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सोमवार, 4 फ़रवरी 2013

पानी के मोल टमाटर, खरीददार नदारद

ग्राहकों का इंतजार करते हुए टमाटर विक्रेता

            
लुड़ेग का टमाटर रस संयंत्र बन्द हो जाने से भटक रहे किसान
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा
 
पुर जिले की पत्थलगांव सब्जी मंडी में इन दिनो किसानों को पानी के मोल में भी टमाटर के खरीददार नहीं मिल रहे हैंटमाटर की अधिक आवक होने से स्थानीय बाजार में खरीददारों का मनमाने रवैये से किसान काफी निरा हो गए हैं। यहॉं टमाटर की उपज लेने वाले किसानों का कहना है कि उनकी परेषानी से उबारने के लिए राजनैतिक दल के नेताओं के साथ शासकीय अमले ने भी चुप्पी साध रखी है यहॉं की सब्जी मंडी तथा अन्य साप्ताहिक बाजारों में किसानों को पानी के मोल पर टमाटर खरीदने वाले नहीं मिलने से वे मायुस हो गए हैंकिसानों का कहना है कि इन दिनो खेतों से एक कांवर टमाटर बेच कर उन्हे दिन भर की मजदूरी भी नहीं मिल पा रही हैटमाटर की फसल बेचकर औने पौने दाम मिलने से निरा होकर ज्यादातर किसानों की अब खेतों से फसल तोड़ने में ही रूचि नहीं रह गई हैपिछले एक सप्ताह से यहॉं सब्जी मंडी में टमाटर के भावों में लगातार गिरावट के बाद 40, 50 रू. प्रति कांवर में भी टमाटर के खरीददार नहीं मिल रहे हैं 
           
पत्थलगांव सब्जी मंडी में टमाटर की खरीदी करने वाले बाहर के व्यापारी नहीं पहुंचने के कारण यहॉं किसानों अच्छी खासी परेशानी का सामना करना पड़ा टमाटर की लोकल मांग बेहद कम रहने की वजह से सब्जी मंडी में दोपहर के बाद भी टमाटर लेकर पहुंचे किसानों की लम्बी कतार लगी रहती है ग्राम पगंषुवा से टमाटर के टोकरे लेकर आए किसान मगंलराम ने बताया कि कल सारा दिन खेतों में मेहनत करके उसने टमाटर की फसल निकाली थी इस फसल को बाजार में लाने के बाद पानी के मोल में भी कोई खरीददार नहीं मिल रहा है इसी तरह का दुखड़ा मुड़ापारा के हृदयराम, सांझूराम,बखला तथ गणपत का भी था इन किसानों का कहना था कि घरेलू जरूरत के साथ अन्य काम काज को पूरा करने के लिए वे टमाटर फसल को बाजार में बेचने के लिए पहुंचते हैं लेकिन यहॉं पर खरीददार ही नहीं मिल पाते हैं सब्जी मंडी में इन दिनों अधिक पके हुए टमाटर की थोड़ी सी भी पूछ परख नहीं है 
                             
टमाटर किसानों को चाहिए अच्छा बाजार
    
टमाटर की अधिक मात्रा में पैदावार लेने वाले किसानों का कहना है कि उनके पास अपनी उपज बेचने के लिए अच्छा बाजार नहीं मिल पाने से अब खेती के काम से भरोसा टूटने लगा हैपत्थलगांव क्षेत्र की अनुकूल जलवायु के चलते यहॉं सौ से अधिक गांवों में टमाटर की दो अलग अलग फसल ली जाती है इन किसानों का कहना है कि टमाटर की पहली फसल के दौरान ही उन्हे अच्छे दाम मिल पाते हैंइसके बाद उन्हे खरीददारों की मर्जी पर ही चलना पड़ता है यहॉं पाकरगांव के किसान गणेचन्द्र बेहरा ने बताया कि दिसम्बर जनवरी माह में आने वाली टमाटर की दूसरी फसल का भवान ही मालिक रहता है कई बार मौसम का मिजाज बदलने के दौरान उन्हे टमाटर की उपज को फेंकने के लिए भी पैसे खर्च करने पड़ते हैं यहॉं कृषि उपज मंडी के पूर्व अध्यक्ष डमरूधर यादव का कहना था कि टमाटर की उपज लेने वाले किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए अच्छा बाजार देने के लिए कई बार सुझाव दिया गया है लेकिन इस दिषा में सार्थक पहल नहीं होने से किसानों की परेषानी ज्यों कि त्यों बनी हुई है उन्हांेने कहा कि टमाटर की उपज लेने वाले किसानों के पास स्थानीय स्तर में अच्छा बाजार एवं परिवहन के साधन नहीं होने से उन्हे बार बार खरीददारों के षोषण का षिकार होना पड़ रहा है 
                      
लुड़ेग टमाटर रस संयंत्र का अनुबंध निरस्त
स्थानीय खरीददारों ने भी टमाटर से मुंह मोड़ा
    यहॉं के किसानों को टमाटर उपज के अच्छे दाम दिलाने के लिए लुड़ेग में स्थापित शासकीय टमाटर ग्रेडिंग एवं प्रोसेसिंग युनिट पर भी बीते एक साल से ताला लग गया हैइस युनिट को जिला कलेक्टर अंकित आनंद ने रायपुर के निजी व्यवसायी को लीज पर दिया थाकुछ दिनों तक यहॉं किसानों से टमाटर की खरीदी करके विभिन्न उत्पाद तैयार किए गए थे लेकिन अब इस युनिट पर ताला लग जाने से यहॉं पहुंचने वाले किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा हैइस युनिट में लाखों रू. लागत वाली मषीन बेकार साबित हो रही हैंउद्यान विभाग व्दारा यहॉं बिजली बिल का भुगतान नहीं करने से यहॉं का बिजली कनेक्षन काटा जा चुका हैंबागबहारा के कांग्रेस नेता जगन्नाथ गुप्ता का कहना है कि भाजपा शासन की लापरवाही का इससे बड़ा उदाहरण नहीं मिल सकता हैउन्होने कहा कि लुड़ेग में टमाटर की शासकीय युनिट को प्रारम्भ करने में जिला प्रशासन कोई रूचि नहीं दिखा रहा है इस वजह किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बिचौलियों के पास शोषण का शिकार होना पड़ रहा है
   
