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शनिवार, 15 नवंबर 2014

रास आने लगा महंगे पान का जायका

पान लबों की शान के साथ विक्रेता
 
संडे स्पेशलः
गुटखा,पाउच का दौर में भी दूर
 नहीं हुए पान के शौकीन

रास आने लगा महंगे पान का जायका

रमेश शर्मा /पत्थलगांव

लबों की शान कहलाने वाला पान के टेस्ट में तरह-तरह के बदलाव के साथ इसकी पैकिंग को विशेष बना देने से इसके शौकीन महंगाई के बाद भी पान की दूकान से दूर नहीं हो पा रहे हैं। गुटका पाउच का चलन बढ़ जाने के बाद पान विक्रेता अपना पारम्परिक व्यवसाय को जीवित रखने के लिए अब सादा पान से लेकर आयुर्वेदिक, ग्लुकोज,ड्रायफ्रू
और चॉकलेटी पान की वैराइटी उपलब्ध कराने लगे हैं। अलग अलग रेंज के मंहगे पान होने के बाद भी युवकों के साथ युवतियों को भी यह स्वाद काफी रास आने लगा है।

वैसे तो पान पुराने लोगों की पसंद माना जाता है लेकिन अब फूड और शीतल पेय की तरह पान के फ्लेवर में भी कई तरह के बदलाव कर देने से पान का व्यवसाय भी अच्छी कमाई का जरिया बन गया है। ठंड के दिनों में पान पत्तों की आवक कम हो जाने से इसके थोक दाम बढ़ जाने के चलते पान विक्रेताओं को अपने ग्राहकों की मांग के अनुसार पहले से ही पर्याप्त मात्रा में स्टॅाक रखना पड़ता है।

यहां के पान विक्रेता धर्मेंद्र साहू का कहना है कि इन दिनों गुटका और पाउच का दौर शुरू हो जाने से उन्हे पान के टेस्ट के अलावा उनकी पैंकिंग पर भी विशेष ध्यान देना पड़ रहा है। उनके पास पहुंचने वाले पान के शौकीनों के लिए लम्बा सफर के लिए खास तरह की पैंकिग करनी पड़ती है। इससे उनके ग्राहक निरंतर बने रहते हैं। श्री साहू का कहना था कि इन दिनों सबसे ज्यादा क्रीम और चॉकलेट
फ्लेवर वाले पान पसंद किए जा रहे हैं। पान में डाले जाने वाले मसाले में चॉकलेट नटस रखे जाते हैं,इससे मुंह में पान का स्वाद और बढ़ जाता है। पान को बांधने के बाद उस पर चॉकलेट की कोटिंग के साथ क्रीम का जायका लगा देने से यह युवक युवतियों की खास पसंद बन जाता है।


रसगुल्ला व ड्रायफ्रूयुक्त पान

यहां के पान विक्रेताओं ने ड्रायफ्रूट युक्त पान की खास वैरायटी तैयार की जा रही हैं। ऐसे पान सगाई,बर्थ डे तथा खास अवसर पर ग्राहकों के आर्डर पर ही तैयार किए जाते हैं। ये पान 5 से 10 दिन तक खराब नहीं होते हैं। इसलिए महंगे पान के भी पान विक्रेताओं को खूब आर्डर मिल रहे हैं। रसगुल्ला पान की खासियत उसका स्वाद और शेप है। रसगुल्ले की तरह यह सॉप्ट तो होता ही है लेकिन मुंह में रखने के बाद इसके स्वाद की तारीफ अवश्य होती है।

स्पेशल डिब्बी में औषधीय पान

पान विक्रेता धर्मेन्द्र साहू का कहना था कि औषधीय पान की पैंकिग के लिए स्पेशल डिब्बियां मिलने लगी हैं। इसमें पान पैक करके दिए जाते हैं। इस तरह की पैकिंग के कारण पान में लम्बे समय तक ताजगी बनी रहती है। उन्होने बताया कि मुंह के छाले, जुकाम और सर्दी से छुटकारा दिलाने के लिए औषधीय पान ग्राहकों के बीच काफी लोगप्रिय होने लगा है।

