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गुरुवार, 21 मई 2015

शादी का सीजन से फूलों की बढ़ी मांग

गांव से भी आने लगी शादी व्याह पर फूलों की मांग
 अग्रिम बुकिंग के बगैर नहीं हो रही फूलों की आपूर्ति                       रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
   शादी का सीजन के चलते इन दिनों फूलों की बिक्री खूब हो रही है। शहर में फूलों का कारोबार करने वाले व्यवसायी ग्राहकों की अग्रिम बुकिंग पर ही प्रति दिन कोलकाता और महाराष्ट्र से फूल मंगा कर आपूर्ति कर रहे हैं। एकाएक फूलों की अधिक मांग आ जाने से विक्रेताओं को अपने ग्राहकों की मांग पूरी कर पाने में असमर्थता जाहिर करनी पड़ रही है।
    इन दिनों वैवाहिक कार्यक्रम के लिए शहरी अंचल के अलावा ग्रामीण अंचल से भी फूलों की मांग आ जाने से बिक्री में काफी इजाफा हुआ है। बताया जा रहा हे कि ग्रामीण अचंल में भी धूमधाम से वैवाहिक कार्यक्रमों के दौरान ताजा फूलों का ही उपयोग किया जा रहा है।गांव में सम्पन्न परिवार के लोग एक दूसरे को देख कर ताजा फूलों की साज सज्जा पर खूब जोर दे रहे हैं। शादी मंडप, गाड़ी डिजाइन के अलावा अन्य साज सज्जा में लोग अब फूलों का अधिक प्रयोग करने लगे हैं। यहां फूलों का व्यवसाय करने वाला प्रदीप बोआल का कहना था कि पहले वह अकेले ही इस व्यवसाय को संभाल लेता था, लेकिन अब  गांव और शहरों से फूलों के कई कई आर्डर आ जाने से उसे अपने साथ दर्जन भर से अधिक सहयोगी रखने पड़ रहे हैं। दूसरे शहरों के फूल व्यवसायी भी यहां पहुंच कर आर्डर लेकर शादी व्याह में फूलों की आपूर्ति करने लगे हैं। अनेक लोग इस व्यवसाय में जुड़ जाने के बाद भी दिन प्रति दिन फूलों की मांग में बढ़ोत्तरी हो रही है।
   शहर में इन दिनों गेंदा, रजनीगंधा, गुलाब, ग्लेडी,गेटलस, जरबेरा की मांग काफी अधिक देखी जा रही है। कोलकाता और नागपुर से फूल मंगाने के कारण यहंा प्रति नग के अनुसार फूलों की कीमत बोली जा रही है। इन दिनों 10 रुपए में बिकने वाली गेंदा लरी के दाम बढ़ कर 20 से 30 रुपए बोले जा रहे हैं। इसी तरह रजनीगंधा 10रुपए, गुलाब 10 से 30 रू.,गेटलस 30 से 40 रुपए एवं जरबेरा 20 रुपए में बेचा जा रहा  है। फूल व्यवसायियों का कहना है कि शादियों में ज्यादातर लोग मांेगरा, गेंदा और गुलाब की मांग कर रहे हैं।
                                             ग्रामीण अंचल में भी फूलों की खपत
    यहां के फूल व्यवसायी प्रदीप का कहना था कि अब ग्रामीण अंचल से भी फूलों की मांग बढ़ गई है। गांव के सरपंच तथा अन्य लोग उन्हे फूलों के साथ गांव चल कर सजाने की भी जिम्मेदारी सौंप रहे हैं। फूल विक्रेता का कहना था कि शहरों की तरह गांवों में भी फूलों की खपत बढ़ जाने से उन्हें आपूर्ति करने में कई बार काफी मशक्कत करनी पड़ रही है। इस फूल विक्रेता का कहना था कि शहरों में वैवाहिक मंडप सजाने के लिए अलग अलग दर ले रहे हैं। विवाह का मंडप 1 हजार से लेकर 5 हजार रुपयों में सजा कर तैयार किया जा रहा है। गाडियों की साज सज्जा में भी लोग मोल भाव नहीं करने लगे हैं। उन्होंने बताया कि गाड़ी सजाने में भी 2 हजार से 5 हजार तक का खर्च आने लगा है।  
                                                आर्टिफिशियल फूलों ने बनाई जगह
     फूल विक्रेताओं का कहना था कि बाहर के बाजार में फूलों की मांग बढ़ जाने से उनका मुनाफा कम हो गया है। कई बार पहले की बुकिंग पर फूलों की आपूर्ति करने में उन्हे काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ जा रहा है। फूल विक्रेता का कहना था कि इन दिनों फूलों की कमी के चलते वैवाहिक गाड़ी सजाने तथा स्टेज के काम में आर्टिफिशियल फूल तथा चुनरी कपड़े का अधिक इस्तेमाल होने लगा है। ताजा फूलों की मांग बढ़ जाने के बाद आर्टिफिशियल फूलों ने अपनी अच्छी जगह बना ली है।


बुधवार, 20 मई 2015

वरदान बनी बैमौसमी बारिश

भरारी के समीप अपनी खरबूज की
फसल के साथ किसान रफैल उरांव
   मिठास घोल रहे हैं पत्थलगांव के खरबूज-तरबूज
रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
        पिछले दिनों हुई बेमौसम की बारिश के बाद गर्मी का मौसमी फल खरबूज और तरबूज की फसल को मामूली नुकसान के बाद भी इसकी अच्छी क्वालिटी बन कर बाजार में पहुंचने से इसका मिठास पड़ोसी जिले के लोगों को भी खूब रास आ रहा है।
         इस अचंल में अधिक पैदावार होने के चलते खरबूज और तरबूज के भाव में भी ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं होने से ग्राहक हाथो हाथ इन फलों की खरीद कर इसका भरपूर स्वाद ले रहे हैं। प्रारंभ में 80 रूपये प्रति किलो बिकने वाला खरबूज इन दिनों 10 से 15 रूप्ये प्रति किलों में बिक रहा है। इसकी उपज लेने वाले किसानों का कहना है कि बेमौसम की बरसात होने से उनके खेतों में तैयार खरबूजा 2 से 3 किलो वजन का निकल रहा है। यंहा भरारी के समीप खरबूज,तरबूज, ककड़ी के साथ अन्य साग सब्जी फसल लेने वाला किसान रफैल उरांव का कहना था कि गर्मी के सीजन में इन फसल के खरीददार उनके खेतों में ही पहुंच जा रहे हैं। नगद भुगतान मिलने से किसानों के लिए गर्मी के मौसमी फलों ने मालामाल कर दिया है।  
    यहंा तिलडेगा,कंटगतराई तथा आस पास के किसानों व्दारा भरारी नाला के किनारे वाले क्षेत्र में गर्मी के दिनों में साग सब्जी की फसल के अलावा ककड़ी, खरबूज और तरबूज की भी काफी बड़ी मात्रा में उपज ली जा रही हैं।इस वर्ष बेमौसम की बारिश ने इन किसानों की लवकी,तोराई तथा अन्य साग सब्जी की फसल को भले ही थोड़ा नुकसान पहुंचाया है लेकिन दो तीन बार हुई इस बारिश के बाद खरबूज और तरबूज की अच्छी क्वाल्टिी बन गई है। इन किसानों के खेतों में पक कर तैयार रस भरे और मीठे खरबूज की फसल देखते ही बन रही है। किसानों का कहना है कि बेमौसम की बरसात ने खरबूज की अच्छी पैदावार हो गई है। किसानों को इस बात की खुशी है कि गर्मी का मौसमी फल खरबूज और तरबूज केवल देखने में ही नहीं बल्कि इसका जायका भी बढ़ गया है। इन दिनों यहंा के ग्राहकों को टोकरों में भर कर खरबूज और तरबूज का बेसब्री से इंतजार रहता है। गर्मी के इन मौसमी फलों को लेकर आने वाले कई किसान बाजार पहुंचने से पहले ही रास्ते में अपनी उपज की बिक्री कर ले रहे हैं।
               फलोद्यान से अतिरिक्त आय
गर्मी का मौसमी फल तरबूज की भी हुई बम्फर पैदावार
उद्यान अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया का कहना है कि इस अंचल में फलोद्यान की काफी अच्छी संभावना है। यहंा गर्मी के दिनों में साग सब्जी की लोकल डिमांड काफी अधिक रहती है।इस वजह किसानों को साग सब्जी के अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहंा के किसानों को गर्मी के मौसमी फल के लिए प्रोत्साहित करने के बाद इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। यहाँ तरबूज, खरबूज, ककड़ी तथा केला,आम लीची की अच्छी पैदावार होने से किसानों को लाखों रूपयों की अतिरिक्त आय होने लगी है।
           पड़ोसी जिलों में पहुंचा गर्मी का मौसमी फल
       इन दिनों पत्थलगांव क्षेत्र में ककड़ी,खरबूज और तरबूज की आवक बढ़ जाने के बाद रायगढ़ जिले के लैलूंगा, धरमजयगढ़, कापू और सरगुजा जिले के सीतापुर,प्रतापगढ़ और बतौली क्षेत्र के साप्ताहिक बाजार में भी गर्मी के इस मौसमी फल की खूब पूछ परख होने लगी है।अन्य फलों की मंहगाई के बीच लोकल फल कम दाम पर उपलब्ध होने से ग्राहकों को भी गर्मी के मौसमी फलों का स्वाद खूब रास आ रहा है।

