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मंगलवार, 20 अगस्त 2013

मुख्यमंत्री की विकास यात्रा में तीसरी बार बदलाव

सोमवार को एसडीएम रामानंदन सिंह ने मंडी प्रागंण में नगर पंचायत
के सीएमओ नारायण सिंह को बुलाकर उन्हे गंदगी से रूबरू कराया।
 पत्थलगाँव/
   मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की विकास यात्रा के पत्थलगाँव पहुँचने का कार्यक्रम की तिथि में अब तीसरी बार बदलाव  किया गया है। नया कार्यक्रम में लुड़ेग और कांसाबेल में मुख्यमंत्री की जनसभा को रद्द कर दिया गया है। विकास यात्रा का कार्यक्रम में बार बार बदलाव होने से यहाँ शासकीय अमला की परेषानी बढ़
गई है। एसडीएम रामानंदन सिंह ने सोमवार को मंडी प्रांगण के कार्यक्रम स्थल के आसपास  गंदगी और नालियों की साफ सफाई के लिए नगर पंचायत के प्रभारी सीएमओ नारायण सिंह को मौके पर ही बुलाकर उन्हे तत्काल साफ सफाई का काम शुरू कराने के निर्देश दिए।
    भाजपा के दिग्गज नेता एवं बिलासपुर सांसद दिलीप सिंह जूदेव का निधन हो जाने के बाद यहाँ मुख्यमंत्री की विकास यात्रा पहुँचने का पूर्व निर्धारित कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था।अब नए कार्यक्रम के लिए पुनः समीक्षा बैठक ली गई है।   एसडीएम रामानंदन सिंह ने आज बताया कि मुख्यमंत्री की विकास यात्रा का नया कार्यक्रम के लिए अब 31 अगस्त की तिथि निर्धारित हुई है। इस तिथि को विकास यात्रा के साथ मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह का पत्थलगाँव आगमन तथा शाम को कृषि उपज मंडी के प्रांगण में विषाल जनसभा का कार्यक्रम तय हुआ है। उन्होने बताया कि विकासयात्रा की नई तिथि के संबंध में समीक्षा बैठक में सभी शासकीय कर्मियों को अवगत करा दिया है। श्री सिंह ने बताया कि यहाँ मुख्यमंत्री का रात्रि विश्राम का कार्यक्रम को देखते हुए सभी विभाग के अधिकारियों को पुनः तैयारियों के लिए अलग अलग जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
    श्री सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री की विकास यात्रा के पत्थलगाँव पहुँचने का कार्यक्रम में तीन बार परिवर्तन किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि शहर में जगह -जगह गंदगी और नालियों का गंदा पानी की साफ सफाई के लिए यहाँ के प्रभारी सीएमओ को कड़े निर्देष दिए गए हैं। उन्होने कहा कि मुख्यमंत्री तथा अन्य अधिकारियों का आवास के  साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की तैयारी की जा रही है। यहाँ पर लोक निर्माण विभाग के जिम्में में आवास व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पत्थलगाँव में विकास यात्रा के दौरान मुख्यमंत्री के अलावा उनके कैबिनेट के अनेक मंत्रियों का भारी जमावड़ा के अलावा यहाँ उच्च अधिकारियों की भी बड़ी संख्या में भीड़ उमडेगी। इसी बात के मददेनजर एसडीएम ने शहर के सभी होटलो को बुक कर लिया है। इन होटलों में सुरक्षा व्यवस्था के साथ अन्य इंतजाम करने की अभी से जोर शोर से तैयारियंा शुरू करा दी गई है। श्री सिंह ने बताया कि नगर पंचायत को सभा स्थल के अलावा पूरे शहर में साफ सफाई,विद्युत व्यवस्था के अच्छे इंतजाम करने को कहा गया है।
                      भोजन,ब्रेकफास्ट के लिए राजधानी के नामचीन रसोइए
    मुख्यमंत्री की विकास यात्रा की तैयारियों के लिए शासकीय अमला फिर से काम में जुट गया है। बरसात का मौसम होने के कारण जनसभा स्थल पर वाटर प्रूफ टेंट के अलावा विद्युत साज सज्जा के कड़े इंतजाम करने पड़ रहे हैं। जनसभा का स्टेज के अलावा राज्य सरकार की उपलब्धियों की जानकारी देने के लिए अलग अलग स्टेज तैयार किए गए हैं। दोनो स्टेज की साज सज्जा सामग्री बिलासपुर और रायपुर से मंगाई जा रही है। पत्थलगाँव में मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के साथ उनके कैबिनेट के कई सदस्यों का रात्रि विश्राम का कार्यक्रम के लिए सुरक्षा के चाक चैबन्द इंतजाम किए जा रहे हैं। व्ही आई पी भोजन के बाद प्रातः ब्रेकफास्ट और अन्य व्यवस्था के लिए राजधानी से नामचीन रसोइयों को बुलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम की तिथि में तीन बार बदलाव के कारण शासकीय अधिकारियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।


