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गुरुवार, 7 अगस्त 2014

प्यार के संदेश की पूरी सुरक्षा



   सात समंदर पार पहुंचेगी रेशम की डोर
  रमेश शर्मा /पत्थलगांव /
       बारिश के बाद भी बहनों व्दारा भेजा गया आत्मीय और पवित्र रिश्ते का संदेश को भाइयों के पास पूरी हिफाजत के साथ पहुंचाने के लिए इस वर्ष डाक विभाग ने राखियों के लिए विशेष लिफाफों का इंतजाम किया है। प्लास्टिक कोटेड होने के कारण डाक विभाग का राखी के लिए विशेष लिफाफा बरसात के दिनों में पानी से भीगने का कोई डर नहीं है।
   यहां के डाक घर में राखी के लिए पहंचे इन विशेष लिफाफे को बहनों व्दारा काफी पसंद किया जा रहा है। यहां की रजनी दुबे ने बताया कि वह प्रति वर्ष अपने भाई के पास आस्ट्रेलिया में राखी भेजती है। रजनी का कहना था कि वह इस बात का ध्यान रखती है कि उसका भेजा हुआ प्यार का संदेश भाई के हाथों में समय पर पहुंच जाए। इस बार यहां डाक विभाग के प्लास्टिक कोटेड लिफाफे से उसकी बरसात में पानी से बचाने की चिंता कम हो गई है। यहां डाक विभाग के सूत्रों के अनुसार राखी के अवसर पर कई बहनों व्दारा सरहद में तैनात अपने भाइयों के पास राखी भेजी जाती है। इसके अलावा चेन्नई, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान के दूरस्थ क्षेत्र में यहां से राखियां पोस्ट की जाती हैं। ऐसे लोगों के लिए डाक विभाग के विशेष लिफाफे काफी कारगर साबित हो रहे हैं। यहां अम्बेडकर नगर में रहने वाले सारांश अग्रवाल का कहना था कि उसकी बहन प्रीति उसे प्रति वर्ष कनाडा से राखी भेजती है। उसे बहन की राखी का बेसब्री से इंतजार रहता है।
                 पवित्र रिश्‍ते की मध्यस्थता गर्व की बात
     यहां उप डाक पाल श्रीमती रजनी तिग्गा का कहना था कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि इस पवित्र रिश्ते की मध्यस्थता हमारा विभाग करता है। बहनों व्दारा भेजा गया प्यार का संदेश के लिफाफों को सुरक्षित व सतर्कता से भेजने के पूरे प्रयास किए जाते हैं। इसी कड़ी में यहां अत्याधुनिक व आकर्षक राखी के लिफाफे उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होने बताया कि राखी के विशेष लिफाफे की कीमत मात्र 7.50 रू. है। इन लिफाफों में बरसात के बावजूद आत्मीय और पवित्र रिश्ते का संदेश के साथ इसमें रेशम की डोर सुरक्षित पहुंच रही है।  

गुरुवार, 26 दिसंबर 2013

सोल्लास मनाया गया क्रिसमस

बुनियादी प्रशिक्षण संस्था में क्रिसमस की खुशियां
 पत्थलगांव  रमेश शर्मा
  प्रभु यीशु का जन्मोत्सव बुधवार को यहाँ मसीहजनों ने काफी धूमधाम के साथ मनाया। शहरी और ग्रामीण अंचल के मसीही लोग काफी बड़ी संख्या में प्रातः गिरजाघर पहुंच कर विशेष प्रार्थना के कार्यक्रम में शामिल हुए। इसके बाद दिन भर क्रिसमस की बधाइयों का सिलसिला चलते रहा।


