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सोमवार, 24 अप्रैल 2017
बुधवार, 9 सितंबर 2015
मांड नदी से 1600 हेक्टेयर भूमि पर सिंचाई का लाभ
| सिंचाई सुविधा में इजाफा के बाद बहनाटांगर क्षेत्र में बढ़ेगा मुगंफल्ली, तिलहन और दलहन का रकबा |
गुड न्यूज
39 करोड़ की लागत की सुसडेगा व्यवपर्तन योजना को मिली
हरी झंडी: 6 ग्राम पंचायत के सैकड़ों किसानों को मिलेगा लाभ
रमेश शर्मा/पत्थलगाँवमांड नदी के तट पर सुसडेगा गांव में किसानों को सिंचाई सुविधा मुहैया कराने के लिए 39 करोड़ रुपयों की लागत से सुसडेगा व्यवपर्तन सिंचाई योजना को हरी झंडी मिल गई है। इस अचंल के किसानों ने सिंचाई साधनों की कमी के संबंध में पिछले दिनो क्षेत्रीय विधायक शिवशंकर साय पैंकरा के समक्ष जोर शोर से मांग उठाई थी। श्री पैंकरा ने सुसडेगा अंचल के किसानों को जल्द ही सिंचाई योजना स्वीकृत कराने का आष्वासन दिया था। सुसडेगा व्यवपर्तन सिंचाई योजना से ग्राम पंचायत बहनाटंागर, केराकछार, करमीटिकरा, किलकिला और सुसडेगा के सैकड़ों किसानों को इस सिंचाई योजना के पूरा हो जाने पर उनकी खेती का काम आसान हो जाएगा। सुसडेगा में स्वीकृत इस सिंचाई योजना से 1600 हेक्टेयर क्षेत्र में किसानों के खेतों में पानी की सुविधा मिल जाने से यहंा पर वर्षा के भरोसे नहीं रहना पड़ेगा।
सुसडेगा के आस पास छः ग्राम पंचायतों में सिंचाई नहरों का जाल बिछ जाने से यहंा भू जल स्तर भी उपर आने की बात कही जा रही है। ग्राम पंचायत बहनाटांगर की महिला सरपंच श्रीमती सम्पति बाई सिदार का कहना था कि इस अचंल की भूमि उपजाउ होने के बाद भी किसानों के पास सिंचाई साधनों की कमी है। इसके चलते ज्यादातर किसान मूँगफल्ली,दलहन और तिलहन फसल की अधिक पैमाने पर उपज नहीं ले पाते हैं। सिंचाई साधनों की कमी से यहंा पर ग्रामीणों को मजदूरी तथा अन्य कार्य करके जीवन यापन करना पड़ता था। उन्होने कहा कि बहनाटांगर में पहले सिंचाई सुविधा के लिए नहरों सं पानी देने की पहल भी हुई थी, लेकिन नहरों का सही रख रखाव नहीं हो पाने से किसानों को वर्षा का पानी पर ही निर्भर रहना पड़ता था।श्रीमती सिदार का कहना था कि यहंा पर सिंचाई का लाभ मिल जाने के बाद किसान अपने खेतों में धान की उपज के अलावा मुंगफल्ली,तिलहन और अन्य फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ कर सकेंगे।
सरगुजा जिले का सीमावर्ती गांव सुसडेगा के समीप मांड नदी का पानी को किसानों के खेतों तक पहुंचाने के लिए लम्बे अर्से से मांग की जा रही थी। लेकिन इस सिंचाई योजना को शासन से स्वीकृति नहीं मिल पा रही थी। पिछले दिनों विधायक शिवशंकर साय ने गांव गांव और घर घर पहुंचकर जनसम्पर्क करने का कार्यक्रम आयोजित किया तो सुसडेगा, सुरेशपुर, बहनाटांगर क्षेत्र के लोगों ने फिर से सिंचाई सुविधा मुहैया कराने की मांग पर जोर दिया था। सुरेशपुर क्षेत्र की उपजाउ भूति होने के बाद भी यहंा सिंचाई के साधनों की कमी है। इस वजह किसानों को खेती के अलावा मजदूरी का काम करना पड़ता है। अब यहंा सुसडेगा व्यवपर्तन योजना के लिए शासन से 3884.99 करोड़ रुपयों की प्रशासकीस स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। इससे अचंल के सैकड़ों किसानों को खेती के काम में भरपूर लाभ मिलेगा।
सिंचाई के साधनों में होगा इजाफा
संसदीय सचिव व क्षेत्रीय विधायक शिवशंकर साय पैंकरा ने बताया पत्थलगांव क्षेत्र में सिंचाई के साधन बढ़ा कर इस अचंल के किसानों को आत्म निर्भर बनाया जाएगा। उन्होने बताया कि सुसडेगा,बहनाटांगर,किलकिला क्षेत्र में सिंचाई साधनों की कमी को देखते हुए यह व्यवपर्तन सिंचाई योजना किसानों के लिए जीवन दायनी योजना साबित होगी। श्री पैंकरा ने बताया कि पत्थलगांव क्षेत्र के किसानों को लाभान्वित कराने के लिए सिंचाई के साधनों में इजाफा करना बेहद जरूरी है। यहंा सुसडेगा व्यवपर्तन योजना के बाद बुढ़ाडांढ़ क्षेत्र के लिए भी एक और सिंचाई योजना स्वीकृत कराने का प्रयास किया जा रहा है। इन सिंचाई योजना को स्वीकृत कराने के साथ इनका नियत समय के भीतर कार्य पूरा कराने का भी प्रयास रहेगा ताकि किसानों को जल्द लाभ मिल सके। श्री पैंकरा ने कहा कि सुसडेगा व्यवपर्तन सिंचाई योजना मांड नदी तट के किनारे वाले 6 गांव के लोगों के लिए वरदान साबित होगी। मिल गई प्रशासकीय स्वीकृति
