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गुरुवार, 23 फ़रवरी 2012

सलखिया की गौशाला से किसानों को मिल रही मदद

फोटो/ पश्चिम बंगाल के बुचड़खानों को भेजी गई गायों का सलखिया में पालन पोषण
गौवध रोकने की दिशा में सार्थक पहल
पत्थलगांव/ 
     गौवध रोकने की दिशा में यंहा पर सलखिया स्थित गुरूकुल वैदिक आश्रम ने एक मिशाल कायम की है। इस आश्रम में पश्चिम बंगाल के बुचड़खानों में गौवध के लिए भेजी गई 200 से अधिक गायों को वापस लाकर उनका पालन पोषण किया जा रहा है।सलखिया की बृहद गौशाला के मवेशियों के माध्यम से अचंल के किसानों को भी उनके खेती किसानी के कामकाज में सहयोग प्रदान किया जा रहा है। यहंा के अध्यक्ष स्वामी रामानंद का कहना है कि गौवध रोकने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है।
  पत्थलगांव के समीप सलखिया गांव में अचंल के वनवासियों को वैदिक शिक्षा और वृध्दाश्रम के माध्यम से बुजुर्गो की बेहतर देखरेख के साथ उन्हे सम्मानजनक आशियाना उपलब्ध कराया गया है।गुरूकुल वैदिक आश्रम का सचंालन करने वाली इस समाजसेवी संस्था ने गरीब तबका के लिए परोपकार के काम करके अलग पहचान कायम की है। इस संस्था के अध्यक्ष स्वामी रामानंद सरस्वती ने बताया कि देश के विभिन्न हिस्सों से गौवध के लिए भेजी गई 200 से अधिक गायों को सलखिया आश्रम में रख कर उनकी सेवा की जा रही है। सलखिया की इस गौशाला में एकत्रित दूध दही को आश्रम में रह कर विद्याध्यन करने वाले गरीब तबका के बच्चों को वितरण कर उन्हे तन्दरूस्त बनाने में मदद दी जा रही है। स्वामी ने बताया कि गौवध के कृत्य को रोकने के लिए केवल बयानबाजी पर्याप्त नहीं है, बल्कि इस काम में सभी को गाय पालन के काम हेतु प्रेरित करने की जरूरत है।उन्होने बताया कि आदिवासी अचंल में किसानों को अपनी खेती के काम हेतु महंगे बैल खरीदने पड़ते हैं। यदि गाय पालन के काम को बढ़ावा दिया जाए तो किसानों की इस समस्या से राहत दी जा सकती है। स्वामी रामानंद ने कहा कि गाय पालन से जैविक खाद तथा बिजली का भी लाभ लिया जा सकता है।
   उन्होने बताया कि इस अचंल के प्रमुख समाजसेवी इन्द्रपाल सिंह भटिया का सहयोग मिल जाने के बाद सलखिया गुरूकुल वैदिक आश्रम में गरीब तबका के सैकड़ो बच्चांे को भी शिक्षा के माध्यम से आत्म निर्भर बनाने की पहल की गई है।यहंा वृध्दाश्रम और बृहद गौशाला के माध्यम से आसपास के ग्रामवासियों को सहयोग देने का प्रयास किया गया है। पत्थलगांव के समीप सलखिया आश्रम में गरीब तबका के बच्चों को विभिन्न ट्रेडो के तहत कृषि,वेल्डिंग,स्क्रीन प्रिंटिग,कारपेंटरी के काम का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इस आश्रम के 100 बच्चों को इन दिनों बैदिक संस्कृति के साथ आसन, व्यायाम, प्राणायाम विद्या में भी पारंगत किया जा रहा है।स्वामी रामानंद का कहना है कि बच्चों को बचपन से ही वैदिक शिक्षा के साथ शाररिक उन्नति पर ध्यान देने से ये बच्चे आगे चल कर स्वस्थ्य जीवन व्यतित कर सकते हैं।उन्होने बताया कि इस आश्रम में प्राचीन रूढ़ियों को तोड़ कर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़ा वर्ग के बालकों को बैदिक शिक्षा का पूरा ज्ञान देकर उन्हे आत्म निर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

सोमवार, 20 फ़रवरी 2012

ग्रामीण महिला को लगातार तीसरी बार सरपंच की जिम्मेदारी


महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई किसानों के साथ
नशामुक्त ग्राम पचायत बनाने की पहल,

गुड़ाखू नशा पर भी लगाना होगा प्रतिबंध

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में गांव के विकास कार्यो को गति देने के साथ साथ किसानों को भी आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सार्थक पहल करने वाली महिला सरपंच को चिकनीपानी के ग्रामीणों ने लगातार तीसरी बार सरपंच की कुर्सी सौंपी है।
     पत्थलगांव विकासखंड अन्तर्गत चिकनीपानी की महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई का कहना है कि उसके गांव में महिलाओं व्दारा शुरू किया गया नशा बन्दी र्का अिभयान में पुलिस प्रशासन का भी सहयोग मिलना चाहिए। इसके बाद वे अपनी ग्राम पचंायत को नशामुक्त बनाने में कामयाब हो सकती हैं।जानकी बाई ने गांव की महिलाओं को जागरूक बनाकर उन्हे शराब विरोधी आन्दोलन के लिए प्रेरित किया है। इस गांव की महिलाऐं शराब बनाने वालों के साथ शराबियों को भी आड़े हाथ लेने में पीछे नहीं रहती हैं।महिला सरपंच जानकीबाई का कहना है कि मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह को गुड़ाखू नशा पर भी कड़ाई से रोक लगाने की पहल करनी चाहिए।
 पिछले एक दशक से भी लम्बे समय से ग्राम पचंायत चिकनीपानी में सरपंच पद का दायित्व सम्हालने वाली महिला सरपंच श्रीमती जानकी बाई को बीते वर्ष निर्मल ग्राम बनाने पर उन्हे देश की महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती प्रतिभा पाटिल के व्दारा सम्मानित किया जा चुका है। जानकी बाई का कहना ह ैकि उनके गांव का किसान खुशहाल रहेगा तभी उसे सन्तुष्टि मिल पाती है। इस महिला ने किसानों के खेतों में समतलीकरण का काम पर विशेष जोर दिया है। चिकनीपानी गांव में ज्यादातर किसानों के पास बजंर और पथरीली भूमि होने के कारण यहंा के किसानों को मजदूरी करने के लिए बाहर पलायन करना पड़ता था। महिला सरपंच जानकी बाई ने यहंा पर भूमि समजली करण का काम से सैकड़ों किसानों को लाभान्वित किया है।