   


सोमवार, 10 जून 2013

बंजर भूमि पर फैली हरियाली



   पर्यावरण संरक्षण  के साथ आमदनी का जरिया
रमेश शर्मा/पत्थलगांव
      यहॉं मिर्जापुर गांव की बंजर  भूमि में एक दशक पहले अकलूराम नामक किसान द्वारा रोपे गए आम के बगीचे की हरियाली अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा का सबब बन गई है। अकलूराम को आम का बगीचा से प्रति वर्ष फलों की बिक्री से होने वाली लाखों रुपयों की आय से अन्य किसानों ने भी अपनी अनुपयोगी भूमि पर वृक्षारोपण करना शुरू कर दिया है।
   यहां समीप ग्राम मुड़ापारा के किसान द्वारा लगभग छह वर्ष पहले रोपा गया आम का बगीचा में इस वर्ष मीठे फलों की बहार छाई हुई है। निरजंन साय के साथ ही ग्राम केराकछार में बुढ़न राम, सुखरापारा में जागेश्‍वर राम, सुसडेगा में सालिगराम एवं कुम्बन साय तथा मिर्जापुर में सोहन नामक किसानों ने भी अपनी बंजर  भूमि में आम के पौधे रोप कर अब फलों का खूबसूरत बगीचा तैयार कर लिया है। इस वर्ष इन किसानों द्वारा रोपे गए आम के पौधों पर फल लग जाने से इन किसानों का उत्साह देखते ही बन रहा है।
ग्राम मुड़ापारा में आम का बगीचा
      ग्राम मुड़ापारा के किसान निरंजन साय ने बताया कि उसके पास लगभग साढ़े चार एकड़ भूमि पथरिली होने के कारण उस पर खेती का काम नहीं हो पाता था। मिर्जापुर गांव में इसी तरह की भूमि पर आम का बगीचा में हरियाली को देख कर उसने भी अपनी बंजर  भूमि पर आम का बगीचा लगाने का निर्णय लिया था। इस किसान ने बताया कि फुलेता स्थित उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया से सम्पर्क करने पर उसे सघन फलोद्यान योजना के तहत निषुल्क 250 आम के पौधे प्राप्त हो गए थे। निरजंन साय ने बताया कि बाद में उसने चैसा,लंगड़ा,अल्फांजो प्रजाति के आम के पौधे भी लाकर लगाए थे। यहॉं विभिन्न प्रजाति के फलदार पौधे रोपने के लिए तकनीकी जानकारी के साथ उद्यान विभाग से उसे खाद,दवा का भी सहयोग मिलने लगा था। दो वर्ष तक देख रेख की मेहनत के बाद उसकी बंजर  भूमि में भी हरियाली फैलने लगी थी।अब यहॉं पर आम के पेड़ों की हरियाली के साथ अनेक पेड़ो पर मीठे फलों की भी बहार दिखने लगी है। निरजंन साय का कहना था कि कुछ दिनो पहले आंधी तूफान के चलते कई पेड़ों पर लगे आम के फल टूट कर गिर गए थे। इसके बाद भी यहॉं पेड़ों पर लटके हुए आम के फल लोगों के आकर्षण का केन्द्र बन गए हैं।इस किसान का कहना है कि बीते दो वर्ष से आम की बिक्री करके उसे अच्छी खासी आमदनी होने लगी है। 