पत्थलगांव उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रका सिंह भदौरिया ने बताया कि लुड़ेग स्थित शासकीय टमाटर रस संयत्र बीते एक साल से बन्द पड़ा है 
खेतों में टमाटरों के ढेर
इस उद्योग को लीज पर लेने वाले व्यापारी की धरोहर राशि जप्त कर उनका अनुबंध निरस्त कर दिया गया हैश्री भदौरिया ने बताया कि लुड़ेग में स्थापित किया गया टमाटर रस संयत्र की देख रेख करने के लिए कोई भी चौकीदार अथवा अन्य कर्मचारी नहीं होने से उन्हे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा हैउन्होने बताया कि इस संयत्र की बिजली कट जाने के बाद यहॉं शाम ढलते ही अंधेरा छा जाता हैऐसे में रात को यहॉं चोरों का हमेषा भय बने रहता हैलुड़ेग का शासकीय टमाटर रस संयत्र चलाने के लिए अब नए व्यवसायी की तला की जा रही है

शनिवार, 17 नवंबर 2012

रंग लाई अखबारनवीश की खबर


        संवरने लगा अव्यवस्थित मुक्तिधाम


पत्थलगांव/
        जशपुर जिले के पत्थलगांव में मुक्तिधाम का जीर्णोध्दार करने के लिए रोटरी क्लब के सदस्यों ने सार्थक पहल के बाद अच्छे परिणाम दिखने लगे हैं। रोटरी क्लब के सदस्यों व्दारा  मुक्तिधाम परिसर में छायादार एवं फूलों के पौधे रोप कर  पर्यावरण सरंक्षण की दिशा में भी सराहनीय पहल की जा रही है।
            पत्थलगांव  मुक्तिधाम की अव्यवस्था को सुधारने के लिए मुख्य व्दार लगा कर चारों तरफ की बाउन्ड्री को ठीक कराया गया है।मुक्तिधाम परिसर में चारो तरफ कचरे का ढ़ेर को हटा कर अच्छी व्यवस्था करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके अलावा मुक्तिधाम का प्रवेश व्दार पर भी लोहे का आकर्षक गेट लगा कर सुरक्षा के पुख्ता इन्तजाम किए गए हैं।
    पिछले दिनो स्थानीय अखबार नवीश ने मुक्तिधाम में व्याप्त अव्यवस्था की खबर को प्रमुखता के साथ प्रकाशित किया था। इस खबर के बाद रोटरी क्लब के अध्यक्ष महेन्द्र अग्रवाल तथा सक्रिय सदस्य माधव शर्मा,हरगोविन्द अग्रवाल ने मुक्तिधाम के जीर्णोध्दार का बीड़ा उठाया था।रोटरी क्लब के सदस्यों ने क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर डा.अशोक कुमार सिंह के पत्थलगांव प्रवास के दौरान मुक्तिधाम के जीर्णोध्दार का प्रस्ताव रखा थ। इस कार्य को समाज सेवा का बेहतर काम बताते हुए डा.सिंह ने तत्काल 25 हजार रू.की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई थी।रोटरी क्लब के डिस्ट्रिक्ट गवर्नर का प्रोत्साहन के बाद  के पार्षद रामअवतार अग्रवाल ने भी इस कार्य के लिए 50 हजार रू.का योगदान दिया था।पत्थलगांव मुक्तिधाम को व्यवस्थित करने के काम में शहर के कई दान दाताओं ने आर्थिक सहायता देकर रोटरी क्लब के सदस्यों की इस पहल के लिए सराहना की जा रही है।
              मुक्तिधाम में पर्यावरण संरक्षण की योजना
   यहां का मुक्तिधाम की रखवाली पर ध्यान नहीं देने के फलस्वरूप ही  के सामान पर चोरों की नजर पड़ गई थी। अज्ञात चोरो ने मुक्तिधाम का अंतिम संस्कार स्थल पर लगाए गए लोहे के मजबूत खम्भों को काट कर गायब कर दिया था। इन सामग्री को पुनः स्थापित कर  ज्यादातर अव्यवस्थाओं को दूर कर लिया गया है।  रोटरी क्लब के अध्यक्ष श्री अग्रवाल ने बताया कि लोगों का अंतिम पड़ाव का महत्वपूर्ण स्थान को बेहतर बनाने के लिए सभी का सहयोग और मशविरा लिया जा रहा है। जीर्णोध्दार के काम में पर्यावरण सरक्षंण को भी प्राथमिकता दी गई है। मुक्तिधाम के चारों ओर छायादार एवं फूल के पौधे रोप कर इनकी रखवाली की भी व्यवस्था की जाऐगी। उन्होने कहा कि गरीब तबका के लोगों को अपने परिजन का अंतिम संस्कार करने में परेशानियों को दूर करने में भी रोटरी क्लब के सदस्य सहयोग देंगे।  मुक्तिधाम परिसर में ही अंतिम संस्कार की सामग्री उपलब्ध कराने के साथ अन्य जरूरी सुविधाओं का भी विस्तार करने की योजना है।मुक्तिधाम का जीर्णोध्दार के कार्य में रोटरी के पदाधिकारी रमेश अग्रवाल, अशोक आदिवासी, प्रवीण गर्ग, पप्पू शर्मा, श्रीमती आरती,आशिष अग्रवाल, विकास अग्रवाल,शेखर त्रिपाठी, बलदेव नायक, डा.बीएल भगत तथा मनोज अम्बस्थ का सराहनीय योगदान रहा है।

