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गुरुवार, 10 मई 2012

परंपरागत सरहुल त्योहार से पर्यावरण का संदेश


पत्थलगॉंव /                     रमेश शर्मा
       वनवासियों के प्रत्येक तीज त्यौहारों में प्रेरणादायक संदेश के साथ आपसी भाईचारे की भावना को मजबूती मिलती है। इन्ही में से एक वनवासियों का वर्षो पुराना सरहुल पर्व भी है, जिसमें  गांव गांव से लोग इकट्ठा होकर पेड़ और धरती की पूजा करके पर्यावरण संरक्षण के काम में अनोखी मिसाल कायम कर रहे हैं।

     उक्त बातें पूर्व मंत्री गणेशराम भगत ने 
गुरुवार को पत्थलगांव में आयोजित सरहुल पर्व के दौरान वनवासियों की एक विषाल जनसभा में कही । 10 मई 2012 को भीषण गर्मी के बाद भी पत्थलगांव में आयोजित सरहुल पर्व में शामिल होने के लिए दूर दराज के गांवों से काफी बड़ी संख्या में आदिवासी इकट्ठा हुए थे। इन ग्रामीणों ने पालीडीह के आम बगीचा में घंटो तक लोक नृत्य तथा गीत गाकर एक दूसरे को सरहुल त्योहार की बधाई दी।ग्रामीण अपनी प्राचीन परम्परा के अनुसार साल वृक्ष के फूल भेंट कर इस त्योहार की बधाई दे रहे थे।पालिडीह का आम बगीचा में एकत्रित वनवासियों ने दोपहर 1 बजे गणेशराम भगत की अगुवाई में एक विषाल रैली भी निकाली। लगभग दो कि.मी.लम्बी इस रैली में शामिल वनवासियों ने यहंा तहसील कार्यालय के समीप प्राचीन सरना में जाकर पूजा अर्चना की। बाद में यह रैली बेहद अनुशासित ढंग से पालिडीह का प्राचीन सरना स्थल पर पहुंची। वनवासियों के इस पूजा स्थल में आसपास के गांवों से आए 31 बैगाओं के व्दारा आदिवासियों की संस्कृति से पेड़ों की पूजा कराई गई। सरहुल की रैली में ज्यादातर ग्रामीण अपने हाथों में झंडे लिए हुए थे। इसमें आदिवासियों के नगाड़ों की गूंज तथा नृत्य का दृष्य काफी मनोहारी लग रहा था।सरहुल की रैली में नगाड़ों की गुंज दूर दूर तक सुनाई पड़ रही थी।
     पालिडीह सरना से रैली वापस लौटने पर आम बगीचा में जनसभा का आयोजन किया गया। इसमें अनेक वनवासी नेताओं ने भी अपने विचार व्यक्त किए।इस सभा में गणेशराम भगत ने कहा कि  हमारे बुजुर्गो के अच्छे अनुभव को नई पीढ़ी के बीच में बांटने के लिए ही वनवासियों के तीज त्यौहारों का आयोजन होता है।वनवासियों की प्राचीन संस्कृति में आपसी भाईचारा को जीवित रखने का पाठ पढ़ाया गया है।श्री भगत ने कहा कि सरहुल त्योहार में पेड़ पौधों को काटने के बजाए उनकी पूजा करने की बात कही गई है।उन्होने कहा कि ग्रामीण एवं किसानों के लिए हरियाली का सदैव महत्व रहा है। इस त्यौहार के माध्यम से वनवासी बगैर शासकीय मदद के  वनों की रक्षा करने का सन्देश को दूर दूर तक पहुंचाते हैं। इसी वजह वनवासियों का सरहुल त्योहार अन्य लोगों के लिए भी प्रेरणा की मिसाल बन गया है। उन्होने कहा कि वनवासियों व्दारा सरहुल का त्यौहार को वर्षो से मनाया जा रहा है।आदिवासियों के इन प्राचीन त्यौहारों की बदौलत दूर दराज के ग्रामीणों में भी भाईचारा कायम है। कुछ लोगों व्दारा आदिवासियों के बीच में धर्मान्तरण की दीवार खड़ी करके उन्हे कमजोर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।पर वनवासी समाज में जागरूकता आने के बाद वे लोग सजग हो गए हैं।प्रलोभन देकर धर्मान्तरण करने वालों को इन आदिवासियों ने बाहर का रास्ता दिखला दिया है।
सरहुल रैली में गणेशराम भगत भीषण
 गर्मी में ग्रामीणों की विशाल रैली
  
वनवासियों की एकजुटता से नक्सलियों ने रास्ता बदला
     श्री भगत ने कहा कि वनवासियों में आपसी भाईचारा और एकजुटता के कारण वे बड़ी से बड़ी समस्या का आसानी से हल ढूंढ़ लेते हैं।उन्होने कहा कि वनवासियों की एकजुटता के चलते नक्सलियों को भी वापस भागने के लिए मजबूर होना पड़ता है।श्री भगत ने कहा कि जशपुर जिले से लगा हुआ सरगुजा जिले का केरजू गांव के आसपास नक्सलियों ने डेरा डाल दिया था। यहंा के वनवासियों ने इपनी एकजुटता का परिचय देकर इन नक्सलियों को रास्ता बदलने के लिए मजबूर कर दिया।इसी तरह जशपुर जिले में भी राज्य की सीमा से लगे सरहदी गांवों में आदिवासियों की एकता के कारण नक्सलियों को अपना रास्ता बदलना पड़ गया है।यहंा वनवासियों के महापुरुष बिरषा मुण्डा तथा रामपुर के जगमोहन बाबा का भी स्मरण किया गया।इन महापुरुषों की वीर गाथा को याद कर नक्सलियों से मुकाबला करने की बात कही गई।वनवासियों की सभा में अखिल भारतीय कल्याण आश्रम के अध्यक्ष जगदेवराम, रामप्रकाश पाण्डेय सत्यप्रकाश तिवार शैलेन्द्र ठाकुर  बगीचा के मुकेश शर्मा, केशव यादव, चन्द्रदेव यादव सरगुजा के संजय गुप्ताबलदेव जोशी, श्रीमती रामवती जायसवाल, रोशन प्रताप साय रम्मू शर्मा, विशु शर्मा सुरेन्द्र कुमार चेतवानी ,राजेश अग्रवाल सहित अनेक लोग उपस्थित थे।

                     मधु मख्खियों का हमला में बाल बाल बचे गणेशराम
    पालिडीह का सरना में गुरूवार को दोपहर तीन बजे सरहुल पूजा कर वापस लौटते वक्त वनवासियों की रैली पर अचानक मधुमख्खियों ने हमला बोल दिया था।इस हमले में पूर्व मंत्री गणेशराम भगत बाल बाल बच गए। श्री भगत की सुरक्षा में तैनात पुलिस जवान सुधीर भगत, मनोहर राम तथा जशपुर के रामप्रकाश पाण्डेय पर मधुमख्खियों ने कई जगह हमला कर उन्हे घायल कर दिया। इन घायलों को पत्थलगांव स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ति कराया गया जंहा उपचार के बाद छुटटी दे दी गई। इस रैली में दो बच्चों सहित दर्जन भर ग्रामीणों पर भी मधुमख्खियों नेे हमला कर उन्हे घायल कर दिया था।सरहुल पूजा के आयोजक रोशन प्रताप तथा विषु शर्मा ने इन्हे भी उपचार के लिए सिविल अस्पताल में भर्ति कराया ।यहंा स्वास्थ्य कर्मियों ने घायलों का तत्काल उपचार शुरू किया। जिससे घायलों को राहत मिल सकी।

सोमवार, 7 मई 2012

मिलावटी चीजें बाजार में, स्‍वास्‍थ्‍य विभाग गहरी नींद में



        कैमिकल से बनता है सरसों तेल व शुध्द घी
       
पत्थलगांव/                    रमेश शर्मा 

मिलावटी दूघ विक्रेता
  मिलावट खोरो पर स्वास्थ्य विभाग का श‍िकंजा नहीं कस पाने से यहॉं ज्यादातर खादय सामग्री में जमकर मिलावट का खेल हो रहा है।प्रति दिन उपयोग में आने वाली इन खादय सामग्री के भाव देखने के बाद  इसमें मिलावट की बात सहज ढंग से उजागर हो जा रही है। इसके बाद भी उपभोक्ताओं के हितों का सरंक्षण के लिए कोई कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।
     इन दिनों बाजार में चना दाल का भाव 50 रू. प्रति किलों की दर पर बिक रही है।पर इसी चना दाल का शुध्द बेसन महज 40 रू. प्रति किलो में आसानी से मिल जा रहा है।किराना की दुकानों में इसी तरह आटा, खादय तेल तथा  शुध्द बेसन जैसी खादय सामग्री के मुंहमांगे दाम देने के बाद भी उपभोक्ताओं को धीमा जहर खरीदना पड़ रहा है।यहॉं पर अमृत भोग बेसन का पैकेट चना दाल से भी कम दाम पर मिल रहा है। शुध्द बेसन के इस पैकेट पर वनज 500 ग्राम तथा इसकी किमत 20 रू. दर्शाई गई है। सबसे दिलचस्प बात यह है कि बेसन के पैकेट पर इसके निर्माता का कहीं भी नाम पता नहीं दिया गया है। खादय सामग्री के इन्ही पैकेटों से होटलों में आलू चाप, सेव ,भजिया बना कर ग्राहकों के सामने परोसा जा रहा है। होटल मालिकों का कहना है कि बाजार में मिलावटी सामग्री बेचने वालों पर स्वास्थ्य विभाग की पकड़ नहीं होने से उन्हे इस तरह के मिलावटी खादय सामग्री से काम चलाना पड़ रहा है।
शुध्द बेसन का पैकेट

