की जा रही है।
        आर्थोपेडिक्स सफल आपरेशन केश नम्बर 1
 घुटने की हड्डी जोड़ने के लिए मरीज मलिक राम
 का टेंसन बैंड वायरिंग का सफल आपरेशन
  1. किलकिला के समीप ग्राम गोलाबुड़ा का बिहानु राम मांझी 30 वर्ष का दुर्घटना में बाऐं पैर में जांघ की हडडी टूट गई थी। इस मरीज के परिजनों ने उसके उपचार के लिए तीन दिन पहल इसे पत्थलगांव सिविल अस्पताल में भर्ती कराया था। आर्थोपेडिक्स सर्जन प्रफुल्ल चैहान ने जब दुर्घटना में घायल बीहानु राम मांझी का परीक्षण किया तो उसके पैर के जांघ की टूटी हुई हडडी को प्लास्टर बांध कर जोड़ने में संदेह लग रहा था। डा.चैहान ने अपने अन्य सहयोगियो से सलाह मशविरा के बाद इस मरीज के पैर का आपरेशन कर राॅड लगाने की योजना बनाई गई। सिविल अस्पताल के आपरेशन थियेटर कक्ष में स्थापित की गई सीआॅर्म मशीन का उपयोग कर इस मरीज का सफल आपरेशन कर दिया गया है। टूटी हुई पैर की हड्डी में शल्य चिकित्सा कर लोहे की राड डाल कर इंटर लाकिंग करने के इस काम में यहां के चिकित्सक डा.डी.पटेल और लैलूंगा के डा.राजकुमार गुप्ता की भी सेवाएं ली गई। लगभग दो घंटे तक चले इस आपरेशन की बाद मरीज और उसके परिजनों से भी अधिक इस काम में जुटे सभी चिकित्सक व उनके सहयोगियों के चेहरों पर खुशी झलक रही थी। इस मरीज का सफल आपरेशन के बाद उसे सघन देख रेख के लिए अभी पत्थलगांव सिविल अस्पताल में ही रखा गया है। बीएमओ डा.जेम्स मिंज ने बताया कि जशपुर जिले में हडडी इंटर लांकिग का यह अब तक का पहला सफल आपरेशन है।
 सी आॅर्म मशीन को उपयोगी बना लेने से मरीजों
 को आपरेशन सुविधा का मिलने लगा लाभ
   आर्थाेपेडिक्स सफल आपरेशन केश नम्बर 2.
      यहां के सिविल अस्पताल में मरीजों के लिए सर्व सुविधायुक्त आपरेशन थियेटर उपलब्ध हो जाने के बाद बीते सप्ताह कोतबा के समीप ग्राम राजाआमा निवासी मलिकराम पिता सिमन उम्र 35 वर्ष भी सफल आपरेशन किया गया है। इस मरीज के घुटने की कटोरी टूट जाने से आर्थोपेडिक्स सर्जन डा.प्रफुल्ल चैहान ने ही टूटी हड्डी पर टेंसन बैंड वायरिंग का सफल आपरेशन किया है। इस मरीज को भी सिविल अस्पताल में ही देख रेख के लिए भर्ती रखा गया है। इस मरीज के परिजनों का कहना था कि परिवार की गरीब हालत के चलते वे दुर्घटना के बाद मालिकराम को बाहर ले जा कर इलाज कराने की स्थिति में नहीं थे। लेकिन यहॉं के सरकारी अस्पताल में ही सफल आपरेशन करके मलिक राम का बेहतर इलाज हो जाने से सभी लोग काफी खुश थे। 

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

थोड़ा सा दाना, थोड़ा सा पानी

पेड़ पौधों पर पक्षियों के लिए मिटटी के बर्तन में पानी
अच्छी खबर..........
पक्षियों को दाना पानी की छोटी पहल का बड़ा लाभ
        रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
       गर्मी के दिनों में सूरज की तपन से मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु पक्षियों को भी राहत की जरूरत होती है। शहर में कई लोगों व्दारा सूरज की तपन बढ़ते ही पक्षियों के लिए दाना पानी उपलब्ध कराने की सार्थक पहल की जा रही है। परोपकार के इस काम में अब कई लोग आगे बढ़ कर हाथ बंटाने लगे हैं। पक्षियों के लिए थोड़ा दाना थोड़ा पानी देने के इस सहयोग का अन्य लोग भी अनुषरण करने लगे हैं। गर्मी के दिनों में दाना पानी देने की इस छोटी सी पहल का अनेक पक्षियों को अच्छा खासा लाभ मिल जाता है।
    यहां इंगलैंड के नाॅटिंघम से अन्तरराष्ट्रीय कानून तथा विकास पर एलएलएम की शिक्षा लेकर लौटी कुलिशा मिश्रा का कहना है कि उन्हे गर्मी के दिनों में पक्षियों को थोड़ा दाना,थोड़ा पानी देने में काफी सुकून मिलता है। उन्हांेने कहा कि पक्षियों के लिए पानी की एक एक बंूद का महत्व रहता है।उन्होने जब घर में रहने वाली गौरैया को पानी की एक बून्द से तृप्ति करते हुए देखा तभी से वह पक्षियों के लिए नियमित रूप से दाना पानी देने का काम कर रही है। कुलिशा का कहना था कि आमतौर पर हर घर में नजर आने वाली गौरैया चिडि़या अब शहर से ही दूर होने लगी है। इसके लिए तेजी से बढ़ते पाॅल्यूशन,रेडिएशन और हरियाली की कमी ने गौरैया को शहरों से दूर कर दिया है। हालांकि शहर के कुछ हरियाली भरे क्षेत्र में गौरैया सुबह शाम झुंड में नजर आती हैं, लेकिन इन्हे घरों में रखने की हमारी पहल में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। कुलिशा का कहना था कि वास्तव में गौरैया चिडि़या भी मनुष्य के आस पास रहने में ही दिलचस्पी दिखाती है। इस नन्ही चिडि़या को वापस घर में बुलाने के लिए हमारी पहल अवश्य लाभप्रद साबित होगा।
घर की छत पर कुलिशा मिश्रा पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करते हुए
हा                  सुकृत्य से मिलता है सुकून
         दरअसल तापमान में वृध्दि के बाद पानी की एक एक बून्द के लिए पक्षियों को भी मशक्कत करते हुए देखा जाता है। गर्मी में पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए यहां के राईस मिलर श्रवण अग्रवाल ने भी सराहनीय पहल की है। उनके व्यावसायिक परिसर में गौरैया को खाने के लिए दाना तो भरपूर मिल जाता था, लेकिन पानी की दो बूंद के लिए इन पक्षियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पक्षियों की परेशानी को महसूस कर इस व्यवसायी ने अपने परिसर तथा आस पास के अनेक पेड़ की टहनियों पर मिटटी की तश्तरियंा टांग दी हैं। इनमें नियमित रूप से पीने का पानी भरने से अब यहां हर वक्त चिडियों का शोरगुल सुनाई देने लगा है।श्रवण अग्रवाल का इस सुकृत्य की सीख उसके बुजुर्गो से मिली थी। गर्मी के दिनों में दाना पानी की अनुपलब्धता के कारण कई छोटे पक्षी दम तोड़ देते हैं। इन पक्षियों को बचाने के लिए मिटटी के बर्तन में पानी रखने से उन्हे निष्चित ही लाभ मिलता है। इस वजह गर्मी के दिनों में पक्षियों के लिए दाना पानी उपलब्ध कराने से उन्हे काफी सुकून मिलता है।
                                         दैनिक भास्कर ने की है दाना पानी की पहल
 यहां के पर्यावरणविद डा.परिवेश मिश्रा ने गौरैया चिडि़या की लगातार कम होती संख्या पर चिंता जाहिर की है। उन्होने कहा कि गौरैया मूलतः अपने घर में ही या आसपास ही देखने को मिल जाती थी, लेकिन अब पक्के घरों में गौरैया के घोंसले बनाने की जगह नहीं मिल पाने से यह बाहर उड़ चुकी है। लोगों को जागरूक करने के लिए दैनिक भास्कर ने थोड़ा सा दाना थोड़ा पानी का नारा देकर इस दिशा में सार्थक पहल की है। उन्होने कहा कि गर्मी के दिनों में सभी को घरों की छत पर या उंचाई वाले स्थान पर पक्षियों के लिए दाना पानी देने के काम में अपनी भागिदारी निभानी चाहिए।

गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

जन्मदिन के उपहार ने बनाया लड़ाकू विमान का पायलट

रमेश शर्मा | पत्थलगांव
बचपन में जन्म दिन का उपहार के रूप में मिलने वाला जगुवार जहाज की शक्ल वाला साधारण खिलौना को समझने की उत्सुकता ने ग्राम कछार का होनहार बालक राकेश यादव को वायुसेना में फ्लाइंग आफिसर के पद पर पहुंचा दिया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे और हैदराबाद में एयर फोर्स का प्रशिक्षण पूरा कर लेने के बाद यह बालक देश के लड़ाकू विमान का पायलट बन जाएगा।
यूपीएससी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे की परीक्षा में 211 वें रेंक के साथ सफलता अर्जित कर लेने के बाद इस युवक ने एसएसबी बोर्ड इलाहाबाद की परीक्षा भी 66 वें रेंक में उत्तीर्ण कर ली है। इस कठिन दौर की परीक्षाओं में शानदार सफलता के बाद राकेश यादव का लड़ाकू विमान के प्रशिक्षण के लिए चयन हो गया है।
पत्थलगांव के समीप छोटा सा कछार नामक गांव का निवासी होनहार बालक 28 दिसंबर से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पूणे में आयोजित तीन साल का प्रशिक्षण में भाग लेने जा रहा है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे में सुपर डिमोना ब्लॅाइडर का प्रशिक्षण के बाद उसे हैदराबाद में एक साल एयर फोर्स अकादमी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसे पूरा कर लेने के बाद राकेश यादव सुखोई, मिग 29 और मिराज 23 की उड़ान भरने लगेगा।
                                                         आड़े नहीं आता ग्रामीण परिवेश
राकेशयादव का कहना है कि यदि एकाग्रता के साथ लक्ष्य बना कर पढ़ाई की जाए तो ग्रामीण माहौल कहीं भी आड़े नहीं पाता। जरूरत इस बात की है कि ग्रामीण अंचल के प्रतिभावान बच्चों को आगे बढ़ने के लिए उनके अभिभावकों को सही पाठयक्रम की जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। इससे प्रतिभावान बच्चों को अपना लक्ष्य हासिल करने में समुचित सहयोग मिल जाता है। राकेश यादव का कहना था कि गाला जैसे छोटे से गांव में पढ़ाई की शुरुआत करने के बाद भी उसे सैनिक स्कूल की प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने एवं पाठयक्रम के बारे में पूरी जानकारी उसके पिता से निश्चित समय पर मिल गई थी। इसी की बदौलत उसको अपना लक्ष्य मिल पाया है।
                                                   गाला गांव से हुई थी पढ़ाई की शुरुआत
गाला के सरस्वती शिशु मंदिर में अपनी प्राइमरी शिक्षा की शुरुआत के बाद इस बालक की लगन और मेहनत से उसका रींवा के सैनिक स्कूल में चयन हो गया था। रींवा के सैनिक स्कूल में विभिन्न विषय की पढ़ाई के साथ वहां परेड और अनुशासन के साथ शारीरिक क्षमता पर विशेष ध्यान देने के बाद इस बालक की प्रतिभा में और भी निखार गया था। राकेश यादव का कहना है कि सैनिक स्कूल में पारिवारिक माहौल में रहकर उत्कृष्ट शिक्षा के बाद लड़ाकू विमान में पायलट बनने का सपना आसान दिखने लगा था। इसी लक्ष्य को सामने रख कर राकेश ने गणित एवं कम्प्यूटर साइंस विषय में मजबूत पकड़ बना ली थी। हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई के दौरान इस बालक को गणित में 100 में 100 अंक के अलावा कंप्यूटर साइंस की प्रैक्टिकल परीक्षा में 30 में 30 अंक प्राप्त होते थे। यहां 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसने यूपीएससी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे की परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन भरा था। इसमें 211 वें रेंक की अच्छी सफलता के बाद आगे की राह भी आसान हो गई। राकेश यादव के पिता लक्ष्मण यादव ग्राम गाला में पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि लगन और लक्ष्य के साथ गांव में रह कर भी ऊंचाइयों को छुवा जा सकता है। फ्लाइंग आफिसर के लिए राकेश यादव का चयन हो जाने के बाद इस होनहार बालक ने अपनी सफलता का श्रेय ग्राम गाला के गुरुजनों के अलावा उसकी माता डिलेश्वरी यादव और पिता लक्ष्मण यादव को दिया है। इस बालक का कहना है कि वह देश की रक्षा के लिए लड़ाकू विमान चला कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करना चाहता है।

