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गुरुवार, 9 अगस्त 2012

महँगे और आकर्षक पौधों के प्रति बढ़ता क्रेज

रंग बिरंगे फूलों की दुकान
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा
बरसात के मौसम में घरों के आसपास विभिन्न फूल तथा अन्य शो पीस पौधे रोपने के लिए उपयुक्त मौसम होने के कारण इन दिनों शहर में रंग बिरंगे फूल एवं विभिन्न प्रजाति के पौधे बेचने वालों की कई जगह दुकान सजी हुई हैं।
    इन दुकानों में तरह तरह के पौधे देखने के बाद आमजन का पौधे रोपने में लगाव बढ़ता जा रहा है। शहर में कई प्रकृतिप्रेमी अपने घरों की छत पर गमलों में पौधे रोप कर पर्यावरण को बढ़ावा दे रहे हैं। रंग बिरंगे फूलों की साज सज्जा से घर भी आकर्षक लगने लगे हैं। अपने घरों की साज सज्जा के लिए ज्यादातर लोगों ने फूल और शो पीस के पौधों को अपनी पहली पसंद बना लिया है।
     शहर में इन दिनों केरल, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे दूरस्थ राज्यों से लाए गए विभिन्न प्रजाति के पौधे महंगे होने के बाद भी यहंा पर इनकी जमकर बिक्री हो रही है। इन दुकानों में सजे हुए फलदार,फूलदार एवं छायादार पौधे यहंा के लोगों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। यंहा पर पंचायती धर्मशाला के आस पास पौधे बेचने वालों की कई दुकान लगी हुई हैं। इन सभी दुकानों में इन दिनों ग्राहको की भीड़ लगी रहती है। जेपी होटल के प्रांगण में भुवनेश्‍वर उड़ीसा से पौधे विक्रय करने वाला अनिल सिंह ने बताया कि वे पिछले एक दशक से पौधे बेचने एवं घरों की साज सज्जा करने का काम कर रहा है। इस विक्रेता ने बताया कि कई घरों में बागवानी तैयार करने का काम किया है।इस विक्रेता के पास 200 से अधिक प्रकार के पौधों का सगं्रह है। इस विक्रेता का कहना था कि वह लोगों की पसंद के अनुसार भांति भांति के पौधे लेकर आता है तथा इसके माध्यम से हरियाली फैलाने का सन्देश भी देता है। श्री सिंह ने बताया कि पिछले साल जिस क्रिसमस ट्री को 200 रू. प्रति नग में बेच रहा था वह पौधा इस वर्ष 350 रू.में बेचा जा रहा है।
                      पौधे लगाने में बढ़ा रूझान 
भुवनेश्‍वर  का पौधे विक्रेता 
 यहां पर पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी पप्पी भाटिया ने बताया कि विभिन्न सजावटी व फूलदार पौधों से घर सजाने में आम लोगों का रूझान काफी बढ़ा है।घर का प्रांगण और छत पर गमलों में पौधे मुस्काराते हुए मन को सुकून देते हैं।श्री भाटिया ने बताया कि उनके पास विभिन्न प्रजाति के गुलाब के दो दर्जन से अधिक तथा अन्य रंग बिरंगे फूल वाले पौधों का अच्छा खासा संग्रह है,  इसके बाद भी वे प्रति वर्ष नए फूलवाले पौधे अवष्य खरीदते हैं।उन्होने कहा कि इन पौधों की देखरेख करने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। मगर उनके घर की हरियाली किसी आगंतुक को रास आती है तो मन प्रसन्न हो जाता है। यहंा के होटल व्यवसायी महाबीर अग्रवाल ने बताया कि उन्होने गुरबारूगोड़ा काॅलोनी में नया घर बनाया है। इसमें हरियाली को बढ़ावा देने के लिए अलग से भू खंड छोड़ा गया था। इस खाली जगह पर विभिन्न प्रकार के फूलदार और छायादार पौधे रोप देने से घर भी आकर्षक दिखने लगा है।उन्होने कहा कि बरसात का मौसम पौधे रोपने के लिए काफी उपयुक्त है। इन दिनों रोपे गए नारियल के पौधे भी अब काफी आकर्षक लगने लगे हैं।
 रमेश शर्मा