    इसी तरह दूध, पनीर तथा अन्य खादय सामग्री में भी जमकर मिलावट हो रही है। दूध में कई घातक तत्व की मिलावट के साथ इसकी बिक्री होने से छोटे बच्चों को इसका अधिक खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। शहर में इन दिनो उपभोक्ताओं व्दारा दूध विक्रेताओं को उनकी मुंहमांगी किमत देने के बाद भी शुध्द दूध नहीं मिल पा रहा है। बताया जाता है कि बाजार में दूध की किमत 30 रू.से लेकर 40 रू. प्रति लीटर होने के बाद भी उपभोक्ताओं को मिलावटी दूध से काम चलाना पड़ रहा है।यहंा के उपभोक्ता महेन्द्र सोनी ने बताया कि बाजार में पैकेट बन्द खादय सामग्री में जमकर मिलावट होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग व्दारा इस ओर कड़ी कार्रवाई नहीं की जा रही है। उन्होने कहा कि इन दिनों चाय, मसाला, खादय तेल ,शुध्द घी के नाम पर उपभोक्ताओं को धीमा जहर परोसा जा रहा है।यहॉं पर उड़ीसा से घटिया तेल के ड्रम लाकर उसमें कैमिकल डाल कर उसे देखते ही देखते सरसों तेल का रूप दे दिया जाता है।इस मिलावटी सरसों तेल को एक किलो तथा अन्य पैक डिब्बों में भर कर दुकानदार धड़ल्ले से बिक्री कर रहे हैं। इन सामग्री के डब्बों पर इसके निर्माता का नाम पता नहीं होने के कारण इसके निर्माता पर स्वास्थ्य विभाग का षिकंजा नहीं कस पाता है।  महेन्द्र सोनी ने कहा कि  इन दिनों बाजार में घटिया खादय सामग्री के विरूध्द में कड़ाई पूर्वक अभियान चलाने की जरूरत है। 
                          क्या कहता है स्वास्थ्य विभाग 
      मिलावटी खादय सामग्री बेचने वालों पर शिकंजा कसने के लिए जिले में 36 दुकानदारों से विभिन्न खादय सामग्री के सेम्पल भरे गए थे। इनमें 11 सेम्पल मानक स्तर से कम पाए जाने पर उन्हे नोटिष दिया गया है। दूध विक्रेताओं व्दारा भी मिलावट करने की कई जगह से षिकायतें मिली हैं। उनके विरूध्द जल्द ही अभियान चला कर कार्रवाई की जाएगी।
                   भारत भूषण बोर्डे, जिला स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी 


मंगलवार, 1 मई 2012

शहीद जवान का परिवार उपेक्षा का शिकार

शहीद की विधवा श्रीमती सीमा
 कुजूर अपने दो बच्‍चों के साथ 

 सुकमा कलेक्टर अपहरण कांड 
  पत्थलगांव/ जशपुर रमेश शर्मा        
       सुकमा कलेक्टर अलेक्स पॉल मेनन को अगवा करने से पहले नक्सलियों की गोलियों से शहीद हाने वाला जवान किशुन कुजूर का परिवार पिछले एक सप्ताह से षासकीय नुमाईदों से मिलने वाली आर्थिक सहायत की बाट जोह रहा है पर अभी तक किसी भी अधिकारी ने इस शहीद के परिजनों के कच्चे घर में पहुंचकर दस्तक नही दी है। सुकमा कलेक्टर की रिहाई के लिए समुचे प्रदेश में कैंडल जलाकर उनके  सकुशल वापस लौटने का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है पर इसी कलेक्टर की सुरक्षा में तैनात शहीद जवान किशुन कुजूर का परिवार अपने कच्चे घर में अंधरे के बीच अकेला बैठा हुआ है।सरकारी अमला की उपेक्षा से दुखी शहीद की माँ श्रीमती जेरमीना का कहना है कि उसे अपने बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन प्रशासनिक अमला की उपेक्षा से काफी दुख पहुंचा है। जेरमीना ने कहा कि उसका छोटा बेटा भी पुलिस सेवा में कार्यरत है। अपने बड़े बेटे के शहीद होने के बाद सरकारी उपेक्षा से पीड़ित इस महिला ने छोटा बेटा आमोद कुजूर की नौकरी से त्यागपत्र दिलाने का मन बना लिया है।
       बीते सप्ताह ग्राम सुराज अभियान के दौरान सुकमा कलेक्टर श्री मेनन की सुरक्षा के लिए तैनात यह शहीद नक्सलियों की गोलियों का षिकार बन गया था। कलेक्टर को अगवा करने के बाद इस शहीद का शव जशपुर जिले में बगीचा के समीप उसके पैत्रृक गंाव सेमरडीह भेजा गया था। इसके पहले परिजनों को अपने जवान बेटे की मौत की खबर भी नही थी। शहीद के पिता अब्राहम ने आज बताया कि अचानक गांव में पुलिस अधिकारियों की गाड़ियों का काफीला और तिंरगे में लिपटा हुआ ताबुत जब उसके घर के सामाने पहूंच तो उसे अनहोनी कि आषंका हो गई थी। अब्राहम ने बताया कि उसके दोनो बेटे पुलिस सेवा में तैनात है इसलिए वह समझ नही पा रहा था कि इस ताबुत में कौन से बेटे का शव है।
   जब उसे पुलिस अधिकारियों ने बताया कि किशुन कुजूर अब उनके बीच नही रहे तो अब्राहम का पूरा परिवार फफक फफक कर रोने लगा था।छोटे से गांव में यह खबर आग की तरह फैल गई थी। इस खबर को सुनते ही पुरा गांव उसके घर पर इकट्ठा हो गया था। पुलिस कर्मियों ने दुख की इस घड़ी में उसके परिवार को ढाढस बंधाया और शहीद के अंतिम संस्कार करने में मदद की थी। इसके बाद एक पुलिस अधिकारी ने अब्राहम कुजूर को 25 हजार रू.नगद राशि का लिफाफा दिया था। यह लिफाफा इस घर में आज भी ज्यों का त्यों रखा हुआ है। शहीद जवान के परिवार के पास उसके आंसू पोछने के लिए अब कोई भी नही है।
               कांग्रेस नेताओं ने भी मुंह फेरा
    जवान किशुन कुजूर के पिता अब्राहम ने बताया कि सबसे बड़ी बिडम्बना तो यह है कि  बगीचा जशपुर मुख्य मार्ग पर मेरा गांव है मगर आज तक कोई भी अधिकारी एवं जनप्रतिनिधि उनका हालचाल जानने नही पहुंचे हैं।अब्राहम ने बताया कि कांग्रेस विधायक शक्राजित नायक एवं रामपुकार सिंह सहित अन्य कांग्रेसी नेता वादा निभाओं आन्दोलन के तहत बगीचा पहुंचे थे। पर इन नेताओं ने भी उनके पास आकर बातचीत करने की जरूरत नहीं समझी।इसके पहले कांग्रेस के नेता वोट के लिए कई बार उसके घर पहुंच कर दस्तक दे चुके हैं। दुःख की घड़ी में कांग्रेसी नेताओं का इस तरह मुंह फेर लेना ठीक नहीं है।अब्राहम के परिजनों का कहना हैं कि शहीद के परिवार को क्या आर्थिक सहायता मिलती है। इस बारे में उसे कुछ भी पता नही है।

सोमवार, 30 अप्रैल 2012

कांग्रेस का विरोध पर भाजपा का विकास भारी; विष्णुसाय



              फिर आजमा सकते हैं विधानसभा में भाग्य
पत्थलगांव / 
     सांसद विष्णुदेव साय का कहना है कि यदि उनकी पार्टी का निर्देष मिलेगा तो वे पुनः विधानसभा का चुनाव लड़ने को तैयार हैं।श्री साय ने कहा कि भाजपा के विकास कार्यो से कांग्रेस के नेता बुरी तरह से बौखला गए हैं।चुनाव से पहले मतदाताओं के बीच में पैठ बनाने के लिए कांग्रेस पार्टी ने विरोध का रास्ता अपनाया है।पर जनता की जागरूकता के कारण कांग्रेस के विरोध से भाजपा को चुनाव में रंच मात्र भी अंतर नहीं पड़ेगा।श्री साय ने कहा कि मिषन 2013 का अभियान के  लिए भाजपा ने भी अपना प्रचार अभियान शुरू कर दिया है। 
    भाजपा सांसद विष्णुदेव साय ने पत्थलगांव में कहा कि मिषन 2013 के लिए भाजपा ने विकास को अपना प्रमुख हथियार बनाया है।उन्होने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेता विरोध करने में बेषक आगे निकल सकते हैं,पर विकास की दौड़ में भाजपा की बराबरी करने में उन्हे काफी वक्त लगेगा।श्री साय ने कहा कि प्रदेष में कांग्रेस सरकार के मुकाबले में भाजपा के विकास कार्य बोलने से नहीं अपितु देखने से महसूस हो रहे है।श्री साय ने कहा कि 108 संजीवनी सेवा आज गांव के जरूरतमंद लोगों के लिए वरदान साबित हो रही है। इस दिषा में भाजपा सरकार आगे भी काम करती रहेगी। स्वास्थ्य के क्षेत्र में स्वास्थ्य बीमा तथा स्मार्ट कार्ड बना कर प्रत्येक व्यक्ति को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मुहैया कराया जाएगा।श्री साय ने कहा कि उनकी पार्टी के कार्यकत्र्ता निचले स्तर तक विकास कार्यो के बारे में मतदाताओं को अवगत करा रहे हैं। उन्होने कहा कि भाजपा सरकार के कामकाज से प्रदेष में महिलाऐं काफी सन्तुष्ट हैं।इस वर्ग के लिए मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की सरकार ने काफी अच्छा काम किया है। श्री साय ने कहा कि कांग्रेस ने सुराज अभियान को विफल करने का पूरा प्रयास किया था पर ग्रामीण जनता ने कांग्रेस नेताओं को नकारते हुए विकास को महत्व दिया है। इन सब बातों को देखते हुए कांग्रेस का विरोध उनकी पार्टी के बीच में ही सीमट कर रह जाएगा।
   उन्होने कहा कि बिजली के मामले में पूरे देष में छत्तीसगढ़ की स्थिति बेहतर है।भाजपा सरकार गांवों के बाद पारे टोलों में बिजली पहुंचा कर किसानों को आत्म निर्भर बनाने की दिषा में तेजी से काम कर रही है।किसानों की बेहतरी के लिए अलग से बजट बना कर हर पहलू पर काम किया जा रहा है।श्री साय ने कहा कि जनता की जागरूकता के कारण कांग्रेस के विरोध से चुनाव में उनकी पार्टी को रचं मात्र भी अंतर नहीं पड़ेगा।उन्होने कहा कि विधानसभा चुनाव में भाजपा अच्छे लोगों को चुनाव में उतारेगी। 
                   पत्थलगांव विधानसभा में होगा भाजपा का कब्जा
   श्री साय ने दावा किया कि इस बार कांग्रेस के कब्जे वाली पत्थलगांव विधानसभा में भी भाजपा की जीत सुनिष्चित है।उन्होने कहा कि लम्बे समय से यहंा पर कांग्रेस का कब्जा होने से विकास की अनेक योजनाओं से स्थानीय लोगों को लाभ नहीं मिल रहा है।श्री साय ने कहा कि राजनीति में केवल अच्छी छवि होना पर्याप्त नहीं है बल्कि जनता की भलाई के लिए सक्रिय होकर काम करना भी बेहद जरूरी है।उन्होने कहा कि कटनी गुमला सड़क का चैड़ीकरण और डामरीकरण के लिए केन्द्र सरकार से पर्याप्त आबंटन लाने के बाद भी कांग्रेस विधायक इस काम को नहीं करा पा रहे हैं।पत्थलगांव विधानसभा में सक्रिय और जूझारू जनप्रतिनिधि के अभाव में इस तरह की अनेक योजनाओं के लाभ से पत्थलगांव के लोग कई वर्षो से वंचित हैं।श्री साय ने कहा कि जषपुर जिले में भाजपा के लोग अति उत्साह का प्रदर्षन नहीं करते हैं पर पर चुनाव के दौरान सभी एक जुट होकर अच्छे परिणाम दिखा देते हैं।    