गुरुवार, 15 मई 2014

निजी महत्वाकांक्षाओं से बिखरते हैं परिवार

जगनलाल अग्रवाल का संयुक्त परिवार
    आज  संयुक्त परिवार दिवस पर विशेष: 
रामदास अग्रवाल का संयुक्त परिवार
 दूर दूर रह कर भी भावनात्मक जुड़ाव जरूरी
 रमेश शर्मा /            पत्थलगांव/    
           अधिकांश लोगों को संयुक्त परिवार की मधुर स्मृतियंा याद होने के बाद भी अब ज्यादा सदस्यों का घर कम ही दिखाई पड़ता है। पुराने लोगों का कहना है कि निजी महत्वाकांक्षा के चलते परिवार का बिखराव के बाद एकल परिवारों की गिनती बढ़ गई है। बुजुर्ग लोगों का भी मानना है कि संयुक्त परिवार में रहने का एक अलग ही आनंद है।जब तक परिवार संयुक्त रहता है, उसका हर सदस्य अनुशासन में रहता है। उसको कोई भी गलत कार्य करने से पहले बहुत सोचना समझना पड़ता है। लेकिन एकल परिवार में सही मार्ग दिखाने वाला नहीं रहने से कई लोग भटक कर परेशानी में पड़ जाते हैं।
           यहाँ के प्रमुख समाजसेवी रामदास अग्रवाल का कहना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में दूर दूर रह कर भी भावनात्मक जुड़ाव को मजबूती से कायम रखने की बात पर ही ध्यान देना चाहिए। एक शहर में ही रहने वाले परिवार के सदस्यों को आपसी मेलजोल में थोड़ा मिठास बढ़ाकर भावनात्मक संबंध को सुदृढ़ रखना चाहिए।
         श्री अग्रवाल का कहना था कि मुश्किल और जरूरत के मौके पर अपना परिवार की याद आने के बाद भी आज बदलते सामाजिक परिदृश्य में संयुक्त परिवार तेजी से टूट रहे हैं और उनकी जगह एकल परिवार लेते जा रहे हैं। लेकिन बदलती जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा के दौर में तनाव तथा अन्य मानसिक समस्याओं से निपटने में केवल अपनों का साथ ही अहम भूमिका निभा सकता है। उन्हांेने कहा कि संयुक्त परिवार में आस पास काफी लोगों की मौजूदगी से एक दूसरे का आत्मविश्वास और एक सहारा का काम करती है। उन्होंने बताया कि संयुक्त परिवार में जहाँ बच्चों का लालन पालन और मानसिक विकास अच्छे से होता है, वहीं वृद्धजन का अंतिम समय भी शांति और खुशियों के बीच गुजरने लगता है।
    श्री अग्रवाल का कहना था कि वृद्धजनों को अपनों से प्यार नहीं मिल पाने से ही उनकी चिड़चिड़ाहट दिखती है, लेकिन संयुक्त परिवार में रह कर ही वृद्धजन अपनी इच्छाओं की पूर्ति कर पाते हैं। श्री अग्रवाल का कहना था कि हमारे बच्चे संयुक्त परिवार में दादा दादी, काका काकी, बुआ आदि का प्यार की छाँव में खेलते कूदते बड़े होते हैं। इस दौरान उन्हें परिवार के संस्कारों का भी ज्ञान मिलने लगता है। रामदास अग्रवाल का कहना था कि पहले प्रत्येक परिवार में कुटुम्ब व्यवस्था होती थी, पर अब आपस में ईर्ष्या और पश्चिमी सभ्यता का चलन बढ़ जाने से ज्यादातर परिवार एकल परिवार में बदलते जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आज इक्का दुक्का घरों में ही संयुक्त परिवार का दृश्य देखने को मिलता है। इसमें भी अब शिकवा शिकायत और बिखराव की बातों पर ही जोर दिया जा रहा है। उन्हांेने कहा कि भले ही परिजन दूर हो जाएँ, पर आपस का प्रेम कम नहीं होना चाहिए। इसके लिए जरूरी है कि भावनाओं के धागे से पूरे परिवार को जोड़ कर रखा जाए। यह तभी संभव हो सकता है जब हम आपस का मेल मिलाप को निरंतर बनाऐ रखें। खास मौके पर सभी लोग एक साथ मिलने से भी दूरियाँ कम होती हैं। परिवार में शादी ब्याह, जन्मदिन या खुशी के अवसर पर एक साथ मिलने का प्रयास को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए।
                                                      65 सदस्यों का संयुक्त परिवार
    यहाँ के गिने चुने संयुक्त परिवारों में से एक जगनलाल अग्रवाल का भी परिवार है। 65 सदस्यों का यह परिवार अपने व्यावसायिक कामकाज से भले ही अलग अलग रहने लगा हैं, लेकिन सभी सदस्यों का आपसी प्यार यथावत है। शादी ब्याह, अथवा किसी भी सुख दुख में छः भाई और तीन बहनों के परिवार के सभी सदस्य अपना व्यवसाय छोड़कर एक छत के नीचे बैठ जाते हैं। ऐसे अवसर में इस संयुक्त परिवार का हंसी मजाक देखते ही बनता है। इस परिवार को पिकनिक जाने के लिए एक बस भी छोटी पड़ जाती है।
    इस परिवार के मुखिया जगनलाल अग्रवाल का कहना था कि संयुक्त परिवार में अगर सुखी रहना है, तो लेने की प्रवृति का परित्याग कर देने की प्रवृत्ति रखनी पड़ेगी। परिवार के हर सदस्य का नैतिक कर्तब्य है कि वे एक दूसरे की भावनाओं का आदर कर आपस में तालमेल रख कर चलें। ऐसा कोई कार्य न करें, जिससे दूसरे की भावनाओं को ठेस पहुंचे। संयुक्त परिवार में किसी भी विषय को अपनी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा नहीं बनाने से परिवार के सदस्यों का आपसी प्रेम बना रहता है। जगनलाल अग्रवाल का कहना था कि थोड़ गम खा कर और त्याग करके ही संयुक्त परिवार चलाया जा सकता है। इसमें भी सबसे अधिक अहम भूमिका परिवार के मुखिया की बन जाती है। उन्होंने कहा कि आज छोटा भाई बड़े भाई से राम बनने की अपेक्षा करता है,किन्तु स्वयं भरत बनने को तैयार नहीं। इसी तरह बड़ा भाई छोटे भाई से अपेक्षा करता है कि वह भरत बने लेकिन स्वयं राम की भूमिका कर पाने में असफल हो जाता है। उन्हांेने कहा कि सास बहू से अपेक्षा करती है कि वह उसको मां समझे, लेकिन सवयं बहू को बेटी मानने तैयार नहीं। बहू चाहती है कि सास मुझको बेटी की तरह माने, लेकिन स्वयं सास को मां जैसा आदर नहीं दे पाती। यह परस्पर विरोधाभास ही सभी परिवार में कलह का मूल कारण होता है।इसके लिए हमें थोड़ा सा त्याग करने की जयरत पड़ती है। इससे संयुक्त परिवार टूटने से बच सकते हैं।उनहोने कहा कि संयुक्त परिवार में सभी सदस्य एक दूसरे के आचार व्यवहार पर निरंतर निगरानी बनाए रखते हैं।यही वजह है कि परिवार में किसी भी सदस्य की अवांछनीय गतिविधियों पर अकुंश लगा रहता है। परिवार में बुजुर्ग सदस्यों को सम्मान देने से शराब,जुआ या अन्य कोई नशा जैसी बुराईयों से बचा रहता है। परिवार में यह सिलसिला लगातार चलाया जा सकता है। इससे संयुक्त परिवार की अपनी गरिमा और बढ़ जाती हैं।
                                                     आत्म विश्‍वास के साथ त्याग भी
         यहाँ के प्रीतपाल भाटिया का कहना था कि संयुक्त परिवार में बच्चों के लिए सर्वाधिक सुरक्षित और उचित विकास का अवसर प्राप्त होता है। उन्होने कहा कि बच्चे की इच्छाओं और आवश्यकताओं का अधिक ध्यान रखा जा सकता है। श्री भाटिया का कहना था कि बच्चे को दादा दादी से प्यार के साथ ज्ञानवर्धक शिक्षा भी मिलती है। यह अवसर एकाकी परिवार में बहुत कम रहता है।उन्होने कहा कि एकल परिवार में बच्चे के मस्तिष्क की संरचना अलग होती है। यही वजह है कि वह भी आगे चल कर एकल परिवार को पसंद करने लग जाते हैं।श्री भाटिया का कहना था कि एक नई सोच के साथ परिवार को आज भी संयुक्त रखा जा सकता है, बशर्ते थोड़ा त्याग और आत्मविश्वास होना चाहिए।