सार्थक दीपावली से गरीबों के चेहरों पर छाई खुशी


   रमेश  शर्मा
पत्‍थलगॉव
    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में दीयों का त्यौहार पर महंगी रोशनी और पटाखों का कानफोड़ू शोर से अलग हट कर दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती में रहने वाले बच्चों के साथ सार्थक दीपावली मनाने का प्रेरणा दायक कार्यक्रम की सभी ने सराहना की है।
     गरीबों के साथ सार्थक दीपावली मनाने के लिए बगीचा के प्रमुख समाजसेवी मकेश शर्मा के व्दारा यह पहल की गई थी। श्री शर्मा ने बगीचा तहसील अन्तर्गत पहाड़ी कोरवाओं की बस्ती रोकड़ा, देवडाढ़ और कचंनडीह जैसे दूरस्थ एवं पहुंच विहिन गांवों में पहुंच कर इस वर्ष गरीबों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया था। उनके छोटे से प्रयास की बदौलत तीन पहाड़ी कोरवा गांव के अनेक गरीब तबका के लोगों ने शहरी लोगों की तरह नए कपड़े पहनकर रंगीन आतीशबाजी की रोशनी से अपने कच्चे घरों में उजियारा फैलाया है। मुकेश शर्मा का कहना था कि दूसरों को खुशी देकर जो आनंद मिलता है उसे किसी भी तरह अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है।
                        पत्रकार की प्रेरणा
     दरअसल यहां पहाड़ी कोरवा तथा अन्य गरीब तबका के लोगों के लिए प्रशासनिक अधिकारी और अन्य जिम्मेदार लोग केवल बयानबाजी करके रह जाते हैं। आजादी के 65 साल के बाद भी यहंा के गरीबों का रहन सहन में कोई बदलाव नहीं आ पाया है।जिले के कुछ सक्रिय पत्रकार इन बेसहारा लोगों की पीड़ा को प्रमुखता के साथ जरूर उठाते हैं मगर शासकीय अमला ने  इस दिशा में कभी भी सार्थक पहल नहीं की है। मुकेश शर्मा का कहना था कि उन्होने पहाड़ी कोरवा तथा गरीबों की पीड़ा पर ईमानदारी के साथ कलम चलाने वाले पत्रकार की प्रेरणा से ही गरीबों के साथ दीपावली की ख्‍ुशी बांटने का निर्णय लिया था। वे अन्य त्यौहारों में भी इस परम्परा को जीवित रखेंगे। 
  जशपुर जिले के ज्यादातर बड़े कस्बे और शहरों में मगंलवार को जब सभी लोग अपने घर और प्रतिष्ठानों में विद्युत झालर की साज सज्जा और तेज आवाज के पटाखे फोड़ने में ब्यस्त थे उस समय यहंा प्रमुख समाज सेवी मुकेश शर्मा अपने ग्रामीण साथियों के साथ गरीब बच्चों के चेहरों पर खुशी की मुस्कान लाने की कोशिश कर रहे थे। बगीचा के समीप रोकड़ा,देवडाढ़ और कचंनडीह गांव में रहने वाले पहाड़ी कोरवा परिवार के दो दर्जन से अधिक बच्चों को नए कपड़ों के साथ रंग बिरंगी फूलझड़ी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। मुकेश शर्मा ने इन गांवों में पहुंच कर पहाड़ी कोरवा परिवार की महिलाओं को साड़ी तथा अन्य बुजूर्गो को ठंड से बचने के लिए कम्बल का भी वितरण किया ।श्री शर्मा का कहना था कि  गरीबों के चेहरों पर जो खुशी झलक रही थी उसका सुखद अहसास को वे आज भी नहीं भूला पाए हैं।गरीबों के साथ सार्थक दीपावली मनाने के इस कार्यक्रम में ग्राम पंचायत रोकड़ा के सरपंच मंगरूराम,केशव यादव, भगवानों, पवन सिंह, संजय सिंह सहित अन्य लोग भी शामिल थे।



शनिवार, 13 अक्टूबर 2012

मिट्टी में सोना पर दाम औना पौना

  पुराने माप से स्वर्ण कणों का तौल में ठगे जा रहे ग्रामीण
              रमेश शर्मा
     छत्तीसगढ़ जशपुर जिले में सोने जैसी कीमती धातु का तौल करने के लिए आज भी वर्षो पुराने तराजू और आना, धान जैसे बांट का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी वजह यहां  पत्थलगांव, फरसाबहार के ग्रामीण अचंल में मिट्टी से स्वर्णकण एकत्रित करके स्थानीय दुकानदारों के पास  बेचने वालों का जमकर शोषण हो रहा है।
     पूर्व सांसद एवं प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष पुष्पा देवी सिंह ने आरोप लगाया है कि सरकार की बेरूखी के चलते यहंा ईब और मैनी नदी के तट की मिट्टी में स्वर्ण कणों का सग्रंहण करने वालों का जमकर शोषण हो रहा है। उन्होने बताया कि जिले के पत्थलगांव, फरसाबहार विकासखंड के गांवों में जगह जगह मिट्टी धोकर स्वर्ण कण तलाश  करने वालों की भीड़ दिखाई देती है। यहां मिटटी से कीमती सोना का संग्रहण करने वालों से खरीददारों व्दारा आज भी पुराने तराजू एवं पुराने बांट का इस्तेमाल किया जा रहा है।

  पूर्व सांसद पुष्पादेवी का कहना था कि इन दिनों सोने के भाव में निरतंर हो रही वृध्दि के चलते यहंा मिटटी में सोना निकालने वाले गरीब परिवार का रहन सहन भले ही बदल गया है मगर सोने का तौल करने के लिए स्थानीय खरीददारों व्दारा इलेक्ट्रानिक तराजू के स्थान पर वर्षो पुराने आना रत्ती और धान का दाना वाला माप का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होने बताया कि यहंा पर मिटटी में सोना तलाश  कर उसे बेचने वालों को इसकी कीमत देने के लिए धान का दाना पर ही भाव तय किया जाता है।

   उल्लेखनीय है कि जिले के पत्थलगांव व फरसाबहार और कांसाबेल विकासखंड अन्तर्गत कई गांव के लोग ईब और मैनी नदी के तट पर मिटटी में कीमती स्वर्ण कणों की तलाश  कर के अपना जीवन यापन करते हैं।यहंा पर तिलंगा, बागबहार, तरेकेला, सबदमुंडा, बरजोर, हथगड़ा, सोनाजोरी, सिहारजोरी, धौरासांड़ गांव के लोग बरसात के दिनो में अपने पूरे परिवार के साथ मिटटी में सोना तलाश ने का काम में व्यस्त हो जाते हैं। मिटटी और रेत को पानी में धोने के कठिन प्रक्रिया पूर करके इन ग्रामीणों के पास प्रति दिन 500 से एक हजार रू. तक के स्वर्ण कण इकटठे हो जाते हैं। 