जल संसाधन विभाग के एसडीओ सुनिल कुमार धमिजा ने बताया कि सुसडेगा व्यवपर्तन योजना की प्रषासकीय स्वीकृति का पत्र प्राप्त हो गया है। इस योजना को पूरा करने के लिए निविदा आमंत्रित करने की प्रक्रिया प्रारम्भ कर दी गई है। श्री धमिजा ने बताया कि लगभग 39 करोड़ रूपयों की लागत वाली इस सिंचाई योजना की निविदा हो जाने के बाद जल्द ही काम शुरू करा दिया जाएगा।
मंगलवार, 16 जून 2015
मधु मक्खियों के हमले से दूर भागे जंगली हाथी
रमेश शर्मा/पत्थलगांव/
पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के दर्जन भर गांवों में उत्पात मचा रहे जंगली हाथियों को अन्यत्र खदेड़ने के काम में वन अधिकारियों के सारे प्रयास भले ही विफल हो गए थे, लेकिन मधुमक्खियों का झुंड ने इन उत्पाती हाथियों की चंद मिनटों में ही अकल ठिकाने लगा कर दूर भागने के लिए मजबूर कर दिया।
बताया जाता है कि बीते माह पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के महेष्षपुर गांव में ग्रामीणों के घरों में तोड-फोड़ करने वाले जगंली हाथियों को यहां का वातावरण इतना रास आ गया था कि वे यहंा से हटने का नाम ही नहीं रहे थे। महेशपुर के बाद खाड़ामाचा,खमगड़ा आदि गांवों में उत्पात मचाने वाले इन हाथियों के यंहा पर डेरा डाल देने से वन अधिकारी भी खासे परेशान हो गए थे।
महेशपुर, खाड़ामाचा और कोतबा क्षेत्र में एक पखवाड़ा से डेरा डाल कर बैठे जंगली हाथियों के सामने दो दिन पहले उस समय असहज स्थिति बन गई थी जब खाड़ामाचा गांव के समीप इन हाथियों पर मधु मक्खियों के बड़े झुंड ने अचानक हमला बोल दिया। उत्पात मचाने वाले जंगली हाथियों की गतिविधियों की देख रेख करने वाले ग्रामीणों ने बताया कि कोतबा क्षेत्र के एक जलाशय में कई घंटों तक जल क्रीडा करने के बाद हाथियों का दल ने गांव की ओर जाने का रुख किया था। खाड़ामाचा गांव पहुंचने से पहले जंगली हाथियों का दल ने जैसे ही एक पेड़ की टहनियां तोड़ी उसी वक्त अचानक मधु मक्खियों के बड़े दल ने इन हाथियों पर हमला बोल दिया।एक साथ सैकड़ों मधु मक्खियों का हमला हो जाने से जंगली हाथियों का दल विचलित हो गया था। इधर उधर भागने के बाद भी जब मधु मक्खियों के हमले से इन हाथियों को राहत नहीं मिली हाथियों ने वापस भागने में ही अपनी भलाई समझी।
ग्राम पंचायत खाड़ामाचा के एक प्रत्यक्षदर्शी मंगल साय ने बताया कि मधु मक्खियों से पीछा छुड़ाने के लिए जंगली हाथियों का दल देखते ही देखते वहंा से ओझल हो गया। बाद में जंगली हाथियों के इस दल को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा पर स्थित जशपुर वन मंडल के तपकरा वन परिक्षेत्र के जंगलों में देखा गया है।
तपकरा क्षेत्र पहुंचा हाथियों का दल
पत्थलगांव के वन उप मंडल अधिकारी व्हीके साहु ने बताया कि बीते एक पखवाड़ा से काडरो क्षेत्र में डेरा डाल कर बैठा जंगली हाथियों का दल ने यहंा के दर्जन भर गांव में 50 से अधिक लोगों के घरों में तोड़ फोड़ कर काफी नुकसान पहुंचाया है। जंगली हाथियों के इस दल को अन्यत्र खदेड़ने के लिए वन विभाग की हल्ला बोल पार्टी, पटाखों के शोर तथा मशाल जलाने जैसे कई उपाय किए गए। इसके बाद भी उत्पाती हाथी यहंा से अन्यत्र जाने का नाम नहीं ले रहे थे।श्री साहू ने बताया कि इन जंगली हाथियों का लगातार उत्पात से इस अचंल के ग्रामीण खासे परेषान हो कर उन्होने वन कर्मियों के विरोध में ही मोर्चा खोल दिया था। इसी वजह वन सहायक तथा दो बीट गार्डो ने अपनी छुटटी का आवेदन देकर घरों में बैठ गए थे। श्री साहु ने कहा कि जंगली हाथियों का दल दूर भाग जाने के बाद यहां के ग्राम वासियों के साथ वन कर्मियों ने भी राहत की सांस ली है।
पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के दर्जन भर गांवों में उत्पात मचा रहे जंगली हाथियों को अन्यत्र खदेड़ने के काम में वन अधिकारियों के सारे प्रयास भले ही विफल हो गए थे, लेकिन मधुमक्खियों का झुंड ने इन उत्पाती हाथियों की चंद मिनटों में ही अकल ठिकाने लगा कर दूर भागने के लिए मजबूर कर दिया।