सोमवार, 23 अप्रैल 2012


कलेक्टर की  रिहाई के लिए गिरजाघर में विशेष प्रार्थना
 शहीद सुरक्षा कर्मियों को दी गई श्रध्दांजलि
पत्थलगांव/
     नक्सलियों के कब्जे से सुकमा कलेक्टर एलेक्स पॅाल मेनन की जल्द से जल्द सकुशल रिहाई के लिए रविवार को यहंा का बड़ा गिरजाघर में सैकड़ो मसीहीजनों ने विशेष प्रार्थना की । पत्थलगांव गिरजाघर के प्रमुख पुरोहित निर्मल मिंज ने इस घटना में कलेक्टर के दो सुरक्षा कर्मियों की निर्मम हत्या पर भी गहरा दुःख व्यक्त किया। इस घटना में शहीद होने वाले दो सुरक्षा कर्मी किसुन कुजूर एवं अमजद खान की आत्मा को शांति प्रदान करने के लिए गिरजाघर में मसीहीजनों ने दो मिनट का मौन रख कर उन्हे श्रध्दाजंलि अर्पित की।
फोटो/ रविवार को पत्थलगांव गिरजाघर में विशेष प्रार्थना सभा  
    पत्थलगांव गिरजाघर के प्रमुख पुरोहित श्री मिंज ने कहा कि हिंसा का रास्ता अपनाने वालों को कभी भी परमेष्वर का आषीष प्राप्त नहीं हो पाता है। उन्होने कहा कि नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़ कर षंाति का मार्ग अपनाना चाहिए। गिरजाधर में आयोजित प्रार्थना सभा में छोटे बच्चे, महिलाऐं और अन्य मसीहीजनों ने नक्सलियों से जल्द से जल्द  कलेक्टर श्री मेनन की रिहाई की अपील की । मसीहीजनों का कहना था कि सुकमा के कलेक्टर  जनता की भलाई के काम में डियूटी कर रहे थे।ऐसे निर्दोष व्यक्ति पर किसी भी तरह का जुल्म उचित नहीं है।
    शनिवार को नक्सलियों व्दारा सुकमा कलेक्टर श्री मेनन को अगवा कर लेने की खबर को टीवी पर देखने के बाद यहॉं के गिरजाघर में रविवार विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया था। इस सभा की जानकारी मिलते ही आज तड़के गिरजाघर का हाल मसीहीजनों से खचाखच भर गया था।गिरजाघर की प्रार्थना सभा में शामिल होने के लिए आसपास के गांवों से भी छोटे बच्चे महिलाओं की काफी भीड़ पहुंच गई थी।
                        राहा में भी शोकसभा एवं प्रार्थना
         रायगढ़ अम्बिकापुर हेल्थ एसोसियेशन की संचालक सिस्टर एलिजाबेथ ने नक्सलियों के कृत्य की कड़े शब्दों में आलोचना की।उन्होने कहा नक्सलियों की इंसानियत खतम हो चुकी है। रविवार को राहा में भी सुकमा कलेक्टर श्री मेनन और उड़ीसा से अगवा किए गए विधायक की जल्द रिहाई के लिए प्रार्थना की गई। यहॉं पर नक्सली हिंसा में शहीद होने वाले कलेक्टर के दो सुरक्षा गार्डो को भावभीनी श्रध्दाजंलि प्रदान की गई। राहा में आयोजित प्रार्थना सभा में बीटीआई प्रिंसिपल अर्पणा बरूवा के अलावा मसिहि संस्था के अनेक स्टाफ मौजूद थे।
    सुकमा कलेक्टर की सकुशल रिहाई के लिए यहां आसपास के ग्रामीण अचंल के गिरजाघरों में भी विशेष प्रार्थनाऐं की गई। पाकरगांव के सरपंच नेहरू लकड़ा ने बताया कि शनिवार को घटित इस घटना से मसीही समाज काफी क्षुब्ध है। उन्होने बताया कि रविवार को पाकरगांव के समीप करंगाबहला गिरजाघर तथा आसपास के तारागढ़,केराकछार,बारबन्द,तामामुंडा,डेमूपारा,व्यौराडांड़ गिरजाघर में भी विशेष प्रार्थना कर के मसीहीजनों ने सुकमा कलेक्टर की जल्द रिहाई करने की अपील की गई।


सोमवार, 16 अप्रैल 2012

द्रोणाचार्यों का सम्मान करने नहीं आए मुख्य अतिथि

शिक्षक सम्मान समारोह में राजनेताओं के बदले बाबा कपिलदास बने मुख्य अतिथि


 18 शिक्षकों का बाबा कपिलदास से कराया सम्मान
पत्थलगांव/
    ज्ञान का दीप जलाकर समाज में षिक्षा का उजियारा फैलाने वाले सेवानिवृत शिक्षकों के लिए आयोजित सम्मान समारोह के मुख्य अतिथि और अध्यक्षता करने वालों के लिए रविवार को इस कार्यक्रम के आयोजकों को घंटो इंतजार करना पड़ा।इसके बाद भी कोई नहीं पहुंच पाने से किलकिला के प्रमुख संत बाबा कपिलदास को आनन फानन में मुख्य अतिथि की जिम्मेदारी सौंपनी पड़ी।
     बाबा कपिलदास ने कहा कि समाज में शिक्षा का उजियारा फैलाने वालों का सम्मान कर उन्हे बेहद खुशी महसूस हो रही है। बाबा ने कहा कि शिक्षकों की बदौलत ही बड़े राजनेता अधिकारी तथा अन्य महत्वपूर्ण पद मिल पाते हैं। उन्होने कहा कि शिक्षकों के सम्मान का कार्यक्रम निर्धारित होने के बाद राजनेताओं को इस तरह उदासिनता नहीं बरतनी चाहिए।
  छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ ने रविवार को यहंा का प्रमुख धार्मिक स्थल किलकिलेश्‍वर धाम में सेवानिवृत शिक्षकों को सम्मानित करने के लिए सम्मान समारोह का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में बुलाए गए मुख्य अतिथि और अध्यक्षता के लिए राजनैतिक दल के नेताओं का घंटो इंतजार के बाद भी वे इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।बाद में  किलकिलेश्‍वर धाम के बाबा कपिलदास को मुख्य अतिथि बनाकर उन्हे शिक्षक संघ ने स्मृमि चिन्ह प्रदान किया। बाबा कपिलदास ने  इस कार्यक्रम में राजनैतिक दल के नेताओं की अनुपस्थिति में सभी सेवानिवृत शिक्षकों को आषिर्वाद प्रदान किया और शाल श्रीफल भेट कर उन्हे सम्मानित किया। पत्थलगांव ब्लाक षिक्षा अधिकारी बरसाय पैंकरा तथा संघ के अन्य पदाधिकारियों की उपस्थिति में यहंा पर  18 सेवानिवृत शिक्षकों को सम्मानित करने का कार्यक्रम को पूरे उत्साह के साथ पूरा किया गया।
          अतिथियों के लिए किया गया लंबा इंतजार
   पत्थलगांव के समीप किलकिला में आयोजित शिक्षकों का सम्मान समारोह के कार्यक्रम में संसदीय सचिव भरत साय को मुख्य अतिथि बनाकर संघ ने इस अचंल के गणमान्य नागरिकअधिकारी तथा पत्रकारों  को आमत्रित किया था। इस कार्यक्रम में अध्यक्षता के लिए विधायक रामपुकार सिंह तथा विषिष्ठ अतिथि में जनपद अध्यक्ष अर्जून सायनगर पंचायत अध्यक्ष डा.बीएल भगत को आमत्रित किया था। बताया जाता है कि कार्यक्रम का आयोजन करने वाले छत्तीसगढ़ शिक्षक संघ के पदाधिकारियों ने शिक्षकों को सम्मानित करने के इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में बुलाए गए अतिथियों का कई घंटों तक इंतजार करते रहे पर अंत तक कोई भी कार्यक्रम मे नहीं पहुंचा। राजनैतिक दल के नेताओं की इस उपेक्षा से क्षुब्ध होकर  शिक्षक संघ  ने  अपने कार्यकाल के दौरान विषिष्ठ सेवा प्रदान करने वाले 18सेवानिवृत षिक्षकों को बाबा कपिलदास से सम्मानिक करा कर इस कार्यक्रम को पूरा किया।
                 सम्मानित सेवानिवृत शिक्षक
  सेवानिवृत शिक्षकों को सम्मानित करने के इस कार्यक्रम में पीएल नामदेव,आत्माराम रावकांशीराम श्रीवासदिवाकर पाठकपुनीराम भारतीसदर सायश्रवण साय चैहानशोभाराम तिर्कीमानवेल एक्का,देवानंद पैंकरा ,अनंतराम सिदार,डीआर पटेल,चुन्नीलालपुरषोत्तम सिंह,जगतराम,फकीर राम खुंटे,जेपी परहा को मंच पर बुलाकर उन्हे शाॅल श्री फल भेट कर सम्मानित किया।
     शिक्षक संघ के उपप्रांताध्यक्ष ओंकार सिंह ठाकुर ने कहा कि हमारे समाज में  गुरू प्राचीन काल से ही सम्मानित होते आए हैं। गुरूओं व्दारा समाज को सही दिशा देने के कारण उनका आज भी सर्वोच्च स्थान मिला हुआ है। इस कार्यक्रम में ब्लॅाक षिक्षा अधिकारी बरसाय पैंकरा,तृतीय वर्ग कर्मचारी संेघ के अध्यक्ष भीमसेन जी स्वर्णकारसम्भागीय सचिव राजकुमार सिंगहरिशंकर यादव सहित अन्य लोगों ने मंच सम्हाल कर कार्यक्रम को पूर्ण कराया।
  बताया जाता है कि सेवानिवृत षिक्षकों का सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि सहित अन्य सभी से एक पखवाड़ा पहले सहमति ले ली गई थी। इस कार्यक्रम को लेकर छत्तीसगढ़ षिक्षक संघ ने जोरशोर से तैयारियंा की थी। षिक्षक संघ के सदस्यों ने पूरे क्षेत्र में आमंत्रण पत्र वितरित कर लगभग पांच सौ लोगो के  साथ सेवानिवृत होने वाले षिक्षकों के साथ भोजन की भी व्यवस्था कराई थी। सेवानिवृत  शिक्षकों  के कार्यक्रम में आमंत्रित अतिथियों के नहीं पहुंचने से लोग तरह तरह की चर्चा करते देखे गए।