    मिटटी से कीमती सोना निकालने वाले इन ग्रामीणों को सोने के दाम में बेतहाश ा वृध्दि होने से भले ही अच्छी खासी आमदनी होने लगी है। मगर कीमती सोना का तौल करने के लिए खरीददारों के पास आज भी प्रचलन से बाहर के माप होने से इन गरीबों का जमकर शोषण हो रहा है।बागबहार से पांच कि.मी.दूर तिलंगा गांव का सुखबासु पारा में रहने वाले राजुराम, सोमारी बाई, लोहरा एवं पीलाराम का कहना था कि वे मजदूरों का ग्रुप बना कर मिटटी में सोना निकालने का काम करते हैं। इस दौरान मिटटी से मिलने वाले सोने के कणों को बेच कर राश ि को आपस में बराबर बांट लेते हैं। ग्राम बागबहार में राजुराम नामक एक मजदूर ने बताया कि यहंा सोना की कीमत तोला में नहीं बल्कि धान का एक दाना के तौल पर तय की जाती है। इन दिनो सोना के भाव में तेजी के चलते एक दाना धान के बराबर सोना के दाम 100 रू.से बढ़कर 150 रू.तक पहुंच गए हैं। 

      यहां  पर ग्रामीणों से सोना खरीदने वाले एक स्थानीय व्यापारी का कहना था कि धान के 200 दाने के बराबर एक तोला का वजन है। यहंा मिट्टी में मिलने वाला सोना 24 कैरेट का होने के बाद भी इसमें मिट्टी के अंश  रह जाते हैं। इसलिए स्थानीय स्तर पर सोने का भाव कम नहीं है। फरसाबहार के थाना प्रभारी ए आर छात्रे ने बताया कि यहां  मिट्टी में स्वर्ण कण तलाश  करने वाले ज्यादातर भोले भाले लोग होने के कारण वे सोना का तौल में शोषण होने की बात से अनभिज्ञ हैं। उन्होने बताया कि इस अचंल में आसपास के नदी नालों में ग्रामीणों व्दारा काफी बड़ी मात्रा में स्वर्ण कण निकालने का काम किया जाता है। बरसात के दिनों में मिट्टी गिली होने तथा नदी नालों में पानी आसानी से मिल जाने के कारण यहंा जगह जगह स्वर्ण कण तलाश ने वालों की टोली दिखाई देती है। श्री छात्रे ने कहा कि इस अचंल में लम्बे समय से सोना तौलने के लिए धान का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। इस संबंध में यदि सोना संग्रहण करने वालो की श िकायत मिलती है तभी वे मामला दर्ज कर कार्रवाई कर सकते हैं।
 



शनिवार, 11 अगस्त 2012

गाजर घास फैला रही बीमारी, किसानों को परेशानी



गाजर घास के साथ
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा/ 
 जशपुर जिले में बारिश के दिनों में जगह जगह उग गई गाजर घास लोगों के लिए परेषानी का सबब बन गई है।घर के आस पास आबादी क्षेत्र के अलावा खेतों में भी गाजर घास बहुतायत में देखी जा रही है। फसल के बीच में स्वतः उगने वाली गाजर घास से फसल प्रभावित होने पर किसानों को इससे अच्छी खासी परेषानी का सामना करना पड़ रहा है।
  शहर में जगह जगह उग चुकी गाजर घास की सफाई के लिए नगर पंचायत ने अभी तक कोई पहल नहीं की है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिस क्षेत्र में गाजर घास अधिक मात्रा में उग चुकी है वहां रहने वालों को चर्म रोग की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उदयानन अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया का कहना है कि गाजर घास को उखाड़ कर गडडे में दबा देने से ही राहत मिल सकती है। उन्होने कहा कि यह घास पषुओं के साथ साथ मनुष्य के लिए भी नुकसानदायक है। शहर के ज्यादातर मुहल्लों में इन दिनो गाजर घास का प्रकोप फैल गया है। गलियों में सड़क के किनारे तथा घरों के आस पास काफी बड़ी तादाद में गाजर घास उग जाने से लोगों को आने जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

  शहर में जशपुर मुख्य मार्ग के किनारे, सिंचाई कालोनी, रेस्ट हाउस मुहल्ला, बिलाईटांगर तथा वार्ड क्रमांक 7 और 8 में गाजर घास का सबसे ज्यादा प्रकोप देखा जा रहा है। बेलघाटी मुहल्ला में रहने वाले गुरूचरण सिंह भाटिया ने बताया कि उनके मुहल्ले में घरों के आसपास तथा सड़क के किनारे गाजर घास उग जाने से लोगों को काफी परेषानी का सामना करना पड़ रहा है।यहंा के किसान गणेशचन्द्र बेहरा ने बताया कि गाजर घास फसल के बीच में उग जाने से फसल की पैदावार में भी कमी आती है।उन्होने बताया कि खेतों में काम करने वाले मजदूर गाजर घास के सम्पर्क में आने से उनके व्दारा चर्म रोग की शिकायत की जाती है।श्री बेहरा ने बताया कि गाजर घास के बीज काफी सुक्ष्म होने के कारण स्वतः उग जाते हैं। उन्होने बताया कि गाजर घास का फूल आने से पहले इस उखाड़ कर नष्ट करने से ही थोड़ी राहत मिल पाती हैं।
 सिविल अस्पताल के चिकित्सक बसंत सिंह का कहना है कि गाजर घास के पौधों से बचकर रहना चाहिए। इसके सम्पर्क में आने से एलर्जी, एक्जिमा जैसे रोगों की सम्भावना बनी रहती है। उन्होने कहा कि बरसात के दिनों में यह वनस्पति घर के आस पास तथा खेत खलिहानों में काफी बड़ी तादाद में स्वतः उग जाती है।
     फूल लगने से पहले नष्ट करें
  वन मंडल अधिकारी चन्द्रषेखर तिवारी ने बताया कि वनस्पति विज्ञान में गाजर घास का नाम पार्थेनियम है। मगर क्षेत्रिय भाषा में इसे गाजर घास कहा जाता है। इस पौधे का मूल स्थान मैक्सिको वेस्टइंडिज तथा मध्य व उत्तरी अमेरिका माना जाता है। इस घास में फूल लगने से पहले ही इसे नष्ट करके त्वचा के रोगों से बचा जा सकता है। गाजर घास का प्रत्येक पौधा पांच हजार सुक्ष्म बीज पैदा कर सकता है। उन्होने बताया कि भारत में पहली बार गाजर घास महाराष्ट्र के पूर्वी क्षेत्र में 1964 में देखने को मिली थी। ऐसा माना जाता है कि अमेरिका,कनाडा से आयातित गेंहू के साथ इसका आना हुआ है।