केले के बगीचे से नगद आमदनी
    बंजर  एवं खेती के लिए अनुपयोगी भूमि पर मेहनत के बाद ग्राम गाला के कुशकुमार नामक एक किसान ने केले का बगीचा तैयार किया है।कुशकुमार ने बताया कि उसने भी शासन की फलोद्यान योजना की विस्तृत जानकारी के बाद अपनी तीन एकड़ बंजर  भूमि पर केले की खेती करने का निर्णय लिया था। पहले कई किसानों ने इसे घाटे का सौदा बताकर उसे परेषान कर दिया था लेकिन बाजार में केले की अच्छी मांग को देख कर उसने हिम्मत नहीं हारी थी। उद्यान विभाग से केले के पौधे प्राप्त करने के बाद प्रारम्भ के वर्षो में उसे काफी मेहनत करनी पड़ी थी। गांव के आवारा मवेषियों से बगीचे की देख रेख करने की परेषानी से वह थोड़ा हतोत्साहित जरूर हुआ था। लेकिन केले का बगीचा के चारों ओर कंटीले पौधों का घेराव से अब स्थायी सुरक्षा बन गई है। बीते दो वर्षो से कुशकुमार अपना बगीचा से फलों की बिक्री करके प्रति वर्ष एक से डेढ़ लाख रूपयों की अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने लगा है। इस किसान का कहना था कि उसके बगीचे में लगे फलों को खरीदने के लिए घर बैठे ग्राहक पहुंचने लगे हैं। फलो के थोक विक्रेताओं को गाला स्थित केलों का बगीचा की जानकारी मिलने के बाद उससे फल के लिए फोन से ही सम्पर्क हो जाता है। इस किसान का कहना था कि केले का बगीचा से मिलने वाली नगद आमदनी के बाद वह अन्य फलदार पौधों रोपने की तैयारी करने लगा है।
              बंजर  भूमि पर किसानों ने फैलाई हरियाली
    यहॉं उद्यान अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि यहॉं के अनेक गांवों में बंजर  भूमि पर वृक्षारोपण हो जाने के बाद वहंा अब अच्छी खासी हरियाली फैल गई है। बंजर भूमि पर फलदार पौधे रोपने वाले किसानों को अतिरिक्त आमदनी के साथ पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी अच्छी पहल हुई है। उन्होने बताया कि इन किसानों से प्रेरणा लेकर अन्य किसान भी उनके पास पहुंच कर विभिन्न फलदार एवं छायादार पौधों की मांग करने लगे हैं।श्री भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव क्षेत्र में दर्जन भर से अधिक किसानों की बंजर  तथा अनुपयोगी भूमि पर इन दिनो आम व अन्य फलों के बगीचे लोगों के आकर्षण का केन्द्र बने हुए हैं।

सोमवार, 3 जून 2013

चाय उत्पादन से छत्तीसगढ़ की बनेगी अलग पहचानः उसेंडी

जशपुर में चाय की खेती

       पत्थलगांव /छत्तीसगढ़ /रमेश शर्मा /        प्रदेश के वन मंत्री विक्रम उसेंडी का कहना है कि जशपुर जिले में चाय की खेती की सफलता के बाद बस्तर जिले में भी चाय के बगान लगाने का प्रयास किया जाएगा। उन्होने कहा कि यहॉं अच्छे किस्म की चाय तैयार कर छत्तीसगढ़ की विश्‍व स्तर पर अलग पहचान कायम करने का प्रयास किया जाएगा। श्री उसेंडी जशपुर अंचल में  चाय बगान का अवलोकन के बाद यूनीवार्ता सवांददाता रमेश शर्मा  से चर्चा कर रहे थे।
     उन्होंने कहा कि जशपुर जिले में चाय उत्पादन की विपुल सम्भावनाओं को देखते हुए यहॉं चाय की प्रोसेस मषीन स्थापित कर अच्छे किस्म की चाय तैयार की जाएगी।श्री उसेंडी ने बताया कि जशपुर जिले में मनरेगा योजना के तहत वन विभाग ने बीते वर्ष 22 हजार चाय के पौधे तैयार किए थे। इस वर्ष यहॉं दाजीलिंग से उत्कृष्ट किस्म के बीज मंगा कर 70 हजार चाय के पौधे तैयार किए जा रहे हैं।उन्हांेने बताया कि यहॉं दार्जीलिंग से मंगाऐ गए चाय के पौधों की तुलना में स्थानीय स्तर पर तैयार किए गए चैधों की ग्रोथ अधिक है।श्री उसेंडी ने बताया कि वन विभाग व्दारा यहॉं तैयार चाय बगान से आगामी सिंतबर माह में चाय की पहली फसल मिलनी शुरू हो जाएगी।उन्होने कहा कि जशपुर जिले में मनरेगा के तहत चाय की खेती करने का अनूठा प्रयास था।यह प्रयास पूरी तरह सफल रहा है।बस्तर जिले की जलवायु जशपुर से मिलती जुलती होने के कारण वहंा के कुछ क्षेत्रों में भी चाय के बगान तैयार किए जाऐंगे।श्री उसेंडी ने कहा कि बस्तर के साथ छत्तीसगढ़ में चाय उत्पादन के अन्य क्षेत्रों पर भी गम्भीरता से विचार किया जा रहा है।यहॉं चाय के बगान लगा कर किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी।
      जशपुर वन मंडल अधिकारी चन्द्रषेखर तिवारी ने बताया कि यहंा 27 एकड़ भूमि में 18 किसानों ने चाय की खेती शुरू की है।इन किसानों को चाय की खेती के लिए असम भेज कर प्रषिक्षण दिलाया गया था।इन किसानों व्दारा चाय की खेती में अच्छी सफलता के बाद इस वर्ष यहॉं चाय का रकबा बढ़ा कर दो गुना करने की तैयारी की गई है।
  श्री तिवारी ने बताया कि यहॉं किसानों की समिति बना कर उन्हे चाय उत्पादन के लिए समुचित सहयोग दिया जा रहा है।इस बात से यहॉं के अन्य किसान भी चाय की फसल को लेकर उत्साहित हैं। श्री तिवारी ने बताया जशपुर जिले के चाय बगानों से 20 हजार किलो चाय की हरी पत्ती टूटने की संभावना है।जिसमें 300 किलो दानेदार चाय तथा 100 किलो ग्रीन टी तैयार होगी।उन्होने बताया कि प्रारम्भ में स्थानीय किसानों की उपज को पश्चिम बंगाल तथा अमृतसर में मार्केट दिलाने के लिए वन विभाग व्दारा मदद की जाएगी।