शुक्रवार, 15 मई 2015

पेड़ की छाँव तले खेल का अनोखा स्कूल

पेड़ की छांव तले शिक्षिका स्नेहा का अनोखा स्कूल
रमेश शर्मा/पत्थलगांव/
       गर्मी की छुटिटयाँ शुरू होते ही शहरी क्षेत्र के बच्चे भले ही अभिनय, नृत्य, ध्यान और व्यक्तित्व विकास की कक्षाओं में शामिल हो गए हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल के बच्चों के सामने इस तरह की सुविधाओं का सर्वथा अभाव रहता है। गांव के बच्चों को ग्रीष्मकालीन छुटिटयों में चिलचिलाती धूप में इधर उधर घूमना तथा मवेशियों के साथ उठा पटक करते देख कर तिलडेगा माध्यमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती स्नेहा श्रीवास्तव ने पेड़ की छांव तले प्रति दिन 2 घंटे तक खेल और पढ़ाई का अनोखा स्कूल चलाया जा रहा है।
     ग्रीष्मकालीन छुटिटयों के इस स्कूल में गांव के बच्चों को कभी 2 घंटे तो कभी 1 घंटे में ही छुट्टीे दी जाती है। ग्रामीण बच्चों को खेल खेल में रंगोली, बागवानी, वाद विवाद, नृत्य व गीत सिखाया जा रहा है। गांव के बच्चों को खेलकूद के साथ अन्य मनोरंजक कार्यक्रम काफी रूचिकर लगने लगे हैं। पेड़ की छांव तले स्कूली बच्चों की भीड़ के साथ अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहते हैं। ग्रामीण बच्चों को लुका छिपी के खेल तथा नाच गाने के साथ विज्ञान और अंग्रेजी विषय की पढ़ाई भी खूब रास आ रही है।
खेल खेल में ज्ञान की बातें भी
        पेड़ की छांव तले ग्रामीण बच्चों का अनोखा स्कूल चलाने वाली शिक्षिका स्नेहा ने बताया कि यहां गर्मी की छुटिटयंा होते ही ज्यादातर बच्चें मवेशी चराने और पेड़ पर चढ़कर धमाचौकड़ी जैसे अनुपयोगी काम में व्यस्त हो जाते थे। तेज गर्मी का मौसम के दौरान धूप में बाहर खेलने से कई बच्चे बुखार तथा अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते थे। ग्रामीण बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन छुटिटयों में मनोरजन कम और परेशानी अधिक मिलने की बात पर शिक्षिका स्नेहा काफी व्यथित हुई थी। उन्होंने बताया कि इन्ही बातों को देख कर उसके मन में खेल कूद का अनोखा स्कूल शुरू करने का विचार आया था। इसके तहत गांव के इन बच्चों को एकत्रित कर जब उन्हे खेल खेल में पढ़ाने का काम शुरू किया तो सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। तिलडेगा गांव में अब गांव के अनेक बच्चे यहाँ पहुंच कर अपना कला कौशल निखारने में जुट गए हैं। इन छोटे बच्चों के खेल कूद के इन कार्यक्रमों में कई बार बच्चों के अभिभावक भी उपस्थित रहते हैं। 
अभिभावक भी चिंतामुक्त
पहले चिलचिलाती धूप में मवेशियों पर बैठकर होती थी धमाचौकड़ी
राडोल के उपसरपंच मनोज अम्बस्थ ने बताया कि इस अंचल में ग्रीष्मकालीन छुटिटयां शुरू होते ही आस पास गांवों के ज्यादातर बच्चे मवेशियों के बीच रह कर खेल कूद में व्यस्त हो जाते थे।मवेशियों पर बैठ कर तालाब और नदी नालों में चले जाने से इन बच्चों के अभिभावक भी चिंतित रहते थे। श्री अम्बस्थ ने बताया कि अब चिलचिलाती धूप में इधर उधर घूमने के बजाए इन बच्चों को मनोरजंन के खेल कूद के साथ पेड़ की छांव तले पढ़ाने का काम गांव के बुजुर्गो को भी पसंद आ रहा है।

बुधवार, 29 अप्रैल 2015

थोड़ा सा दाना, थोड़ा सा पानी

पेड़ पौधों पर पक्षियों के लिए मिटटी के बर्तन में पानी
अच्छी खबर..........
पक्षियों को दाना पानी की छोटी पहल का बड़ा लाभ
        रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
       गर्मी के दिनों में सूरज की तपन से मनुष्य ही नहीं, बल्कि पशु पक्षियों को भी राहत की जरूरत होती है। शहर में कई लोगों व्दारा सूरज की तपन बढ़ते ही पक्षियों के लिए दाना पानी उपलब्ध कराने की सार्थक पहल की जा रही है। परोपकार के इस काम में अब कई लोग आगे बढ़ कर हाथ बंटाने लगे हैं। पक्षियों के लिए थोड़ा दाना थोड़ा पानी देने के इस सहयोग का अन्य लोग भी अनुषरण करने लगे हैं। गर्मी के दिनों में दाना पानी देने की इस छोटी सी पहल का अनेक पक्षियों को अच्छा खासा लाभ मिल जाता है।
    यहां इंगलैंड के नाॅटिंघम से अन्तरराष्ट्रीय कानून तथा विकास पर एलएलएम की शिक्षा लेकर लौटी कुलिशा मिश्रा का कहना है कि उन्हे गर्मी के दिनों में पक्षियों को थोड़ा दाना,थोड़ा पानी देने में काफी सुकून मिलता है। उन्हांेने कहा कि पक्षियों के लिए पानी की एक एक बंूद का महत्व रहता है।उन्होने जब घर में रहने वाली गौरैया को पानी की एक बून्द से तृप्ति करते हुए देखा तभी से वह पक्षियों के लिए नियमित रूप से दाना पानी देने का काम कर रही है। कुलिशा का कहना था कि आमतौर पर हर घर में नजर आने वाली गौरैया चिडि़या अब शहर से ही दूर होने लगी है। इसके लिए तेजी से बढ़ते पाॅल्यूशन,रेडिएशन और हरियाली की कमी ने गौरैया को शहरों से दूर कर दिया है। हालांकि शहर के कुछ हरियाली भरे क्षेत्र में गौरैया सुबह शाम झुंड में नजर आती हैं, लेकिन इन्हे घरों में रखने की हमारी पहल में कोई कोताही नहीं होनी चाहिए। कुलिशा का कहना था कि वास्तव में गौरैया चिडि़या भी मनुष्य के आस पास रहने में ही दिलचस्पी दिखाती है। इस नन्ही चिडि़या को वापस घर में बुलाने के लिए हमारी पहल अवश्य लाभप्रद साबित होगा।
घर की छत पर कुलिशा मिश्रा पक्षियों के लिए पानी की व्यवस्था करते हुए
हा                  सुकृत्य से मिलता है सुकून
         दरअसल तापमान में वृध्दि के बाद पानी की एक एक बून्द के लिए पक्षियों को भी मशक्कत करते हुए देखा जाता है। गर्मी में पक्षियों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए यहां के राईस मिलर श्रवण अग्रवाल ने भी सराहनीय पहल की है। उनके व्यावसायिक परिसर में गौरैया को खाने के लिए दाना तो भरपूर मिल जाता था, लेकिन पानी की दो बूंद के लिए इन पक्षियों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। पक्षियों की परेशानी को महसूस कर इस व्यवसायी ने अपने परिसर तथा आस पास के अनेक पेड़ की टहनियों पर मिटटी की तश्तरियंा टांग दी हैं। इनमें नियमित रूप से पीने का पानी भरने से अब यहां हर वक्त चिडियों का शोरगुल सुनाई देने लगा है।श्रवण अग्रवाल का इस सुकृत्य की सीख उसके बुजुर्गो से मिली थी। गर्मी के दिनों में दाना पानी की अनुपलब्धता के कारण कई छोटे पक्षी दम तोड़ देते हैं। इन पक्षियों को बचाने के लिए मिटटी के बर्तन में पानी रखने से उन्हे निष्चित ही लाभ मिलता है। इस वजह गर्मी के दिनों में पक्षियों के लिए दाना पानी उपलब्ध कराने से उन्हे काफी सुकून मिलता है।
                                         दैनिक भास्कर ने की है दाना पानी की पहल
 यहां के पर्यावरणविद डा.परिवेश मिश्रा ने गौरैया चिडि़या की लगातार कम होती संख्या पर चिंता जाहिर की है। उन्होने कहा कि गौरैया मूलतः अपने घर में ही या आसपास ही देखने को मिल जाती थी, लेकिन अब पक्के घरों में गौरैया के घोंसले बनाने की जगह नहीं मिल पाने से यह बाहर उड़ चुकी है। लोगों को जागरूक करने के लिए दैनिक भास्कर ने थोड़ा सा दाना थोड़ा पानी का नारा देकर इस दिशा में सार्थक पहल की है। उन्होने कहा कि गर्मी के दिनों में सभी को घरों की छत पर या उंचाई वाले स्थान पर पक्षियों के लिए दाना पानी देने के काम में अपनी भागिदारी निभानी चाहिए।