       शासन की भूमि समतलीकरण योजना का लाभ मिलने के बाद अब चिकनीपानी क्षेत्र के किसान अपने ही खेतों में टमाटर, धान, साग सब्जी जैसी नगद फसल लेने में ब्यस्त रहते हैं।यहंा के किसानों व्दारा टमाटर की दोहरी फसल लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना लिया है।इन दिनो चिकनीपानी में बलबीर, राजेश और हाकिम की बजंर भूमि में समतलीकरण का काम कराया जा रहा है। इन किसानों ने बताया कि उन्हे अपने खेत बनाने के लिए सरपंच कार्यालय में नहीं जाना पड़ा। बल्कि सरपंच स्वंय उनके मुहल्ले में पहुंच कर उन्हे स्वयं समतलीकरण का लाभ के बारे में समझाईश देने आई थी। ग्राम पचंायत चिकनीपानी में किसानों के खेतों में सिंचाई साधन की कमी को देखते हुए यहंा पर भरारी बांध की नहरों को पक्का कराया गया है। इन नहरों का पानी किसानों के खेतों तक पहुंच जाने से यहंा के किसान अब साग सब्जी जैसी नगद फसल का लाभ लेने लगे हैं। गांव में इन दिनों आधा दर्जन किसानों ने अपने खेत में डबरी बनाने का भी काम शुरू किया है। महिला सरपंच जानकी बाई ने जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी बिश्वनाथ नायक से सम्पर्क कर इन किसानों को शासकीय मदद दिलाई है।

  यहंा कि महिला पचं परमीला, गुरबारी,सुशीला, अलमा तथा जेरोनिका का कहना था कि उनकी ग्राम पचंायत में  महिला सरपंच होने से उन्हे अपने वार्ड में विकास कार्य कराने के लिए ज्यादा भाग दौड़ नहीं करनी पड़ती है। इन पंचों ने बताया कि वे सरपंच के साथ प्रत्येक पखवाड़े अलग अलग मुहल्ल्लों का भ्रमण कर ग्रामीणों से उनकी समस्याओं का ब्यौरा एकत्रित करते हैं। इन कार्यो को प्राथमिकता के आधार पर पचंायत में प्रस्ताव पारित कर उसे पूरा करते हैं। इन दिनों यहंा पर  कर्राढाड़ से भरारी चैक तक सड़क में मुरूमीकरण का काम पूरा कराया गया है।गांव के लोगों का कहना है कि हमारी महिला सरपंच उनकी मुलभूत सुविधाओं का पूरा ध्यान रखती हैं इसलिए वे बार बार उन्हे काम करने का अवसर दे रहे हैं।
रमेश शर्मा     

सोमवार, 6 फ़रवरी 2012

गरीब बच्चों को मिलती है वैदिक संस्कृति की शिक्षा


सलखिया का गुरुकुल आश्रम है सद्भावना की अनोखी मिसाल


 संसदीय सचिव ओमप्रकाश राठिया एवं प्रमुख समाजसेवी पोम्मी भाटिया व्दारा गरीबों को कम्बल का वितरण किया गया। 
                    
   पत्थलगांव / रमेश शर्मा
     गरीब तबका के बच्चों को जातिगत भेद भाव से दूर रखकर गुरुकुल आश्रम की प्राचीन परम्पराओं के अनुरूप वेद की शिक्षा के साथ साथ उन्हे आत्म निर्भर बनाने के लिए सराहनीय पहल की जा रही है। पत्थलगांव के समीप लैलूंगा विकास खंड के सलखिया गांव में स्थित यह विद्यालय प्रेरणा और सद्भावना की अनोखी मिशाल है।
      इस विद्यालय के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम के समापन समारोह में मुख्य अतिथि संसदीय सचिव ओम प्रकाश राठिया उपस्थित थे। उन्हांेने  कहा कि आज भाग दौड़ की जीवन में अच्छे संस्कार देकर गरीब बच्चों वैदिक संस्कृति सिखाना बेहद कठिन काम है। श्री राठिया ने कहा कि आपस की सद्भावना को कायम रखने के लिए प्राचीन शिक्षा पद्यति को लुप्त होने से बचाना होगा। उन्होने कहा कि सलखिया गांव में इस काम को पूरी ईमानदारी और लगन के साथ किया जा रहा है। श्री राठिया ने कहा कि गरीब बच्चों को शिक्षा देने के इनक कार्यो में सभी को अपनी भागीदारी निभानी चाहिए। सलखिया स्थित आर्य विद्या सभा के वार्षिक उत्सव में शामिल होकर सैकड़ों गरीब लोगों को ठंड से बचने के लिए कम्बल वितरण किए। इस कार्यक्रम में आर्य विद्या सभा ने तीन दिनों तक वेद प्रवचन का आयोजन भी किया।जिसमें देश के कोने कोने से आए विदवानों ने वेदों के महत्व पर प्रकाश डाला।
   वेद प्रवक्ता डॉ. धर्मवीर ने कहा कि मौजूदा परिवेश में वेदों का अनुशरणकाफी महत्वपूर्ण हो गया है।वेद के अनुसरण से ही एकता और अखंडता की प्रेरणा मिलती है। डा.धर्मवीर ने कहा कि जाति और धर्म को अलग अलग करके व्देष और हिंसा को बढ़ा दिया गया है। इसके विपरित वेद में एक धर्म एक भाषा तथा अखंडता व शांति को महत्व दिया गया है। इसी तरह दिल्ली से प.ं दिनेश दत्त एवं देहरादून से आए सत्यपाल सरल ने भी ज्ञानवर्धक उपदेश देकर सभी का मन मोह लिया। सार्वदेशिक आर्य प्रतिनिधि सभा के उपप्रधान सुरेश अग्रवाल ने ध्वजारोहण कर कार्यक्रम की शुरूवात की। वार्षिक उत्सव के समापन समारोह में विद्यालय के छात्रों ने शाररिक योग तथा वेद के विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किए।तीन दिवसीय इस कार्यक्रम में रायगढ़ ,जशपुर,सरगुजा जिलों से आए हजारों लोगों ने कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दी। आर्य विद्या सभा ने इस दौरान प्रति दिन 5000 से अधिक निर्धन व्यक्तियों को भोजन करा कर उन्हे जीवन में उन्नति की डगर दिखाई।


वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में हजारों लोगों ने भोजन किया
 
  आर्य सभा के अध्यक्ष स्वामी रामानंद ने बताया  िकइस विद्यालय में पहली से बारहवीं तक की आवासीय निशुल्क शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। जिसमें गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले बच्चों को आत्म निर्भर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्हांेने बताया कि वेद पाठशाला में ग्रामीण अचंल के 27 बच्चों का चयन किया गया है। इन बच्चों को वेैदिक संस्कृति  की शिक्षा के साथ प्रति माह पांच सौ रू.की छात्रवृत्ति भी दी जा रही है।वेदिक संस्कृति के छात्र आसन,व्यायाम,प्राणायाम करके अपनी शारीरिक उन्नति, यज्ञ, ब्रम्हयज्ञ,तथा वेद पाठ के माध्यम से आत्मिक प्रगति कर रहे हैं। स्वामी जी ने बताया कि इस ग्रामीण विद्यालय में पढ़ने वाले छात्रों को विभिन्न ट्रेडों के तहत  कृषि,वेल्डिंग,स्क्रीन प्रिटिंग,कारपेंटरी आदि का भी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस संस्था में 100 गाय की एक बृहद गौशाला भी  संचालित है। इसके अलावा वृध्दों की सुव्यवस्था के लिए वृध्दाश्रम का भी संचालन किया जा रहा है। आश्रम में वृध्दों को समुचित व्यवस्था निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं।
      आर्य सभा के अध्यक्ष रामानंद ने बताया कि यहंा की गतिविधियों का सचंालन के लिए रायगढ़ के प्रमुख समाजसेवी पोम्मी भाटिया से भरपूर सहयोग मिल रहा है।उन्होने कहा कि यहंा प्राचीन रूढ़ियों को तोड़ कर अनुसूचित जाति,अनुसूचित जनजाति तथा पिछड़े वर्ग के बालकों को वेद संस्कृति की शिक्षा देकर उन्हे आत्म निर्भर बनाने की पहल की गई है।