शनिवार, 17 नवंबर 2012

रंग लाई अखबारनवीश की खबर


        संवरने लगा अव्यवस्थित मुक्तिधाम


पत्थलगांव/
        जशपुर जिले के पत्थलगांव में मुक्तिधाम का जीर्णोध्दार करने के लिए रोटरी क्लब के सदस्यों ने सार्थक पहल के बाद अच्छे परिणाम दिखने लगे हैं। रोटरी क्लब के सदस्यों व्दारा  मुक्तिधाम परिसर में छायादार एवं फूलों के पौधे रोप कर  पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में भी सराहनीय पहल की जा रही है।
            पत्थलगांव  मुक्तिधाम की अव्यवस्था को सुधारने के लिए मुख्य व्दार लगा कर चारों तरफ की बाउन्ड्री को ठीक कराया गया है।मुक्तिधाम परिसर में चारो तरफ कचरे का ढ़ेर को हटा कर अच्छी व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा मुक्तिधाम का प्रवेश व्दार पर भी लोहे का आकर्षक गेट लगा कर सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम किए गए हैं।
    पिछले दिनो स्थानीय अखबार नवीश ने मुक्तिधाम में व्याप्त अव्यवस्था की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इस खबर के बाद रोटरी क्लब के अध्यक्ष महेन्द्र अग्रवाल तथा सक्रिय सदस्य माधव शर्मा,हरगोविन्द अग्रवाल ने मुक्तिधाम के जीर्णोध्दार का बीड़ा उठाया था।रोटरी क्लब के सदस्यों ने क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डा.अशोक कुमार सिंह के पत्थलगांव प्रवास के दौरान मुक्तिधाम के जीर्णोध्दार का प्रस्ताव रखा थ। इस कार्य को समाज सेवा का बेहतर काम बताते हुए डा.सिंह ने तत्काल 25 हजार रू.की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी।रोटरी क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का प्रोत्साहन के बाद  के पार्षद रामअवतार अग्रवाल ने भी इस कार्य के लिए 50 हजार रू.का योगदान दिया था।पत्थलगांव मुक्तिधाम को व्यवस्थित करने के काम में शहर के कई दान दाताओं ने आर्थिक सहायता देकर रोटरी क्लब के सदस्यों की इस पहल के लिए सराहना की जा रही है।
              मुक्तिधाम में पर्यावरण संरक्षण की योजना
   यहां का मुक्तिधाम की रखवाली पर ध्यान नहीं देने के फलस्वरूप ही  के सामान पर चोरों की नजर पड़ गई थी। अज्ञात चोरो ने मुक्तिधाम का अंतिम संस्कार स्थल पर लगाए गए लोहे के मजबूत खम्भों को काट कर गायब कर दिया था। इन सामग्री को पुनः स्थापित कर  ज्यादातर अव्यवस्थाओं को दूर कर लिया गया है।  रोटरी क्लब के अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने बताया कि लोगों का अंतिम पड़ाव का महत्वपूर्ण स्थान को बेहतर बनाने के लिए सभी का सहयोग और मशविरा लिया जा रहा है। जीर्णोध्दार के काम में पर्यावरण सरक्षंण को भी प्राथमिकता दी गई है। मुक्तिधाम के चारों ओर छायादार एवं फूल के पौधे रोप कर इनकी रखवाली की भी व्यवस्था की जाऐगी। उन्होने कहा कि गरीब तबका के लोगों को अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने में परेशानियों को दूर करने में भी रोटरी क्लब के सदस्य सहयोग देंगे।  मुक्तिधाम परिसर में ही अंतिम संस्कार की सामग्री उपलब्ध कराने के साथ अन्य जरूरी सुविधाओं का भी विस्तार करने की योजना है।मुक्तिधाम का जीर्णोध्दार के कार्य में रोटरी के पदाधिकारी रमेश अग्रवाल, अशोक आदिवासी, प्रवीण गर्ग, पप्पू शर्मा, श्रीमती आरती,आशिष अग्रवाल, विकास अग्रवाल,शेखर त्रिपाठी, बलदेव नायक, डा.बीएल भगत तथा मनोज अम्बस्थ का सराहनीय योगदान रहा है।