गुरुवार, 1 जनवरी 2015

सात समंदर पार से आई खुशी

जर्मनी की बाला का छत्तीसगढ़ प्रेम
सेवा के कार्य में भाषा नहीं बनती रूकावट
    रमेश शर्मा /पत्थलगांव/
         
         ममतामयी मदर टेरेसा के दिखाए मार्ग पर चल कर समाज सेवा करने के लिए सात समन्दर पार रहने वाली एक विदेशी बाला ने देश के सैकड़ों शहरों में पत्थलगांव को चुना है। जर्मनी की इस बाला ने यहां की समाज सेवी संस्था राहा व्दारा संचालित विकलांग सेवा केन्द्र में रहने वाले असहाय बच्चों को अपनी सेवा देकर उन्हे आत्म निर्भर बनाने का निर्णय लिया था। सेवा के इस काम में उसे खुशियों का खजाना मिल गया है। इस विदेशी बाला ने पूरी लगन और ईमानदारी से सेवा के दायित्व का निर्वहन किया, जिससे लारा नामक विदेशी युवती अब यहां रहने वाले विकलांग बच्चों के साथ उनके परिजनों की भी चहेती बन गई है।  
       रायगढ़ अम्बिकापुर हेल्थ एसोसिएशन नामक समाज सेवी संस्था की निदेषक सिस्टर एलिजाबेथ ने बताया कि जर्मनी में स्कूली षिक्षा पूरी करने के बाद कम से कम दो वर्ष तक समाज सेवा के क्षेत्र में काम करने की अनिवार्यता है। इसी के चलते जर्मनी के स्काच शहर की निवासी सुश्री लारा बुसेमर ने दो साल पहले छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव शहर में आकर समाज सेवा का मन बनाया था। लारा को यहां विकलांग बच्चों के साथ रह कर उन्हे पढ़ाने लिखाने का माहौल इतना रास आया कि उसकी निर्धारित समयावधि देखते ही देखते पूरी हो गई। बाद में लारा ने यहां के ग्रामीण विकलांग बच्चों का प्यार और आत्मीयता को देख कर उनके बीच में लगभग दो माह और व्यतित कर लिए हैं। यहां लारा ने अपने समाज सेवा के काम से सभी को आष्चर्य चकित कर डाला है।
                                                   याद खींच लाई दुबारा
         शहर का विकलांग सेवा केन्द्र में रहने वाले विकलांग बच्चे तथा यहां पदस्थ अन्य स्टॅाफ से मिला प्यार दुलार की यादें लारा को यहां फिर से खींच लाई है। इस बार लारा अकेली नहीं बल्कि अपनी माता श्रीमती जेली व पिता पीटर बुसमेर को भी साथ लेकर आई है। विकलांग सेवा केन्द्र में रह कर विद्या अध्ययन करने वाले बच्चे भी फिर से लारा को अपने बीच में देख कर काफी खुश हैं। लारा का कहना था कि दूसरी बार पत्थलगांव पहुंच कर उसे बेहद प्रसन्नता हो रही है, क्योकि यहां पोलियो और अन्य बीमारियों से पीड़ित इन बच्चों ने अब अपने पैरों पर खड़ा होना सीख लिया है। ये बच्चे पढ़ लिख कर जब आत्म निर्भर बन जाएंगे, उस दिन का उसे बेसब्री से इंतजार है। 21 साल की सुरी लारा का कहना था कि उसकी जिन्दगी में यहां व्यतित किया गया समय एक यादगार समय बन कर रह गया है। यहां छोटे बच्चों की भाषा नहीं समझने के बाद भी उनके व्दारा इशारों में अपनी बात को समझाने का ढंग तथा बेहद भोलेपन के साथ किया जाने वाला हंसी मजाक के क्षण को वह कभी भी नहीं भूल पाती है।
                                                 मदर टेरेसा है प्रेरणा
    लारा ने बताया कि उसे ममतामयी मदर टेरेसा के बारे में पढ़ने के बाद ही भारत में आकर समाज सेवा के कार्य करने की इच्छा हुई। तदर की प्रेरणा से उसने स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद भारत के किसी गांव में आकर समाज सेवा करने का निश्चय किया था। स्कूल के एक सहपाठी ने इंटरनेट पर छत्तीसगढ़ के पत्थलगांव शहर में विकलांग बच्चों के लिए काम करने वाला इस सेवा केन्द्र का नाम सुझाया था। लारा ने बताया कि पत्थलगांव के बारे में जितना सुना था, यहां पहुंच कर उससे भी ज्यादा अच्छा वातावरण देखने को मिला । इस विदेशी बाला का कहना था कि भविष्य में भी उसकी समाज सेवा के कार्यो से जुड़े रहने की तमन्ना है। लारा ने कहा कि मदर टेरेसा के दिखाए मार्ग पर चल कर वह भी अपने पराए का भेद भुला कर सेवा के सहयोग में अपना हाथ बांटना चाहती है।