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सोमवार, 18 मार्च 2013

कृषि उत्पादकता में श्रेष्ठ प्रदर्शन: मनोज अंबस्थ सम्मानित

कृषि मंत्री से पुरस्कार ग्रहण करते हुए
 तिलडेगा के किसान मनोज अम्बस्थ

पत्थलगांव/ रमे शर्मा
    जशपुर जिले में कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में श्रेष्ठ प्रदर्श न करने वाले ग्राम तिलडेगा के कृषक मनोज अंबस्थ को इस वर्ष एक्सटेंशन रिफार्म्स (आत्मा) योजनांतर्गत कृषि उत्पादकता पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। रायपुर के कृषि महाविद्यालय में आयोजित एक समारोह में कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू ने उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया। श्री अम्बस्थ ने अपने छोटे से गांव में सुविधाओं का अभाव के बाद भी श्री पदयति से धान की बम्फर पैदावार ली है। इस किसान ने उन्नत खेती अपना कर दूसरे किसानों को भी प्रेरण दी है।
       यहां वरिष्ठ कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती अनिता एक्का ने बताया कि कि कृषि क्षेत्र में उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार द्वारा एक्सटेंशन रिफॉर्म्स योजना संचालित की है। इस योजना के तहत उत्कृष्ट कृषि आधारित उत्पादन के लिए राज्य सरकार द्वारा कृषि उत्पादकता पुरस्कार प्रदान किया जाता है। इस योजना के लिए प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों से कृषकों का चयन किया गया था। इसमें पत्थलगांव विकासखंड से कृषि उत्पादकता के लिए श्रेष्ठ कृषक के रूप में तिलडेगा के उन्नतषील कृषक मनोज अम्बस्थ चयनित हुए थे। उन्होने बताया कि बीते सप्ताह रायपुर के कृषि महाविद्यालय में आयोजित एक रंगा रंग समारोह में प्रदेश के कृषि मंत्री चंद्रशेखर साहू ने उन्हें 25 हजार रू का चेक और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
     कृषि उत्पादकता में श्रेष्ठ प्रदर्षन करने वाले किसान श्री अम्बस्थ ने बताया कि उन्होंने परंपरागत व्यवसाय के रुप में कृषि को एक नया आयाम दिया है। इस किसान का कहना था कि खेती के काम में नई तकनीकों और कुशल प्रबंधन की बदौलत उन्होंने प्रति ईकाई फसलोत्पादन में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उल्लेखनीय है कि यह पुरस्कार हासिल करने वाले वह क्षेत्र के पहले कृषक हैं।
                        किसान बदल सकते हैं तस्वीर
   श्री अम्बस्थ को कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में सम्मानित करने परयहां के किसानों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। विधायक रामपुकार सिंह ने कहा कि मनोज अम्बस्थ ने खेती के काम काज में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने से दूसरे किसानों को भी उनके अनुभव का लाभ मिल सकेगा।श्री सिंह ने कहा कियहां खेती के क्षेत्र में काम करने की असीम संभावनाऐं हैं। किसानों को सिंचाई के लिए छोटे बांध तथा अन्य सुविधाऐं मुहैया करा कर यहां  की तस्वीर बदली जा सकती है।
  यहां के पूर्व मंडी अध्यक्ष डमरूधर यादव का कहना था कि पत्थलगांव के किसान ने कृषि उत्पादकता के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करके वे आस-पास के किसानों के लिए एक मिसाल बनकर उभरे हैं। श्री यादव ने कहा कि इस अंचल में धन की दोहरी फसल लगाई जाती है।  तिलडेगा गांव के किसान को मिले इस सम्मान से दूसरे किसानों का भी उत्साह बढ़ेगा। श्री अम्बस्थ को सम्मानित करने पर यहां कृषक समाज के प्रतिनिधियों और कृषि विभाग के अधिकारियों के साथ किसान नेता वेदप्रका मिश्रा, राजेश  अग्रवाल ,विजय त्रिपाठी,वेदप्रकाश मिश्रा,हरगोविंद अग्रवाल, सुरेन्द्र चेतवानी, मुकेश अग्रवाल, नीरज गुप्ता, छत्रमोहन यादव,निसामुद्दीन खान ने बधाई दी है।


मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

किसान की सूझबूझ काम आई, खुद ही बनाई जैविक खाद

 प्रगतिशील किसान वेदप्रकाश  मिश्रा अपने खेतों में
     
पत्थलगांव
        रमेश शर्मा
  वर्तमान में किसानों को जहां रासायनिक खादों से खेती करना महंगा साबित हो रहा है।वहीं यहॉं पर एक प्रगतिशील किसान वेदप्रकाश मिश्रा ने अपने ही खेतों में जैविक खाद बनाकर दूसरे किसानों के लिए भी प्रेरणा की मिसाल बन गए हैं।
      इस किसान ने पुरानी बस्ती के पास अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार करके न केवल खेती का रकबा बढ़ा लिया है, बल्कि खाद पर नाममात्र का खर्च करके अपने खेतों में पैदावार को दो गुना से अधिक कर लिया है।श्री मिश्रा ने इस वर्ष धान आदि की खेती के अलावा गन्ना का बम्फर उत्पादन लेकर अपनी आमदनी को तीन गुना बढ़ा लिया है। इस किसान के खेतों में जैविक खाद का उपयोग को देखने के लिए आसपास के गांवों से किसान पहुंच रहे हैं। श्री मिश्रा अब इन किसानों को जैविक खेती से अधिक मुनाफे का गुर सीखा रहे हैं।श्री मिश्रा ने चर्चा के दौरान बताया कि उसने अपने खेत पर जैविक खाद के तहत दीवार नाडेप, केंचुवा खाद, समाध खाद, विभिन्न प्रकार की पत्तियंा से कीट नियंत्रक दवा तैयार की है। इसका अपने खेतों में उपयोग करके लगभग 12 एकड़ भूमि में उन्नत फसल का लाभ लिया है।इस किसान ने बताया कि खेतों के बीच में खाली भूमि पर विभिन्न साग सब्जी उगा लेने से उसे बाजार में महंगी सब्जी नहीं खरीदनी पड़ रही है। इस किसान का कहना था कि उसके खेतों में तैयार होने वाली फसल के साथ वह साग सब्जी से भी नगद आमदनी ले रहा है। वेद प्रकाश मिश्रा के खेतों में इन दिनों विभिन्न फसल को उगाने का तरिका तथा जैविक खाद बनाने की विधि को आस पास के किसान देख रहे हैं।
     श्री मिश्रा ने अपने खेतों में नींबू ,मिर्च के भी पौधे लगा लिए हैं।उनका कहना था कि कृषि विभाग से बीते वर्ष उन्होंने तालाब निर्माण के लिए सहायता मांगी थी। इस आवेदन पर वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी श्रीमती अनिता एक्का ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे तालाब निर्माण के लिए अनुदान उपलब्ध कराया था। इस किसान के खेत में तालाब बनाने के बाद वहॉं  इन दिनों लबालब पानी भर गया है। इस किसान का कहना था कि वह सरकारी मदद के बाद जैविक खाद का उपयोग करकें अच्छा मुनाफा प्राप्त कर रहा है।जैविक खाद के बारे में अपना रूझान के संबंध में वेद प्रकाष मिश्रा ने बताया कि रासायनिक खाद खादों का लगातार उपयोग करने से उर्वरा शक्ति क्षीण हो जाती है।खेत की मिटटी का उपचार नहीं होने से धीरे धीरे फसल में काफी कम उत्पादन होने लगता है।उन्होने बताया कि रासायनिक खाद की महंगाई तथा उत्पादन कम होने से उन्होने जैविक खाद बनाने पर विचार किया था।अब यह जैविक खाद उसके विकास का आधार बन चुकी है।

रमेश शर्मा
                        
                                