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

कांग्रेस का विरोध पर भाजपा का विकास भारी; विष्णुसाय



              फिर आजमा सकते हैं विधानसभा में भाग्य
पत्थलगांव / 
     सांसद विष्णुदेव साय का कहना है कि यदि उनकी पार्टी का निर्देष मिलेगा तो वे पुनः विधानसभा का चुनाव लड़ने को तैयार हैं।श्री साय ने कहा कि भाजपा के विकास कार्यो से कांग्रेस के नेता बुरी तरह से बौखला गए हैं।चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच में पैठ बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने विरोध का रास्ता अपनाया है।पर जनता की जागरूकता के कारण कांग्रेस के विरोध से भाजपा को चुनाव में रंच मात्र भी अंतर नहीं पड़ेगा।श्री साय ने कहा कि मिषन 2013 का अभियान के  लिए भाजपा ने भी अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। 
    भाजपा सांसद विष्णुदेव साय ने पत्थलगांव में कहा कि मिषन 2013 के लिए भाजपा ने विकास को अपना प्रमुख हथियार बनाया है।उन्होने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता विरोध करने में बेषक आगे निकल सकते हैं,पर विकास की दौड़ में भाजपा की बराबरी करने में उन्हे काफी वक्त लगेगा।श्री साय ने कहा कि प्रदेष में कांग्रेस सरकार के मुकाबले में भाजपा के विकास कार्य बोलने से नहीं अपितु देखने से महसूस हो रहे है।श्री साय ने कहा कि 108 संजीवनी सेवा आज गांव के जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस दिषा में भाजपा सरकार आगे भी काम करती रहेगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वास्थ्य बीमा तथा स्मार्ट कार्ड बना कर प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मुहैया कराया जाएगा।श्री साय ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकत्र्ता निचले स्तर तक विकास कार्यो के बारे में मतदाताओं को अवगत करा रहे हैं। उन्होने कहा कि भाजपा सरकार के कामकाज से प्रदेष में महिलाऐं काफी सन्तुष्ट हैं।इस वर्ग के लिए मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की सरकार ने काफी अच्छा काम किया है। श्री साय ने कहा कि कांग्रेस ने सुराज अभियान को विफल करने का पूरा प्रयास किया था पर ग्रामीण जनता ने कांग्रेस नेताओं को नकारते हुए विकास को महत्व दिया है। इन सब बातों को देखते हुए कांग्रेस का विरोध उनकी पार्टी के बीच में ही सीमट कर रह जाएगा।
   उन्होने कहा कि बिजली के मामले में पूरे देष में छत्तीसगढ़ की स्थिति बेहतर है।भाजपा सरकार गांवों के बाद पारे टोलों में बिजली पहुंचा कर किसानों को आत्म निर्भर बनाने की दिषा में तेजी से काम कर रही है।किसानों की बेहतरी के लिए अलग से बजट बना कर हर पहलू पर काम किया जा रहा है।श्री साय ने कहा कि जनता की जागरूकता के कारण कांग्रेस के विरोध से चुनाव में उनकी पार्टी को रचं मात्र भी अंतर नहीं पड़ेगा।उन्होने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा अच्छे लोगों को चुनाव में उतारेगी। 
                   पत्थलगांव विधानसभा में होगा भाजपा का कब्जा
   श्री साय ने दावा किया कि इस बार कांग्रेस के कब्जे वाली पत्थलगांव विधानसभा में भी भाजपा की जीत सुनिष्चित है।उन्होने कहा कि लम्बे समय से यहंा पर कांग्रेस का कब्जा होने से विकास की अनेक योजनाओं से स्थानीय लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है।श्री साय ने कहा कि राजनीति में केवल अच्छी छवि होना पर्याप्त नहीं है बल्कि जनता की भलाई के लिए सक्रिय होकर काम करना भी बेहद जरूरी है।उन्होने कहा कि कटनी गुमला सड़क का चैड़ीकरण और डामरीकरण के लिए केन्द्र सरकार से पर्याप्त आबंटन लाने के बाद भी कांग्रेस विधायक इस काम को नहीं करा पा रहे हैं।पत्थलगांव विधानसभा में सक्रिय और जूझारू जनप्रतिनिधि के अभाव में इस तरह की अनेक योजनाओं के लाभ से पत्थलगांव के लोग कई वर्षो से वंचित हैं।श्री साय ने कहा कि जषपुर जिले में भाजपा के लोग अति उत्साह का प्रदर्षन नहीं करते हैं पर पर चुनाव के दौरान सभी एक जुट होकर अच्छे परिणाम दिखा देते हैं।    