गुरुवार, 15 मार्च 2012

शराबियों को सबक सिखाएंगी महिलाऍं

ग्रामसभा में महिलाओं ने लिया शराब बन्दी का संकल्प

पाकरगांव की ग्रामसभा में लिया गया संकल्‍प
    आबकारी विभाग की निष्क्रियता से कच्ची शराब की बिक्री बढ़ी
 पत्थलगांव/
    घर घर में बिक रही महुए की कच्ची शराब का धंधा पर आबकारी विभाग की विफलता के बाद ग्रामीण महिलाओं ने इस पर अकंुश लगाने का बीड़ा उठाया है। पाकरगांव की महिलाओं ने शराब बन्दी का संकल्प लेने के बाद गांव में घर घर जाकर इस निर्णय से लोगों को अवगत कराना शुरू कर दिया है। ग्रामीण महिलाओं ने पाकरगांव की ग्रामसभा में एकजुट होकर मद्यनिषेध गांव बनाने का संकल्‍प लिया है। पाकरगांव के पंचायत प्रतिनिधियों ने शराब बन्दी के काम में महिलाओं के समूह को पूरा सहयोग देने का वायदा करके शराबियों को दंडित करने का भी निर्णय लिया है।
    पत्थलगांव क्षेत्र में आबकारी विभाग की निष्क्रियता के चलते अवैध शराब का व्यवसाय काफी फलने फूलने लगा है। महुए की कच्ची शराब ग्रामीणों को आसानी से मिलने के बाद युवा वर्ग भी इसकी चपेट में आकर अपराध की दुनिया में उतरने लगे हैं।पाकरगांव की पूर्व सरपंच श्रीमती पतियारों बाई का कहना है कि कच्ची शराब की अवैध बिक्री का सबसे ज्यादा खामियाजा ग्रामीण महिलाओं को भुगतना पड़ रहा है। उन्होने कहा कि गांव की पढ़ी लिखी महिलाओं ने इस बुराई से लड़ने का मन बना लिया है। इसी के तहत पाकरगांव की महिलाओं ने दृढ़ संकल्प करके समूचे गांव को मद्यनिषेध बनाने का निर्णय लिया है।
सुश्री मल्लिका बनर्जी सहायक निरीक्षक




     पाकरगांव के सरपंच नेहरू लकड़ा ने बताया कि मगंलवार को हुई ग्रामसभा में महिलाओं ने शराबियों को सबक सिखाकर अपने गांव को मद्यनिषेध गांव बनाने का सकंल्प लिया है। श्री लकड़ा ने बताया कि मंगलवार को पंचायत भवन में ग्रामसभा का आयोजन किया गया था। इसमें काफी बड़ी संख्या में ग्रामीण इकटठा हुए थे। इस बैठक में गर्मी का मौसम शुरू होने से पहले पाकरगांव पंचायत अन्तर्गत के विभिन्न मुहल्लों में पेयजल की समस्या का निदान तथा अन्य जरूरी मुददों पर चर्चा शुरू की गई थी।ग्रामीणों को पानी का दुरूपयोंग नहीं करने तथा बिगड़े हैंड पम्पों की त्वरित जानकारी देने की समझाईश दी जा रही थी। इस दौरान गांव की महिला श्रीमती रूपनी कुजूर ने घर घर बनाई जा रही महुआ की कच्ची शराब का उल्लेख कर अपना विरोध दर्ज  किया। इस महिला का कहना था कि महुआ शराब की अवैध बिक्री के चलते उनका सुख चैन समाप्त हो चुका है। श्रीमती रूपनी बाई व्दारा पेयजल तथा अन्य मुददों को अलग रखकर सबसे पहले शराब की अवैध बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का आग्रह किया। पाकरगांव की ग्रामसभा में इस महिला के समर्थन में देखते ही देखते अनेक महिलाओं ने सामने आकर अपनी एकजुटता दिखा दी। इस गांव की वृध्द महिला श्रीमती बाबी मिंज ने भी अवैध शराब की बिक्री पर चिन्ता व्यक्त करते हुए पाकरगांव को मद्यनिषेध गांव बनाने का आग्रह किया ।
     पाकरगांव में आयोजित ग्रामसभा में महिलाओं का शराब बन्दी की बात को लेकर दृढ़ निश्चय को देखते हुए यहां के सरपंच नेहरू लकड़ा ने भी महिलाओं के सुझाव की सराहना की । श्री लकड़ा ने कहा कि शराब बन्दी के काम में आने वाली कठिनाइयों के बारे में महिलाओं को समझाया गया था। पर ग्रामीण महिलाऐं अपने निर्णय पर अडिग थी। उन्होने बताया कि ग्रामसभा में महिलाओं ने शराब बन्दी का सकंल्प लेकर इस काम को तत्काल क्रियान्वयन करने की बात कही। महिलाओं की एकजुटता देखकर वहां उपस्थित पचंायत प्रतिनिधियों ने भी अपना पूरा सहयोग देने का वायदा किया। पाकरगांव की ग्रामसभा में उपस्थित जनपद सदस्य श्रीमती सरोजनी किसपोटटा ने भी महिलाओं में शराब बन्दी की बात लेकर जागरूकता की सराहना की। उन्होने ग्रामसभा में पत्थलगांव की महिला सहायक निरीक्षक मल्लिका बनर्जी को बुलाकर ग्रामीण महिलाओं के निर्णय से अवगत कराया। सभी महिलाओं ने वहां पर एकजुट होकर पाकरगांव को मद्यनिषेध गांव बनाने का संकल्प लिया।
   पाकरगांव उपसरपंच गणेशचन्द्र बेहरा, पंच सुकरूराम ,लहर साय ,जुगनू बेग,बल साय, साक्षरता मिशन की प्रेरक श्रीमती पुष्पा बड़ा तथा भुनेश्वर यादव, आंगनवाड़ी कार्यकत्र्ता श्रीमती विजय कमारी लकड़ा,श्रीमती चाहामुनी बड़ा,श्रीमती तरेशा मिंज सहित अनेक महिलाओं ने अब घर घर जाकर ग्रामीणों को इस अभियान से अवगत कराना शुरू कर दिया।
             पत्थलगांव की महिला सहायक निरीक्षक सुश्री मल्लिका बनर्जी ने कहा कि ग्रामीण महिलाओं में शराब बन्दी को लेकर जागरूक होना बहुत अच्छी बात है। यहां की महिलाओं को कानून के दायरे में रह कर शराब बन्दी के अभियान को जारी रखने की बात कही गई है।सुश्री बनर्जी ने कहा कि दृढ़ इच्छाशक्ति के बाद कोई भी काम कठिन नहीं हैं। पाकरगांव की महिलाओं का  अभियान से अन्य गांव की महिलाओं को भी सीख मिलेगी।
  रमेश शर्मा पत्थलगांव 

  सुश्री मल्लिका बनर्जी 
सहायक निरीक्षक पत्थलगांव

गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

सलखिया की गौशाला से किसानों को मिल रही मदद

फोटो/ पश्चिम बंगाल के बुचड़खानों को भेजी गई गायों का सलखिया में पालन पोषण
गौवध रोकने की दिशा में सार्थक पहल
पत्थलगांव/ 
     गौवध रोकने की दिशा में यंहा पर सलखिया स्थित गुरूकुल वैदिक आश्रम ने एक मिशाल कायम की है। इस आश्रम में पश्चिम बंगाल के बुचड़खानों में गौवध के लिए भेजी गई 200 से अधिक गायों को वापस लाकर उनका पालन पोषण किया जा रहा है।सलखिया की बृहद गौशाला के मवेशियों के माध्यम से अचंल के किसानों को भी उनके खेती किसानी के कामकाज में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। यहंा के अध्यक्ष स्वामी रामानंद का कहना है कि गौवध रोकने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
  पत्थलगांव के समीप सलखिया गांव में अचंल के वनवासियों को वैदिक शिक्षा और वृध्दाश्रम के माध्यम से बुजुर्गो की बेहतर देखरेख के साथ उन्हे सम्मानजनक आशियाना उपलब्ध कराया गया है।गुरूकुल वैदिक आश्रम का सचंालन करने वाली इस समाजसेवी संस्था ने गरीब तबका के लिए परोपकार के काम करके अलग पहचान कायम की है। इस संस्था के अध्यक्ष स्वामी रामानंद सरस्वती ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से गौवध के लिए भेजी गई 200 से अधिक गायों को सलखिया आश्रम में रख कर उनकी सेवा की जा रही है। सलखिया की इस गौशाला में एकत्रित दूध दही को आश्रम में रह कर विद्याध्यन करने वाले गरीब तबका के बच्चों को वितरण कर उन्हे तन्दरूस्त बनाने में मदद दी जा रही है। स्वामी ने बताया कि गौवध के कृत्य को रोकने के लिए केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस काम में सभी को गाय पालन के काम हेतु प्रेरित करने की जरूरत है।उन्होने बताया कि आदिवासी अचंल में किसानों को अपनी खेती के काम हेतु महंगे बैल खरीदने पड़ते हैं। यदि गाय पालन के काम को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की इस समस्या से राहत दी जा सकती है। स्वामी रामानंद ने कहा कि गाय पालन से जैविक खाद तथा बिजली का भी लाभ लिया जा सकता है।
   उन्होने बताया कि इस अचंल के प्रमुख समाजसेवी इन्द्रपाल सिंह भटिया का सहयोग मिल जाने के बाद सलखिया गुरूकुल वैदिक आश्रम में गरीब तबका के सैकड़ो बच्चांे को भी शिक्षा के माध्यम से आत्म निर्भर बनाने की पहल की गई है।यहंा वृध्दाश्रम और बृहद गौशाला के माध्यम से आसपास के ग्रामवासियों को सहयोग देने का प्रयास किया गया है। पत्थलगांव के समीप सलखिया आश्रम में गरीब तबका के बच्चों को विभिन्न ट्रेडो के तहत कृषि,वेल्डिंग,स्क्रीन प्रिंटिग,कारपेंटरी के काम का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इस आश्रम के 100 बच्चों को इन दिनों बैदिक संस्कृति के साथ आसन, व्यायाम, प्राणायाम विद्या में भी पारंगत किया जा रहा है।स्वामी रामानंद का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही वैदिक शिक्षा के साथ शाररिक उन्नति पर ध्यान देने से ये बच्चे आगे चल कर स्वस्थ्य जीवन व्यतित कर सकते हैं।उन्होने बताया कि इस आश्रम में प्राचीन रूढ़ियों को तोड़ कर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के बालकों को बैदिक शिक्षा का पूरा ज्ञान देकर उन्हे आत्म निर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

ग्रामीण महिला को लगातार तीसरी बार सरपंच की जिम्मेदारी


महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई किसानों के साथ
नशामुक्त ग्राम पचायत बनाने की पहल,