बुधवार, 14 दिसंबर 2011


घर पर ही जैविक खाद तैयार कर रहा किसान



किसान कर रहे हैं साग सब्जी के साथ फूलों की खेती
 रमेश शर्मा
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
जशपुर जिले के पत्थलगांव विकास खंड अन्तर्गत 18 गांव के किसानों ने रासायनिक खाद को छोड़कर जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। किसानों के घर में ही उपलब्ध गोबर तथा कूड़ा करकट से बनने वाली जैविक खाद का उपयोग करने से खेतों की हरियाली बढ़ गई है। इन किसानों का कहना है कि प्रारम्भिक तौर पर जैविक खाद का उपयोग करने के अच्छे नतिजे सामने आए हैं।
      लुड़ेग के किसान सुभाष प्रधान ने बताया कि यहंा के अन्य किसानों व्दारा अपने खेतों में रासायनिक खाद के बदले जैविक खाद का इस्तेमाल करते हुए देख कर  उसने भी अपने खेतों में इस बार जैविक खाद को अपनाया है। सुभाष प्रधान ने अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में जैविक खाद के सहारे साग सब्जी की खेती शुरू की है। इस किसान का कहना था कि गोभी मिर्ची और भिंडी के पौधे लगाने के बाद एक महिने में ही उसके खेतों में हरियाली छा गई थी। अब वह पहली बार इस फसल से नगद लाभ लेने लगा है। इस किसान का कहना था कि एक एकड़ में लगभग 50 किलो रासायनिक खाद के बदले उसे महज तीन किलो जैविक खाद का उपयोग करना पड़ रहा है। सुभाष प्रधान का कहना था कि इन दिनो खेती के काम में मजदूरों की समस्या को देखते हुए जैविक खाद ने उसकी कई मुश्किलों को दूर कर दिया है।
  लुड़ेग में रूद्रधर खुंटिया, केडी खंुटिया, प्रफुल्ल पटेल तथा सुरेश अग्रवाल ने भी अपने खेतों में रासायनिक खेती के बदले जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। इन किसानों ने भी जैविक खाद को अधिक उपयोगी बताया है। सुरेश अग्रवाल का कहना था कि इन दिनों किसान के पास में सबसे बड़ी मजदूर की समस्या रहती है। उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग करने पर उन्हे युरिया, डीएपी तथा पोटाश खाद खेतों में डालने के लिए बार बार मजदूरों की तलाश करनी पड़ती थी। जैविक खाद की अपेक्षा रासायनिक खाद काफी महंगी होने के कारण इस पर मजदूरी खर्च भी अधिक रहता था। इसके विपरित जैविक खाद का उपयोग करने पर मजदूरी का खर्च भी नाममात्र रह गया है। यहंा के किसानों का कहना कि यदि अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार की जाए तो खेती किसानी का खर्च पहले के मुकाबले में आधा से भी कम पड़ रहा है।
           कुड़ा करकट से बनने लगी खाद
  पत्थलगांव में उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव विकास खंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए यहंा पर 18 गांव के 66 किसानों को निशुल्क जैविक खाद उपलब्ध कराई गई है। इन किसानों को अपने घर की बाड़ी में जैविक खाद बनाने के लिए आधुनिक टेंक का भी वितरण किया गया है। किसान अपने घर पर ही गोबर तथा कुड़ा करकट के साथ पत्तियों को खाद के टेंक में डाल कर खाद तैयार कर रहे हैं। मिर्जापुर के अकलू राम ने बताया कि उसने अपनी बाड़ी में ही जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया है। अकलू राम का कहना था कि खाद बनाने के टेंक में गोबर तथा कुड़ा करकट डाल कर तीन माह में लगभग साढ़े चार क्विंटल अच्छी खाद तैयार कर ले रहा है। कई किसानों के पास अधिक भूमि होने पर उनके व्दारा खाद तैयार करने के दो से ज्यादा टेंक बना रखें हैं।  उद्यान विभाग की पहल के बाद यहंा पर केराकछार, ईला, तमता, बटूराबहार, मिर्जापुर, पत्थलगांव, मक्कापुर, पालीडिह, पाकरगांव गांव में किसान अपने घर पर ही केंचवा जैविक खाद बनाने लगे हैं।
            पाकरगांव में फुलों की खेती
   इस अचंल के किसानों का कहना था कि रासायनिक खाद के मुकाबले में जैविक खाद की फसल का उपयोग करना काफी लाभप्रद साबित हो रहा है। पाकरगांव में गणेश बेहरा ने अपनी बाड़ी में  साग सब्जी की फसल के साथ फुलों की खेती का काम भी शुरू किया है। उन्होने कहा कि इसमें जैविक खाद का प्रयोग करने से काफी अच्छा उत्पादन आया है। स्थानीय बाजार में फुलों की हर समय मांग बनी रहने से इस किसान के पास घर बैठे फूलों के ग्राहक मिलने लगे हैं।
रमेश शर्मा पत्‍थलगॉंव