गुरुवार, 9 अगस्त 2012

महँगे और आकर्षक पौधों के प्रति बढ़ता क्रेज

रंग बिरंगे फूलों की दुकान
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा
बरसात के मौसम में घरों के आसपास विभिन्न फूल तथा अन्य शो पीस पौधे रोपने के लिए उपयुक्त मौसम होने के कारण इन दिनों शहर में रंग बिरंगे फूल एवं विभिन्न प्रजाति के पौधे बेचने वालों की कई जगह दुकान सजी हुई हैं।
    इन दुकानों में तरह तरह के पौधे देखने के बाद आमजन का पौधे रोपने में लगाव बढ़ता जा रहा है। शहर में कई प्रकृतिप्रेमी अपने घरों की छत पर गमलों में पौधे रोप कर पर्यावरण को बढ़ावा दे रहे हैं। रंग बिरंगे फूलों की साज सज्जा से घर भी आकर्षक लगने लगे हैं। अपने घरों की साज सज्जा के लिए ज्यादातर लोगों ने फूल और शो पीस के पौधों को अपनी पहली पसंद बना लिया है।
     शहर में इन दिनों केरल, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र जैसे दूरस्थ राज्यों से लाए गए विभिन्न प्रजाति के पौधे महंगे होने के बाद भी यहंा पर इनकी जमकर बिक्री हो रही है। इन दुकानों में सजे हुए फलदार,फूलदार एवं छायादार पौधे यहंा के लोगों को काफी आकर्षित कर रहे हैं। यंहा पर पंचायती धर्मशाला के आस पास पौधे बेचने वालों की कई दुकान लगी हुई हैं। इन सभी दुकानों में इन दिनों ग्राहको की भीड़ लगी रहती है। जेपी होटल के प्रांगण में भुवनेश्‍वर उड़ीसा से पौधे विक्रय करने वाला अनिल सिंह ने बताया कि वे पिछले एक दशक से पौधे बेचने एवं घरों की साज सज्जा करने का काम कर रहा है। इस विक्रेता ने बताया कि कई घरों में बागवानी तैयार करने का काम किया है।इस विक्रेता के पास 200 से अधिक प्रकार के पौधों का सगं्रह है। इस विक्रेता का कहना था कि वह लोगों की पसंद के अनुसार भांति भांति के पौधे लेकर आता है तथा इसके माध्यम से हरियाली फैलाने का सन्देश भी देता है। श्री सिंह ने बताया कि पिछले साल जिस क्रिसमस ट्री को 200 रू. प्रति नग में बेच रहा था वह पौधा इस वर्ष 350 रू.में बेचा जा रहा है।
                      पौधे लगाने में बढ़ा रूझान 
भुवनेश्‍वर  का पौधे विक्रेता 
 यहां पर पर्यावरण एवं प्रकृति प्रेमी पप्पी भाटिया ने बताया कि विभिन्न सजावटी व फूलदार पौधों से घर सजाने में आम लोगों का रूझान काफी बढ़ा है।घर का प्रांगण और छत पर गमलों में पौधे मुस्काराते हुए मन को सुकून देते हैं।श्री भाटिया ने बताया कि उनके पास विभिन्न प्रजाति के गुलाब के दो दर्जन से अधिक तथा अन्य रंग बिरंगे फूल वाले पौधों का अच्छा खासा संग्रह है,  इसके बाद भी वे प्रति वर्ष नए फूलवाले पौधे अवष्य खरीदते हैं।उन्होने कहा कि इन पौधों की देखरेख करने में काफी मेहनत करनी पड़ती है। मगर उनके घर की हरियाली किसी आगंतुक को रास आती है तो मन प्रसन्न हो जाता है। यहंा के होटल व्यवसायी महाबीर अग्रवाल ने बताया कि उन्होने गुरबारूगोड़ा काॅलोनी में नया घर बनाया है। इसमें हरियाली को बढ़ावा देने के लिए अलग से भू खंड छोड़ा गया था। इस खाली जगह पर विभिन्न प्रकार के फूलदार और छायादार पौधे रोप देने से घर भी आकर्षक दिखने लगा है।उन्होने कहा कि बरसात का मौसम पौधे रोपने के लिए काफी उपयुक्त है। इन दिनों रोपे गए नारियल के पौधे भी अब काफी आकर्षक लगने लगे हैं।
 रमेश शर्मा

खेल खेल में पढ़ाई : मासूमों को रास आई

 पत्थलगांव/ रमेश शर्मा/
    छत्तीसगढ़ के स्कूलों में नन्हे बच्चों को खेल के साथ पढ़ाई का प्रयोग बेहद कारगर साबित हो रहा है। नन्हे बच्चों को शिक्षा से जोड़ने के लिए नर्सरी तथा बाल मंदिरों में खिलौने तथा प्रेरणादायी चित्र के माध्यम से पढ़ाया जा रहा है।छोटे बच्चों को खेल खेल में अक्षर ज्ञान तथा अन्य उपयोगी शिक्षा  देने वाले स्कूल काफी रास आ रहे हैं।
   खेल खेल में छोटे बच्चे गिनती और शरीर के विभिन्न अंग के नाम को आसानी से याद कर ले रहे हैं। बच्चों को इन स्कूलों में पढ़ाई के दौरान गीत संगीत की भी शिक्षा दी जाती है। अपने हमउम्र सहपाठियों के साथ कक्षा में खेलकूद करना और शैतानी करने की छुट के चलते बच्चों का स्कूल में देखते ही देखते समय व्यतीत हो जाता है।छोटे बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि प्रारम्भिक दौर में यह पढ़ाई बेहद लाभप्रद है।स्कूल में जाकर ये नन्हे बच्चे अपना टिफिन ,पानी की बाटल और स्कूल का बस्ता के प्रति सजग रहने लगे हैं।