बताया जाता है कि बीते माह पत्थलगांव वन परिक्षेत्र के महेष्षपुर गांव में ग्रामीणों के घरों में तोड-फोड़ करने वाले जगंली हाथियों को यहां का वातावरण इतना रास आ गया था कि वे यहंा से हटने का नाम ही नहीं रहे थे। महेशपुर के बाद खाड़ामाचा,खमगड़ा आदि गांवों में उत्पात मचाने वाले इन हाथियों के यंहा पर डेरा डाल देने से वन अधिकारी भी खासे परेशान हो गए थे।
महेशपुर, खाड़ामाचा और कोतबा क्षेत्र में एक पखवाड़ा से डेरा डाल कर बैठे जंगली हाथियों के सामने दो दिन पहले उस समय असहज स्थिति बन गई थी जब खाड़ामाचा गांव के समीप इन हाथियों पर मधु मक्खियों के बड़े झुंड ने अचानक हमला बोल दिया। उत्पात मचाने वाले जंगली हाथियों की गतिविधियों की देख रेख करने वाले ग्रामीणों ने बताया कि कोतबा क्षेत्र के एक जलाशय में कई घंटों तक जल क्रीडा करने के बाद हाथियों का दल ने गांव की ओर जाने का रुख किया था। खाड़ामाचा गांव पहुंचने से पहले जंगली हाथियों का दल ने जैसे ही एक पेड़ की टहनियां तोड़ी उसी वक्त अचानक मधु मक्खियों के बड़े दल ने इन हाथियों पर हमला बोल दिया।एक साथ सैकड़ों मधु मक्खियों का हमला हो जाने से जंगली हाथियों का दल विचलित हो गया था। इधर उधर भागने के बाद भी जब मधु मक्खियों के हमले से इन हाथियों को राहत नहीं मिली हाथियों ने वापस भागने में ही अपनी भलाई समझी।
ग्राम पंचायत खाड़ामाचा के एक प्रत्यक्षदर्शी मंगल साय ने बताया कि मधु मक्खियों से पीछा छुड़ाने के लिए जंगली हाथियों का दल देखते ही देखते वहंा से ओझल हो गया। बाद में जंगली हाथियों के इस दल को छत्तीसगढ़ राज्य की सीमा पर स्थित जशपुर वन मंडल के तपकरा वन परिक्षेत्र के जंगलों में देखा गया है।
तपकरा क्षेत्र पहुंचा हाथियों का दल
पत्थलगांव के वन उप मंडल अधिकारी व्हीके साहु ने बताया कि बीते एक पखवाड़ा से काडरो क्षेत्र में डेरा डाल कर बैठा जंगली हाथियों का दल ने यहंा के दर्जन भर गांव में 50 से अधिक लोगों के घरों में तोड़ फोड़ कर काफी नुकसान पहुंचाया है। जंगली हाथियों के इस दल को अन्यत्र खदेड़ने के लिए वन विभाग की हल्ला बोल पार्टी, पटाखों के शोर तथा मशाल जलाने जैसे कई उपाय किए गए। इसके बाद भी उत्पाती हाथी यहंा से अन्यत्र जाने का नाम नहीं ले रहे थे।श्री साहू ने बताया कि इन जंगली हाथियों का लगातार उत्पात से इस अचंल के ग्रामीण खासे परेषान हो कर उन्होने वन कर्मियों के विरोध में ही मोर्चा खोल दिया था। इसी वजह वन सहायक तथा दो बीट गार्डो ने अपनी छुटटी का आवेदन देकर घरों में बैठ गए थे। श्री साहु ने कहा कि जंगली हाथियों का दल दूर भाग जाने के बाद यहां के ग्राम वासियों के साथ वन कर्मियों ने भी राहत की सांस ली है।
बुधवार, 20 मई 2015
वरदान बनी बैमौसमी बारिश
| भरारी के समीप अपनी खरबूज की फसल के साथ किसान रफैल उरांव |
मिठास घोल रहे हैं पत्थलगांव के खरबूज-तरबूज
रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
पिछले दिनों हुई बेमौसम की बारिश के बाद गर्मी का मौसमी फल खरबूज और तरबूज की फसल को मामूली नुकसान के बाद भी इसकी अच्छी क्वालिटी बन कर बाजार में पहुंचने से इसका मिठास पड़ोसी जिले के लोगों को भी खूब रास आ रहा है।
इस अचंल में अधिक पैदावार होने के चलते खरबूज और तरबूज के भाव में भी ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं होने से ग्राहक हाथो हाथ इन फलों की खरीद कर इसका भरपूर स्वाद ले रहे हैं। प्रारंभ में 80 रूपये प्रति किलो बिकने वाला खरबूज इन दिनों 10 से 15 रूप्ये प्रति किलों में बिक रहा है। इसकी उपज लेने वाले किसानों का कहना है कि बेमौसम की बरसात होने से उनके खेतों में तैयार खरबूजा 2 से 3 किलो वजन का निकल रहा है। यंहा भरारी के समीप खरबूज,तरबूज, ककड़ी के साथ अन्य साग सब्जी फसल लेने वाला किसान रफैल उरांव का कहना था कि गर्मी के सीजन में इन फसल के खरीददार उनके खेतों में ही पहुंच जा रहे हैं। नगद भुगतान मिलने से किसानों के लिए गर्मी के मौसमी फलों ने मालामाल कर दिया है।