      
रमेश शर्मा

सोमवार, 30 जनवरी 2012

खोई हुई बेटी को सामने पाकर वे फूट-फूट कर रोने लगे

बासंती की मॉं

गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने उपचार कर परिजनों से भी मिलाया
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
रमेश शर्मा
गुजरात का दिल सचमुच बहुत बड़ा है। उसके आगे बढ़ने के पीछे परोपकार की भावना का भी समावेश होता है। परसेवा के लिए जो परशेवा (पसीना) बहा दे, वही सच्च गुजराती है। अब किसने सोचा था कि सात साल पहले जो बेटी खो गई हो, वह अचानक माता-पिता के सामने आ जाए। इससे माता-पिता ही नहीं, बल्कि पूरा गाँव ही खुशियों से झूम उठा। ग्रामीणों ने उस टीम को देखा जिसने उनकी बेटी को सही सलामत घर तक पहुँचा दिया। उन्होंने टीम का ही नहीं, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया। लड़ककी के माता-पिता ने टीम को आशाीष देते-देते नहीं थकती। बेटी को पाकर वे आल्हादित हैं। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण सात साल पहले अपनी ससुराल से गायब होने वाली एक ग्रामीण युवती को गुजरात स्थित अहमदाबाद के मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों ने उपचार कर इस महिला को उसके घरजियाबथान स्थित परिजनों के पास  लाकर मिला दिया।
गुजरात से आए दल के साथ
बासंती पति के साथ

    गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का पांच सदस्यी  दल के साथ यहां आकर बसंती नायक यह महिला जब अपने परिजनों से मिली  तो उसके आंसु थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने तथा लम्बे समय से गायब रहने के कारण बसंती के माता पिता ने उसके जीवित होने की भी उम्मीद छोड़ दी थी। बसंती के पिता मानसाय ने बताया कि वर्ष 2004 में उसकी बेटी पत्थलगांव के समीप कंटगतराई में अपने दो नन्हे बच्चों को ससुराल में छोड़ कर अचानक गायब हो गई थी।इस युवती की ससुराल और मायके वालों ने मिल कर उसकी जगह जगह तलाश की थी लेकिन बसंती का कहीं पता नहीं चल सका था। मानसाय ने बताया कि बसंती के नहीं मिल पाने के बाद उसने पत्थलगांव पुलिस के पास जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने भी बसंती के फोटो लेकर उसकी तलाश की पर कहीं भी पता नहीं चल सका।
          
        ठीक होकर लिया पत्थलगांव का नाम  
 बसंती को लेकर पत्थलगांव पहुंचे गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों के दल की महिला सदस्य सुश्री पारूल सोलंकी ने बताया कि अहमदाबाद स्थित मानसिक आरोग्य हास्पिटल में बीते वर्ष अप्रेल माह में गुजरात पुलिस ने इस युवती को लावारिश हालत में बरामद किया था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण यह महिला पुलिस को कुछ भी जानकारी नहीं दे पा रही थी।गुजरात पुलिस ने इस महिला को अहमदाबाछ स्थित मानसिक आरोग्य स्वास्थ्य कर्मियों के पास लाकर उन्हे सौंप दिया था। यहां के स्वास्थ्य कर्मियों ने अनजान महिला को अपना कर उसी दिन से इलाज और उसकी सेवा का काम शुरू कर दिया था। मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन और बेहतर इलाज मिलने के कारण इस युवती की दशा में जल्द सुधार होने लगा था। जब यह युवती ठीक होकर कुछ समझने बुझने लगी तो गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने राहत की सांस ली थी । स्वास्थ्य कर्मियों के दल ने बताया कि पहले अपने परिजन तथा अन्य के बारे में कुछ भी नहीं बता पाने वाली यह युवती जब पूरी तरह से  स्वस्थ्य हो गई तो उसने सबसे पहले पत्थलगांव का नाम बताया था। इस युवती को मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन मिलने के बाद उसकी गुमी हुई याददाश्त भी धीरे धीरे लौटने लगी थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि बसंती से जब उसका जशपुर जिले का पूरा पता मिला तो फिर इस युवती को लाकर उसके परिजनों से मिलाया गया।
    पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में जब गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का दल पहुंचा तो बसंती ने स्वयं आगे बढ़ कर अपने घर का रास्ता बता दिया । इस युवती के पिता मानसाय को अचानक उसकी खोई हुई बेटी मिली तो वह फूट-फूट कर रोने लगा था। मानसाय तथा उसकी पत्नी एतवारी बाई ने बताया कि उन्हे बसंती के वापस मिलने की रंचं मात्र भी उम्मीद नहीं थी। गुजरात से यहां पहुंचा स्वास्थ्य कर्मियों का दल में उपस्थित पी .पी.नाडिया, मोरारजी सोलंकी, प्रिती सोलंकी, सुनीता रावत तथा पारूल सोलंकी ने बताया कि बसंती को उसके परिजनों से मिला कर उन्हें जो खुशी मिली है उसे वे लोग शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते हैं। उन्होने कहा कि गुजरात के मानसिक अस्पताल में रह कर वे बसंती जैसे सैकड़ों मरीजों का उपचार करते हैं। लेकिन इस तरह वषरे से बिछुड़े हुए मरीज को लाकर उसके परिजनों से मिलाने में सफल हो जाते हैं तो उनकी मेहनत सार्थक हो जाती है। पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में खोई हुई युवती को देखने के लिए ग्रामीणों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ पडी़ थी। यहां के लोगों से अपनापन मिलने के बाद गुजरात के स्वास्थ्य कर्मी भी अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे।
रमेश शर्मा