गुरुवार, 25 दिसंबर 2014

जन्मदिन के उपहार ने बनाया लड़ाकू विमान का पायलट

रमेश शर्मा | पत्थलगांव
बचपन में जन्म दिन का उपहार के रूप में मिलने वाला जगुवार जहाज की शक्ल वाला साधारण खिलौना को समझने की उत्सुकता ने ग्राम कछार का होनहार बालक राकेश यादव को वायुसेना में फ्लाइंग आफिसर के पद पर पहुंचा दिया है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे और हैदराबाद में एयर फोर्स का प्रशिक्षण पूरा कर लेने के बाद यह बालक देश के लड़ाकू विमान का पायलट बन जाएगा।
यूपीएससी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे की परीक्षा में 211 वें रेंक के साथ सफलता अर्जित कर लेने के बाद इस युवक ने एसएसबी बोर्ड इलाहाबाद की परीक्षा भी 66 वें रेंक में उत्तीर्ण कर ली है। इस कठिन दौर की परीक्षाओं में शानदार सफलता के बाद राकेश यादव का लड़ाकू विमान के प्रशिक्षण के लिए चयन हो गया है।
पत्थलगांव के समीप छोटा सा कछार नामक गांव का निवासी होनहार बालक 28 दिसंबर से राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पूणे में आयोजित तीन साल का प्रशिक्षण में भाग लेने जा रहा है। राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे में सुपर डिमोना ब्लॅाइडर का प्रशिक्षण के बाद उसे हैदराबाद में एक साल एयर फोर्स अकादमी का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसे पूरा कर लेने के बाद राकेश यादव सुखोई, मिग 29 और मिराज 23 की उड़ान भरने लगेगा।
                                                         आड़े नहीं आता ग्रामीण परिवेश
राकेशयादव का कहना है कि यदि एकाग्रता के साथ लक्ष्य बना कर पढ़ाई की जाए तो ग्रामीण माहौल कहीं भी आड़े नहीं पाता। जरूरत इस बात की है कि ग्रामीण अंचल के प्रतिभावान बच्चों को आगे बढ़ने के लिए उनके अभिभावकों को सही पाठयक्रम की जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए। इससे प्रतिभावान बच्चों को अपना लक्ष्य हासिल करने में समुचित सहयोग मिल जाता है। राकेश यादव का कहना था कि गाला जैसे छोटे से गांव में पढ़ाई की शुरुआत करने के बाद भी उसे सैनिक स्कूल की प्रतियोगी परीक्षा में शामिल होने एवं पाठयक्रम के बारे में पूरी जानकारी उसके पिता से निश्चित समय पर मिल गई थी। इसी की बदौलत उसको अपना लक्ष्य मिल पाया है।
                                                   गाला गांव से हुई थी पढ़ाई की शुरुआत
गाला के सरस्वती शिशु मंदिर में अपनी प्राइमरी शिक्षा की शुरुआत के बाद इस बालक की लगन और मेहनत से उसका रींवा के सैनिक स्कूल में चयन हो गया था। रींवा के सैनिक स्कूल में विभिन्न विषय की पढ़ाई के साथ वहां परेड और अनुशासन के साथ शारीरिक क्षमता पर विशेष ध्यान देने के बाद इस बालक की प्रतिभा में और भी निखार गया था। राकेश यादव का कहना है कि सैनिक स्कूल में पारिवारिक माहौल में रहकर उत्कृष्ट शिक्षा के बाद लड़ाकू विमान में पायलट बनने का सपना आसान दिखने लगा था। इसी लक्ष्य को सामने रख कर राकेश ने गणित एवं कम्प्यूटर साइंस विषय में मजबूत पकड़ बना ली थी। हायर सेकेंडरी तक की पढ़ाई के दौरान इस बालक को गणित में 100 में 100 अंक के अलावा कंप्यूटर साइंस की प्रैक्टिकल परीक्षा में 30 में 30 अंक प्राप्त होते थे। यहां 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उसने यूपीएससी द्वारा आयोजित राष्ट्रीय रक्षा अकादमी पुणे की परीक्षा में शामिल होने के लिए आवेदन भरा था। इसमें 211 वें रेंक की अच्छी सफलता के बाद आगे की राह भी आसान हो गई। राकेश यादव के पिता लक्ष्मण यादव ग्राम गाला में पशु चिकित्सा क्षेत्र अधिकारी के पद पर कार्यरत हैं। उनका कहना है कि लगन और लक्ष्य के साथ गांव में रह कर भी ऊंचाइयों को छुवा जा सकता है। फ्लाइंग आफिसर के लिए राकेश यादव का चयन हो जाने के बाद इस होनहार बालक ने अपनी सफलता का श्रेय ग्राम गाला के गुरुजनों के अलावा उसकी माता डिलेश्वरी यादव और पिता लक्ष्मण यादव को दिया है। इस बालक का कहना है कि वह देश की रक्षा के लिए लड़ाकू विमान चला कर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करना चाहता है।

शुक्रवार, 12 दिसंबर 2014

कटनी गुमला सड़क की बदहाली: केन्द्र सरकार से पूछा सवाल

रमेश शर्मा / पत्थलगांव/        
शहर में एनएच की बदहाल सड़क पर डामरीकरण
का काम में आज भी गुणवत्ता की अनदेखी हो रही है।
 झाड़ू से लिपापोती के बाद डामरीकरण का काम
जशपुर जिले में दैनिक भास्कर व्दारा नागरिकों के सरोकार का मुद्दा कटनी गुमला एनएच सड़क की बदहाली और मानव तस्करी के मामलों पर अंकुश लगाने के लिए प्रमुखता से उठाई गई खबरों को लेकर राज्यसभा सदस्य रणविजय सिंह जूदेव ने दोनांे मुद्दों पर केन्द्र सरकार से जवाब मांगा है। कटनी गुमला राष्ट्रीय राज मार्ग की बेहद जर्जर हालत को सुधारने के नाम पर बार बार गुणवत्ता की अनदेखी करने और करोड़ों की लागत का डामरीकरण के काम को एक ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को दिए जाने पर राज्य सभा सदस्य रणविजय सिंह जूदेव ने केन्द्र सरकार का ध्यानाकर्षण करा कर इस मामले मे विस्तृत जवाब मांगा है। 3 दिसंबर को राज्यसभा में कटनी गुमला राष्ट्रीय राजमार्ग के कार्य में गुणवत्ता की अनदेखी करने का यह मामला राज्यसभा के सदन में उठाए जाने के बाद एनएच विभाग के अधिकारियों में खलबली मच गई है।
                                                 2 माह की सड़क दुर्घटना में 6 की मौतें

बस स्टैण्ड चौराहे पर एनएच के जानलेवा गड्ढे में फंसा ट्रक
इस सड़क पर जगह जगह जानलेवा गड्ढे बन जाने से यहंा वाहनों की दुर्घटना में भी काफी इजाफा हुआ है। पत्थलगांव क्षेत्र में लगभग 10 कि.मी. लम्बा कटनी गुमला हाइवे की बदहाली का सुधार कार्य कराने के लिए एनएच विभाग के अधिकारियों 4 बार निविदा आमंत्रित कर इन्हे बगैर कारण के ही निरस्त कर दिया था। इस वजह यहंा की जर्जर सड़क पर जानलेवा गड्ढे बन जाने के बाद 2 माह में सड़क दुर्घटना के अलग अलग मामलों में 6 लोगों की मौत हुई थी। कटनी गुमला सड़क की बदहाली से पैदल चलने वाली राहगिरों की मौत और डामरविहिन इस सड़क पर रात दिन उड़ने वाली धूल से परेशान नागरिकों ने कई बार आन्दोलन भी किया था लेकिन एनएच अधिकारियों ने नागरिकों को राहत देने की कोई पहल नहीं की थी।