यहंा तिलडेगा,कंटगतराई तथा आस पास के किसानों व्दारा भरारी नाला के किनारे वाले क्षेत्र में गर्मी के दिनों में साग सब्जी की फसल के अलावा ककड़ी, खरबूज और तरबूज की भी काफी बड़ी मात्रा में उपज ली जा रही हैं।इस वर्ष बेमौसम की बारिश ने इन किसानों की लवकी,तोराई तथा अन्य साग सब्जी की फसल को भले ही थोड़ा नुकसान पहुंचाया है लेकिन दो तीन बार हुई इस बारिश के बाद खरबूज और तरबूज की अच्छी क्वाल्टिी बन गई है। इन किसानों के खेतों में पक कर तैयार रस भरे और मीठे खरबूज की फसल देखते ही बन रही है। किसानों का कहना है कि बेमौसम की बरसात ने खरबूज की अच्छी पैदावार हो गई है। किसानों को इस बात की खुशी है कि गर्मी का मौसमी फल खरबूज और तरबूज केवल देखने में ही नहीं बल्कि इसका जायका भी बढ़ गया है। इन दिनों यहंा के ग्राहकों को टोकरों में भर कर खरबूज और तरबूज का बेसब्री से इंतजार रहता है। गर्मी के इन मौसमी फलों को लेकर आने वाले कई किसान बाजार पहुंचने से पहले ही रास्ते में अपनी उपज की बिक्री कर ले रहे हैं।
फलोद्यान से अतिरिक्त आय
पिछले दिनों हुई बेमौसम की बारिश के बाद गर्मी का मौसमी फल खरबूज और तरबूज की फसल को मामूली नुकसान के बाद भी इसकी अच्छी क्वालिटी बन कर बाजार में पहुंचने से इसका मिठास पड़ोसी जिले के लोगों को भी खूब रास आ रहा है।
इस अचंल में अधिक पैदावार होने के चलते खरबूज और तरबूज के भाव में भी ज्यादा बढ़ोत्तरी नहीं होने से ग्राहक हाथो हाथ इन फलों की खरीद कर इसका भरपूर स्वाद ले रहे हैं। प्रारंभ में 80 रूपये प्रति किलो बिकने वाला खरबूज इन दिनों 10 से 15 रूप्ये प्रति किलों में बिक रहा है। इसकी उपज लेने वाले किसानों का कहना है कि बेमौसम की बरसात होने से उनके खेतों में तैयार खरबूजा 2 से 3 किलो वजन का निकल रहा है। यंहा भरारी के समीप खरबूज,तरबूज, ककड़ी के साथ अन्य साग सब्जी फसल लेने वाला किसान रफैल उरांव का कहना था कि गर्मी के सीजन में इन फसल के खरीददार उनके खेतों में ही पहुंच जा रहे हैं। नगद भुगतान मिलने से किसानों के लिए गर्मी के मौसमी फलों ने मालामाल कर दिया है।
यहंा तिलडेगा,कंटगतराई तथा आस पास के किसानों व्दारा भरारी नाला के किनारे वाले क्षेत्र में गर्मी के दिनों में साग सब्जी की फसल के अलावा ककड़ी, खरबूज और तरबूज की भी काफी बड़ी मात्रा में उपज ली जा रही हैं।इस वर्ष बेमौसम की बारिश ने इन किसानों की लवकी,तोराई तथा अन्य साग सब्जी की फसल को भले ही थोड़ा नुकसान पहुंचाया है लेकिन दो तीन बार हुई इस बारिश के बाद खरबूज और तरबूज की अच्छी क्वाल्टिी बन गई है। इन किसानों के खेतों में पक कर तैयार रस भरे और मीठे खरबूज की फसल देखते ही बन रही है। किसानों का कहना है कि बेमौसम की बरसात ने खरबूज की अच्छी पैदावार हो गई है। किसानों को इस बात की खुशी है कि गर्मी का मौसमी फल खरबूज और तरबूज केवल देखने में ही नहीं बल्कि इसका जायका भी बढ़ गया है। इन दिनों यहंा के ग्राहकों को टोकरों में भर कर खरबूज और तरबूज का बेसब्री से इंतजार रहता है। गर्मी के इन मौसमी फलों को लेकर आने वाले कई किसान बाजार पहुंचने से पहले ही रास्ते में अपनी उपज की बिक्री कर ले रहे हैं।
फलोद्यान से अतिरिक्त आय
| गर्मी का मौसमी फल तरबूज की भी हुई बम्फर पैदावार |
उद्यान अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया का कहना है कि इस अंचल में फलोद्यान की काफी अच्छी संभावना है। यहंा गर्मी के दिनों में साग सब्जी की लोकल डिमांड काफी अधिक रहती है।इस वजह किसानों को साग सब्जी के अच्छे दाम मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यहंा के किसानों को गर्मी के मौसमी फल के लिए प्रोत्साहित करने के बाद इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं। यहाँ तरबूज, खरबूज, ककड़ी तथा केला,आम लीची की अच्छी पैदावार होने से किसानों को लाखों रूपयों की अतिरिक्त आय होने लगी है।
पड़ोसी जिलों में पहुंचा गर्मी का मौसमी फल
इन दिनों पत्थलगांव क्षेत्र में ककड़ी,खरबूज और तरबूज की आवक बढ़ जाने के बाद रायगढ़ जिले के लैलूंगा, धरमजयगढ़, कापू और सरगुजा जिले के सीतापुर,प्रतापगढ़ और बतौली क्षेत्र के साप्ताहिक बाजार में भी गर्मी के इस मौसमी फल की खूब पूछ परख होने लगी है।अन्य फलों की मंहगाई के बीच लोकल फल कम दाम पर उपलब्ध होने से ग्राहकों को भी गर्मी के मौसमी फलों का स्वाद खूब रास आ रहा है।