खोई हुई बेटी को सामने पाकर वे फूट-फूट कर रोने लगे


गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने उपचार कर परिजनों से भी मिलाया
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/  रमेश शर्मा
गुजरात का दिल सचमुच बहुत बड़ा है। उसके आगे बढ़ने के पीछे परोपकार की भावना का भी समावेश होता है। परसेवा के लिए जो परशेवा (पसीना) बहा दे, वही सच्च गुजराती है। अब किसने सोचा था कि सात साल पहले जो बेटी खो गई हो, वह अचानक माता-पिता के सामने आ जाए। इससे माता-पिता ही नहीं, बल्कि पूरा गाँव ही खुशियों से झूम उठा। ग्रामीणों ने उस टीम को देखा जिसने उनकी बेटी को सही सलामत घर तक पहुँचा दिया। उन्होंने टीम का ही नहीं, बल्कि गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का भी आभार व्यक्त किया। लड़ककी के माता-पिता ने टीम को आशाीष देते-देते नहीं थकती। बेटी को पाकर वे आल्हादित हैं। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण सात साल पहले अपनी ससुराल से गायब होने वाली एक ग्रामीण युवती को गुजरात स्थित अहमदाबाद के मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों ने उपचार कर इस महिला को उसके घरजियाबथान स्थित परिजनों के पास  लाकर मिला दिया।
    गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का पांच सदस्यी  दल के साथ यहां आकर बसंती नायक यह महिला जब अपने परिजनों से मिली  तो उसके आंसु थमने का नाम नहीं ले रहे थे। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने तथा लम्बे समय से गायब रहने के कारण बसंती के माता पिता ने उसके जीवित होने की भी उम्मीद छोड़ दी थी। बसंती के पिता मानसाय ने बताया कि वर्ष 2004 में उसकी बेटी पत्थलगांव के समीप कंटगतराई में अपने दो नन्हे बच्चों को ससुराल में छोड़ कर अचानक गायब हो गई थी।इस युवती की ससुराल और मायके वालों ने मिल कर उसकी जगह जगह तलाश की थी लेकिन बसंती का कहीं पता नहीं चल सका था। मानसाय ने बताया कि बसंती के नहीं मिल पाने के बाद उसने पत्थलगांव पुलिस के पास जाकर रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पुलिस ने भी बसंती के फोटो लेकर उसकी तलाश की पर कहीं भी पता नहीं चल सका।
                   ठीक होकर लिया पत्थलगांव का नाम  
 बसंती को लेकर पत्थलगांव पहुंचे गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों के दल की महिला सदस्य सुश्री पारूल सोलंकी ने बताया कि अहमदाबाद स्थित मानसिक आरोग्य हास्पिटल में बीते वर्ष अप्रेल माह में गुजरात पुलिस ने इस युवती को लावारिश हालत में बरामद किया था। मानसिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण यह महिला पुलिस को कुछ भी जानकारी नहीं दे पा रही थी।गुजरात पुलिस ने इस महिला को अहमदाबाछ स्थित मानसिक आरोग्य स्वास्थ्य कर्मियों के पास लाकर उन्हे सौंप दिया था। यहां के स्वास्थ्य कर्मियों ने अनजान महिला को अपना कर उसी दिन से इलाज और उसकी सेवा का काम शुरू कर दिया था। मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन और बेहतर इलाज मिलने के कारण इस युवती की दशा में जल्द सुधार होने लगा था। जब यह युवती ठीक होकर कुछ समझने बुझने लगी तो गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों ने राहत की सांस ली थी । स्वास्थ्य कर्मियों के दल ने बताया कि पहले अपने परिजन तथा अन्य के बारे में कुछ भी नहीं बता पाने वाली यह युवती जब पूरी तरह से  स्वस्थ्य हो गई तो उसने सबसे पहले पत्थलगांव का नाम बताया था। इस युवती को मानसिक आरोग्य हास्पिटल के कर्मचारियों से अपनापन मिलने के बाद उसकी गुमी हुई याददाश्त भी धीरे धीरे लौटने लगी थी। स्वास्थ्य कर्मियों ने बताया कि बसंती से जब उसका जशपुर जिले का पूरा पता मिला तो फिर इस युवती को लाकर उसके परिजनों से मिलाया गया।
    पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में जब गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों का दल पहुंचा तो बसंती ने स्वयं आगे बढ़ कर अपने घर का रास्ता बता दिया । इस युवती के पिता मानसाय को अचानक उसकी खोई हुई बेटी मिली तो वह फूट-फूट कर रोने लगा था। मानसाय तथा उसकी पत्नी एतवारी बाई ने बताया कि उन्हे बसंती के वापस मिलने की रंचं मात्र भी उम्मीद नहीं थी। गुजरात से यहां पहुंचा स्वास्थ्य कर्मियों का दल में उपस्थित पी .पी.नाडिया, मोरारजी सोलंकी, प्रिती सोलंकी, सुनीता रावत तथा पारूल सोलंकी ने बताया कि बसंती को उसके परिजनों से मिला कर उन्हें जो खुशी मिली है उसे वे लोग शब्दों में व्यक्त नहीं कर सकते हैं। उन्होने कहा कि गुजरात के मानसिक अस्पताल में रह कर वे बसंती जैसे सैकड़ों मरीजों का उपचार करते हैं। लेकिन इस तरह वषरे से बिछुड़े हुए मरीज को लाकर उसके परिजनों से मिलाने में सफल हो जाते हैं तो उनकी मेहनत सार्थक हो जाती है। पत्थलगांव के समीप घरजियाबथान गांव में खोई हुई युवती को देखने के लिए ग्रामीणों की अच्छी खासी भीड़ उमड़ पडी़ थी। यहां के लोगों से अपनापन मिलने के बाद गुजरात के स्वास्थ्य कर्मी भी अपने आंसू रोक नहीं पा रहे थे। 