                                               6 माह में 12 बार हो चुका विरोध प्रदर्शन
      कटनी गुमला सड़क की बदहाली को लेकर यहाँ 6 माह में नागरिकों व्दारा दर्जन भर से अधिक बार आन्दालन कर अपना विरोध जता चुके हैं। एक माह पहले यहाँ के स्कूली छात्र छात्राओं के साथ उनके प्राध्यापकों का मानव श्रृख्ंाला बना कर चक्काजाम आन्दोलन और एसडीएम रामानंदन सिंह का घेराव भी किया गया था। बस स्टैण्ड चौराहे की इस घटना के बाद एसडीएम रामानंदन सिंह ने एनएच अधिकारियों के खिलाफ भू राजस्व संहिता के तहत अपराधिक मामला भी दर्ज किया था लेकिन एनएच अधिकारियों ने जर्जर सड़क पर डामरीकरण कराने की दिशा में कोई पहल नहीं की। शहर में एनएच सड़क पर जानलेवा गड्ढेे बन जाने के बाद कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता ने यहंा कि.मी.क्रमांक 466,467 और 468 पर डामरीकरण का काम के लिए बाढ़ आपदा मद से 46 लाख रुपयों का एनएच विभाग को आबंटन उपलब्ध कराया था। इस आंबटन के बाद एनएच विभाग के कार्यपालन अभियंता जेपी तिग्गा ने इस में नरेगा पध्दति की शर्त होने के कारण इस कार्य की निविदा को आमंत्रित कर उसे भी निरस्त कर दिया था। कटनी गुमला हाईवे की बदहाली नहीं सुधर पाने से यहंा के नागरिक खासे परेशान हो गए थे। एनएच सड़क की बदहाली को लेकर पिछले सप्ताह यहंा सभी राजनैतिक दल के लोगों ने एक मंच पर इकट्ठा होकर अनिश्चितकालीन आन्दोलन करने की चेतावनी दी थी। जर्जर एनएच सड़क के विरोध में नागरिकों का आन्दोलन से यहाँ कानून व्यवस्था बिगड़ने का अंदेशा को देख कर एनएच विभाग ने बगैर निविदा के ही शहर के 3 कि.मी. में नया डामरीकरण का काम शुरू करा दिया है,लेकिन इसके आगे और पीछे की सड़क की बदहाली जस की तस है।
                                    दैनिक भास्कर ने उठाया था नागरिकों के सरोकार का मामला
 जिले में कटनी गुमला राष्ट्रीय राज मार्ग के कि.मी.क्रमांक 516 से 541 तक 8 करोड़ रूपयों का डामरीकरण का काम को बगैर पड़ताल के एक ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को दिए जाने की खबर को दैनिक भास्कर ने 12 नवंबर के अंक में प्रमुखता के साथ उठाया था। जशपुर जिले में सुखरापारा से शंख तक 146 कि.मी.लम्बी कटनी गुमला सड़क की बदहाली सुधारने के दौरान बार बार गुणवत्ता की अनदेखी करने से यहंा समूची सड़क जर्जर हो गई है। बीते 4 दिनो से पत्थलगांव का शहरी क्षेत्र में एनएच विभाग ने नया डामरीकरण का काम शुरू कराया है। शहर में 3 कि.मी.की इस सड़क पर करोड़ों रुपयों के इस काम की देखरेख के लिए विभाग के तकनीकी  अधिकारी प्रारम्भ से ही नदारद रहने से यहंा काम की गुणवत्ता पर फिर से सवालिया निशान लग गया है।

 
कैप्राज्यसभा सदस्य रणविजय सिंह जूदेव
                सीधी बात: रणविजय सिंह जूदेव, राज्यसभा सांसद
सवाल/ राज्यसभा सदस्य बनने के बाद जशपुर जिले में अच्छी सड़कों का निर्माण कराना आपने पहली प्राथमिकता बताई थी। इस दिशा में क्या प्रयास हो रहे है?
      राज्यसभा सदस्य बनने के बाद मैंने राज्यसभा की कार्रवाई को समझने के बाद सबसे पहला सवाल कटनी गुमला राष्ट्रीय राज मार्ग की बदहाली को लेकर ही उठाया है। इस सड़क की बदहाली का मेरा सवाल 3 दिसंबर को सदन के पटल पर रखा गया है। इस पर जल्द ही केन्द्र सरकार जवाब देगी।
       इसके अलावा जशपुर जिले में आदिवासी युवक युवतियों को अच्छी नौकरी देने का झांसा देकर उन्हे देश के महानगरों में बेचने का भी मामला पर केन्द्र सरकार से सवाल किया गया है। मानव तस्करी की रोकथाम के लिए केन्द्र सरकार क्या नियम बना रही है, इस समस्या पर कैसे अंकुश लग सकेगा, अब तक कितने लोग प्रभावित हुए हेैं, ऐसी बहुत सारी बातें हैं। इसके लिए केन्द्र सरकार से सवाल किया गया है। इसके बाद मानव तस्करी के मामलों में अवश्य रोकथाम हो पाएगी।
सवाल/ कटनी गुमला हाईवे की बदहाली से आप अवगत हैं !
          कटनी गुमला सड़क का निर्माण में गुणवत्ता की अनदेखी करने से जशपुर जिले के नागरिकों को आवागमन में काफी परेशानी उठानी पड़ रही है। पूरे जिले में नागरिकों की इस गंभीर समस्या के मददेनजर ही यह मामला को राज्यसभा में उठा कर केन्द्र सरकार से जवाब मांगा गया है।
सवाल/ केन्द्र सरकार के सामने एनएच विभाग की कौन-कौन सी खामियों को उठाया गया है ? 
   जिले में कटनी गुमला सड़क पर डामरीकरण का काम को गुणवत्ता के साथ कब तक पूरा कर लिया जाएगा ! इसके अलावा यहंा डामरीकरण की निविदा को आनन फानन में किसी ब्लैक लिस्टेड ठेकेदार को देने की शिकायत पर भी पुष्ट जानकारी मांगी गई है। इस मामले में केन्द्र सरकार से विस्तृत जानकारी देने के लिए सदन में सवाल उठाया गया है।

गुरुवार, 11 दिसंबर 2014

रोगों के उपचार में भी ज्योतिष शास्त्र उपयोगी: डा.त्रिपाठी

डा. शत्रुघन त्रिपाठी  ज्योतिषविद पत्थलगांव
पत्थलगांव/ 
ज्योतिष शास्त्र में मांगलिक व वैवाहिक कार्यो का मुहूर्त के अलावा हृदय रोग, नेत्र रोग तथा अनेक जटिल रोगों का उपचार के लिए कई उपयोगी उपाय बताए गए हैं। इन उपायों को निश्चित समय पर करने से न केवल स्वास्थ्य में तेजी से सुधार होता है बल्कि रोग का सही उपचार के बाद जीवन की निराशा से भी बचा जा सकता है।
     उक्त बातें शनिवार को किलकिवरधाम में आयोजित निरोग जीवन के लिए जरूरी उपाय विषय पर आयोजित संगोष्ठि में प्रमुख ज्योतिषविद डा.शत्रुघन त्रिपाठी ने कही। काषी हिन्दू विश्वविद्यालय वाराणसी के प्रोफेसर डा.त्रिपाठी को इस वर्ष हृदय रोग का ज्योतिष शास्त्रीय निदान एवं उपचार विषय पर किए गए शोध पर उन्हे राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने पुरस्कार से सम्मानित किया है।
       इस संगोष्ठि में उन्होने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में मानव जीवन के भाग्य निर्धारण, शुभाशुभ निर्धारण के साथ स्वास्थ्य संबंधी सभी जानकारी पूर्णतः वैज्ञानिक हैं। प्राचीनकाल में केवल 2 विज्ञान थे, पहला आयुर्वेद विज्ञान जो स्वास्थ्य रक्षण में तत्पर था । दूसरा आज के विख्यात सभी विज्ञान के अनुभागों को अपने गर्भ में संजोया था। उन्होने बताया कि ज्योतिष शास्त्र में आयुर्वेद विज्ञान मौजूदा समय में मानव के रोग निदान के लिए बेहद उपयोगी साबित हो रहा है।
        डा.त्रिपाठी का कहना है कि  ऋग्वेद के 10 वें मंडल में हृदयरोग की चर्चा सबसे पहले प्राप्त होती है। इसमें हृद्रोग मम सूर्य हरिमाण्य च नाषय मंत्र के आधार पर सूर्य को हृदयरोग का प्रमुख कारण निवारण पाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र के विविध ग्रन्थों में कुल 66 ग्रहयोग हैं। इन ग्रहयोगों के अध्यन के उपरांत जातक की जन्तकुंडली के अधार पर रोगों से बचने का भी उपाय ज्ञात हो जाता है।
                 जन्मकुंडली जीवन का आईना
           डा.त्रिपाठी ने बताया कि वास्तव में ज्योतिष शास्त्र में जन्म कुंडली को जीवन का आईना भी माना गया है। इसका अध्ययन करने पर यदि चतुर्थ भाव में सूर्य, शनि एवं मंगल की स्थिति के अलावा दषमस्थ शनि सूर्य की स्थिति, शत्रुक्षेत्री सूर्य यदि पाप ग्रहों के साथ चतुर्थ भाव में विराजमान रहने से हृदय रोग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इस रोग का बचाव के लिए ज्योतिष शास्त्र में ही अचूक उपाय भी बताए गए हैं। इनमें हृदय रोग से बचाव के लिए ललिता सहस्त्रनाम मंत्र, हृदयघात होने पर नृसिंह मंत्र का जाप, हृच्छूल होने पर राहु व आदितहृदयस्त्रोत का पाठ, हृदयरोग की शल्यक्रिया की सफलता हेतु भविष्य पुराणोक्तं आदित्य हृदय का विधि विधान से पाठ, घातक स्थिति में विषिष्ठ मृतसंजीवनी मंत्र व पाषुपतास्त्र का पाठ विशेष फलदायी रहता है। डा.त्रिपाठी ने कहा कि किसी को सामान्य हृदयरोग होने की स्थिति में रविवार को सूर्य की आराधना व माणिक्य पांच रत्ती धारण करने से रोगी को अवष्य लाभ मिलता है।
                हृदय रोग के कारक ग्रह 
 ज्योतिष शास्त्र में हृदयरोग का मुख्य कारक ग्रह शनि, सूर्य, राहु, मंगल तथा गुरू है। जिस ग्रह की दशा अन्तरदशा में रोग के लक्षण दिखते हैं उसके अनुसार पूजा अर्चना से ही लाभ मिलता है। उन्होने कहा कि जन्मकुंडली में नीचस्थ सूर्य एवं दशम भावस्थ मंगल में मधुमेह व उच्च रक्तचाप की संभावना बढ़ जाती है। इन रोगों का भी ग्रहदशा से निदान का उपाय है। जन्मलग्न में 12 वां भावस्थ शुक्र तथा अष्टमावस्था में शनि से कोलेस्ट्राल में विकार उत्पन्न करता है। चैथे भावस्थ शनि, मंगल एवं राहू की युक्ति से रोगी को राहत दिलाई जा सकती है। डा.त्रिपाठी का कहना था कि शनि,गुरू,राहु की सूर्य की दशाओं में यह रोग उत्पन्न होता है तथा कष्टप्रद भी होता है। निरोग जीवन के लिए आयोजित इस संगोष्ठि में मारवाड़ी युवा मंच के पूर्व अध्यक्ष अनिल अग्रवाल, साधुराम अग्रवाल, पार्षद वेदप्रकाश मिश्रा, शक्तिनाथ मिश्रा, विजय शर्मा, जगन्नाथ गुप्ता के अलावा अनेक बुध्दिजीवियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए।