पड़ोसी जिलों में पहुंचा गर्मी का मौसमी फल
इन दिनों पत्थलगांव क्षेत्र में ककड़ी,खरबूज और तरबूज की आवक बढ़ जाने के बाद रायगढ़ जिले के लैलूंगा, धरमजयगढ़, कापू और सरगुजा जिले के सीतापुर,प्रतापगढ़ और बतौली क्षेत्र के साप्ताहिक बाजार में भी गर्मी के इस मौसमी फल की खूब पूछ परख होने लगी है।अन्य फलों की मंहगाई के बीच लोकल फल कम दाम पर उपलब्ध होने से ग्राहकों को भी गर्मी के मौसमी फलों का स्वाद खूब रास आ रहा है।
शुक्रवार, 15 मई 2015
पेड़ की छाँव तले खेल का अनोखा स्कूल
| पेड़ की छांव तले शिक्षिका स्नेहा का अनोखा स्कूल |
रमेश शर्मा/पत्थलगांव/
गर्मी की छुटिटयाँ शुरू होते ही शहरी क्षेत्र के बच्चे भले ही अभिनय, नृत्य, ध्यान और व्यक्तित्व विकास की कक्षाओं में शामिल हो गए हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल के बच्चों के सामने इस तरह की सुविधाओं का सर्वथा अभाव रहता है। गांव के बच्चों को ग्रीष्मकालीन छुटिटयों में चिलचिलाती धूप में इधर उधर घूमना तथा मवेशियों के साथ उठा पटक करते देख कर तिलडेगा माध्यमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती स्नेहा श्रीवास्तव ने पेड़ की छांव तले प्रति दिन 2 घंटे तक खेल और पढ़ाई का अनोखा स्कूल चलाया जा रहा है।
ग्रीष्मकालीन छुटिटयों के इस स्कूल में गांव के बच्चों को कभी 2 घंटे तो कभी 1 घंटे में ही छुट्टीे दी जाती है। ग्रामीण बच्चों को खेल खेल में रंगोली, बागवानी, वाद विवाद, नृत्य व गीत सिखाया जा रहा है। गांव के बच्चों को खेलकूद के साथ अन्य मनोरंजक कार्यक्रम काफी रूचिकर लगने लगे हैं। पेड़ की छांव तले स्कूली बच्चों की भीड़ के साथ अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहते हैं। ग्रामीण बच्चों को लुका छिपी के खेल तथा नाच गाने के साथ विज्ञान और अंग्रेजी विषय की पढ़ाई भी खूब रास आ रही है।
गर्मी की छुटिटयाँ शुरू होते ही शहरी क्षेत्र के बच्चे भले ही अभिनय, नृत्य, ध्यान और व्यक्तित्व विकास की कक्षाओं में शामिल हो गए हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल के बच्चों के सामने इस तरह की सुविधाओं का सर्वथा अभाव रहता है। गांव के बच्चों को ग्रीष्मकालीन छुटिटयों में चिलचिलाती धूप में इधर उधर घूमना तथा मवेशियों के साथ उठा पटक करते देख कर तिलडेगा माध्यमिक स्कूल में पदस्थ शिक्षिका श्रीमती स्नेहा श्रीवास्तव ने पेड़ की छांव तले प्रति दिन 2 घंटे तक खेल और पढ़ाई का अनोखा स्कूल चलाया जा रहा है।
ग्रीष्मकालीन छुटिटयों के इस स्कूल में गांव के बच्चों को कभी 2 घंटे तो कभी 1 घंटे में ही छुट्टीे दी जाती है। ग्रामीण बच्चों को खेल खेल में रंगोली, बागवानी, वाद विवाद, नृत्य व गीत सिखाया जा रहा है। गांव के बच्चों को खेलकूद के साथ अन्य मनोरंजक कार्यक्रम काफी रूचिकर लगने लगे हैं। पेड़ की छांव तले स्कूली बच्चों की भीड़ के साथ अन्य ग्रामीण भी उपस्थित रहते हैं। ग्रामीण बच्चों को लुका छिपी के खेल तथा नाच गाने के साथ विज्ञान और अंग्रेजी विषय की पढ़ाई भी खूब रास आ रही है।
| खेल खेल में ज्ञान की बातें भी |
पेड़ की छांव तले ग्रामीण बच्चों का अनोखा स्कूल चलाने वाली शिक्षिका स्नेहा ने बताया कि यहां गर्मी की छुटिटयंा होते ही ज्यादातर बच्चें मवेशी चराने और पेड़ पर चढ़कर धमाचौकड़ी जैसे अनुपयोगी काम में व्यस्त हो जाते थे। तेज गर्मी का मौसम के दौरान धूप में बाहर खेलने से कई बच्चे बुखार तथा अन्य बीमारियों की चपेट में आ जाते थे। ग्रामीण बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन छुटिटयों में मनोरजन कम और परेशानी अधिक मिलने की बात पर शिक्षिका स्नेहा काफी व्यथित हुई थी। उन्होंने बताया कि इन्ही बातों को देख कर उसके मन में खेल कूद का अनोखा स्कूल शुरू करने का विचार आया था। इसके तहत गांव के इन बच्चों को एकत्रित कर जब उन्हे खेल खेल में पढ़ाने का काम शुरू किया तो सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। तिलडेगा गांव में अब गांव के अनेक बच्चे यहाँ पहुंच कर अपना कला कौशल निखारने में जुट गए हैं। इन छोटे बच्चों के खेल कूद के इन कार्यक्रमों में कई बार बच्चों के अभिभावक भी उपस्थित रहते हैं।