    इन स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों का कहना है कि जस्ट प्ले एंड लर्न पदयति की शिक्षा नन्हे बच्चों के लिए जितनी सहज है उसके विपरित शिक्षकों के लिए यह बेहद चुनौतीभरा काम रहता है। ठीक से अपनी बात को व्यक्त तक नहीं कर पाने वाले नन्हे बच्चों की भाषा को भी समझ कर उन्हे खुश रखना बेहद कठिन काम होता है।मगर नन्हे बच्चों की मीठी बोली के बाद कोई भी कठिन काम आसानी से पूरा हो जाता हैं। नन्हे बच्चों के शिक्षकों का कहना था कि प्रारंभिक काल में शिक्षा के प्रति बच्चों को प्रेरित करना हाई स्कूल में पढ़ाने से भी ज्यादा चुनौती भरा काम रहता है। एक शिक्षिका ने बताया कि नन्हे बच्चों की शरारत तथा उनके अजीबो गरीब सवाल के बीच उन्हे कभी भी अपना काम कठिन नहीं लगता है।

सोमवार, 30 जुलाई 2012

आजादी के 64 साल बाद भी अंधविश्‍वास का सहारा


गरम सलाखों से गला
दाग कर हो रहा उपचार 
  नन्हे बच्चे भी प्रभावित 
रमेश शर्मा 
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में शिक्षा का व्यापक प्रचार प्रसार के बाद भी यहां के ग्रामीण अचंल के लोग अंध विष्वास की जकड़ से नहीं निकल पाए हैं। यहां इलाज के नाम पर गले में लोहे की गरम सलाखों से जला कर पेट दर्द एवं गला दर्द का उपचार किया जाता है। जिले में पत्थलगांव तहसील अन्तर्गत के ग्रामीण अचंल में पेट दर्द के मरीजों का उपचार का तरिका को देखकर रोंगटे खड़े हो सकते हैं। यहां पेट दर्द के बाद गला दर्द की रहस्यमयी बीमारी का प्रकोप से मुड़ाबहला गांव के पाकरडाढ़ मुहल्ले में अनेक लोग पीड़ित होने से इस गांव में दहशत का माहौल बन गया है। जुलाई माह में यहां पेट दर्द एवं गला दर्द की शिकायत यत के बाद एक महिला सहित दो लोगों की मौत हो जाने से गांव के लोग इसे दैविय प्रकोप मानकर झाड़फुंक से उपचार करा रहे हैं। मुड़ाबहला के सरपंच हीरालाल ने बताया कि गांव के समीप कुकरगांव में शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र होने के बाद भी पेट दर्द एवं गला दर्द से पीड़ित मरीजो का गरम लोहे तथा तांबे के सिक्के को आग में जला कर उससे मरीज के गले में दाग कर इलाज किया जा रहा है। पिछले दो दिनों में 4 नन्हे बच्चों सहित 37 लोग इस बीमारी की चपेट में आने के बाद यहां अंधविश्‍वास के चलते उनके गले पर गरम लोहे की सलाख से दाग दिया गया हैं।
गरम सलाखों से गला दाग कर किया गया पीड़ितों का उपचार
 पत्थलगांव ब्लॅाक मेडिकल अधिकारी डा. जे मिंज को रविवार को इस बीमारी की जानकारी मिलने के बाद प्रभावित गांव में स्वास्थ्य कैंप लगा कर मरीजों का उपचार शुरू किया गया है। प्रभावित गांव पाकरडाढ़ में तैनात गला कान के विशेषज्ञ चिकित्सक बसंत कुमार सिंग ने सोमवार को बताया कि गला व पेट दर्द की बीमारी से पीड़ित सभी मरीजों का उपचार शुरू कर दिया गया है। उन्होने बताया कि इन मरीजों की जांच के बाद वे पूरी तरह से स्वस्थ्य पाए गए हैं। डा.सिंग ने कहा कि मौसमी बुखार सर्दी खांसी की वजह से गांव के लोग अंधविष्वास में उलझ गए हैं। इसी वजह यहां  मरीजों का झाड़ फूंक अथवा गला में दाग कर इलाज कराया जा रहा था।उन्होने बताया कि गांव में लोगों को समझाने का प्रयास किया जा रहा है। तथा किसी भी तरह की बीमारी की षिकायत पर इन सभी ग्रामीणों को स्वास्थ्य विभाग की सेवाऐं लेने को कहा गया है।
                     गरम लोहे की सलाख से इलाज
    मुड़ाबहला के सरपंच हीरा साय ने बताया कि विगत 4 जूलाई को इस मुहल्ले में मानकुंवर पति मनसुख 30 वर्ष की पेट दर्द व गला दर्द के बाद अचानक मृत्यु हो गई थी। इसके बाद 26 जुलाई को इसी तरह पेट दर्द व गला दर्द की षिकायत के बाद केशर पिता धनसाय नागवंषी 8 वर्ष की भी मृत्यु हो चुकी है। उन्होने बताया कि पिछले तीन दिनो से गांव में पेट दर्द एवं गला दर्द से पीड़ितों की संख्या में लगातार इजाफा हुआ है। इसके पहले पेट दर्द व गला दर्द से दो लोगों की मौत होने से गांव में दहशत का वातावरण बन गया था। इसी वजह यहां झाड़ फूंक करने वालों की मदद ली जा रही हैं। मुड़ाबहला का पाकरडांढ़ मुहल्ले में जमलसाय का परिवार के सभी 6 सदस्य पेट दर्द व गला दर्द की बीमारी से पीड़ित हैं। जमलसाय ने अपने 4 नाबालिक बच्चों का गला दाग कर इलाज कराया है।इसी तरह तीन साल की दशमती पिता राधे तथा नौ वर्षिय नन्दकुमार पिता धरम साय सहित 37 पीड़ितों का भी गला दाग कर इलाज किया गया है। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि गांव में झाड़फूंक का काम करने वाले विष्णु यादव, मुनेश्‍वर नाग और शांतु नाग व्दारा इस तरह से पीड़ित मरीजों का लोहे की सलाख अथवा तांबे के सिक्के को आग में लाल करके उससे गला में दाग कर उपचार किया गया है।