फोटो/ गुजरात के स्वास्थ्य कर्मियों के साथ खोई हुई बसंती

रविवार, 1 जनवरी 2012

जिद करो और दुनिया बदलो का सकंल्प के बाद


खारडोढ़ी गांव में श्रीमती अनिता यादव बनी प्रेरणा की मिसाल
       खारडोढ़ी की महिलाओं ने बजंर भूमि पर फैला दी हरियाली 
पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
खारडोढ़ी गांव की उबड़ खाबड़ और पथरीली जमीन पर नौ साल पहले यहंा की महिलाओं का स्वसहायता समूह व्दारा रोपे गए पौधे अब सघन जगंल का रूप ले चुके हैं। लगभग 25 एकड़ क्षेत्र में फैले इन दो जगंलों की देख रेख का काम गांव के ही लोग मिलजुल कर करते हैं।सबसे दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण महिलाओं का स्वसहायता समूह की समझाईश के बाद प्रत्येक ग्रामीण साग सब्जी की उपज लेकर नगद लाभ कमाने लगे हैं।यहंा के ग्रामीण अपनी बाड़ी में ही केंचवा खाद बना कर विभिन्न साग सब्जी का अधिक उत्पादन ले रहे हैं।गांव में जगंल की कमी दूर हो जाने के बाद यहंा जलाउ लकड़ी की किल्लत दूर हो गई है।जगंल की सूखी टहनियों की बदौलत चुल्हा चौका का काम आसानी से होने लगा है।
पत्थलगांव विकासखंड अन्तर्गत ग्राम खारडोढ़ी के आसपास बजंर और पथरीली भूमि होने के कारण यहंा की ग्रामीण महिलाओं को जलाउ लकड़ी लेने के लिए 25 से 30 कि.मी. दूर सिसरिंगा और तेजपुर जगंल जाना पड़ता था। प्रति दिन जलाउ लकड़ी की समस्या से जूझने के कारण यहंा की महिलाऐं दूसरा काम के बारे में सोच भी नहीं पाती थी। इस गांव के लोगों की परेशानी के बारे में जब आदिवासी विकास कार्यक्रम  आई फेड के अधिकारियों को पता चला तो उन्होने गांव में पहंुच कर यहंा की महिलाओं में आत्म विश्वास जगाया था। आदिवासी विकास कार्यक्रम के तत्कालीन अधिकारी संदीप शर्मा, अशोक जायसवाल ने यहंा की ग्रामीण महिलाओं के मोंगरा समूह, चम्पा समूह और ध्रुव नामक स्वसहायता समूह गठित कर उन्हे वृक्षारोपण, बाड़ी विकास, मुर्गी पालन जैसे छोटे छोटे काम के प्रति आकर्षित किया था। यहंा के महिलाओं के तीन अलग अलग समूह बना कर उन्हे सुखरापारा सेन्ट्रल बैंक से कर्ज भी दिलाया गया था। जिसे यहंा की ग्रामीण महिलाओं ने अब पूरा चूकता कर दिया है। यहं की महिलाओं का कहना है कि अपने काम के प्रति रूचि और लगन से उन्हे सभी कार्यो में अपार सफलता मिलती रही है।
मोंगरा समूह की अध्यक्ष श्रीमती अनिता यादव ने बताया कि सबसे पहले वर्ष 2002 में उन्होने खारडोढ़ी का खेरखेरी पारा और जुनापारा की पथरीली भूमि में वृक्षारोपण किया था। खेरखेरीपारा की भूमि के समीप बरसाती नाला होने से यहंा रोपे गए विभिन्न प्रजाति के पौधे जल्द ही हरियाली में बदलने लगे थे। मौजूदा समय में यहंा पर लगभग 20 एकड़ बजंर भूमि ने हरियाली की चादर ओढ़ ली है। यहंा जुनापारा और खेरखेरीपारा के दो अलग अलग जगंल की देख रेख करने वाले चौकीदारों के लिए गांव के लोग आपस में अनाज इकटठा कर उन्हे पारिश्रमिक दे रहे हैं। यहंा के ग्रामीण भी इन जगंलों को सुरक्षित रखने में अपना समय देते हैं। यहंा पर मिलने वाला मवेशिओं का चारा को ग्रामीण मिल बांट कर उपयोग कर लेते हैं। इस गांव के दोनो हरे भरे जगंल पड़ोस के गांव वालों के लिए एक मिशाल बन गए हैं।  
                   कलेक्टर ने रोपा था काजू का पौधा
खारडोढ़ी की महिलाओं का जज्बा के बारे में जशपुर के तत्कालीन कलेक्टर दर्गेश मिश्रा को पता चला तो उन्होने भी गांव पहुंच कर यहंा वृक्षारोपण तथा अन्य कार्यो का जायजा लिया। खारडोढ़ी गांव में कलेक्टर श्री मिश्रा ने भी अपनी उपस्थिति को यादगार बनाने के लिए यहंा खेरखेरी पारा की बजंर भूमि में काजू का पौधा रोपा था। यह छोटा सा पौघा अब बड़ा पेड़ बन कर फलने फुलने लगा है।गांव के लोग काजू के पेड़ की देखभाल करते रहते हैं।
खारडोढ़ी की ग्रामीण महिलाओं में सबसे पहले मोंगरा समूह का गठन कर श्रीमती अनिता यादव को इसका अध्यक्ष बनाया गया था। इस महिला के कामकाज से प्रेरित होकर गांव में महिलाओं के दो और समूह का गठन किया गया। इन तीन समूह की लगभग 50 महिलाओं ने  नौ वर्षो में पूरे गांव की तस्वीर बदल डाली है। महिला समूह व्दारा रोपे गए पौधे बड़े हो जाने के बाद यहंा मवेशियों के लिए चारा और पेड़ो की टहनियों से जलाउ लकड़ी की व्यवस्था आसानी से हो जा रही है। श्रीमती अनिता ने बताया कि खरडोढ़ी गांव की अलग पहचान बनाने में उनके सामने कई बार कठिनाई भी आई लेकिन  यहां की महिला सहयोगी रमीला बाई, प्रेमवती, पन्ना बाई जानकी बाई, पुष्पा भगत के अलावा राम साय,महादेव जैसे कई ग्रामवासियों का भरपूर सहयोग मिल जाने से उनकी सभी परेशानियंा देखते ही देखते दूर हो जाती थी। गांव के लोगों ने आपस में मिलजुल कर काम करने की अब आदत बना ली है। इसी की बदौलत खारडोढ़ी गांव के लोग अब खुशहाल रहने लगे हैं। उन्हे शासन से किसी भी प्रकार की मदद नहीं मिलने के बाद भी वे अपना कामकाज सुचारू ढंग से कर रही हैं।

बुधवार, 21 दिसंबर 2011

क्रिसमस त्यौहार की तैयारी जोरों पर


बीटीआई चर्च में शुरू हो गई क्रिसमस की विशेष प्रार्थना
 गिरजाघरों में होने लगी प्रार्थना, दुकानों में उमड़ी भीड़
 मांदल की थाप के साथ बज रहा गिटार का मधुर संगीत 
पत्थलगांव/
छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले में इसाई समुदाय के लोग बहुतायत में होने के कारण इन दिनो यहंा के बाजारों की रौनक देखते ही बन रही है। क्रिसमस का त्यौहार करीब आते ही इसाई समुदाय के लोग हर्षोल्लास के साथ इस पर्व को मनाने की तैयारी करने लगे हैं। प्रभु यीशु के जन्म के पर्व की तैयारी में शहर तथा दूर दराज के ग्रामीण अचंल में रहने वाले इसाई समुदाय के लोगों के चेहरों पर खुशियां दिखाई पड़ रही है।
     यहां पर इसाई समुदाय के लोग इन दिनों अपने घर और गिरजघरों की साज सज्जा में जुटे हुए हैं। क्रिसमस का त्यौहार के पहले यहंा के गिरजाघरों में प्रार्थना का दौर शुरू हो गया है, वहीं इस त्यौहार का उत्साह में शहरों से गांव में त्यौहार मनाने की खातिर पहुंच युवक युवतियंा अपने गिटार तथा अन्य वाद्ययंत्र लेकर खुशी से गीत गुनगुनाने लगे हैं।रात के समय इन दिनों मांदल की थाप में युवक युवतियों का नाच गाना देखते ही बन रहा है।
      पत्थलगांव क्षेत्र में इसाई समुदाय के लोगों की अधिक संख्या होने के कारण यहंा पर दिसंबर महिने के पहले पखवाड़े से ही शहर में क्रिसमस के सामानों की दुकानें सजने लगती हैं। अब जब क्रिसमस त्यौहार के कुछ ही दिन बचे हैं तो दुकानों में ग्राहकों की भीड़ बढ़ गई है। क्रिसमस के मौके पर बिकने वाले सामान क्रिसमस ट्री, स्टार, सजावटी फूल,गुलदस्ता , विद्युत झालर सहित अन्य फैंसी आयटमों से यहंा की दूकानें सज गई हैं। बड़े शहर और महानगरो में काम काज करने वाले इसाई समुदाय के युवक युवतियां क्रिसमस का त्यौहार को अपने परिजनों के साथ मनाने के लिए वापस लौटने लगे हैं। ये लोग अपने परिजनों के बीच पहुंचने से पहले क्रिसमस के सामान की जमकर खरीददारी कर रहे हैं। शहर और गांव में रहने वाले युवक युवतियंा भी दुकानों में पहुंच कर खरीदी में व्यस्त हो गए हैं। यहंा के दुकानदारों का कहना है कि क्रिसमस के मौके पर हल्के सामानों की बिक्री नहीं होती है। इसके विपरित मंहगे इलेक्ट्रानिक झूमर, क्रिसमस ट्री, क्रिसमस स्टार,प्रभु यीशु और माता मरियम की मुर्तियों की अधिक मांग बनी हुई है। यहंा के दुकानदारों ने इस वर्ष चायना के क्रिसमस स्टार और विद्युत झालर के अनेक आयटम रखे हैं। ये सामान ग्राहकों के बजट के अनुरूप होने के कारण इनकी बिक्री अधिक हो रही हैं। क्रिसमस के अवसर पर दुकानदारों ने प्रेम का संदेश देने वाले काफी आकर्षक सांता ड्रेसेज, कैंडल, क्रिव के भी अनेक आयटम मंगा लिए हैं। इन आयटम को ग्राहक अपने बच्चों के लिए अवश्य खरीद रहे हैं। वेलवेट वाली हर साईज की सांताड्रेस इस वर्ष विशेष आकर्षण का केन्द्र बन गई हैं। महज 150 रू. से लेकर 1500 रू. तक की इस ड्रेस को देखने के बाद ग्राहक इसकी खरीदी के बगैर नहीं लौट पाते हैं। इनके अलावा सांता क्लोज के स्टेचु, ग्रिटिंग कार्ड की भी जमकर बिक्री हो रही है। इसाई समुदाय के लोग क्रिसमस के मौके पर जमकर खरीददारी में व्यस्त हो गए हैं।