गुड़ाखू नशा पर भी लगाना होगा प्रतिबंध

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में गांव के विकास कार्यो को गति देने के साथ साथ किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक पहल करने वाली महिला सरपंच को चिकनीपानी के ग्रामीणों ने लगातार तीसरी बार सरपंच की कुर्सी सौंपी है।
     पत्थलगांव विकासखंड अन्तर्गत चिकनीपानी की महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई का कहना है कि उसके गांव में महिलाओं व्दारा शुरू किया गया नशा बन्दी र्का अिभयान में पुलिस प्रशासन का भी सहयोग मिलना चाहिए। इसके बाद वे अपनी ग्राम पचंायत को नशामुक्त बनाने में कामयाब हो सकती हैं।जानकी बाई ने गांव की महिलाओं को जागरूक बनाकर उन्हे शराब विरोधी आन्दोलन के लिए प्रेरित किया है। इस गांव की महिलाऐं शराब बनाने वालों के साथ शराबियों को भी आड़े हाथ लेने में पीछे नहीं रहती हैं।महिला सरपंच जानकीबाई का कहना है कि मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह को गुड़ाखू नशा पर भी कड़ाई से रोक लगाने की पहल करनी चाहिए।
 पिछले एक दशक से भी लम्बे समय से ग्राम पचंायत चिकनीपानी में सरपंच पद का दायित्व सम्हालने वाली महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई को बीते वर्ष निर्मल ग्राम बनाने पर उन्हे देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल के व्दारा सम्मानित किया जा चुका है। जानकी बाई का कहना ह ैकि उनके गांव का किसान खुशहाल रहेगा तभी उसे सन्तुष्टि मिल पाती है। इस महिला ने किसानों के खेतों में समतलीकरण का काम पर विशेष जोर दिया है। चिकनीपानी गांव में ज्यादातर किसानों के पास बजंर और पथरीली भूमि होने के कारण यहंा के किसानों को मजदूरी करने के लिए बाहर पलायन करना पड़ता था। महिला सरपंच जानकी बाई ने यहंा पर भूमि समजली करण का काम से सैकड़ों किसानों को लाभान्वित किया है।

       शासन की भूमि समतलीकरण योजना का लाभ मिलने के बाद अब चिकनीपानी क्षेत्र के किसान अपने ही खेतों में टमाटर, धान, साग सब्जी जैसी नगद फसल लेने में ब्यस्त रहते हैं।यहंा के किसानों व्दारा टमाटर की दोहरी फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना लिया है।इन दिनो चिकनीपानी में बलबीर, राजेश और हाकिम की बजंर भूमि में समतलीकरण का काम कराया जा रहा है। इन किसानों ने बताया कि उन्हे अपने खेत बनाने के लिए सरपंच कार्यालय में नहीं जाना पड़ा। बल्कि सरपंच स्वंय उनके मुहल्ले में पहुंच कर उन्हे स्वयं समतलीकरण का लाभ के बारे में समझाईश देने आई थी। ग्राम पचंायत चिकनीपानी में किसानों के खेतों में सिंचाई साधन की कमी को देखते हुए यहंा पर भरारी बांध की नहरों को पक्का कराया गया है। इन नहरों का पानी किसानों के खेतों तक पहुंच जाने से यहंा के किसान अब साग सब्जी जैसी नगद फसल का लाभ लेने लगे हैं। गांव में इन दिनों आधा दर्जन किसानों ने अपने खेत में डबरी बनाने का भी काम शुरू किया है। महिला सरपंच जानकी बाई ने जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बिश्वनाथ नायक से सम्पर्क कर इन किसानों को शासकीय मदद दिलाई है।

  यहंा कि महिला पचं परमीला, गुरबारी,सुशीला, अलमा तथा जेरोनिका का कहना था कि उनकी ग्राम पचंायत में  महिला सरपंच होने से उन्हे अपने वार्ड में विकास कार्य कराने के लिए ज्यादा भाग दौड़ नहीं करनी पड़ती है। इन पंचों ने बताया कि वे सरपंच के साथ प्रत्येक पखवाड़े अलग अलग मुहल्ल्लों का भ्रमण कर ग्रामीणों से उनकी समस्याओं का ब्यौरा एकत्रित करते हैं। इन कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर पचंायत में प्रस्ताव पारित कर उसे पूरा करते हैं। इन दिनों यहंा पर  कर्राढाड़ से भरारी चैक तक सड़क में मुरूमीकरण का काम पूरा कराया गया है।गांव के लोगों का कहना है कि हमारी महिला सरपंच उनकी मुलभूत सुविधाओं का पूरा ध्यान रखती हैं इसलिए वे बार बार उन्हे काम करने का अवसर दे रहे हैं।
रमेश शर्मा     

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

गरीब बच्चों को मिलती है वैदिक संस्कृति की शिक्षा


सलखिया का गुरुकुल आश्रम है सद्भावना की अनोखी मिसाल


 संसदीय सचिव ओमप्रकाश राठिया एवं प्रमुख समाजसेवी पोम्मी भाटिया व्दारा गरीबों को कम्बल का वितरण किया गया। 
                    
   पत्थलगांव / रमेश शर्मा
     गरीब तबका के बच्चों को जातिगत भेद भाव से दूर रखकर गुरुकुल आश्रम की प्राचीन परम्पराओं के अनुरूप वेद की शिक्षा के साथ साथ उन्हे आत्म निर्भर बनाने के लिए सराहनीय पहल की जा रही है। पत्थलगांव के समीप लैलूंगा विकास खंड के सलखिया गांव में स्थित यह विद्यालय प्रेरणा और सद्भावना की अनोखी मिशाल है।
      इस विद्यालय के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि संसदीय सचिव ओम प्रकाश राठिया उपस्थित थे। उन्हांेने  कहा कि आज भाग दौड़ की जीवन में अच्छे संस्कार देकर गरीब बच्चों वैदिक संस्कृति सिखाना बेहद कठिन काम है। श्री राठिया ने कहा कि आपस की सद्भावना को कायम रखने के लिए प्राचीन शिक्षा पद्यति को लुप्त होने से बचाना होगा। उन्होने कहा कि सलखिया गांव में इस काम को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ किया जा रहा है। श्री राठिया ने कहा कि गरीब बच्चों को शिक्षा देने के इनक कार्यो में सभी को अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। सलखिया स्थित आर्य विद्या सभा के वार्षिक उत्सव में शामिल होकर सैकड़ों गरीब लोगों को ठंड से बचने के लिए कम्बल वितरण किए। इस कार्यक्रम में आर्य विद्या सभा ने तीन दिनों तक वेद प्रवचन का आयोजन भी किया।जिसमें देश के कोने कोने से आए विदवानों ने वेदों के महत्व पर प्रकाश डाला।
   वेद प्रवक्ता डॉ. धर्मवीर ने कहा कि मौजूदा परिवेश में वेदों का अनुशरणकाफी महत्वपूर्ण हो गया है।वेद के अनुसरण से ही एकता और अखंडता की प्रेरणा मिलती है। डा.धर्मवीर ने कहा कि जाति और धर्म को अलग अलग करके व्देष और हिंसा को बढ़ा दिया गया है। इसके विपरित वेद में एक धर्म एक भाषा तथा अखंडता व शांति को महत्व दिया गया है। इसी तरह दिल्ली से प.ं दिनेश दत्त एवं देहरादून से आए सत्यपाल सरल ने भी ज्ञानवर्धक उपदेश देकर सभी का मन मोह लिया। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान सुरेश अग्रवाल ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की शुरूवात की। वार्षिक उत्सव के समापन समारोह में विद्यालय के छात्रों ने शाररिक योग तथा वेद के विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए।तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में रायगढ़ ,जशपुर,सरगुजा जिलों से आए हजारों लोगों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दी। आर्य विद्या सभा ने इस दौरान प्रति दिन 5000 से अधिक निर्धन व्यक्तियों को भोजन करा कर उन्हे जीवन में उन्नति की डगर दिखाई।


वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भोजन किया
 
  आर्य सभा के अध्यक्ष स्वामी रामानंद ने बताया  िकइस विद्यालय में पहली से बारहवीं तक की आवासीय निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बच्चों को आत्म निर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हांेने बताया कि वेद पाठशाला में ग्रामीण अचंल के 27 बच्चों का चयन किया गया है। इन बच्चों को वेैदिक संस्कृति  की शिक्षा के साथ प्रति माह पांच सौ रू.की छात्रवृत्ति भी दी जा रही है।वेदिक संस्कृति के छात्र आसन,व्यायाम,प्राणायाम करके अपनी शारीरिक उन्नति, यज्ञ, ब्रम्हयज्ञ,तथा वेद पाठ के माध्यम से आत्मिक प्रगति कर रहे हैं। स्वामी जी ने बताया कि इस ग्रामीण विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को विभिन्न ट्रेडों के तहत  कृषि,वेल्डिंग,स्क्रीन प्रिटिंग,कारपेंटरी आदि का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस संस्था में 100 गाय की एक बृहद गौशाला भी  संचालित है। इसके अलावा वृध्दों की सुव्यवस्था के लिए वृध्दाश्रम का भी संचालन किया जा रहा है। आश्रम में वृध्दों को समुचित व्यवस्था निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
      आर्य सभा के अध्यक्ष रामानंद ने बताया कि यहंा की गतिविधियों का सचंालन के लिए रायगढ़ के प्रमुख समाजसेवी पोम्मी भाटिया से भरपूर सहयोग मिल रहा है।उन्होने कहा कि यहंा प्राचीन रूढ़ियों को तोड़ कर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के बालकों को वेद संस्कृति की शिक्षा देकर उन्हे आत्म निर्भर बनाने की पहल की गई है।

      
रमेश शर्मा

सोमवार, 30 जनवरी 2012

खोई हुई बेटी को सामने पाकर वे फूट-फूट कर रोने लगे

बासंती की मॉं

गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने उपचार कर परिजनों से भी मिलाया
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
रमेश शर्मा
गुजरात का दिल सचमुच बहुत बड़ा है। उसके आगे बढ़ने के पीछे परोपकार की भावना का भी समावेश होता है। परसेवा के लिए जो परशेवा (पसीना) बहा दे, वही सच्च गुजराती है। अब किसने सोचा था कि सात साल पहले जो बेटी खो गई हो, वह अचानक माता-पिता के सामने आ जाए। इससे माता-पिता ही नहीं, बल्कि पूरा गाँव ही खुशियों से झूम उठा। ग्रामीणों ने उस टीम को देखा जिसने उनकी बेटी को सही सलामत घर तक पहुँचा दिया। उन्होंने टीम का ही नहीं, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया। लड़ककी के माता-पिता ने टीम को आशाीष देते-देते नहीं थकती। बेटी को पाकर वे आल्हादित हैं। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण सात साल पहले अपनी ससुराल से गायब होने वाली एक ग्रामीण युवती को गुजरात स्थित अहमदाबाद के मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों ने उपचार कर इस महिला को उसके घरजियाबथान स्थित परिजनों के पास  लाकर मिला दिया।
गुजरात से आए दल के साथ
बासंती पति के साथ

    गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का पांच सदस्यी  दल के साथ यहां आकर बसंती नायक यह महिला जब अपने परिजनों से मिली  तो उसके आंसु थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने तथा लम्बे समय से गायब रहने के कारण बसंती के माता पिता ने उसके जीवित होने की भी उम्मीद छोड़ दी थी। बसंती के पिता मानसाय ने बताया कि वर्ष 2004 में उसकी बेटी पत्थलगांव के समीप कंटगतराई में अपने दो नन्हे बच्चों को ससुराल में छोड़ कर अचानक गायब हो गई थी।इस युवती की ससुराल और मायके वालों ने मिल कर उसकी जगह जगह तलाश की थी लेकिन बसंती का कहीं पता नहीं चल सका था। मानसाय ने बताया कि बसंती के नहीं मिल पाने के बाद उसने पत्थलगांव पुलिस के पास जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने भी बसंती के फोटो लेकर उसकी तलाश की पर कहीं भी पता नहीं चल सका।
          
        ठीक होकर लिया पत्थलगांव का नाम  
 बसंती को लेकर पत्थलगांव पहुंचे गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों के दल की महिला सदस्य सुश्री पारूल सोलंकी ने बताया कि अहमदाबाद स्थित मानसिक आरोग्य हास्पिटल में बीते वर्ष अप्रेल माह में गुजरात पुलिस ने इस युवती को लावारिश हालत में बरामद किया था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण यह महिला पुलिस को कुछ भी जानकारी नहीं दे पा रही थी।गुजरात पुलिस ने इस महिला को अहमदाबाछ स्थित मानसिक आरोग्य स्वास्थ्य कर्मियों के पास लाकर उन्हे सौंप दिया था। यहां के स्वास्थ्य कर्मियों ने अनजान महिला को अपना कर उसी दिन से इलाज और उसकी सेवा का काम शुरू कर दिया था। मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन और बेहतर इलाज मिलने के कारण इस युवती की दशा में जल्द सुधार होने लगा था। जब यह युवती ठीक होकर कुछ समझने बुझने लगी तो गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने राहत की सांस ली थी । स्वास्थ्य कर्मियों के दल ने बताया कि पहले अपने परिजन तथा अन्य के बारे में कुछ भी नहीं बता पाने वाली यह युवती जब पूरी तरह से  स्वस्थ्य हो गई तो उसने सबसे पहले पत्थलगांव का नाम बताया था। इस युवती को मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन मिलने के बाद उसकी गुमी हुई याददाश्त भी धीरे धीरे लौटने लगी थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि बसंती से जब उसका जशपुर जिले का पूरा पता मिला तो फिर इस युवती को लाकर उसके परिजनों से मिलाया गया।
    पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में जब गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का दल पहुंचा तो बसंती ने स्वयं आगे बढ़ कर अपने घर का रास्ता बता दिया । इस युवती के पिता मानसाय को अचानक उसकी खोई हुई बेटी मिली तो वह फूट-फूट कर रोने लगा था। मानसाय तथा उसकी पत्नी एतवारी बाई ने बताया कि उन्हे बसंती के वापस मिलने की रंचं मात्र भी उम्मीद नहीं थी। गुजरात से यहां पहुंचा स्वास्थ्य कर्मियों का दल में उपस्थित पी .पी.नाडिया, मोरारजी सोलंकी, प्रिती सोलंकी, सुनीता रावत तथा पारूल सोलंकी ने बताया कि बसंती को उसके परिजनों से मिला कर उन्हें जो खुशी मिली है उसे वे लोग शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते हैं। उन्होने कहा कि गुजरात के मानसिक अस्पताल में रह कर वे बसंती जैसे सैकड़ों मरीजों का उपचार करते हैं। लेकिन इस तरह वषरे से बिछुड़े हुए मरीज को लाकर उसके परिजनों से मिलाने में सफल हो जाते हैं तो उनकी मेहनत सार्थक हो जाती है। पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में खोई हुई युवती को देखने के लिए ग्रामीणों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ पडी़ थी। यहां के लोगों से अपनापन मिलने के बाद गुजरात के स्वास्थ्य कर्मी भी अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे।
रमेश शर्मा

खोई हुई बेटी को सामने पाकर वे फूट-फूट कर रोने लगे


गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने उपचार कर परिजनों से भी मिलाया
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/  रमेश शर्मा
गुजरात का दिल सचमुच बहुत बड़ा है। उसके आगे बढ़ने के पीछे परोपकार की भावना का भी समावेश होता है। परसेवा के लिए जो परशेवा (पसीना) बहा दे, वही सच्च गुजराती है। अब किसने सोचा था कि सात साल पहले जो बेटी खो गई हो, वह अचानक माता-पिता के सामने आ जाए। इससे माता-पिता ही नहीं, बल्कि पूरा गाँव ही खुशियों से झूम उठा। ग्रामीणों ने उस टीम को देखा जिसने उनकी बेटी को सही सलामत घर तक पहुँचा दिया। उन्होंने टीम का ही नहीं, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया। लड़ककी के माता-पिता ने टीम को आशाीष देते-देते नहीं थकती। बेटी को पाकर वे आल्हादित हैं। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण सात साल पहले अपनी ससुराल से गायब होने वाली एक ग्रामीण युवती को गुजरात स्थित अहमदाबाद के मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों ने उपचार कर इस महिला को उसके घरजियाबथान स्थित परिजनों के पास  लाकर मिला दिया।
    गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का पांच सदस्यी  दल के साथ यहां आकर बसंती नायक यह महिला जब अपने परिजनों से मिली  तो उसके आंसु थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने तथा लम्बे समय से गायब रहने के कारण बसंती के माता पिता ने उसके जीवित होने की भी उम्मीद छोड़ दी थी। बसंती के पिता मानसाय ने बताया कि वर्ष 2004 में उसकी बेटी पत्थलगांव के समीप कंटगतराई में अपने दो नन्हे बच्चों को ससुराल में छोड़ कर अचानक गायब हो गई थी।इस युवती की ससुराल और मायके वालों ने मिल कर उसकी जगह जगह तलाश की थी लेकिन बसंती का कहीं पता नहीं चल सका था। मानसाय ने बताया कि बसंती के नहीं मिल पाने के बाद उसने पत्थलगांव पुलिस के पास जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने भी बसंती के फोटो लेकर उसकी तलाश की पर कहीं भी पता नहीं चल सका।
                   ठीक होकर लिया पत्थलगांव का नाम  
 बसंती को लेकर पत्थलगांव पहुंचे गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों के दल की महिला सदस्य सुश्री पारूल सोलंकी ने बताया कि अहमदाबाद स्थित मानसिक आरोग्य हास्पिटल में बीते वर्ष अप्रेल माह में गुजरात पुलिस ने इस युवती को लावारिश हालत में बरामद किया था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण यह महिला पुलिस को कुछ भी जानकारी नहीं दे पा रही थी।गुजरात पुलिस ने इस महिला को अहमदाबाछ स्थित मानसिक आरोग्य स्वास्थ्य कर्मियों के पास लाकर उन्हे सौंप दिया था। यहां के स्वास्थ्य कर्मियों ने अनजान महिला को अपना कर उसी दिन से इलाज और उसकी सेवा का काम शुरू कर दिया था। मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन और बेहतर इलाज मिलने के कारण इस युवती की दशा में जल्द सुधार होने लगा था। जब यह युवती ठीक होकर कुछ समझने बुझने लगी तो गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने राहत की सांस ली थी । स्वास्थ्य कर्मियों के दल ने बताया कि पहले अपने परिजन तथा अन्य के बारे में कुछ भी नहीं बता पाने वाली यह युवती जब पूरी तरह से  स्वस्थ्य हो गई तो उसने सबसे पहले पत्थलगांव का नाम बताया था। इस युवती को मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन मिलने के बाद उसकी गुमी हुई याददाश्त भी धीरे धीरे लौटने लगी थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि बसंती से जब उसका जशपुर जिले का पूरा पता मिला तो फिर इस युवती को लाकर उसके परिजनों से मिलाया गया।
    पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में जब गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का दल पहुंचा तो बसंती ने स्वयं आगे बढ़ कर अपने घर का रास्ता बता दिया । इस युवती के पिता मानसाय को अचानक उसकी खोई हुई बेटी मिली तो वह फूट-फूट कर रोने लगा था। मानसाय तथा उसकी पत्नी एतवारी बाई ने बताया कि उन्हे बसंती के वापस मिलने की रंचं मात्र भी उम्मीद नहीं थी। गुजरात से यहां पहुंचा स्वास्थ्य कर्मियों का दल में उपस्थित पी .पी.नाडिया, मोरारजी सोलंकी, प्रिती सोलंकी, सुनीता रावत तथा पारूल सोलंकी ने बताया कि बसंती को उसके परिजनों से मिला कर उन्हें जो खुशी मिली है उसे वे लोग शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते हैं। उन्होने कहा कि गुजरात के मानसिक अस्पताल में रह कर वे बसंती जैसे सैकड़ों मरीजों का उपचार करते हैं। लेकिन इस तरह वषरे से बिछुड़े हुए मरीज को लाकर उसके परिजनों से मिलाने में सफल हो जाते हैं तो उनकी मेहनत सार्थक हो जाती है। पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में खोई हुई युवती को देखने के लिए ग्रामीणों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ पडी़ थी। यहां के लोगों से अपनापन मिलने के बाद गुजरात के स्वास्थ्य कर्मी भी अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे। 

फोटो/ गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों के साथ खोई हुई बसंती