अभिभावक भी चिंतामुक्त
| पहले चिलचिलाती धूप में मवेशियों पर बैठकर होती थी धमाचौकड़ी |
राडोल के उपसरपंच मनोज अम्बस्थ ने बताया कि इस अंचल में ग्रीष्मकालीन छुटिटयां शुरू होते ही आस पास गांवों के ज्यादातर बच्चे मवेशियों के बीच रह कर खेल कूद में व्यस्त हो जाते थे।मवेशियों पर बैठ कर तालाब और नदी नालों में चले जाने से इन बच्चों के अभिभावक भी चिंतित रहते थे। श्री अम्बस्थ ने बताया कि अब चिलचिलाती धूप में इधर उधर घूमने के बजाए इन बच्चों को मनोरजंन के खेल कूद के साथ पेड़ की छांव तले पढ़ाने का काम गांव के बुजुर्गो को भी पसंद आ रहा है।
बुधवार, 22 अक्टूबर 2014
जज्बे से छँट गया अंधेरा
| महिला मंडल की सदस्य दृष्टिबाधित बच्चों के साथ दीपावली का पर्व मनाते हुए |
दूसरों से मिलती हैं त्योहार की खुशियॉं
दृष्टिबाधित बच्चों के चेहरों पर फैली खुशियॉं
रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
अपनी जिन्दगी में रोशनी के उजाले से दूर रहने वालों के चेहरों पर यदि खुशियां लाई जाए, तो यह क्षण दीपोत्सव के अवसर पर तरह तरह के स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद से भी अधिक प्रभावशाली साबित होता है। जीवन की तेज भागदौड़ की व्यस्तता के बीच पत्थलगांव महिला मंडल की सदस्यों ने बुधवार को यहां दृष्टि बाधित गरीब बच्चों को ढेर सारे उपहार भेंट कर ऐसी ही खुशियों का आनंद लिया।
यहां की समाज सेवी संस्था राहा व्दारा ग्रामीण अचंल में रहने वाले 20 दृष्टिबाधित बच्चों को पत्थलगांव का शक्ति सेवा केन्द्र में पढ़ा लिखा कर आत्म निर्भर बनाने की पहल शुरू की है। इन 20 बच्चों के लिए आवास भोजन की निशुल्क व्यवस्था के साथ ब्रेल लिपि के प्रशिक्षित शिक्षक इन्हे जीवन में आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि इन बच्चों की बचपन से ही आंखों की रोशनी नहीं रहने से इनके अभिभावक अपनी गरीबी के कारण इन बच्चों को केवल बोझ की तरह ढो रहे थे। ऐसे बच्चों को यहां ब्रेल लिपि से पढ़ाने के साथ अन्य बच्चों के साथ खेल तथा पढ़ाई लिखाई कराने से इन्हे अपने जीवन में कुछ कर दिखाने के लिए नई डगर मिल गई है।
पत्थलगांव की महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती चन्दा राजकुमार गर्ग ने बताया कि गरीब तबका के दृष्टिबाधित इन बच्चों के बारे में जब उन्हे जानकारी मिली तो वे महिला मंडल की अन्य सदस्यों के साथ किसी भी तीज त्योहार के समय इन बच्चों के लिए विभिन्न उपहार लेकर उनके बीच पहुंच जाती हैं। दृष्टिबाधित इन बच्चों व्दारा गीत संगीत के साथ खेल कूद और पढ़ने में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा दिया है। सभी बच्चे प्रातः खेल कूद में भाग लेने से पहले योग का भी शानदार प्रदर्शन करना सीख गए हैं। यहां के कई बच्चे जब मधुर संगीत के साथ गीतों का स्वर निकालते हैं तो किसी को विश्वास ही नहीं होता कि इनकी जिन्दगी में अंधेरा फैला हुआ है। दृष्टिबाधित बच्चों ने ब्रेल लिपि लिखने एवं पढ़ने की गति बढ़ाकर सामान्य लोगों की तरह चलने फिरने ,सार्वजनिक स्थलों में बिना किसी के सहयोग के चलने के अलावा अपने कार्यो को करने में सक्षम हो रहे हैं। राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ ने बताया कि दृष्टि बाधित इन बच्चों में सीखने का जज्बा के साथ उनमें रूचि के साथ ध्यानपूर्वक कठिन अभ्यास करने की लगन है। इसी वजह इन बच्चों ने अपने जीवन से अधंकार को हटाने सफलता हासिल की है।
दृष्टिबाधित बच्चों के चेहरों पर फैली खुशियॉं
रमेश शर्मा/ पत्थलगांव/
अपनी जिन्दगी में रोशनी के उजाले से दूर रहने वालों के चेहरों पर यदि खुशियां लाई जाए, तो यह क्षण दीपोत्सव के अवसर पर तरह तरह के स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद से भी अधिक प्रभावशाली साबित होता है। जीवन की तेज भागदौड़ की व्यस्तता के बीच पत्थलगांव महिला मंडल की सदस्यों ने बुधवार को यहां दृष्टि बाधित गरीब बच्चों को ढेर सारे उपहार भेंट कर ऐसी ही खुशियों का आनंद लिया।