मंगलवार, 22 मई 2012

परंपरा को जीवित रखने का अनूठा प्रयास


कोषाध्यक्ष जगनलाल अग्रवाल

प्रबंधक प्रहलाद रोहिला
बुजुर्गो के सेवा कार्य से सैकड़ो मुसाफिरों को मिलता है लाभ
पत्थलगॉंव / रमेश शर्मा
      शहरों में गरीब यात्रियों के ठहरने का सहारा ध्‍ार्मशाला  की परम्परा भले ही अब लुप्त होने लगी है। मगर जशपुर जिले के पत्थलगांव में  के समाजसेवियों व्दारा इस पुरानी परम्परा का आज भी बेहतर ढंग से सचंालन किया जा रहा है। बस स्टैण्ड यहॉं पर स्थित हरियाणा ध्‍ार्मशाला  को व्यावसायिक उपयोग से अलग रखकर  सेवा और मदद की भावना को ही सबसे उपर रखा गया है।
     पत्थलगांव में 40 साल पहले  पर हरियाणा से आकर बसने वाले बुजुर्गो ने आपस में धनराषि एकत्रित कर इस ध्‍ार्मशाला  की नींव रखी थी।  दानदाताओं की लम्बी कतार के साथ निःस्वार्थ भावना से यंहा का काम में सहयोग देने वालों के चलते इस ध्‍ार्मशाला  की दूर दूर तक पहचान बन गई है। पत्थलगांव की धर्मशाला से गरीबों को ठहरने का सहारा के अलावा कम खर्च पर वैवाहिक कार्यक्रम पूरे करने वालों को अच्छी खासी मदद  मिल जाती है। इस ध्‍ार्मशाला  से होने वाली मामूली आय के साथ अन्य दानदाताओं की आर्थिक सहायता को शामिल कर दूर दराज से आने वाले यात्रियों को अच्छी सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। महंगाई के बदलते दौर में भी  ठहरने वाले यात्रियों को महज 50 रू. और 10 रू. में कमरा उपलब्ध कराया जा रहा है।
       के प्रबंधक प्रहलाद रोहिला का कहना है कि ध्‍ार्मशाला  में सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए प्रबंधक मंडल ने  पर यात्रियों के लिए कुछ आवश्‍यक नियम बनाऐं हैं। सभी यात्रियों से इन नियमों का पालन करना अनिवार्य रखा गया है। इसके अलावा  साफ सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्होने कहा कि आपराधिक घटनाओं के मददेनजर  ठहरने वाले का पहचान पत्र की कड़ाई अवष्य की गई है। श्री रोहिला ने बताया कि कभी कभी परिस्थितिवश मुसाफिर से ठहरने की शुल्क को भी माफ कर दिया जाता है।
व्यवस्थापक नत्थूराम शर्मा
     हरियाणा से आए हुए बुजुर्गो ने वर्ष 1968 के दौरान जिस उद्देश्‍य को लेकर पत्थलगांव में हरियाणा ध्‍ार्मशाला  की नींव रखी गई थी उस मदद की भावना को आज भी पूरे विष्वास के साथ जारी रखा गया है। चार दषक पहले निर्मित यह ध्‍ार्मशाला  की पिछले दिनों काफी जर्जर हालत हो जाने से इसका पुनः जीर्णोंध्दार कराया गया है। मौजूदा समय में  पर यात्रियों को ठहरने के लिए आधुूनिक सुविधाओं का पूरा खयाल रखा गया है।
                        धर्मशाला में सुविधा विस्तार की बृहद योजना
       हरियाणा ध्‍ार्मशाला  के कोषाध्यक्ष जगनलाल अग्रवाल ने बताया कि इस ध्‍ार्मशाला  में पुराने कमरे और शौचालयों को हटाकर नई सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यात्रियों के लिए चौबीस घन्टे बिजली पानी जैसी जरूरी सुविधाओं के बदले   पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जा रहा है। गर्मी के दिनों में यात्रियों कूलर, पंखों की व्यवस्था के साथ ठंड के दिनों में गददे, कम्बल जैसी सुविधाओं का भी बेहतर प्रबंध किया गया है। शहर के दानदाताओं व्दारा हरियाणा ध्‍ार्मशाला  में आर्थिक मदद कर अपने बुजुर्गो के नाम षिलालेख पर दर्ज करा दिए हैं। ध्‍ार्मशाला  के व्यवस्थापक नन्थुराम शर्मा ने बताया कि इस ध्‍ार्मशाला  सचंालन के लिए कभी भी व्यावसायिक दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाता है। वैवाहिक कार्यक्रम के दौरान पहले आओ पहले पाओ का नियम रखा गया है। उन्होने कहा कि मंहगाई के इस दौर में ज्यादातर शहरों में गरीब यात्रियों के ठहरने की पुरानी ध्‍ार्मशाला  का नाम भले ही लुप्त हो गया है पर  की ध्‍ार्मशाला  में सभी सदस्यों का सहयोग से यात्रियों को निरतंर सुविधा मिल रही है। उन्होने बताया कि इस धर्मशाला में यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जल्द ही बदलाव करने की योजना है। इसके लिए ध्‍ार्मशाला  व्यवस्थापक मंडल ने बृहद कार्य योजना बनाई है। श्री शर्मा ने कहा कि आज महंगाई के दौर में ध्‍ार्मशाला  संचालन का काम  थोड़ा कठिन अवश्‍य है पर  ठहरने वाले गरीब यात्रियों की दुवाओं से काफी सुखद अहसास होता है। श्री शर्मा ने बताया कि लम्बे समय के बाद भी ध्‍ार्मशाला  का सचालन में रूकावट नहीं आने के पीछे इसके सदस्यों की एकता, आपसी भाईचारा तथा सेवा की भावना प्रमुख कारण है।  ध्‍ार्मशाला  व्यवस्थापक मंडल के संरक्षक धर्मपाल अग्रवाल व्दारा आय ब्यय की आडिट के बाद ही नई योजना को स्वीकृति दी जाती है।
     गरीब यात्रियों को इस अनजाने शहर में महंगे होटल और लॉज की दिक्कत के कारण उसे ध्‍ार्मशाला  का काफी बड़ा सहारा मिल जाता है। ध्‍ार्मशाला  में ठहरने का बेहद कम खर्च के बाद गरीब यात्री खाने पीने की महंगाई का आसानी से मुकाबला कर लेते हैं। पत्थलगांव ध्‍ार्मशाला में प्रति दिन 50 से 150 यात्रियों को ठहरने का लाभ मिल रहा है। छोटा व्यवसाय करने वाले लोग बेफिकर होकर पत्थलगांव ध्‍ार्मशाला  पहुंचते हैं।