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

सलखिया की गौशाला से किसानों को मिल रही मदद

फोटो/ पश्चिम बंगाल के बुचड़खानों को भेजी गई गायों का सलखिया में पालन पोषण
गौवध रोकने की दिशा में सार्थक पहल
पत्थलगांव/ 
     गौवध रोकने की दिशा में यंहा पर सलखिया स्थित गुरूकुल वैदिक आश्रम ने एक मिशाल कायम की है। इस आश्रम में पश्चिम बंगाल के बुचड़खानों में गौवध के लिए भेजी गई 200 से अधिक गायों को वापस लाकर उनका पालन पोषण किया जा रहा है।सलखिया की बृहद गौशाला के मवेशियों के माध्यम से अचंल के किसानों को भी उनके खेती किसानी के कामकाज में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। यहंा के अध्यक्ष स्वामी रामानंद का कहना है कि गौवध रोकने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
  पत्थलगांव के समीप सलखिया गांव में अचंल के वनवासियों को वैदिक शिक्षा और वृध्दाश्रम के माध्यम से बुजुर्गो की बेहतर देखरेख के साथ उन्हे सम्मानजनक आशियाना उपलब्ध कराया गया है।गुरूकुल वैदिक आश्रम का सचंालन करने वाली इस समाजसेवी संस्था ने गरीब तबका के लिए परोपकार के काम करके अलग पहचान कायम की है। इस संस्था के अध्यक्ष स्वामी रामानंद सरस्वती ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से गौवध के लिए भेजी गई 200 से अधिक गायों को सलखिया आश्रम में रख कर उनकी सेवा की जा रही है। सलखिया की इस गौशाला में एकत्रित दूध दही को आश्रम में रह कर विद्याध्यन करने वाले गरीब तबका के बच्चों को वितरण कर उन्हे तन्दरूस्त बनाने में मदद दी जा रही है। स्वामी ने बताया कि गौवध के कृत्य को रोकने के लिए केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस काम में सभी को गाय पालन के काम हेतु प्रेरित करने की जरूरत है।उन्होने बताया कि आदिवासी अचंल में किसानों को अपनी खेती के काम हेतु महंगे बैल खरीदने पड़ते हैं। यदि गाय पालन के काम को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की इस समस्या से राहत दी जा सकती है। स्वामी रामानंद ने कहा कि गाय पालन से जैविक खाद तथा बिजली का भी लाभ लिया जा सकता है।
   उन्होने बताया कि इस अचंल के प्रमुख समाजसेवी इन्द्रपाल सिंह भटिया का सहयोग मिल जाने के बाद सलखिया गुरूकुल वैदिक आश्रम में गरीब तबका के सैकड़ो बच्चांे को भी शिक्षा के माध्यम से आत्म निर्भर बनाने की पहल की गई है।यहंा वृध्दाश्रम और बृहद गौशाला के माध्यम से आसपास के ग्रामवासियों को सहयोग देने का प्रयास किया गया है। पत्थलगांव के समीप सलखिया आश्रम में गरीब तबका के बच्चों को विभिन्न ट्रेडो के तहत कृषि,वेल्डिंग,स्क्रीन प्रिंटिग,कारपेंटरी के काम का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इस आश्रम के 100 बच्चों को इन दिनों बैदिक संस्कृति के साथ आसन, व्यायाम, प्राणायाम विद्या में भी पारंगत किया जा रहा है।स्वामी रामानंद का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही वैदिक शिक्षा के साथ शाररिक उन्नति पर ध्यान देने से ये बच्चे आगे चल कर स्वस्थ्य जीवन व्यतित कर सकते हैं।उन्होने बताया कि इस आश्रम में प्राचीन रूढ़ियों को तोड़ कर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के बालकों को बैदिक शिक्षा का पूरा ज्ञान देकर उन्हे आत्म निर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

ग्रामीण महिला को लगातार तीसरी बार सरपंच की जिम्मेदारी


महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई किसानों के साथ
नशामुक्त ग्राम पचायत बनाने की पहल,