यहां की समाज सेवी संस्था राहा व्दारा ग्रामीण अचंल में रहने वाले 20 दृष्टिबाधित बच्चों को पत्थलगांव का शक्ति सेवा केन्द्र में पढ़ा लिखा कर आत्म निर्भर बनाने की पहल शुरू की है। इन 20 बच्चों के लिए आवास भोजन की निशुल्क व्यवस्था के साथ ब्रेल लिपि के प्रशिक्षित शिक्षक इन्हे जीवन में आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि इन बच्चों की बचपन से ही आंखों की रोशनी नहीं रहने से इनके अभिभावक अपनी गरीबी के कारण इन बच्चों को केवल बोझ की तरह ढो रहे थे। ऐसे बच्चों को यहां ब्रेल लिपि से पढ़ाने के साथ अन्य बच्चों के साथ खेल तथा पढ़ाई लिखाई कराने से इन्हे अपने जीवन में कुछ कर दिखाने के लिए नई डगर मिल गई है।
पत्थलगांव की महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती चन्दा राजकुमार गर्ग ने बताया कि गरीब तबका के दृष्टिबाधित इन बच्चों के बारे में जब उन्हे जानकारी मिली तो वे महिला मंडल की अन्य सदस्यों के साथ किसी भी तीज त्योहार के समय इन बच्चों के लिए विभिन्न उपहार लेकर उनके बीच पहुंच जाती हैं। दृष्टिबाधित इन बच्चों व्दारा गीत संगीत के साथ खेल कूद और पढ़ने में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा दिया है। सभी बच्चे प्रातः खेल कूद में भाग लेने से पहले योग का भी शानदार प्रदर्शन करना सीख गए हैं। यहां के कई बच्चे जब मधुर संगीत के साथ गीतों का स्वर निकालते हैं तो किसी को विश्वास ही नहीं होता कि इनकी जिन्दगी में अंधेरा फैला हुआ है। दृष्टिबाधित बच्चों ने ब्रेल लिपि लिखने एवं पढ़ने की गति बढ़ाकर सामान्य लोगों की तरह चलने फिरने ,सार्वजनिक स्थलों में बिना किसी के सहयोग के चलने के अलावा अपने कार्यो को करने में सक्षम हो रहे हैं। राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ ने बताया कि दृष्टि बाधित इन बच्चों में सीखने का जज्बा के साथ उनमें रूचि के साथ ध्यानपूर्वक कठिन अभ्यास करने की लगन है। इसी वजह इन बच्चों ने अपने जीवन से अधंकार को हटाने सफलता हासिल की है।
| जीने का जज्बे से छंट गया अंधेरा |
छलके खुशी के आंसू
महिला मंडल की सदस्यों ने दृष्टिबाधित इन बच्चों को दीपावली के अवसर पर नए कपड़े, मिठाई और खिलौने भेंट किए तब सभी बच्चों ने हंसते हुए एक साथ थैक्स आंटी कहा तो वहंा उपस्थित अन्य लोगों की आंखों में भी आंसू निकल पड़े थे। महिला मंडल की सह सचिव श्रीमती अर्चना अग्रवाल का कहना था कि दृष्टिबाधित इन बचचों ने अपनी लगन और मेहनत से ईश्वर के कोप को भी निरर्थक बना दिया है। उन्होने कहा कि ऐसे बच्चों की खुशियों से ही त्योहार की सच्ची खुशी मिलती है। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष पवन अग्रवाल, सिविल अस्पताल के बीएमओ डा.जेम्स मिंज, सेंट जेवियर स्कूल के प्राचार्य फादर पंखरासियुस सहित अनेक लोग उपस्थित थे।
महिला मंडल की सदस्यों ने दृष्टिबाधित इन बच्चों को दीपावली के अवसर पर नए कपड़े, मिठाई और खिलौने भेंट किए तब सभी बच्चों ने हंसते हुए एक साथ थैक्स आंटी कहा तो वहंा उपस्थित अन्य लोगों की आंखों में भी आंसू निकल पड़े थे। महिला मंडल की सह सचिव श्रीमती अर्चना अग्रवाल का कहना था कि दृष्टिबाधित इन बचचों ने अपनी लगन और मेहनत से ईश्वर के कोप को भी निरर्थक बना दिया है। उन्होने कहा कि ऐसे बच्चों की खुशियों से ही त्योहार की सच्ची खुशी मिलती है। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष पवन अग्रवाल, सिविल अस्पताल के बीएमओ डा.जेम्स मिंज, सेंट जेवियर स्कूल के प्राचार्य फादर पंखरासियुस सहित अनेक लोग उपस्थित थे।
सोमवार, 21 जुलाई 2014
सर्पदंश से डरने की जरुरत नहीं
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| 108 संजीवनी सेवा के स्टॉफ को दिया बीएमओ डा.जे मिंज ने दिया एनटी स्नेक वेनम उपचार का प्रशिक्षण |
अच्छी पहलः
108 संजीवनी सेवा में एनटी
स्नेक वेनम भी उपलब्ध
रमेश शर्मा/पत्थलगांव/
108 संजीवनी सेवा वाहन में सर्पदंश के मरीजों को बचाने वाली जीवन
रक्षक एनटी स्नेक वेनम दवा रखने की पहल ऐसे मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। सर्पदंश
के गंभीर मरीजों को अस्पताल लाने से पहले एनटी स्नेक वेनम का उपचार मिल जाने से ऐसे