शनिवार, 15 नवंबर 2014

रास आने लगा महंगे पान का जायका

पान लबों की शान के साथ विक्रेता
 
संडे स्पेशलः
गुटखा,पाउच का दौर में भी दूर
 नहीं हुए पान के शौकीन

रास आने लगा महंगे पान का जायका

रमेश शर्मा /पत्थलगांव

लबों की शान कहलाने वाला पान के टेस्ट में तरह-तरह के बदलाव के साथ इसकी पैकिंग को विशेष बना देने से इसके शौकीन महंगाई के बाद भी पान की दूकान से दूर नहीं हो पा रहे हैं। गुटका पाउच का चलन बढ़ जाने के बाद पान विक्रेता अपना पारम्परिक व्यवसाय को जीवित रखने के लिए अब सादा पान से लेकर आयुर्वेदिक, ग्लुकोज,ड्रायफ्रू
और चॉकलेटी पान की वैराइटी उपलब्ध कराने लगे हैं। अलग अलग रेंज के मंहगे पान होने के बाद भी युवकों के साथ युवतियों को भी यह स्वाद काफी रास आने लगा है।

वैसे तो पान पुराने लोगों की पसंद माना जाता है लेकिन अब फूड और शीतल पेय की तरह पान के फ्लेवर में भी कई तरह के बदलाव कर देने से पान का व्यवसाय भी अच्छी कमाई का जरिया बन गया है। ठंड के दिनों में पान पत्तों की आवक कम हो जाने से इसके थोक दाम बढ़ जाने के चलते पान विक्रेताओं को अपने ग्राहकों की मांग के अनुसार पहले से ही पर्याप्त मात्रा में स्टॅाक रखना पड़ता है।

यहां के पान विक्रेता धर्मेंद्र साहू का कहना है कि इन दिनों गुटका और पाउच का दौर शुरू हो जाने से उन्हे पान के टेस्ट के अलावा उनकी पैंकिंग पर भी विशेष ध्यान देना पड़ रहा है। उनके पास पहुंचने वाले पान के शौकीनों के लिए लम्बा सफर के लिए खास तरह की पैंकिग करनी पड़ती है। इससे उनके ग्राहक निरंतर बने रहते हैं। श्री साहू का कहना था कि इन दिनों सबसे ज्यादा क्रीम और चॉकलेट
फ्लेवर वाले पान पसंद किए जा रहे हैं। पान में डाले जाने वाले मसाले में चॉकलेट नटस रखे जाते हैं,इससे मुंह में पान का स्वाद और बढ़ जाता है। पान को बांधने के बाद उस पर चॉकलेट की कोटिंग के साथ क्रीम का जायका लगा देने से यह युवक युवतियों की खास पसंद बन जाता है।


रसगुल्ला व ड्रायफ्रूयुक्त पान

यहां के पान विक्रेताओं ने ड्रायफ्रूट युक्त पान की खास वैरायटी तैयार की जा रही हैं। ऐसे पान सगाई,बर्थ डे तथा खास अवसर पर ग्राहकों के आर्डर पर ही तैयार किए जाते हैं। ये पान 5 से 10 दिन तक खराब नहीं होते हैं। इसलिए महंगे पान के भी पान विक्रेताओं को खूब आर्डर मिल रहे हैं। रसगुल्ला पान की खासियत उसका स्वाद और शेप है। रसगुल्ले की तरह यह सॉप्ट तो होता ही है लेकिन मुंह में रखने के बाद इसके स्वाद की तारीफ अवश्य होती है।

स्पेशल डिब्बी में औषधीय पान

पान विक्रेता धर्मेन्द्र साहू का कहना था कि औषधीय पान की पैंकिग के लिए स्पेशल डिब्बियां मिलने लगी हैं। इसमें पान पैक करके दिए जाते हैं। इस तरह की पैकिंग के कारण पान में लम्बे समय तक ताजगी बनी रहती है। उन्होने बताया कि मुंह के छाले, जुकाम और सर्दी से छुटकारा दिलाने के लिए औषधीय पान ग्राहकों के बीच काफी लोगप्रिय होने लगा है।

मीठे पत्ते पर फ्रूटी खोपरा,ग्लुकोज और गुलकंदयुक्त पान फैमिली पान के रूप में आज भी अपनी पहले की तरह जगह बनाए हुए है। यह सबसे पुरानी रामेष्वर पान दुकान के विक्रेता बिहारी सिंग का कहना है कि गुटका और पाउच का दौर में भी ग्राहक इस पान से दूर नहीं हो पाए हैं। फर्क इतना है कि सर्दी के दिनों में मीठे पत्ते और गर्मी के दिनों में मघई या बनारसी पत्ते पर यह तैयार किया जाता है।
 