क्रिसमस के अवसर पर यहंा के सुसडेगा गांव में गिटार के साथ नागपुर का युवक गौरव यदु
     
                 
  कछार घाटी से दिखते हैं जुगनू
  यहंा पर क्रिसमस के मौके पर गांव गांव में रात के समय क्रिसमस स्टार चमकते हुए दिखाई पड़ रहे हैं। लुड़ेग के समीप झंडाघाट,जशपुर के पास की लोरो घाटी , घरजियाबथान की घाटी तथा कछार घाटी से गुजरते वक्त आसपास के गांवों में रात के समय जुगनु की तरह इन क्रिसमस स्टार की खुबसुरती देखते ही बन रही है। यहंा पर कुनकुरी का बड़ा चर्च और पत्थलगांव स्थित कैथोलिक आश्रम का पुराना चर्च में काफी आकर्षक साज सज्जा की गई है। बीटीआई और राहा कार्यालय में भी क्रिसमस की तैयारी अंतिम दौर पर पहुंच गई हैं। आस पास के गांवों में युवक युवतियां मादंर वाद्ययंत्र की थाप पर झुमते हुए देखी जा रही हैं। यहंा जामजुनवानी, पाकरगांव, कंटगजोर, लुड़ेग, बारबन्द के गिरजाघरों के आस पास रात के समय नाच गानो का दौर देखते ही बन रहा है।
                    मांदल की थाप पर झूम रहे लोग
  यहंा पर क्रिसमस और नव वर्ष नजदीक आते ही बसों में भीड़ बढ़ जाती है। इस अचंल में रहने वाले इसाई समुदाय के लोग मुम्बई,गोवा,दिल्ली,जम्मू,कोलकोता और पंजाब में रह कर नौकरी करते हैं।ये लोग क्रिसमस का त्यौहार अपने परिजनों के साथ गांव में आकर मनाते हैं। इसी वजह इन दिनों बसों में भीड़ बढ़ गई है। इन दिनों छोटे से गांव में मांदल की थाप पर यदि कोई  बड़ा अफसर नाचते हुए मिल जाए तो आश्चर्य की बात नहीं रहती। देश के विभिन्न हिस्सों में उंचे पद पर पदस्थ इसाई समुदाय के लोगों का गांव में जमावड़ा लगने लगा है। ऐसे लोग अपने परिचित और परिवार के साथ क्रिसमस की खुशियों को दोगुना करने में लगे हैं।

बुधवार, 14 दिसंबर 2011


घर पर ही जैविक खाद तैयार कर रहा किसान



किसान कर रहे हैं साग सब्जी के साथ फूलों की खेती
 रमेश शर्मा
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
जशपुर जिले के पत्थलगांव विकास खंड अन्तर्गत 18 गांव के किसानों ने रासायनिक खाद को छोड़कर जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। किसानों के घर में ही उपलब्ध गोबर तथा कूड़ा करकट से बनने वाली जैविक खाद का उपयोग करने से खेतों की हरियाली बढ़ गई है। इन किसानों का कहना है कि प्रारम्भिक तौर पर जैविक खाद का उपयोग करने के अच्छे नतिजे सामने आए हैं।
      लुड़ेग के किसान सुभाष प्रधान ने बताया कि यहंा के अन्य किसानों व्दारा अपने खेतों में रासायनिक खाद के बदले जैविक खाद का इस्तेमाल करते हुए देख कर  उसने भी अपने खेतों में इस बार जैविक खाद को अपनाया है। सुभाष प्रधान ने अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में जैविक खाद के सहारे साग सब्जी की खेती शुरू की है। इस किसान का कहना था कि गोभी मिर्ची और भिंडी के पौधे लगाने के बाद एक महिने में ही उसके खेतों में हरियाली छा गई थी। अब वह पहली बार इस फसल से नगद लाभ लेने लगा है। इस किसान का कहना था कि एक एकड़ में लगभग 50 किलो रासायनिक खाद के बदले उसे महज तीन किलो जैविक खाद का उपयोग करना पड़ रहा है। सुभाष प्रधान का कहना था कि इन दिनो खेती के काम में मजदूरों की समस्या को देखते हुए जैविक खाद ने उसकी कई मुश्किलों को दूर कर दिया है।
  लुड़ेग में रूद्रधर खुंटिया, केडी खंुटिया, प्रफुल्ल पटेल तथा सुरेश अग्रवाल ने भी अपने खेतों में रासायनिक खेती के बदले जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। इन किसानों ने भी जैविक खाद को अधिक उपयोगी बताया है। सुरेश अग्रवाल का कहना था कि इन दिनों किसान के पास में सबसे बड़ी मजदूर की समस्या रहती है। उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग करने पर उन्हे युरिया, डीएपी तथा पोटाश खाद खेतों में डालने के लिए बार बार मजदूरों की तलाश करनी पड़ती थी। जैविक खाद की अपेक्षा रासायनिक खाद काफी महंगी होने के कारण इस पर मजदूरी खर्च भी अधिक रहता था। इसके विपरित जैविक खाद का उपयोग करने पर मजदूरी का खर्च भी नाममात्र रह गया है। यहंा के किसानों का कहना कि यदि अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार की जाए तो खेती किसानी का खर्च पहले के मुकाबले में आधा से भी कम पड़ रहा है।
           कुड़ा करकट से बनने लगी खाद
  पत्थलगांव में उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव विकास खंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए यहंा पर 18 गांव के 66 किसानों को निशुल्क जैविक खाद उपलब्ध कराई गई है। इन किसानों को अपने घर की बाड़ी में जैविक खाद बनाने के लिए आधुनिक टेंक का भी वितरण किया गया है। किसान अपने घर पर ही गोबर तथा कुड़ा करकट के साथ पत्तियों को खाद के टेंक में डाल कर खाद तैयार कर रहे हैं। मिर्जापुर के अकलू राम ने बताया कि उसने अपनी बाड़ी में ही जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया है। अकलू राम का कहना था कि खाद बनाने के टेंक में गोबर तथा कुड़ा करकट डाल कर तीन माह में लगभग साढ़े चार क्विंटल अच्छी खाद तैयार कर ले रहा है। कई किसानों के पास अधिक भूमि होने पर उनके व्दारा खाद तैयार करने के दो से ज्यादा टेंक बना रखें हैं।  उद्यान विभाग की पहल के बाद यहंा पर केराकछार, ईला, तमता, बटूराबहार, मिर्जापुर, पत्थलगांव, मक्कापुर, पालीडिह, पाकरगांव गांव में किसान अपने घर पर ही केंचवा जैविक खाद बनाने लगे हैं।
            पाकरगांव में फुलों की खेती
   इस अचंल के किसानों का कहना था कि रासायनिक खाद के मुकाबले में जैविक खाद की फसल का उपयोग करना काफी लाभप्रद साबित हो रहा है। पाकरगांव में गणेश बेहरा ने अपनी बाड़ी में  साग सब्जी की फसल के साथ फुलों की खेती का काम भी शुरू किया है। उन्होने कहा कि इसमें जैविक खाद का प्रयोग करने से काफी अच्छा उत्पादन आया है। स्थानीय बाजार में फुलों की हर समय मांग बनी रहने से इस किसान के पास घर बैठे फूलों के ग्राहक मिलने लगे हैं।
रमेश शर्मा पत्‍थलगॉंव