    मुड़ाबहला के समीप पाकरडाढ़ के आंगनवाड़ी केन्द्र में स्वास्थ्य विभाग का शिविर में गरम सलाखों से दागे जाने के बाद दयाराम, सदानंद, लोहरा, धरमसाय, नन्दकुमार, मुक्ता, कृष्णा, कौशल्या,  सुषिला, सुषमा, हारावती पार्वती बाई रमिला, ढ़ोली बाई करमबती सोनकुमारी, अमरसाय का उपचार किया जा रहा है।
                        पानी की होगी जांच
     मुड़ाबहला गांव में पेट दर्द और गला दर्द की बीमारी से अनेक लोग पीड़ित होने के बाद आज गांव में पानी की जांच के लिए हेण्‍ड पम्प से नमूने भी लिए गए हैं।चिकित्सकों का कहना है कि गांव में आज इस तरह की बीमारी से पीड़ित एक भी नया मरीज नहीं आया है। पुराने मरीजों को भी आवश्‍यक दवा मुहैया कराने के बाद यहां स्थिति नियंत्रण में है।

     

शुक्रवार, 13 जुलाई 2012

बिना द्रोणाचार्य के चल रही स्कूल

कन्या हाई स्कूल पत्थलगांव
पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
  छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में पत्थलगांव का कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल की छात्राओं को बीते पांच वर्षो से गृह विज्ञान विषय के शिक्षको के बगैर ही अपनी पढ़ाई पूरी करनी पड रही है। इस शासकीय स्कूल में इस वर्ष अन्य महत्वपूर्ण विषयों के भी षिक्षकों की कमी से अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है।कषक्षकों का अभाव के कारण इस स्कूल में अध्यापन कार्य प्रभावित हो रहा है इसके बाद भी शिक्षा अधिकारी और जिम्मेदार जनप्रतिनिधि इस स्कूल की सुध नहीं ले रहे हैं।
   सबसे दिलचस्प बात यह है कि यहॉं  की 2 छात्राओं ने बगैर शिक्षकों के गृह विज्ञान की पढ़ाई में अपने बलबूते से स्कूल में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोस्ताहन का पुरूस्कार प्राप्त कर चुकी है। यहां  की छात्राओं की गृह विज्ञान विषय को लेकर काफी रूचि के बाद भी शासकीय कन्या हाई स्कूल में बीते पांच वर्षो से गृह विज्ञान विषय के शिक्षकों की पदस्थापना नहीं हो रही है। इंदिरा गांधी कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल के प्राचार्य एम टोप्पो ने बताया वर्ष 2007 से यहॉं  गृह विज्ञान विषय की कक्षाऐं प्रारम्भ की गई हैं। तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी ने यहॉं  पर जल्द ही गृह विज्ञान विषय के शिक्षकों को पदस्थ करने का आश्वासन दिया था।पर पांच साल का लम्बा समय व्यतित हो जाने के बाद भी इस स्कूल में गृह विज्ञान के शिक्षक पदस्थ नहीं हो पाए हैं। उन्होने बताया कि नए षिक्षा सत्र में यहॉं  पर गणित, विज्ञान, भौतिक, अंग्रेजी जैसे महत्वपूर्ण विषय के षिक्षकों का भी टोटा हो गया है। इस स्कूल में 16 षिक्षकों की पदस्थापना के विरूध्द केवल 8 षिक्षकों से ही काम चलाना पड़ रहा है। प्राचार्य ने बताया कि यहॉं  कामर्स विषय की कक्षाऐं नहीं होने के बाद भी इस स्कूल में कामर्स विषय के दो व्याख्याताओं की पदस्थापना कर दी गई है। उन्होने बताया कि ऐसे विपरित हालात में यहॉं  पर छात्राओं को शिक्षा देने का काम किसी चुनौती से कम नहीं है। श्री टोप्पो ने बताया कि गृह विज्ञान विषय के शिक्षक नहीं होने के बाद भी यहॉं  की छात्राओं ने अपने बलबूते पर पढ़ाई करनी पड़ रही है।
             लाखों के कम्प्यूटर कचरे में
  कन्या हाई स्कूल में छात्राओं को कम्पयूटर की शिक्षा देने के लिए पांच साल पहले भेजे गए लगभग 50 कम्प्यूटर सेट बगैर उपयोग के ही यहॉं  कचरे के ढ़ेर में बदल गए हैं। प्राचार्य श्री टोप्पो का कहना है कि स्कूल में कम्प्यूटर के जानकार शिक्षक नहीं होने से यहॉं  सभी महंगे उपकरण बीगड़ चुके हैं। इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए कई बार उच्च अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है पर यहॉं  की व्यवस्था को सुधारने की अब तक कोई पहल नहीं हो पाई है। श्री टोप्पो ने बताया कि यहॉं  अभी भी 8 शिक्षकों की कमी है। इस दिशा में उच्च अधिकारियों व्दारा निदान नहीं करने से स्कूल की समस्या यथावत बनी हुई है। कन्या स्कूल की छात्राओं ने बताया कि वे कम्प्यूटर की शिक्षा लेना चाहती हैं पर उन्हे अपने स्कूल में कोई सुविधा नहीं मिल पा रही है। 
             बगैर शिक्षक के 2 छात्राओं को ज्ञान पुरस्कार
   कन्या हायर सेकेन्डरी स्कूल में वर्ष 2008 में कु नौमी ने गृह विज्ञान विषय में उत्कृष्ट अंक अर्जित कर 12 वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने पर इस छात्रा को मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार रू.का नगद पुरूस्कार प्राप्त हुआ था। वर्ष 2010 में भी यहॉं  की छात्रा कु.अमिला ने 12 वीं की परीक्षा में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने पर उसे भी मुख्यमंत्री ज्ञान प्रोत्साहन योजना के तहत 10 हजार रू.का नगद पुरस्कार मिल चुका है।