गुरुवार, 10 मई 2012

परंपरागत सरहुल त्योहार से पर्यावरण का संदेश


पत्थलगॉंव /                     रमेश शर्मा
       वनवासियों के प्रत्येक तीज त्यौहारों में प्रेरणादायक संदेश के साथ आपसी भाईचारे की भावना को मजबूती मिलती है। इन्ही में से एक वनवासियों का वर्षो पुराना सरहुल पर्व भी है, जिसमें  गांव गांव से लोग इकट्ठा होकर पेड़ और धरती की पूजा करके पर्यावरण संरक्षण के काम में अनोखी मिसाल कायम कर रहे हैं।

     उक्त बातें पूर्व मंत्री गणेशराम भगत ने 
गुरुवार को पत्थलगांव में आयोजित सरहुल पर्व के दौरान वनवासियों की एक विषाल जनसभा में कही । 10 मई 2012 को भीषण गर्मी के बाद भी पत्थलगांव में आयोजित सरहुल पर्व में शामिल होने के लिए दूर दराज के गांवों से काफी बड़ी संख्या में आदिवासी इकट्ठा हुए थे। इन ग्रामीणों ने पालीडीह के आम बगीचा में घंटो तक लोक नृत्य तथा गीत गाकर एक दूसरे को सरहुल त्योहार की बधाई दी।ग्रामीण अपनी प्राचीन परम्परा के अनुसार साल वृक्ष के फूल भेंट कर इस त्योहार की बधाई दे रहे थे।पालिडीह का आम बगीचा में एकत्रित वनवासियों ने दोपहर 1 बजे गणेशराम भगत की अगुवाई में एक विषाल रैली भी निकाली। लगभग दो कि.मी.लम्बी इस रैली में शामिल वनवासियों ने यहंा तहसील कार्यालय के समीप प्राचीन सरना में जाकर पूजा अर्चना की। बाद में यह रैली बेहद अनुशासित ढंग से पालिडीह का प्राचीन सरना स्थल पर पहुंची। वनवासियों के इस पूजा स्थल में आसपास के गांवों से आए 31 बैगाओं के व्दारा आदिवासियों की संस्कृति से पेड़ों की पूजा कराई गई। सरहुल की रैली में ज्यादातर ग्रामीण अपने हाथों में झंडे लिए हुए थे। इसमें आदिवासियों के नगाड़ों की गूंज तथा नृत्य का दृष्य काफी मनोहारी लग रहा था।सरहुल की रैली में नगाड़ों की गुंज दूर दूर तक सुनाई पड़ रही थी।
     पालिडीह सरना से रैली वापस लौटने पर आम बगीचा में जनसभा का आयोजन किया गया। इसमें अनेक वनवासी नेताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस सभा में गणेशराम भगत ने कहा कि  हमारे बुजुर्गो के अच्छे अनुभव को नई पीढ़ी के बीच में बांटने के लिए ही वनवासियों के तीज त्यौहारों का आयोजन होता है।वनवासियों की प्राचीन संस्कृति में आपसी भाईचारा को जीवित रखने का पाठ पढ़ाया गया है।श्री भगत ने कहा कि सरहुल त्योहार में पेड़ पौधों को काटने के बजाए उनकी पूजा करने की बात कही गई है।उन्होने कहा कि ग्रामीण एवं किसानों के लिए हरियाली का सदैव महत्व रहा है। इस त्यौहार के माध्यम से वनवासी बगैर शासकीय मदद के  वनों की रक्षा करने का सन्देश को दूर दूर तक पहुंचाते हैं। इसी वजह वनवासियों का सरहुल त्योहार अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा की मिसाल बन गया है। उन्होने कहा कि वनवासियों व्दारा सरहुल का त्यौहार को वर्षो से मनाया जा रहा है।आदिवासियों के इन प्राचीन त्यौहारों की बदौलत दूर दराज के ग्रामीणों में भी भाईचारा कायम है। कुछ लोगों व्दारा आदिवासियों के बीच में धर्मान्तरण की दीवार खड़ी करके उन्हे कमजोर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।पर वनवासी समाज में जागरूकता आने के बाद वे लोग सजग हो गए हैं।प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करने वालों को इन आदिवासियों ने बाहर का रास्ता दिखला दिया है।
सरहुल रैली में गणेशराम भगत भीषण
 गर्मी में ग्रामीणों की विशाल रैली
  
वनवासियों की एकजुटता से नक्सलियों ने रास्ता बदला
     श्री भगत ने कहा कि वनवासियों में आपसी भाईचारा और एकजुटता के कारण वे बड़ी से बड़ी समस्या का आसानी से हल ढूंढ़ लेते हैं।उन्होने कहा कि वनवासियों की एकजुटता के चलते नक्सलियों को भी वापस भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है।श्री भगत ने कहा कि जशपुर जिले से लगा हुआ सरगुजा जिले का केरजू गांव के आसपास नक्सलियों ने डेरा डाल दिया था। यहंा के वनवासियों ने इपनी एकजुटता का परिचय देकर इन नक्सलियों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर कर दिया।इसी तरह जशपुर जिले में भी राज्य की सीमा से लगे सरहदी गांवों में आदिवासियों की एकता के कारण नक्सलियों को अपना रास्ता बदलना पड़ गया है।यहंा वनवासियों के महापुरुष बिरषा मुण्डा तथा रामपुर के जगमोहन बाबा का भी स्मरण किया गया।इन महापुरुषों की वीर गाथा को याद कर नक्सलियों से मुकाबला करने की बात कही गई।वनवासियों की सभा में अखिल भारतीय कल्याण आश्रम के अध्यक्ष जगदेवराम, रामप्रकाश पाण्डेय सत्यप्रकाश तिवार शैलेन्द्र ठाकुर  बगीचा के मुकेश शर्मा, केशव यादव, चन्द्रदेव यादव सरगुजा के संजय गुप्ताबलदेव जोशी, श्रीमती रामवती जायसवाल, रोशन प्रताप साय रम्मू शर्मा, विशु शर्मा सुरेन्द्र कुमार चेतवानी ,राजेश अग्रवाल सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