     क्रिसमस का त्योहार पर अन्य समुदाय के लोगों ने भी प्रभु यीशु के अनुयायियों को ईसा मसीह के जन्मोत्सव के अवसर पर उनके घर पहुंच कर बधाइयां दी। बंदियाखार स्थित कैथोलिक गिरजाघर में मंगलवार को देर रात तक यीशु जन्मोत्सव के कार्यक्रम होते रहे। यहाँ मसीही लोगों ने जलसा का कार्यक्रम में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया था। यहाँ पर प्रस्तुत की गई लघु नाटिका में प्रभु यीशु के अवतरण का दृश्य प्रस्तुत करते हुए संदेश दिया कि मानवता के उत्थान के लिए ही प्रभु यीशु का अवतरण हुआ था। इस कार्यक्रम में बंदियाखार चर्च के प्रमुख तथा अन्य गणमान्य लोग काफी संख्या में उपस्थित थे। यहाँ आयोजित जलसा कार्यक्रम में दूर दराज के ग्रामीण अचंल से भी हजारों मसीहीजन पहुंचे थे। आधी रात को प्रभु यीशु क जन्म के बाद नन्हा बालक के घास की चरनी में लाकर रख दिया गया था। यहाँ पर लोगों की भीड़ कम होने का नाम नहीं ले रही थी।
           सजाई गई चरनी और गौशाला
      क्रिसमस के दिन यहाँ प्रातः से ही चहल पहल बढ़ गई थी। बुनियादी प्रशिक्षण संस्था सहित अन्य मिशन संस्थान के प्रांगण में भी प्रभु यीशु की जन्मस्थली के प्रतीक स्वरूप घास-फूस से बनाई गई चरनी व गौशाला की आकर्षक साज सज्जा कर आराधना की गई। इसमें प्रभु के जन्म के समय मौजूद गडरियों व मजिसियों की भी झांकी बनाई गई थी। यहाँ बीटीआई की वयोवृद्ध सिस्टर विनिता ने बताया कि प्रभु यीशु मसीह के जन्म का कोई निर्धारित समय उल्लेखित नहीं है, लेकिन मान्यता है कि कड़कड़ाती ठंड में आधी रात को प्रभु यीशु का जन्म हुआ था। इसी के अनुसार 24 दिंसबर की रात को प्रभु का अवतरण माना जाता है और 25 दिसंबर को विश्वभर में क्रिसमस पर्व को सेलिब्रेट किया जाता है। 
विकलांग बच्चों के साथ केक काट कर मनाई खुशियां
     विकलांग बच्चों के साथ केक काट कर मनाई खुशियां
  यहाँ विकलांग सेवा केन्द्र के बच्चों के साथ केक काट कर क्रिसमस डे सेलीब्रेट किया। राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ के अलावा अनेक लोग उपस्थित थे। यहाँ पर सिस्टर रूथ ने कहा कि प्रभु यीशु दया, प्रेम   क्षमा व करूणा के प्रतीक हैं। उन्होने मानव समाज के उद्धार के लिए खुद का बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि विकलांग बच्चों के साथ इस त्यौहार की खुशियों को आपस में बांटने से और भी आनंद बढ़ जाता है। सिस्टर अर्पणा बरूआ ने कहा कि प्रभु यीशु ने अपने महान जीवन दर्शन के जरिए पूरी दुनिया को मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होने अपना पूरा जीवन सत्य, अंहिंसा, दया, करूणा और परोपकार के लिए समर्पित कर दिया। प्रभु यीशु के विचार उपदेश आज भी प्रासंगिक और प्रेरणा दायक हैं। इस कार्यक्रम में कनाडा के नागरिक ग्लेन यदु, गौरव यदु ने विकलांग बच्चों के साथ क्रिसमस के त्योहार का केक काट कर उन्हे बधाइयंा दी। यहाँ पर क्रिसमस के मौके पर सभी उपस्थित लोगों ने एक दूसरे को बधाई दी।

     