रविवार, 1 जुलाई 2012

निजी स्कूलों की मनमानी से पालको को आया पसीना

एक निजी शाला की तस्‍वीर
 पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
  छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों व्दारा मनमाना शुल्क वसूलने की ढ़ेरों शिकायतों के बाद भी शिक्षा अधिकारी चुप्पी साध कर बैठे हैं। निजी स्कूलों की शैक्षणिक शुल्क के नाम पर लूट खसोट से पालकों को राहत देने के लिए शिक्षा विभाग के सचिव का कड़ा रुख अपनाए जाने के निर्देशों के बाद भी इस दिशा में ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई है।
   यहां पर ज्यादातर निजी स्कूलों में शिक्षा को व्यवसाय के रूप में बदल देने से पालकों की परेशानी बढ़ गई है। निजी स्कूल संचालित करने वाले एक स्कूल में तो भवन निर्माण के नाम पर भी स्कूली छात्रों से शुल्क वसूली करने का मामला सामने आया है। इस स्‍कूल में संचालक का मनमाने रवैए के बारे में शहर के कई पालकों ने षिक्षा अधिकारी को शिकायत की है। मगर धीमी गति से जांच के कारण ऐसी शि कायतों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
     ब्‍लॉक शिक्षा अधिकारी बी एस पैंकरा ने बताया कि यहां एक निजी स्कूल में भवन निर्माण के नाम पर भारी भरकम शुल्क वसूला जा रहा है। इस मामले में कई पालकों ने उनके पास मौखिक शिकायत की है। इस वजह संचालक के विरूध्द कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होने बताया कि इन दिनो निजी स्कूलों में यूनीफार्म, पुस्तक व अन्य गतिविधियों का संचालन के नाम पर मनमाने  ढंग से छात्र छात्राओं से फीस वसूली की लगातार शिकायतें मिल रही है।इस तरह की अवैध वसूली के बारे में पालकों से लिखित षिकायत का मामला सामने आने पर संबंधित स्कूल प्रबंधन के विरूध्द कड़ी कार्रवाई के साथ स्कूल की मान्यता को भी रदद करने की कार्रवाई की जाएगी।श्री पैंकरा ने बताया कि निजी स्कूलों को शिक्षा नियमों का पालन करने की कड़ी हिदायत दी जा चुकी है।
        यहां के पालकों का कहना है कि निजी स्कूलों पर नकेल कसने के सभी उपाय बेकार साबित हो रहे हैं। उनका मानना है कि मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की सरकार के इस फैसले पर षिक्षा अधिकारियों को कड़ाई से क्रियान्वयन कराना चाहिए। पालक नत्थूराम शर्मा तथा प्रहलाद रोहिला ने कहा कि बंदियाखार स्थित अग्रंजी माध्यम का निजी स्कूल में भवन निर्माण के लिए 2000 रू. शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैं। इस स्कूल के सूचना पटल पर इस आषय का नोटिस भी चस्पा कर दिया गया है। इन पालकों ने कहा कि निजी स्कूल प्रबंधन के मनमाने रवैए पर रोक लगाने के लिए पहले भी कानून बनाए गए हैं, पर शिक्षा अधिकारियों व्दारा इन नियमों को अनदेखा करने से पालकों को राहत नहीं मिल पाती है। उन्होने कहा कि निजी स्कूलों का मनमाना रवैया में रोक लगनी चाहिए।
                निजी स्कूलों में नहीं हो रहा नियमों का पालन
     पत्थलगांव में दर्जन भर से अधिक निजी स्कूलों का सचंालन किया जा रहा है। इनमें ज्यादातर स्कूलों में शिक्षा विभाग के नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। स्कूल प्रबंधन व्दारा मनमानी फीस की वसूली पर अंकुश लगाने के लिए अभी तक शिक्षा अधिकारियों ने ठोस उपाय नहीं किए गए है। पिछले दिनो यहंा षिक्षा अधिकारी ने  स्कूलों के प्रबंधन को अधिक शुल्क वसूली पर रोक लगाए जाने संबधी आदेश दिया था। स्कूल षिक्षा विभाग के सचिव क ेआर पिस्दा व्दारा जारी इस आदेष में कहा गया है कि निजी स्कूलों में षिक्षा को व्यवसाय के रूप सचंालित करने की षिकायत पर त्वरित जांच के बाद दोषियों के विरूध्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा निजी स्कूलों में लाभ नहीं और हानि नही ंके सिंध्दात को अनदेखा करने पर इनके विरूध्द कार्रवाई करने को कहा गया है। निजी स्कूलों से आय व्यय, षुल्क निर्धारण और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी सात दिनों के भीतर देने को भी कहा गया था ।  स्कूलों के मनमाने रवैए पर अकुंष लगाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की तीन सदस्यीय समिति गठित कर संबंधित स्कूलों का निरीक्षण करने का आदेष अब फाईलों में सिमट कर रह गया है। पालकों का आरोप है कि निजी स्कूलों में वार्षिक शुल्क में वृध्दि के पूर्व पालक समिति से सहमति  नहीं ली जा रही है । शुल्क का निर्धारण युक्तिसंगत नहीं होने से पालकों की परेशानी बढ़ गई है । निजी स्कूलों में पुस्तक,यूनिफार्म,बस ,विकास शुल्क के नाम पर जगह जगह अतिरिक्त फीस वसूली करने के बाद भी स्कूल सचंालक के विरूध्द  कार्रवाई  नहीं होने से यहां के पालकों में आक्रोश व्याप्त है।
                    इनका पालन अनिवार्य
  •    प्रत्येक निजी स्कूलों को हर साल ऑडिटेड आय व्यय का ब्यौरा जिला शिक्षा अधिकारी को प्रस्तुत करना होगा।
  •   मान्यता प्राप्त करने के लिए आवेदन के साथ स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जिला षिक्षा अधिकारी को देनी होगी।
  •    हर स्कूल को प्रति वर्ष के लिए निर्धारित शुल्‍क का प्रारूप का प्रकाशन किया जाएगा।
  •  शुल्क बढ़ाने से पहले पालकों की सहमति लेना अनिवार्य है।