गुड़ाखू नशा पर भी लगाना होगा प्रतिबंध

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में गांव के विकास कार्यो को गति देने के साथ साथ किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक पहल करने वाली महिला सरपंच को चिकनीपानी के ग्रामीणों ने लगातार तीसरी बार सरपंच की कुर्सी सौंपी है।
     पत्थलगांव विकासखंड अन्तर्गत चिकनीपानी की महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई का कहना है कि उसके गांव में महिलाओं व्दारा शुरू किया गया नशा बन्दी र्का अिभयान में पुलिस प्रशासन का भी सहयोग मिलना चाहिए। इसके बाद वे अपनी ग्राम पचंायत को नशामुक्त बनाने में कामयाब हो सकती हैं।जानकी बाई ने गांव की महिलाओं को जागरूक बनाकर उन्हे शराब विरोधी आन्दोलन के लिए प्रेरित किया है। इस गांव की महिलाऐं शराब बनाने वालों के साथ शराबियों को भी आड़े हाथ लेने में पीछे नहीं रहती हैं।महिला सरपंच जानकीबाई का कहना है कि मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह को गुड़ाखू नशा पर भी कड़ाई से रोक लगाने की पहल करनी चाहिए।
 पिछले एक दशक से भी लम्बे समय से ग्राम पचंायत चिकनीपानी में सरपंच पद का दायित्व सम्हालने वाली महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई को बीते वर्ष निर्मल ग्राम बनाने पर उन्हे देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल के व्दारा सम्मानित किया जा चुका है। जानकी बाई का कहना ह ैकि उनके गांव का किसान खुशहाल रहेगा तभी उसे सन्तुष्टि मिल पाती है। इस महिला ने किसानों के खेतों में समतलीकरण का काम पर विशेष जोर दिया है। चिकनीपानी गांव में ज्यादातर किसानों के पास बजंर और पथरीली भूमि होने के कारण यहंा के किसानों को मजदूरी करने के लिए बाहर पलायन करना पड़ता था। महिला सरपंच जानकी बाई ने यहंा पर भूमि समजली करण का काम से सैकड़ों किसानों को लाभान्वित किया है।

       शासन की भूमि समतलीकरण योजना का लाभ मिलने के बाद अब चिकनीपानी क्षेत्र के किसान अपने ही खेतों में टमाटर, धान, साग सब्जी जैसी नगद फसल लेने में ब्यस्त रहते हैं।यहंा के किसानों व्दारा टमाटर की दोहरी फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना लिया है।इन दिनो चिकनीपानी में बलबीर, राजेश और हाकिम की बजंर भूमि में समतलीकरण का काम कराया जा रहा है। इन किसानों ने बताया कि उन्हे अपने खेत बनाने के लिए सरपंच कार्यालय में नहीं जाना पड़ा। बल्कि सरपंच स्वंय उनके मुहल्ले में पहुंच कर उन्हे स्वयं समतलीकरण का लाभ के बारे में समझाईश देने आई थी। ग्राम पचंायत चिकनीपानी में किसानों के खेतों में सिंचाई साधन की कमी को देखते हुए यहंा पर भरारी बांध की नहरों को पक्का कराया गया है। इन नहरों का पानी किसानों के खेतों तक पहुंच जाने से यहंा के किसान अब साग सब्जी जैसी नगद फसल का लाभ लेने लगे हैं। गांव में इन दिनों आधा दर्जन किसानों ने अपने खेत में डबरी बनाने का भी काम शुरू किया है। महिला सरपंच जानकी बाई ने जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बिश्वनाथ नायक से सम्पर्क कर इन किसानों को शासकीय मदद दिलाई है।

  यहंा कि महिला पचं परमीला, गुरबारी,सुशीला, अलमा तथा जेरोनिका का कहना था कि उनकी ग्राम पचंायत में  महिला सरपंच होने से उन्हे अपने वार्ड में विकास कार्य कराने के लिए ज्यादा भाग दौड़ नहीं करनी पड़ती है। इन पंचों ने बताया कि वे सरपंच के साथ प्रत्येक पखवाड़े अलग अलग मुहल्ल्लों का भ्रमण कर ग्रामीणों से उनकी समस्याओं का ब्यौरा एकत्रित करते हैं। इन कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर पचंायत में प्रस्ताव पारित कर उसे पूरा करते हैं। इन दिनों यहंा पर  कर्राढाड़ से भरारी चैक तक सड़क में मुरूमीकरण का काम पूरा कराया गया है।गांव के लोगों का कहना है कि हमारी महिला सरपंच उनकी मुलभूत सुविधाओं का पूरा ध्यान रखती हैं इसलिए वे बार बार उन्हे काम करने का अवसर दे रहे हैं।
रमेश शर्मा     