                     मधु मख्खियों का हमला में बाल बाल बचे गणेशराम
    पालिडीह का सरना में गुरूवार को दोपहर तीन बजे सरहुल पूजा कर वापस लौटते वक्त वनवासियों की रैली पर अचानक मधुमख्खियों ने हमला बोल दिया था।इस हमले में पूर्व मंत्री गणेशराम भगत बाल बाल बच गए। श्री भगत की सुरक्षा में तैनात पुलिस जवान सुधीर भगत, मनोहर राम तथा जशपुर के रामप्रकाश पाण्डेय पर मधुमख्खियों ने कई जगह हमला कर उन्हे घायल कर दिया। इन घायलों को पत्थलगांव स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ति कराया गया जंहा उपचार के बाद छुटटी दे दी गई। इस रैली में दो बच्चों सहित दर्जन भर ग्रामीणों पर भी मधुमख्खियों नेे हमला कर उन्हे घायल कर दिया था।सरहुल पूजा के आयोजक रोशन प्रताप तथा विषु शर्मा ने इन्हे भी उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ति कराया ।यहंा स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों का तत्काल उपचार शुरू किया। जिससे घायलों को राहत मिल सकी।

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

गरीब बच्चों को मिलती है वैदिक संस्कृति की शिक्षा


सलखिया का गुरुकुल आश्रम है सद्भावना की अनोखी मिसाल


 संसदीय सचिव ओमप्रकाश राठिया एवं प्रमुख समाजसेवी पोम्मी भाटिया व्दारा गरीबों को कम्बल का वितरण किया गया। 
                    
   पत्थलगांव / रमेश शर्मा
     गरीब तबका के बच्चों को जातिगत भेद भाव से दूर रखकर गुरुकुल आश्रम की प्राचीन परम्पराओं के अनुरूप वेद की शिक्षा के साथ साथ उन्हे आत्म निर्भर बनाने के लिए सराहनीय पहल की जा रही है। पत्थलगांव के समीप लैलूंगा विकास खंड के सलखिया गांव में स्थित यह विद्यालय प्रेरणा और सद्भावना की अनोखी मिशाल है।
      इस विद्यालय के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि संसदीय सचिव ओम प्रकाश राठिया उपस्थित थे। उन्हांेने  कहा कि आज भाग दौड़ की जीवन में अच्छे संस्कार देकर गरीब बच्चों वैदिक संस्कृति सिखाना बेहद कठिन काम है। श्री राठिया ने कहा कि आपस की सद्भावना को कायम रखने के लिए प्राचीन शिक्षा पद्यति को लुप्त होने से बचाना होगा। उन्होने कहा कि सलखिया गांव में इस काम को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ किया जा रहा है। श्री राठिया ने कहा कि गरीब बच्चों को शिक्षा देने के इनक कार्यो में सभी को अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। सलखिया स्थित आर्य विद्या सभा के वार्षिक उत्सव में शामिल होकर सैकड़ों गरीब लोगों को ठंड से बचने के लिए कम्बल वितरण किए। इस कार्यक्रम में आर्य विद्या सभा ने तीन दिनों तक वेद प्रवचन का आयोजन भी किया।जिसमें देश के कोने कोने से आए विदवानों ने वेदों के महत्व पर प्रकाश डाला।
   वेद प्रवक्ता डॉ. धर्मवीर ने कहा कि मौजूदा परिवेश में वेदों का अनुशरणकाफी महत्वपूर्ण हो गया है।वेद के अनुसरण से ही एकता और अखंडता की प्रेरणा मिलती है। डा.धर्मवीर ने कहा कि जाति और धर्म को अलग अलग करके व्देष और हिंसा को बढ़ा दिया गया है। इसके विपरित वेद में एक धर्म एक भाषा तथा अखंडता व शांति को महत्व दिया गया है। इसी तरह दिल्ली से प.ं दिनेश दत्त एवं देहरादून से आए सत्यपाल सरल ने भी ज्ञानवर्धक उपदेश देकर सभी का मन मोह लिया। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान सुरेश अग्रवाल ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की शुरूवात की। वार्षिक उत्सव के समापन समारोह में विद्यालय के छात्रों ने शाररिक योग तथा वेद के विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए।तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में रायगढ़ ,जशपुर,सरगुजा जिलों से आए हजारों लोगों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दी। आर्य विद्या सभा ने इस दौरान प्रति दिन 5000 से अधिक निर्धन व्यक्तियों को भोजन करा कर उन्हे जीवन में उन्नति की डगर दिखाई।


वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भोजन किया
 
  आर्य सभा के अध्यक्ष स्वामी रामानंद ने बताया  िकइस विद्यालय में पहली से बारहवीं तक की आवासीय निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बच्चों को आत्म निर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हांेने बताया कि वेद पाठशाला में ग्रामीण अचंल के 27 बच्चों का चयन किया गया है। इन बच्चों को वेैदिक संस्कृति  की शिक्षा के साथ प्रति माह पांच सौ रू.की छात्रवृत्ति भी दी जा रही है।वेदिक संस्कृति के छात्र आसन,व्यायाम,प्राणायाम करके अपनी शारीरिक उन्नति, यज्ञ, ब्रम्हयज्ञ,तथा वेद पाठ के माध्यम से आत्मिक प्रगति कर रहे हैं। स्वामी जी ने बताया कि इस ग्रामीण विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को विभिन्न ट्रेडों के तहत  कृषि,वेल्डिंग,स्क्रीन प्रिटिंग,कारपेंटरी आदि का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस संस्था में 100 गाय की एक बृहद गौशाला भी  संचालित है। इसके अलावा वृध्दों की सुव्यवस्था के लिए वृध्दाश्रम का भी संचालन किया जा रहा है। आश्रम में वृध्दों को समुचित व्यवस्था निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
      आर्य सभा के अध्यक्ष रामानंद ने बताया कि यहंा की गतिविधियों का सचंालन के लिए रायगढ़ के प्रमुख समाजसेवी पोम्मी भाटिया से भरपूर सहयोग मिल रहा है।उन्होने कहा कि यहंा प्राचीन रूढ़ियों को तोड़ कर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के बालकों को वेद संस्कृति की शिक्षा देकर उन्हे आत्म निर्भर बनाने की पहल की गई है।

      
रमेश शर्मा