शनिवार, 8 नवंबर 2014

प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में भव्य शोभायात्रा

पंज प्यारे के सामने निशान साहेब
कीर्तन में गूँज . बोले सो निहाल, सतश्री अकाल
पत्थलगांव/    रमेश शर्मा
      बोले सो निहाल, सतश्री अकाल का जयकारे गुरुवार को शहरभर में गूंजे । काफी बड़ी संख्या में सिक्ख समाज जन सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव जी की महिमा का गुणगान करते शहर के प्रमुख मार्गो से निकले।
          अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत ते सब बन्दे की सुमधुर पंक्तिय को जत्थों व्दारा गाया जा रहा था। रंग बिरंगे फूलों से सजी शोभायात्रा का जगह जगह लोगों व्दारा आत्मीय स्वागत किया जा रहा था। पूरे रास्ते भर प्रसाद का वितरण किया जा रहा था। इस शोभायात्रा में शस्त्र कला व युद्ध कौशल के प्रदर्षन ने खासा रोमांच जगाया। यहां  पर गुरुसिंह सभा के गुरुव्दारा में 11 बजे से कीर्तन की शुरूवात हो गई थी। कीर्तन से पहले पूर्ण गुरुसिखी मर्यादा के अनुसार अरदास की गई।
       दोपहर गुरु अटूट लंगर के पश्चात सुसज्जित ट्रक में सजी हुई पालकी में गुरुग्रंथ साहिब को विराजमान किया गया। यहां  सिक्ख संगत ने काफी आकर्षक ढंग से पालकी को सजाया था। इस सवारी के आगे पंज प्यारे की भूमिका में अमरजीत सिंह काके, गोल्डी भाटिया, इन्दरजीत, अपनी एक जैसी वेश भूषा में उपस्थित थे। सवारी के आगे सिक्ख संगत के कार्यकत्र्ता सड़क धोने व झाड़ू से मार्ग साफ करने की सेवा कर रहे थे। शोभा यात्रा के साथ नगर कीर्तन के इस के कार्यक्रम में गुरुव्दारे का शब्दी जत्था भी उपस्थित था। शोभा यात्रा में सबसे आगे निशान साहेब के साथ अवनित भटिया चल रहे थे। सीतापुर के बेदी ढ़ोलकी तथा विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ बेहद अनुशासित रूप से पूरी संगत आगे बढ़ रही थी। इस शोभायात्रा और कीर्तन में शस्त्र कला व युध्द कौशल के प्रदर्षन ने खासा रोमांच जगाया।
       वीर खालसा गतका ग्रुप,स्मार्ट इंटरनेशनल गतका एकेडमी के युवकों ने युध्द कौशल का प्रदर्षन शानदार ढंग से किया। गुरुव्दारा गुरुसिंह सभा से निकल कर भव्य शोभायात्रा के साथ सिक्ख संगत सबसे पहले जशपुर रोड़ गई। यहां  अन्य समुदाय के लोगों ने भी गुरुग्रंथ साहेब का आत्मीय स्वागत कर संगत के लिए स्वलपाहार की व्यवस्था कराई थी। इस शोभायात्रा में सीतापुर, धर्मजयगढ़, कांसाबेल से भी सिक्ख संगत काफी बड़ी संख्या में शामिल हुई थी। 
                                               दिखा सांप्रदायिक सौहार्द
 गुरुग्रथ्ंा साहिब की शोभायात्रा एवं नगर कीर्तन के कार्यक्रम में सांप्रदायिक सौहार्द के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सफाई का संदेशके प्रति जागरूकता का दृष्य भी दिखाई दिए। यहां  बस स्टैण्ड का इंदिरा चैराहा के समीप अग्रवाल सभा के युवकों ने गुरुग्रंथ साहेब का स्वागत करने के पश्चात पूरी संगत के लिए जलपान की व्यवस्था की थी।रायगढ़ रोड़ ,जशपुर रोड़ और अम्बिकापुर रोड़ में भी कई जगह विभिन्न समुदाय के लोगों ने शोभा यात्रा के साथ पंज प्यारों का स्वागत कर सभी के लिए जलपान की व्यवस्था कराई थी। सरदार हरपेज सिंह भाटिया ने शोभायात्रा के दौरान सभी वर्ग के लोगों को प्रसाद वितरण किया गया।


बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

जज्बे से छँट गया अंधेरा

महिला मंडल की सदस्य दृष्टिबाधित बच्चों के साथ दीपावली का पर्व मनाते हुए

दूसरों से मिलती हैं त्योहार की खुशियॉं
दृष्टिबाधित बच्चों के चेहरों पर फैली खुशियॉं
   रमेश शर्मा/  पत्थलगांव/     
       अपनी जिन्दगी में रोशनी के उजाले से दूर रहने वालों के चेहरों पर यदि खुशियां लाई जाए, तो यह क्षण दीपोत्सव के अवसर पर तरह तरह के स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद से भी अधिक प्रभावशाली साबित होता है। जीवन की तेज भागदौड़ की व्यस्तता के बीच पत्थलगांव महिला मंडल की सदस्यों ने बुधवार को यहां दृष्टि बाधित गरीब बच्चों को ढेर सारे उपहार भेंट कर ऐसी ही खुशियों का आनंद लिया।
    यहां की समाज सेवी संस्था राहा व्दारा ग्रामीण अचंल में रहने वाले 20 दृष्टिबाधित बच्चों को पत्थलगांव का शक्ति सेवा केन्द्र में पढ़ा लिखा कर आत्म निर्भर बनाने की पहल शुरू की है। इन 20 बच्चों के लिए आवास भोजन की निशुल्क व्यवस्था के साथ ब्रेल लिपि के प्रशिक्षित शिक्षक इन्हे जीवन में आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि इन बच्चों की बचपन से ही आंखों की रोशनी नहीं रहने से इनके अभिभावक अपनी गरीबी के कारण इन बच्चों को केवल बोझ की तरह ढो रहे थे। ऐसे बच्चों को यहां ब्रेल लिपि से पढ़ाने के साथ अन्य बच्चों के साथ खेल तथा पढ़ाई लिखाई कराने से इन्हे अपने जीवन में कुछ कर दिखाने के लिए नई डगर मिल गई है।
    पत्थलगांव की महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती चन्दा राजकुमार गर्ग ने बताया कि गरीब तबका के दृष्टिबाधित इन बच्चों के बारे में जब उन्हे जानकारी मिली तो वे महिला मंडल की अन्य सदस्यों के साथ किसी भी तीज त्योहार के समय इन बच्चों के लिए विभिन्न उपहार लेकर उनके बीच पहुंच जाती हैं। दृष्टिबाधित इन बच्चों व्दारा गीत संगीत के साथ खेल कूद और पढ़ने में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा दिया है। सभी बच्चे प्रातः खेल कूद में भाग लेने से पहले योग का भी शानदार प्रदर्शन करना सीख गए हैं। यहां के कई बच्चे जब मधुर संगीत के साथ गीतों का स्वर निकालते हैं तो किसी को विश्वास ही नहीं होता कि इनकी जिन्दगी में अंधेरा फैला हुआ है। दृष्टिबाधित बच्चों ने ब्रेल लिपि लिखने एवं पढ़ने की गति बढ़ाकर सामान्य लोगों की तरह चलने फिरने ,सार्वजनिक स्थलों में बिना किसी के सहयोग के चलने के अलावा अपने कार्यो को करने में सक्षम हो रहे हैं। राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ ने बताया कि दृष्टि बाधित इन बच्चों में सीखने का जज्बा के साथ उनमें रूचि के साथ ध्यानपूर्वक कठिन अभ्यास करने की लगन है। इसी वजह इन बच्चों ने अपने जीवन से अधंकार को हटाने सफलता हासिल की है।
             
जीने का जज्बे से छंट गया अंधेरा
                            छलके खुशी के आंसू
  महिला मंडल की सदस्यों ने दृष्टिबाधित इन बच्चों को दीपावली के अवसर पर नए कपड़े, मिठाई और खिलौने भेंट किए तब सभी बच्चों ने हंसते हुए एक साथ थैक्स आंटी कहा तो वहंा उपस्थित अन्य लोगों की आंखों में भी आंसू निकल पड़े थे। महिला मंडल की सह सचिव श्रीमती अर्चना अग्रवाल का कहना था कि दृष्टिबाधित इन बचचों ने अपनी लगन और मेहनत से ईश्वर के कोप को भी निरर्थक बना दिया है। उन्होने कहा कि ऐसे बच्चों की खुशियों से ही त्योहार की सच्ची खुशी मिलती है। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष पवन अग्रवाल, सिविल अस्पताल के बीएमओ डा.जेम्स मिंज, सेंट जेवियर स्कूल के प्राचार्य फादर पंखरासियुस सहित अनेक लोग उपस्थित थे।