रविवार, 1 जनवरी 2012

जिद करो और दुनिया बदलो का सकंल्प के बाद


खारडोढ़ी गांव में श्रीमती अनिता यादव बनी प्रेरणा की मिसाल
       खारडोढ़ी की महिलाओं ने बजंर भूमि पर फैला दी हरियाली 
पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
खारडोढ़ी गांव की उबड़ खाबड़ और पथरीली जमीन पर नौ साल पहले यहंा की महिलाओं का स्वसहायता समूह व्दारा रोपे गए पौधे अब सघन जगंल का रूप ले चुके हैं। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इन दो जगंलों की देख रेख का काम गांव के ही लोग मिलजुल कर करते हैं।सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण महिलाओं का स्वसहायता समूह की समझाईश के बाद प्रत्येक ग्रामीण साग सब्जी की उपज लेकर नगद लाभ कमाने लगे हैं।यहंा के ग्रामीण अपनी बाड़ी में ही केंचवा खाद बना कर विभिन्न साग सब्जी का अधिक उत्पादन ले रहे हैं।गांव में जगंल की कमी दूर हो जाने के बाद यहंा जलाउ लकड़ी की किल्लत दूर हो गई है।जगंल की सूखी टहनियों की बदौलत चुल्हा चौका का काम आसानी से होने लगा है।
पत्थलगांव विकासखंड अन्तर्गत ग्राम खारडोढ़ी के आसपास बजंर और पथरीली भूमि होने के कारण यहंा की ग्रामीण महिलाओं को जलाउ लकड़ी लेने के लिए 25 से 30 कि.मी. दूर सिसरिंगा और तेजपुर जगंल जाना पड़ता था। प्रति दिन जलाउ लकड़ी की समस्या से जूझने के कारण यहंा की महिलाऐं दूसरा काम के बारे में सोच भी नहीं पाती थी। इस गांव के लोगों की परेशानी के बारे में जब आदिवासी विकास कार्यक्रम  आई फेड के अधिकारियों को पता चला तो उन्होने गांव में पहंुच कर यहंा की महिलाओं में आत्म विश्वास जगाया था। आदिवासी विकास कार्यक्रम के तत्कालीन अधिकारी संदीप शर्मा, अशोक जायसवाल ने यहंा की ग्रामीण महिलाओं के मोंगरा समूह, चम्पा समूह और ध्रुव नामक स्वसहायता समूह गठित कर उन्हे वृक्षारोपण, बाड़ी विकास, मुर्गी पालन जैसे छोटे छोटे काम के प्रति आकर्षित किया था। यहंा के महिलाओं के तीन अलग अलग समूह बना कर उन्हे सुखरापारा सेन्ट्रल बैंक से कर्ज भी दिलाया गया था। जिसे यहंा की ग्रामीण महिलाओं ने अब पूरा चूकता कर दिया है। यहं की महिलाओं का कहना है कि अपने काम के प्रति रूचि और लगन से उन्हे सभी कार्यो में अपार सफलता मिलती रही है।
मोंगरा समूह की अध्यक्ष श्रीमती अनिता यादव ने बताया कि सबसे पहले वर्ष 2002 में उन्होने खारडोढ़ी का खेरखेरी पारा और जुनापारा की पथरीली भूमि में वृक्षारोपण किया था। खेरखेरीपारा की भूमि के समीप बरसाती नाला होने से यहंा रोपे गए विभिन्न प्रजाति के पौधे जल्द ही हरियाली में बदलने लगे थे। मौजूदा समय में यहंा पर लगभग 20 एकड़ बजंर भूमि ने हरियाली की चादर ओढ़ ली है। यहंा जुनापारा और खेरखेरीपारा के दो अलग अलग जगंल की देख रेख करने वाले चौकीदारों के लिए गांव के लोग आपस में अनाज इकटठा कर उन्हे पारिश्रमिक दे रहे हैं। यहंा के ग्रामीण भी इन जगंलों को सुरक्षित रखने में अपना समय देते हैं। यहंा पर मिलने वाला मवेशिओं का चारा को ग्रामीण मिल बांट कर उपयोग कर लेते हैं। इस गांव के दोनो हरे भरे जगंल पड़ोस के गांव वालों के लिए एक मिशाल बन गए हैं।  
                   कलेक्टर ने रोपा था काजू का पौधा
खारडोढ़ी की महिलाओं का जज्बा के बारे में जशपुर के तत्कालीन कलेक्टर दर्गेश मिश्रा को पता चला तो उन्होने भी गांव पहुंच कर यहंा वृक्षारोपण तथा अन्य कार्यो का जायजा लिया। खारडोढ़ी गांव में कलेक्टर श्री मिश्रा ने भी अपनी उपस्थिति को यादगार बनाने के लिए यहंा खेरखेरी पारा की बजंर भूमि में काजू का पौधा रोपा था। यह छोटा सा पौघा अब बड़ा पेड़ बन कर फलने फुलने लगा है।गांव के लोग काजू के पेड़ की देखभाल करते रहते हैं।
खारडोढ़ी की ग्रामीण महिलाओं में सबसे पहले मोंगरा समूह का गठन कर श्रीमती अनिता यादव को इसका अध्यक्ष बनाया गया था। इस महिला के कामकाज से प्रेरित होकर गांव में महिलाओं के दो और समूह का गठन किया गया। इन तीन समूह की लगभग 50 महिलाओं ने  नौ वर्षो में पूरे गांव की तस्वीर बदल डाली है। महिला समूह व्दारा रोपे गए पौधे बड़े हो जाने के बाद यहंा मवेशियों के लिए चारा और पेड़ो की टहनियों से जलाउ लकड़ी की व्यवस्था आसानी से हो जा रही है। श्रीमती अनिता ने बताया कि खरडोढ़ी गांव की अलग पहचान बनाने में उनके सामने कई बार कठिनाई भी आई लेकिन  यहां की महिला सहयोगी रमीला बाई, प्रेमवती, पन्ना बाई जानकी बाई, पुष्पा भगत के अलावा राम साय,महादेव जैसे कई ग्रामवासियों का भरपूर सहयोग मिल जाने से उनकी सभी परेशानियंा देखते ही देखते दूर हो जाती थी। गांव के लोगों ने आपस में मिलजुल कर काम करने की अब आदत बना ली है। इसी की बदौलत खारडोढ़ी गांव के लोग अब खुशहाल रहने लगे हैं। उन्हे शासन से किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलने के बाद भी वे अपना कामकाज सुचारू ढंग से कर रही हैं।

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

क्रिसमस त्यौहार की तैयारी जोरों पर


बीटीआई चर्च में शुरू हो गई क्रिसमस की विशेष प्रार्थना
 गिरजाघरों में होने लगी प्रार्थना, दुकानों में उमड़ी भीड़
 मांदल की थाप के साथ बज रहा गिटार का मधुर संगीत 
पत्थलगांव/
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इसाई समुदाय के लोग बहुतायत में होने के कारण इन दिनो यहंा के बाजारों की रौनक देखते ही बन रही है। क्रिसमस का त्यौहार करीब आते ही इसाई समुदाय के लोग हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाने की तैयारी करने लगे हैं। प्रभु यीशु के जन्म के पर्व की तैयारी में शहर तथा दूर दराज के ग्रामीण अचंल में रहने वाले इसाई समुदाय के लोगों के चेहरों पर खुशियां दिखाई पड़ रही है।
     यहां पर इसाई समुदाय के लोग इन दिनों अपने घर और गिरजघरों की साज सज्जा में जुटे हुए हैं। क्रिसमस का त्यौहार के पहले यहंा के गिरजाघरों में प्रार्थना का दौर शुरू हो गया है, वहीं इस त्यौहार का उत्साह में शहरों से गांव में त्यौहार मनाने की खातिर पहुंच युवक युवतियंा अपने गिटार तथा अन्य वाद्ययंत्र लेकर खुशी से गीत गुनगुनाने लगे हैं।रात के समय इन दिनों मांदल की थाप में युवक युवतियों का नाच गाना देखते ही बन रहा है।
      पत्थलगांव क्षेत्र में इसाई समुदाय के लोगों की अधिक संख्या होने के कारण यहंा पर दिसंबर महिने के पहले पखवाड़े से ही शहर में क्रिसमस के सामानों की दुकानें सजने लगती हैं। अब जब क्रिसमस त्यौहार के कुछ ही दिन बचे हैं तो दुकानों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है। क्रिसमस के मौके पर बिकने वाले सामान क्रिसमस ट्री, स्टार, सजावटी फूल,गुलदस्ता , विद्युत झालर सहित अन्य फैंसी आयटमों से यहंा की दूकानें सज गई हैं। बड़े शहर और महानगरो में काम काज करने वाले इसाई समुदाय के युवक युवतियां क्रिसमस का त्यौहार को अपने परिजनों के साथ मनाने के लिए वापस लौटने लगे हैं। ये लोग अपने परिजनों के बीच पहुंचने से पहले क्रिसमस के सामान की जमकर खरीददारी कर रहे हैं। शहर और गांव में रहने वाले युवक युवतियंा भी दुकानों में पहुंच कर खरीदी में व्यस्त हो गए हैं। यहंा के दुकानदारों का कहना है कि क्रिसमस के मौके पर हल्के सामानों की बिक्री नहीं होती है। इसके विपरित मंहगे इलेक्ट्रानिक झूमर, क्रिसमस ट्री, क्रिसमस स्टार,प्रभु यीशु और माता मरियम की मुर्तियों की अधिक मांग बनी हुई है। यहंा के दुकानदारों ने इस वर्ष चायना के क्रिसमस स्टार और विद्युत झालर के अनेक आयटम रखे हैं। ये सामान ग्राहकों के बजट के अनुरूप होने के कारण इनकी बिक्री अधिक हो रही हैं। क्रिसमस के अवसर पर दुकानदारों ने प्रेम का संदेश देने वाले काफी आकर्षक सांता ड्रेसेज, कैंडल, क्रिव के भी अनेक आयटम मंगा लिए हैं। इन आयटम को ग्राहक अपने बच्चों के लिए अवश्य खरीद रहे हैं। वेलवेट वाली हर साईज की सांताड्रेस इस वर्ष विशेष आकर्षण का केन्द्र बन गई हैं। महज 150 रू. से लेकर 1500 रू. तक की इस ड्रेस को देखने के बाद ग्राहक इसकी खरीदी के बगैर नहीं लौट पाते हैं। इनके अलावा सांता क्लोज के स्टेचु, ग्रिटिंग कार्ड की भी जमकर बिक्री हो रही है। इसाई समुदाय के लोग क्रिसमस के मौके पर जमकर खरीददारी में व्यस्त हो गए हैं।

क्रिसमस के अवसर पर यहंा के सुसडेगा गांव में गिटार के साथ नागपुर का युवक गौरव यदु
     
                 
  कछार घाटी से दिखते हैं जुगनू
  यहंा पर क्रिसमस के मौके पर गांव गांव में रात के समय क्रिसमस स्टार चमकते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। लुड़ेग के समीप झंडाघाट,जशपुर के पास की लोरो घाटी , घरजियाबथान की घाटी तथा कछार घाटी से गुजरते वक्त आसपास के गांवों में रात के समय जुगनु की तरह इन क्रिसमस स्टार की खुबसुरती देखते ही बन रही है। यहंा पर कुनकुरी का बड़ा चर्च और पत्थलगांव स्थित कैथोलिक आश्रम का पुराना चर्च में काफी आकर्षक साज सज्जा की गई है। बीटीआई और राहा कार्यालय में भी क्रिसमस की तैयारी अंतिम दौर पर पहुंच गई हैं। आस पास के गांवों में युवक युवतियां मादंर वाद्ययंत्र की थाप पर झुमते हुए देखी जा रही हैं। यहंा जामजुनवानी, पाकरगांव, कंटगजोर, लुड़ेग, बारबन्द के गिरजाघरों के आस पास रात के समय नाच गानो का दौर देखते ही बन रहा है।
                    मांदल की थाप पर झूम रहे लोग
  यहंा पर क्रिसमस और नव वर्ष नजदीक आते ही बसों में भीड़ बढ़ जाती है। इस अचंल में रहने वाले इसाई समुदाय के लोग मुम्बई,गोवा,दिल्ली,जम्मू,कोलकोता और पंजाब में रह कर नौकरी करते हैं।ये लोग क्रिसमस का त्यौहार अपने परिजनों के साथ गांव में आकर मनाते हैं। इसी वजह इन दिनों बसों में भीड़ बढ़ गई है। इन दिनों छोटे से गांव में मांदल की थाप पर यदि कोई  बड़ा अफसर नाचते हुए मिल जाए तो आश्चर्य की बात नहीं रहती। देश के विभिन्न हिस्सों में उंचे पद पर पदस्थ इसाई समुदाय के लोगों का गांव में जमावड़ा लगने लगा है। ऐसे लोग अपने परिचित और परिवार के साथ क्रिसमस की खुशियों को दोगुना करने में लगे हैं।