सोमवार, 12 दिसंबर 2011

जैविक खाद से खेतों में छाई हरियाली

घर पर ही जैविक खाद तैयार कर रहा किसान

किसान कर रहे हैं साग सब्जी के साथ फूलों की खेती

रमेश शर्मा
पत्थलगांव/छत्तीसगढ़/
जशपुर जिले के पत्थलगांव विकास खंड अन्तर्गत 18 गांव के किसानों ने रासायनिक खाद को छोड़कर जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। किसानों के घर में ही उपलब्ध गोबर तथा कूड़ा करकट से बनने वाली जैविक खाद का उपयोग करने से खेतों की हरियाली बढ़ गई है। इन किसानों का कहना है कि प्रारम्भिक तौर पर जैविक खाद का उपयोग करने के अच्छे नतिजे सामने आए हैं।
      लुड़ेग के किसान सुभाष प्रधान ने बताया कि यहंा के अन्य किसानों व्दारा अपने खेतों में रासायनिक खाद के बदले जैविक खाद का इस्तेमाल करते हुए देख कर  उसने भी अपने खेतों में इस बार जैविक खाद को अपनाया है। सुभाष प्रधान ने अपनी लगभग डेढ़ एकड़ भूमि में जैविक खाद के सहारे साग सब्जी की खेती शुरू की है। इस किसान का कहना था कि गोभी मिर्ची और भिंडी के पौधे लगाने के बाद एक महिने में ही उसके खेतों में हरियाली छा गई थी। अब वह पहली बार इस फसल से नगद लाभ लेने लगा है। इस किसान का कहना था कि एक एकड़ में लगभग 50 किलो रासायनिक खाद के बदले उसे महज तीन किलो जैविक खाद का उपयोग करना पड़ रहा है। सुभाष प्रधान का कहना था कि इन दिनो खेती के काम में मजदूरों की समस्या को देखते हुए जैविक खाद ने उसकी कई मुश्किलों को दूर कर दिया है।
  लुड़ेग में रूद्रधर खुंटिया, केडी खंुटिया, प्रफुल्ल पटेल तथा सुरेश अग्रवाल ने भी अपने खेतों में रासायनिक खेती के बदले जैविक खाद का उपयोग करना शुरू किया है। इन किसानों ने भी जैविक खाद को अधिक उपयोगी बताया है। सुरेश अग्रवाल का कहना था कि इन दिनों किसान के पास में सबसे बड़ी मजदूर की समस्या रहती है। उन्होने बताया कि रासायनिक खाद का प्रयोग करने पर उन्हे युरिया, डीएपी तथा पोटाश खाद खेतों में डालने के लिए बार बार मजदूरों की तलाश करनी पड़ती थी। जैविक खाद की अपेक्षा रासायनिक खाद काफी महंगी होने के कारण इस पर मजदूरी खर्च भी अधिक रहता था। इसके विपरित जैविक खाद का उपयोग करने पर मजदूरी का खर्च भी नाममात्र रह गया है। यहंा के किसानों का कहना कि यदि अपने खेतों में ही जैविक खाद तैयार की जाए तो खेती किसानी का खर्च पहले के मुकाबले में आधा से भी कम पड़ रहा है।
           कूड़ा करकट से बनने लगी खाद
  पत्थलगांव में उद्यान विभाग के अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि पत्थलगांव विकास खंड में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए यहंा पर 18 गांव के 66 किसानों को निशुल्क जैविक खाद उपलब्ध कराई गई है। इन किसानों को अपने घर की बाड़ी में जैविक खाद बनाने के लिए आधुनिक टेंक का भी वितरण किया गया है। किसान अपने घर पर ही गोबर तथा कुड़ा करकट के साथ पत्तियों को खाद के टेंक में डाल कर खाद तैयार कर रहे हैं। मिर्जापुर के अकलू राम ने बताया कि उसने अपनी बाड़ी में ही जैविक खाद बनाने का काम शुरू किया है। अकलू राम का कहना था कि खाद बनाने के टेंक में गोबर तथा कुड़ा करकट डाल कर तीन माह में लगभग साढ़े चार क्विंटल अच्छी खाद तैयार कर ले रहा है। कई किसानों के पास अधिक भूमि होने पर उनके व्दारा खाद तैयार करने के दो से ज्यादा टेंक बना रखें हैं।  उद्यान विभाग की पहल के बाद यहंा पर केराकछार, ईला, तमता, बटूराबहार, मिर्जापुर, पत्थलगांव, मक्कापुर, पालीडिह, पाकरगांव गांव में किसान अपने घर पर ही केंचवा जैविक खाद बनाने लगे हैं।
            पाकरगांव में फूलों की खेती
   इस अचंल के किसानों का कहना था कि रासायनिक खाद के मुकाबले में जैविक खाद की फसल का उपयोग करना काफी लाभप्रद साबित हो रहा है। पाकरगांव में गणेश बेहरा ने अपनी बाड़ी में  साग सब्जी की फसल के साथ फुलों की खेती का काम भी शुरू किया है। उन्होने कहा कि इसमें जैविक खाद का प्रयोग करने से काफी अच्छा उत्पादन आया है। स्थानीय बाजार में फुलों की हर समय मांग बनी रहने से इस किसान के पास घर बैठे फुलों के ग्राहक मिलने लगे हैं।
रमेश शर्मा