गुरुवार, 7 अगस्त 2014

प्यार के संदेश की पूरी सुरक्षा



   सात समंदर पार पहुंचेगी रेशम की डोर
  रमेश शर्मा /पत्थलगांव /
       बारिश के बाद भी बहनों व्दारा भेजा गया आत्मीय और पवित्र रिश्ते का संदेश को भाइयों के पास पूरी हिफाजत के साथ पहुंचाने के लिए इस वर्ष डाक विभाग ने राखियों के लिए विशेष लिफाफों का इंतजाम किया है। प्लास्टिक कोटेड होने के कारण डाक विभाग का राखी के लिए विशेष लिफाफा बरसात के दिनों में पानी से भीगने का कोई डर नहीं है।
   यहां के डाक घर में राखी के लिए पहंचे इन विशेष लिफाफे को बहनों व्दारा काफी पसंद किया जा रहा है। यहां की रजनी दुबे ने बताया कि वह प्रति वर्ष अपने भाई के पास आस्ट्रेलिया में राखी भेजती है। रजनी का कहना था कि वह इस बात का ध्यान रखती है कि उसका भेजा हुआ प्यार का संदेश भाई के हाथों में समय पर पहुंच जाए। इस बार यहां डाक विभाग के प्लास्टिक कोटेड लिफाफे से उसकी बरसात में पानी से बचाने की चिंता कम हो गई है। यहां डाक विभाग के सूत्रों के अनुसार राखी के अवसर पर कई बहनों व्दारा सरहद में तैनात अपने भाइयों के पास राखी भेजी जाती है। इसके अलावा चेन्नई, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान के दूरस्थ क्षेत्र में यहां से राखियां पोस्ट की जाती हैं। ऐसे लोगों के लिए डाक विभाग के विशेष लिफाफे काफी कारगर साबित हो रहे हैं। यहां अम्बेडकर नगर में रहने वाले सारांश अग्रवाल का कहना था कि उसकी बहन प्रीति उसे प्रति वर्ष कनाडा से राखी भेजती है। उसे बहन की राखी का बेसब्री से इंतजार रहता है।
                 पवित्र रिश्‍ते की मध्यस्थता गर्व की बात
     यहां उप डाक पाल श्रीमती रजनी तिग्गा का कहना था कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि इस पवित्र रिश्ते की मध्यस्थता हमारा विभाग करता है। बहनों व्दारा भेजा गया प्यार का संदेश के लिफाफों को सुरक्षित व सतर्कता से भेजने के पूरे प्रयास किए जाते हैं। इसी कड़ी में यहां अत्याधुनिक व आकर्षक राखी के लिफाफे उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होने बताया कि राखी के विशेष लिफाफे की कीमत मात्र 7.50 रू. है। इन लिफाफों में बरसात के बावजूद आत्मीय और पवित्र रिश्ते का संदेश के साथ इसमें रेशम की डोर सुरक्षित पहुंच रही है।  

बुधवार, 6 अगस्त 2014

जीर्णोद्धार की बाट जोहता मुक्तिधाम


सीसी रोड़ का घटिया निर्माण के चलते
 सड़क पर भी उग गई घास
 संकल्प लेने वाले भूल जाते हैं वायदा

    अव्यवस्था से होती है परेशानी

 रमेश शर्मा /पत्थलगांव

         शहर में दानदाता और समाज सेवियों की लम्बी कतार के बाद भी यहां का मुक्तिधाम की बदहाली सुधारने की कोई पहल नहीं हो रही है। अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार के वक्त यहां पहुंच कर अक्सर मुक्तिधाम का कायाकल्प करने का संकल्प तो लिया जाता है, लेकिन इस परिसर से बाहर निकलते ही लोग अपने वादे को भुलकर व्यवसाय तथा अन्य गैर जरूरी कार्यो में उलझ जाते हैं।
               दो वर्ष पहले यहां अन्तरराष्ट्रीय समाज सेवी संस्था ने मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार करने का बीड़ा उठाया था, लेकिन मुक्तिधाम में दरवाजा लगाने के बाद इस संस्था के पदाधिकारियों ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं। शहर का मुक्तिधाम पर चोरों की नजर पड़ जाने के बाद यहां अंतिम संस्कार करने वाले लोहे के गटर काट कर गायब कर दिए गए हैं। बताया जाता है कि आस पास कबाड़ का व्यवसाय करने वाले यहां का लोहा ,दरवाजे तथा अन्य सामान खरीद लेने से मुक्तिधाम में अक्सर चोरो का डेरा लगा रहता है। यहां शव दाह स्थल से चोरों ने कई बार लोहे के मोटे गटर काट कर गायब कर देने से बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करने वालों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मुक्तिधाम परिसर में चारों ओर घांस और गंदगी का साम्राज्य बन जाने से यहां मृतक का अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी बेहद कठिन काम हो गया है। इस परिसर में पानी की खाली बोतल और अन्य कचरे का ढ़ेर से लोगों को दो घड़ी बैठ कर श्रध्दाजंलि देने के लिए भी जगह नहीं मिल पाती है।
यहां बने नवनिर्मित भवन के दरवाजे भी गायब
         नगर पंचायत ने इस परिसर में सीसी रोड़ बनवाने की पहल की थी लेकिन ठेकेदारी प्रथा का भ्रष्टाचार यहां भी अछूता नहीं रहा। सीसी रोड का निर्माण कार्य में गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देने से इस सड़क पर बरसात के बाद जगह जगह घास उग गई है। सीसी रोड का बेहद घटिया कार्य को लेकर लोग अक्सर यहां चर्चा करने लग जाते हैं। लेकिन सीसी रोड़ का निर्माण में भ्रष्टाचार करने वाले ठेकेदार के प्रति लोगों का आक्रोश चाय के उबाल की तरह रहता है। यहां मुक्तिधाम परिसर में बनाई गई सीसी सड़क अब जर्जर हालत में जा पहुंची है। मुक्तिधाम परिसर में ही पोस्ट मार्टम भवन के दरवाजे और खिड़कियों को भी चोरो ने निकाल कर इस भवन को बदनुमा बना दिया है। इसका सुधार कराने के बजाए नगर पंचायत ने मुक्तिधाम परिसर में बगैर जरूरत के फिर से लाखों रूपयों की लागत से नया भवन निर्माण कार्य का ठेका दे दिया गया है। इस निर्माण कार्य की देख रेख नहीं होने से इस नए भवन की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गया है।
    यहां पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों के सामने घास,कूड़ा से जीव जन्तु निकल कर सामने आ जाने से अक्सर जान के लाले पड़ जाते हैं। ऐसे वक्त यहां पर हर बार की तरह इस स्थल का कायाकल्प करने का संकल्प तो लेते हैं, लेकिन मुक्तिधाम से बाहर निकलते ही अपना वायदा को भूल जाते हैं।   
              मिलजुल कर दें जिम्मेदारी
   यहां के प्रमुख व्यवसायी श्रवण अग्रवाल का कहना है कि शहर में जनहित के कार्य कराने के लिए यहां दानदाताओं की कमी नहीं है। ऐसे कार्यो के लिए आपस में मिलजुल कर जिम्मेदारी बांटनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुक्तिधाम का कायाकल्प करने के लिए रोटरी क्लब के डिस्ट्रीक्ट गवर्नर सहित यहां दानदाता रामअवतार अग्रवाल, अनिल मित्तल, सुशील रामदास ने लाखों रू.उपलब्ध कराए हैं। उन्हांेने कहा कि समाजसेवियों में दृढ इच्छाशक्ति के अभाव के चलते मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार आज भी अधूरा पड़ा है।                   
 मुक्तिधाम परिसर में चारों ओर उग गई घास       
रोटरी क्लब करेगा पुनः पहल
     रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष महेन्द्र अग्रवाल पेटू ने बताया कि संस्था की ओर से इस मुक्तिधाम का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया था लेकिन संस्था के अन्य पदाधिकारियों का सहयोग नही मिल पाने से उनका सपना अधूरा रह गया। यहां मुख्य द्वार लगाने के बाद इस परिसर में छायादार वृक्षारोपण, विद्युत व्यवस्था की योजना आज भी अधूरी पड़ी है। श्री अग्रवाल का कहना था कि यहां पर साफ सफाई का अभाव और प्रकाश व्यवस्था का अभाव के चलते बरसात के दिनों में मुष्किलें और बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार के लिए शहर के समाजसेवी व दानदाताओं की मदद से एक बार फिर जीर्णोद्धार का प्रयास किया जाएगा ताकि इस महत्वपूर्ण स्थल को बेहतर बनाया जा सके।