बुधवार, 14 दिसंबर 2011


घर पर ही जैविक खाद तैयार कर रहा किसान



किसान कर रहे हैं साग सब्जी के साथ फूलों की खेती
 रमेश शर्मा
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
जशपुर जिले के पत्थलगांव विकास खंड अन्तर्गत 18 गांव के किसानों ने रासायनिक खाद को छोड़कर जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। किसानों के घर में ही उपलब्ध गोबर तथा कूड़ा करकट से बनने वाली जैविक खाद का उपयोग करने से खेतों की हरियाली बढ़ गई है। इन किसानों का कहना है कि प्रारम्भिक तौर पर जैविक खाद का उपयोग करने के अच्छे नतिजे सामने आए हैं।
      लुड़ेग के किसान सुभाष प्रधान ने बताया कि यहंा के अन्य किसानों व्दारा अपने खेतों में रासायनिक खाद के बदले जैविक खाद का इस्तेमाल करते हुए देख कर  उसने भी अपने खेतों में इस बार जैविक खाद को अपनाया है। सुभाष प्रधान ने अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में जैविक खाद के सहारे साग सब्जी की खेती शुरू की है। इस किसान का कहना था कि गोभी मिर्ची और भिंडी के पौधे लगाने के बाद एक महिने में ही उसके खेतों में हरियाली छा गई थी। अब वह पहली बार इस फसल से नगद लाभ लेने लगा है। इस किसान का कहना था कि एक एकड़ में लगभग 50 किलो रासायनिक खाद के बदले उसे महज तीन किलो जैविक खाद का उपयोग करना पड़ रहा है। सुभाष प्रधान का कहना था कि इन दिनो खेती के काम में मजदूरों की समस्या को देखते हुए जैविक खाद ने उसकी कई मुश्किलों को दूर कर दिया है।
  लुड़ेग में रूद्रधर खुंटिया, केडी खंुटिया, प्रफुल्ल पटेल तथा सुरेश अग्रवाल ने भी अपने खेतों में रासायनिक खेती के बदले जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। इन किसानों ने भी जैविक खाद को अधिक उपयोगी बताया है। सुरेश अग्रवाल का कहना था कि इन दिनों किसान के पास में सबसे बड़ी मजदूर की समस्या रहती है। उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग करने पर उन्हे युरिया, डीएपी तथा पोटाश खाद खेतों में डालने के लिए बार बार मजदूरों की तलाश करनी पड़ती थी। जैविक खाद की अपेक्षा रासायनिक खाद काफी महंगी होने के कारण इस पर मजदूरी खर्च भी अधिक रहता था। इसके विपरित जैविक खाद का उपयोग करने पर मजदूरी का खर्च भी नाममात्र रह गया है। यहंा के किसानों का कहना कि यदि अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार की जाए तो खेती किसानी का खर्च पहले के मुकाबले में आधा से भी कम पड़ रहा है।
           कुड़ा करकट से बनने लगी खाद
  पत्थलगांव में उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव विकास खंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए यहंा पर 18 गांव के 66 किसानों को निशुल्क जैविक खाद उपलब्ध कराई गई है। इन किसानों को अपने घर की बाड़ी में जैविक खाद बनाने के लिए आधुनिक टेंक का भी वितरण किया गया है। किसान अपने घर पर ही गोबर तथा कुड़ा करकट के साथ पत्तियों को खाद के टेंक में डाल कर खाद तैयार कर रहे हैं। मिर्जापुर के अकलू राम ने बताया कि उसने अपनी बाड़ी में ही जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया है। अकलू राम का कहना था कि खाद बनाने के टेंक में गोबर तथा कुड़ा करकट डाल कर तीन माह में लगभग साढ़े चार क्विंटल अच्छी खाद तैयार कर ले रहा है। कई किसानों के पास अधिक भूमि होने पर उनके व्दारा खाद तैयार करने के दो से ज्यादा टेंक बना रखें हैं।  उद्यान विभाग की पहल के बाद यहंा पर केराकछार, ईला, तमता, बटूराबहार, मिर्जापुर, पत्थलगांव, मक्कापुर, पालीडिह, पाकरगांव गांव में किसान अपने घर पर ही केंचवा जैविक खाद बनाने लगे हैं।
            पाकरगांव में फुलों की खेती
   इस अचंल के किसानों का कहना था कि रासायनिक खाद के मुकाबले में जैविक खाद की फसल का उपयोग करना काफी लाभप्रद साबित हो रहा है। पाकरगांव में गणेश बेहरा ने अपनी बाड़ी में  साग सब्जी की फसल के साथ फुलों की खेती का काम भी शुरू किया है। उन्होने कहा कि इसमें जैविक खाद का प्रयोग करने से काफी अच्छा उत्पादन आया है। स्थानीय बाजार में फुलों की हर समय मांग बनी रहने से इस किसान के पास घर बैठे फूलों के ग्राहक मिलने लगे हैं।
रमेश शर्मा पत्‍थलगॉंव

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

जैविक खाद से खेतों में छाई हरियाली

घर पर ही जैविक खाद तैयार कर रहा किसान

किसान कर रहे हैं साग सब्जी के साथ फूलों की खेती

रमेश शर्मा
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
जशपुर जिले के पत्थलगांव विकास खंड अन्तर्गत 18 गांव के किसानों ने रासायनिक खाद को छोड़कर जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। किसानों के घर में ही उपलब्ध गोबर तथा कूड़ा करकट से बनने वाली जैविक खाद का उपयोग करने से खेतों की हरियाली बढ़ गई है। इन किसानों का कहना है कि प्रारम्भिक तौर पर जैविक खाद का उपयोग करने के अच्छे नतिजे सामने आए हैं।
      लुड़ेग के किसान सुभाष प्रधान ने बताया कि यहंा के अन्य किसानों व्दारा अपने खेतों में रासायनिक खाद के बदले जैविक खाद का इस्तेमाल करते हुए देख कर  उसने भी अपने खेतों में इस बार जैविक खाद को अपनाया है। सुभाष प्रधान ने अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में जैविक खाद के सहारे साग सब्जी की खेती शुरू की है। इस किसान का कहना था कि गोभी मिर्ची और भिंडी के पौधे लगाने के बाद एक महिने में ही उसके खेतों में हरियाली छा गई थी। अब वह पहली बार इस फसल से नगद लाभ लेने लगा है। इस किसान का कहना था कि एक एकड़ में लगभग 50 किलो रासायनिक खाद के बदले उसे महज तीन किलो जैविक खाद का उपयोग करना पड़ रहा है। सुभाष प्रधान का कहना था कि इन दिनो खेती के काम में मजदूरों की समस्या को देखते हुए जैविक खाद ने उसकी कई मुश्किलों को दूर कर दिया है।
  लुड़ेग में रूद्रधर खुंटिया, केडी खंुटिया, प्रफुल्ल पटेल तथा सुरेश अग्रवाल ने भी अपने खेतों में रासायनिक खेती के बदले जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। इन किसानों ने भी जैविक खाद को अधिक उपयोगी बताया है। सुरेश अग्रवाल का कहना था कि इन दिनों किसान के पास में सबसे बड़ी मजदूर की समस्या रहती है। उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग करने पर उन्हे युरिया, डीएपी तथा पोटाश खाद खेतों में डालने के लिए बार बार मजदूरों की तलाश करनी पड़ती थी। जैविक खाद की अपेक्षा रासायनिक खाद काफी महंगी होने के कारण इस पर मजदूरी खर्च भी अधिक रहता था। इसके विपरित जैविक खाद का उपयोग करने पर मजदूरी का खर्च भी नाममात्र रह गया है। यहंा के किसानों का कहना कि यदि अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार की जाए तो खेती किसानी का खर्च पहले के मुकाबले में आधा से भी कम पड़ रहा है।
           कूड़ा करकट से बनने लगी खाद
  पत्थलगांव में उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव विकास खंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए यहंा पर 18 गांव के 66 किसानों को निशुल्क जैविक खाद उपलब्ध कराई गई है। इन किसानों को अपने घर की बाड़ी में जैविक खाद बनाने के लिए आधुनिक टेंक का भी वितरण किया गया है। किसान अपने घर पर ही गोबर तथा कुड़ा करकट के साथ पत्तियों को खाद के टेंक में डाल कर खाद तैयार कर रहे हैं। मिर्जापुर के अकलू राम ने बताया कि उसने अपनी बाड़ी में ही जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया है। अकलू राम का कहना था कि खाद बनाने के टेंक में गोबर तथा कुड़ा करकट डाल कर तीन माह में लगभग साढ़े चार क्विंटल अच्छी खाद तैयार कर ले रहा है। कई किसानों के पास अधिक भूमि होने पर उनके व्दारा खाद तैयार करने के दो से ज्यादा टेंक बना रखें हैं।  उद्यान विभाग की पहल के बाद यहंा पर केराकछार, ईला, तमता, बटूराबहार, मिर्जापुर, पत्थलगांव, मक्कापुर, पालीडिह, पाकरगांव गांव में किसान अपने घर पर ही केंचवा जैविक खाद बनाने लगे हैं।
            पाकरगांव में फूलों की खेती
   इस अचंल के किसानों का कहना था कि रासायनिक खाद के मुकाबले में जैविक खाद की फसल का उपयोग करना काफी लाभप्रद साबित हो रहा है। पाकरगांव में गणेश बेहरा ने अपनी बाड़ी में  साग सब्जी की फसल के साथ फुलों की खेती का काम भी शुरू किया है। उन्होने कहा कि इसमें जैविक खाद का प्रयोग करने से काफी अच्छा उत्पादन आया है। स्थानीय बाजार में फुलों की हर समय मांग बनी रहने से इस किसान के पास घर बैठे फुलों के ग्राहक मिलने लगे हैं।
रमेश शर्मा