शनिवार, 17 नवंबर 2012

सार्थक दीपावली से गरीबों के चेहरों पर छाई खुशी


   रमेश  शर्मा
पत्‍थलगॉव
    छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में दीयों का त्यौहार पर महंगी रोशनी और पटाखों का कानफोड़ू शोर से अलग हट कर दूरस्थ पहाड़ी कोरवा बस्ती में रहने वाले बच्चों के साथ सार्थक दीपावली मनाने का प्रेरणा दायक कार्यक्रम की सभी ने सराहना की है।
     गरीबों के साथ सार्थक दीपावली मनाने के लिए बगीचा के प्रमुख समाजसेवी मकेश शर्मा के व्दारा यह पहल की गई थी। श्री शर्मा ने बगीचा तहसील अन्तर्गत पहाड़ी कोरवाओं की बस्ती रोकड़ा, देवडाढ़ और कचंनडीह जैसे दूरस्थ एवं पहुंच विहिन गांवों में पहुंच कर इस वर्ष गरीबों के चेहरों पर मुस्कान लाने का प्रयास किया था। उनके छोटे से प्रयास की बदौलत तीन पहाड़ी कोरवा गांव के अनेक गरीब तबका के लोगों ने शहरी लोगों की तरह नए कपड़े पहनकर रंगीन आतीशबाजी की रोशनी से अपने कच्चे घरों में उजियारा फैलाया है। मुकेश शर्मा का कहना था कि दूसरों को खुशी देकर जो आनंद मिलता है उसे किसी भी तरह अभिव्यक्त नहीं किया जा सकता है।
                        पत्रकार की प्रेरणा
     दरअसल यहां पहाड़ी कोरवा तथा अन्य गरीब तबका के लोगों के लिए प्रशासनिक अधिकारी और अन्य जिम्मेदार लोग केवल बयानबाजी करके रह जाते हैं। आजादी के 65 साल के बाद भी यहंा के गरीबों का रहन सहन में कोई बदलाव नहीं आ पाया है।जिले के कुछ सक्रिय पत्रकार इन बेसहारा लोगों की पीड़ा को प्रमुखता के साथ जरूर उठाते हैं मगर शासकीय अमला ने  इस दिशा में कभी भी सार्थक पहल नहीं की है। मुकेश शर्मा का कहना था कि उन्होने पहाड़ी कोरवा तथा गरीबों की पीड़ा पर ईमानदारी के साथ कलम चलाने वाले पत्रकार की प्रेरणा से ही गरीबों के साथ दीपावली की ख्‍ुशी बांटने का निर्णय लिया था। वे अन्य त्यौहारों में भी इस परम्परा को जीवित रखेंगे। 
  जशपुर जिले के ज्यादातर बड़े कस्बे और शहरों में मगंलवार को जब सभी लोग अपने घर और प्रतिष्ठानों में विद्युत झालर की साज सज्जा और तेज आवाज के पटाखे फोड़ने में ब्यस्त थे उस समय यहंा प्रमुख समाज सेवी मुकेश शर्मा अपने ग्रामीण साथियों के साथ गरीब बच्चों के चेहरों पर खुशी की मुस्कान लाने की कोशिश कर रहे थे। बगीचा के समीप रोकड़ा,देवडाढ़ और कचंनडीह गांव में रहने वाले पहाड़ी कोरवा परिवार के दो दर्जन से अधिक बच्चों को नए कपड़ों के साथ रंग बिरंगी फूलझड़ी मिली तो उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था। मुकेश शर्मा ने इन गांवों में पहुंच कर पहाड़ी कोरवा परिवार की महिलाओं को साड़ी तथा अन्य बुजूर्गो को ठंड से बचने के लिए कम्बल का भी वितरण किया ।श्री शर्मा का कहना था कि  गरीबों के चेहरों पर जो खुशी झलक रही थी उसका सुखद अहसास को वे आज भी नहीं भूला पाए हैं।गरीबों के साथ सार्थक दीपावली मनाने के इस कार्यक्रम में ग्राम पंचायत रोकड़ा के सरपंच मंगरूराम,केशव यादव, भगवानों, पवन सिंह, संजय सिंह सहित अन्य लोग भी शामिल थे।