बुधवार, 16 नवंबर 2011

With Print Media

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के साथ अन्तरंग क्षणों में

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह के साथ अन्तरंग क्षणों में

शराब बनाने की छूट से परेशान हो रही ग्रामीण महिलाऐं



रमेश शर्मा

पत्थलगांव/ पुलिस और ग्रामीणों के बीच में मधुर संबंध कायम करने तथा उन्हे न्याय दिलाने की मंशा से शुरू किया गया चलित थाना अभियान के दौरान ज्यादातर ग्रामीण पुलिस के समक्ष उपस्थित होकर सबसे पहले कच्ची शराब का अवैध करोबार करने वालों पर लगाम लगाने की गुहार कर रहे हैं।आदिवासियों को शराब बनाने की छुट का अब आदिवासी महिलाओं ने ही विरोध करना शुरू कर दिया है।
रविवार को पत्थलगांव थाना पुलिस व्दारा बहनाटांगर गांव में आयोजित चलित थाना में ग्रामीणों के साथ वहंा की महिला सरपंच श्रीमती समपति बाई ने भी पुलिस अधिकारियों से शराब का अवैध करोबार करने वालों पर ठोस कार्रवाई करने का आग्रह किया। यहंा के ग्रामीणों का कहना था कि आदिवासियों को शराब बनाने की छुट का इन दिनों जगह जगह दुरूपयोग होने लगा है। इसी वजह गांव के युवक भी शराब का नशा में डूबे रहते हैं। महिला सरपंच का कहना था कि गांव में अवैध शराब बेचने वालों पर आबकारी विभाग के अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से यह गांव शराबियों का गांव बन गया है।उन्होने बताया कि इसी वजह मारपीट तथा अन्य अपराधिक वारदात होने लगी हैं। इस गांव की ज्यादातर महिलाओं ने कहा कि शराब का सेवन करने से कई घर बर्बादी के कगार पर पहुंच गए हैं।चलित थाना के साथ गांव में पहुंचे नगर निरीक्शक नरेन्द्र शर्मा तथा महिला सहायक निरीक्शक मल्लिका बनर्जी ने ग्रामीण महिलाओं को उनकी इस समस्या को दूर करने में सहयोग देने का आश्वासन दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि अवैध शराब विक्रेताओं के प्रति गांव में जनजागरण अभियान चलाकर इस गांव को आदर्श गांव का रूप दिया जा सकता है।नरेन्द्र शर्मा ने ग्रामीण महिलाओं को विकास के कार्यो में पुलिस का समुचित सहयोग देने का आश्वासन दिया।
चलित थाना में बुधनी बाई नामक एक वृध्द महिला ने अपने पुत्र से प्रताड़ित होने का दुखड़ा सुनाया था।इस महिला ने बताया कि उसके छोटे पुत्र ने घर की दिवार उठा कर उसका रास्ता भी बन्द कर दिया है। ग्रामीण महिला की दुख भरी दास्तान सुनने के बाद महिला सहायक निरीक्शक मल्लिका बनर्जी ने इस वृध्द महिला का पुत्र ढुकरू राम को बुला कर उसका भी पक्श सुना।बुधनीबाई को घर से बेदखल करने तथा उसको परेशान करने की बातों पर दोनो पक्श को समझाईश देकर उन्हे बेहतर ढ़ंग से जीवन यापन करने की बात कही गई। चलित थाना में पुलिस कर्मियों ने गांव की विभिन्न समस्याओं की जानकारी एकत्र की।इस गांव के ग्रामवासियों ने स्वास्थ्य और शिक्शा की अच्छी स्थिति बताई कई मुहल्लों में बिजली नहीं होने की जानकारी देकर ग्रामीणों ने पुलिस कर्मियों को सहयोग देने की बात कही।चलित थाना में पुलिस कर्मियों ने टोनही प्रथा , अधं विश्वास जैसी बुराईयों से दूर रहने की समझाईष दी।
सिंचाई नहर के बाद भी किसानों को पानी का लाभ नहीं ग्राम बहनाटांगर के ग्रामीणों ने बताया कि यहंा पर केराकछार सिंचाई बांध से नहरों में पानी नहीं मिलने से अनेक किसानों को दोहरी फसल का लाभ नहीं मिल पा रहा है। यहंा पर रवि सिदार ने बताया कि जल संसाधन विभाग ने उनके गांव में लाखों रूपये व्यय करके सिंचाई नहरों का जाल तो फैला दिया है, पर खपरापारा मुहल्ला तक नहर से सिंचाई के लिए पानी दिया जा रहा है।बहनाटांगर गांव में जुनापारा, कदमपारा और लाईपारा में सिंचाई नहर होने के बाद भी यहंा तक पानी नहीं दिया जा रहा है। यहंा के किसानों का कहना था कि जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को कई बार शिकायत करने के बाद भी किसानों की समस्या यथावत है।पुलिस ने चलित थाना अभियान के दौरान ग्रामीणों के सभी सुझाव और जरूरतों की सूची बनाकर इस दिशा में सार्थक पहल करने का आश्वासन दिया।पुलिस ने बहनाटांगर गांव में पुराने अपराधियों के बारे में भी पुछताछ की। बहनाटांगर की चैपाल में पुलिस ने स्कूली बच्चों के अलावा मजदूरों के साथ भीshविस्तृत चर्चा कर उनके सवालों का जवाब दिया।

जमीन में नमीं नहीं होने से मुंगफल्ली फसल को नुकसान



पत्थलगांव/
  जमीन में नमी नहीं रहने से किसानों की मुगंफल्ली फसल बाहर नहीं निकल पा रही है। खेतों में पानी डाल कर काफी मषक्कत के बाद भी मुंगफल्ली की अधूरी पैदावार मिलने से इस अचंल के किसान हताष हो गए हैं।
   किसानों का कहना है कि दीपावली के एक पखवाड़ा पहले बारिष थम जाने से जमीन काफी कड़ी हो गई है।फसल के आखिरी मौके पर बारिष थम जाने से अब मुगंफल्ली की पैदावार जमीन से बाहर नहीं निकल पा रही है। कई गांवों में मुंगफल्ली की फसल को बाहर निकालने के लिए किसानों व्दारा पानी की व्यवस्था नहीं कर पाने से यह फसल खेतों में ही रह गई है।
       समीप ग्राम बहना टांगर के किसान रवि सिदार ने बताया कि मुगंफल्ली की पैदावार को जमीन से निकालने के लिऐ किसानों को दूर दूर से कांवर में पानी लाना पड़ रहा है। इसके बाद अगले दिन खेतों से आधी अधूरी फसल ही बाहर निकल पा रही है।किसानों का कहना है कि मुगंफल्ली की अच्छी पैदावार के बाद भी उन्हे अपनी फसल का पूरा लाभ नही मिल पा रहा है। किसानों का कहना था कि तमता जलाषय, केराकछार जलाषय, खरकटटा जलाषय की नहरों का जाल तो दूर दूर तक फैल गया है पर इनमें पानी नहीं रहने से किसानों को कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। ग्राम बहनाटांगर के किसानों का कहना था कि बीते तीन चार साल से वे अपने गांव की लगभग पांच कि.मी.लम्बी नहर में बांध का पानी छोड़ने की मांग कर रहे हैं पर उनकी मांग को बार बार अनसुना कर दिया जा रहा है। इस गांव के किसानों का कहना था  िकइस समय मुंगफल्ली की फसल निकालनें में नहरों का पानी काफी लाभप्रद साबित हो सकता था।किसानों का कहना था कि ऐसे विपरित समय में सिंचाई नहरों से पानी देने पर उदारता दिखानी चाहिए।


  पत्थलगांव क्षेत्र के लगभग दो हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में किसान मुंगफल्ली की पैदावार लेते हैं।इस बार दीपावली से पहले बारिष नहीं होने से जमीन की नमीं समाप्त हो गई है। इसी वजह मुंगफल्ली की पैदावार निकालने में किसानों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।किसानों को पानी डालकर फसल निकालने की सलाह दी जा रही है।
       पी एस भदौरिया, कृषि उद्यान अधीक्षक पत्थलगांव