मरीजों को बचाने में चिकित्सकों को भी मदद मिलने लगी है। बीते सप्ताह दूरस्थ गांव काडरो
और बालाझर के दो अलग अलग सर्पदंश पीड़ित मरीजों को त्वरित एनटी स्नेक वेनम लग जाने से
दोनो मरीजों को उपचार के बाद बचा लिया गया।
कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता ने पिछले दिनो यहां सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण के
बाद यहां सर्पदंश के अधिक प्रकरण देखने के बाद 108 संजीवनी सेवा वाहन में
सर्पदंश की पर्याप्त मात्रा में दवा रखने के निर्देश दिए थे। श्री गुप्ता की इस पहल
से ग्रामीण अचंल के लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्राम
काडरो के अगरसाय को करैत नाम जहरीले सर्प के डस लेने के बाद उसके परिजनों ने 108 संजीवनी सेवा को मदद के लिए बुलाया था। इस वाहन के गांव में
पहुंचने के बाद सर्प दंश पीड़ित मरीज की गंभीर हालत को देख कर संजीवनी सेवा के कर्मचारियों
ने उसे मौके पर ही एनटी स्नेक वेनम देकर उसका उपचार प्रारम्भ कर देने के बाद इस मरीज
को सिविल अस्पताल में भर्ति कराया गया था। यहां पर सर्पदंश के मरीज का उपचार कर उसे
बचाने में कामयाबी मिली है। इसके पहले सर्पदंश के मरीजों को सिविल अस्पताल में भर्ती
कराने के बाद ही एनटी स्नेक वेनम मुहैया हो पाती थी।इस अचंल में सर्पदंश पीड़ित मरीजों
को नीयत समय के भीतर एनटी स्नेक वेनम का उपचार मिल जाने से ज्यादातर मरीजों को बचाने
में सफलता मिली है। लेकिन कई बार मरीजों को झाड़ फूंक कराने के चक्कर में उसे अस्पताल
तक पहुंचाने में विलंब कर देने से उस मरीज के बच पाने की संभावना कम हुई हैं।
जागरूकता से मौतों में आई कमी
यहां मेडिसन विशेषज्ञ डा.पी.सुथार का कहना है
कि सर्पदंश के मामलों में अब ग्रामीण अचंल के लोगों में काफी जागरूकता आई है। यहां
पर सर्पदंश की घटना के बाद सिविल अस्पताल में मरीज के बच जाने से गांव के लोग अब झाड़
फूंक के चक्कर में नहीं रहते हैं। उन्होने कहा कि ऐसे मरीजों को बगैर समय गवांए अस्पताल
में भर्ति करा देने से ऐसे मरीजों को असमय मौत की गोद में जाने से बचा लिया जा रहा
है। कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता की पहल के बाद अब सर्पदंश के मरीज को उनके गांव में ही
प्रारम्भिक उपचार मिल जाने से अनेक गंभीर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा
।
संजीवनी सेवा के स्टॅाफ को दिया सर्पदंश उपचार का प्रशिक्षण
बीएमओ डा.जे मिंज ने बताया कि यहां 108 संजीवनी सेवा में पदस्थ
महिला मेडिकल टेक्निश्यिन संगीता गुप्ता और पुरूष मेडिकल टेक्निशयन चंड़ामणी सिंग को
एनटी स्नेक वेनम का उपयोग करने का समुचित प्रशिक्षण दे दिया गया है। इनके अलावा वाहन
चालक अमित टोप्पो भी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रशिक्षित होने से गम्भीर मरीजों को इनका
लाभ मिल रहा है। डा.मिंज ने बताया कि सर्पदंश के मरीजों को आपात सेवा का लाभ देने के
लिए 108 संजीवनी वाहन में 10 नग एनटी स्नेक वेनम
उपलब्ध कराए गए हैं। इस दवा का उपयोग करने के बाद उन्हे पर्याप्त मात्रा में पुनः एनटी
स्नेक वेनम उपलब्ध कराई जा रही है। डा.मिंज ने कहा कि बरसात के दिनों में इस अचंल में
सर्पदंश की अधिक घटनाओं को देखते हुए यहां सिविल अस्पताल में सर्पदंश से पीड़ित मरीजों
की संख्या में खासी वृध्दि हो जाती है।
सर्पदंश के बाद बचाए गए 27 मरीज
यहां सिविल अस्पताल में इस वर्ष सर्पदंश की घटना के बाद 27 मरीजों को उपचार के बाद उन्हे मौत के चंगुल से बचाने में स्वास्थ्य
अमला को सफलता मिली है। बीएमओ डा. मिंज ने
बताया कि यहां पर मार्च महिने में 2 मरीज, मई महिने में 9 मरीज, जून महिने में 14 मरीज तथा जूलाई माह मे ं2 मरीजों को उपचार के बाद बचा लिया गया है। डा.मिंज का कहना था
कि 108 संजीवनी वाहन में मरीजों को तत्काल उपचार की यह व्यवस्था काफी
कारगर साबित हुई है। उन्होने कहा कि दूर दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को सर्पदंश
की घटना के बाद उनके घर पर ही जीवन रक्षक दवा से उपचार प्रारंभ हो जाने से गंभीर मरीजों
को नया जीवन देने में आसानी को सकती है।
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