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

जैविक खाद से खेतों में छाई हरियाली

घर पर ही जैविक खाद तैयार कर रहा किसान

किसान कर रहे हैं साग सब्जी के साथ फूलों की खेती

रमेश शर्मा
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
जशपुर जिले के पत्थलगांव विकास खंड अन्तर्गत 18 गांव के किसानों ने रासायनिक खाद को छोड़कर जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। किसानों के घर में ही उपलब्ध गोबर तथा कूड़ा करकट से बनने वाली जैविक खाद का उपयोग करने से खेतों की हरियाली बढ़ गई है। इन किसानों का कहना है कि प्रारम्भिक तौर पर जैविक खाद का उपयोग करने के अच्छे नतिजे सामने आए हैं।
      लुड़ेग के किसान सुभाष प्रधान ने बताया कि यहंा के अन्य किसानों व्दारा अपने खेतों में रासायनिक खाद के बदले जैविक खाद का इस्तेमाल करते हुए देख कर  उसने भी अपने खेतों में इस बार जैविक खाद को अपनाया है। सुभाष प्रधान ने अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में जैविक खाद के सहारे साग सब्जी की खेती शुरू की है। इस किसान का कहना था कि गोभी मिर्ची और भिंडी के पौधे लगाने के बाद एक महिने में ही उसके खेतों में हरियाली छा गई थी। अब वह पहली बार इस फसल से नगद लाभ लेने लगा है। इस किसान का कहना था कि एक एकड़ में लगभग 50 किलो रासायनिक खाद के बदले उसे महज तीन किलो जैविक खाद का उपयोग करना पड़ रहा है। सुभाष प्रधान का कहना था कि इन दिनो खेती के काम में मजदूरों की समस्या को देखते हुए जैविक खाद ने उसकी कई मुश्किलों को दूर कर दिया है।
  लुड़ेग में रूद्रधर खुंटिया, केडी खंुटिया, प्रफुल्ल पटेल तथा सुरेश अग्रवाल ने भी अपने खेतों में रासायनिक खेती के बदले जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। इन किसानों ने भी जैविक खाद को अधिक उपयोगी बताया है। सुरेश अग्रवाल का कहना था कि इन दिनों किसान के पास में सबसे बड़ी मजदूर की समस्या रहती है। उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग करने पर उन्हे युरिया, डीएपी तथा पोटाश खाद खेतों में डालने के लिए बार बार मजदूरों की तलाश करनी पड़ती थी। जैविक खाद की अपेक्षा रासायनिक खाद काफी महंगी होने के कारण इस पर मजदूरी खर्च भी अधिक रहता था। इसके विपरित जैविक खाद का उपयोग करने पर मजदूरी का खर्च भी नाममात्र रह गया है। यहंा के किसानों का कहना कि यदि अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार की जाए तो खेती किसानी का खर्च पहले के मुकाबले में आधा से भी कम पड़ रहा है।
           कूड़ा करकट से बनने लगी खाद
  पत्थलगांव में उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव विकास खंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए यहंा पर 18 गांव के 66 किसानों को निशुल्क जैविक खाद उपलब्ध कराई गई है। इन किसानों को अपने घर की बाड़ी में जैविक खाद बनाने के लिए आधुनिक टेंक का भी वितरण किया गया है। किसान अपने घर पर ही गोबर तथा कुड़ा करकट के साथ पत्तियों को खाद के टेंक में डाल कर खाद तैयार कर रहे हैं। मिर्जापुर के अकलू राम ने बताया कि उसने अपनी बाड़ी में ही जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया है। अकलू राम का कहना था कि खाद बनाने के टेंक में गोबर तथा कुड़ा करकट डाल कर तीन माह में लगभग साढ़े चार क्विंटल अच्छी खाद तैयार कर ले रहा है। कई किसानों के पास अधिक भूमि होने पर उनके व्दारा खाद तैयार करने के दो से ज्यादा टेंक बना रखें हैं।  उद्यान विभाग की पहल के बाद यहंा पर केराकछार, ईला, तमता, बटूराबहार, मिर्जापुर, पत्थलगांव, मक्कापुर, पालीडिह, पाकरगांव गांव में किसान अपने घर पर ही केंचवा जैविक खाद बनाने लगे हैं।
            पाकरगांव में फूलों की खेती
   इस अचंल के किसानों का कहना था कि रासायनिक खाद के मुकाबले में जैविक खाद की फसल का उपयोग करना काफी लाभप्रद साबित हो रहा है। पाकरगांव में गणेश बेहरा ने अपनी बाड़ी में  साग सब्जी की फसल के साथ फुलों की खेती का काम भी शुरू किया है। उन्होने कहा कि इसमें जैविक खाद का प्रयोग करने से काफी अच्छा उत्पादन आया है। स्थानीय बाजार में फुलों की हर समय मांग बनी रहने से इस किसान के पास घर बैठे फुलों के ग्राहक मिलने लगे हैं।
रमेश शर्मा