मीठे पत्ते पर फ्रूटी खोपरा,ग्लुकोज और गुलकंदयुक्त पान फैमिली पान के रूप में आज भी अपनी पहले की तरह जगह बनाए हुए है। यह सबसे पुरानी रामेष्वर पान दुकान के विक्रेता बिहारी सिंग का कहना है कि गुटका और पाउच का दौर में भी ग्राहक इस पान से दूर नहीं हो पाए हैं। फर्क इतना है कि सर्दी के दिनों में मीठे पत्ते और गर्मी के दिनों में मघई या बनारसी पत्ते पर यह तैयार किया जाता है।
 



शनिवार, 8 नवंबर 2014

प्रकाश पर्व के उपलक्ष्य में भव्य शोभायात्रा

पंज प्यारे के सामने निशान साहेब
कीर्तन में गूँज . बोले सो निहाल, सतश्री अकाल
पत्थलगांव/    रमेश शर्मा
      बोले सो निहाल, सतश्री अकाल का जयकारे गुरुवार को शहरभर में गूंजे । काफी बड़ी संख्या में सिक्ख समाज जन सिक्ख धर्म के संस्थापक गुरु नानकदेव जी की महिमा का गुणगान करते शहर के प्रमुख मार्गो से निकले।
          अव्वल अल्लाह नूर उपाया कुदरत ते सब बन्दे की सुमधुर पंक्तिय को जत्थों व्दारा गाया जा रहा था। रंग बिरंगे फूलों से सजी शोभायात्रा का जगह जगह लोगों व्दारा आत्मीय स्वागत किया जा रहा था। पूरे रास्ते भर प्रसाद का वितरण किया जा रहा था। इस शोभायात्रा में शस्त्र कला व युद्ध कौशल के प्रदर्षन ने खासा रोमांच जगाया। यहां  पर गुरुसिंह सभा के गुरुव्दारा में 11 बजे से कीर्तन की शुरूवात हो गई थी। कीर्तन से पहले पूर्ण गुरुसिखी मर्यादा के अनुसार अरदास की गई।
       दोपहर गुरु अटूट लंगर के पश्चात सुसज्जित ट्रक में सजी हुई पालकी में गुरुग्रंथ साहिब को विराजमान किया गया। यहां  सिक्ख संगत ने काफी आकर्षक ढंग से पालकी को सजाया था। इस सवारी के आगे पंज प्यारे की भूमिका में अमरजीत सिंह काके, गोल्डी भाटिया, इन्दरजीत, अपनी एक जैसी वेश भूषा में उपस्थित थे। सवारी के आगे सिक्ख संगत के कार्यकत्र्ता सड़क धोने व झाड़ू से मार्ग साफ करने की सेवा कर रहे थे। शोभा यात्रा के साथ नगर कीर्तन के इस के कार्यक्रम में गुरुव्दारे का शब्दी जत्था भी उपस्थित था। शोभा यात्रा में सबसे आगे निशान साहेब के साथ अवनित भटिया चल रहे थे। सीतापुर के बेदी ढ़ोलकी तथा विभिन्न वाद्ययंत्रों के साथ बेहद अनुशासित रूप से पूरी संगत आगे बढ़ रही थी। इस शोभायात्रा और कीर्तन में शस्त्र कला व युध्द कौशल के प्रदर्षन ने खासा रोमांच जगाया।
       वीर खालसा गतका ग्रुप,स्मार्ट इंटरनेशनल गतका एकेडमी के युवकों ने युध्द कौशल का प्रदर्षन शानदार ढंग से किया। गुरुव्दारा गुरुसिंह सभा से निकल कर भव्य शोभायात्रा के साथ सिक्ख संगत सबसे पहले जशपुर रोड़ गई। यहां  अन्य समुदाय के लोगों ने भी गुरुग्रंथ साहेब का आत्मीय स्वागत कर संगत के लिए स्वलपाहार की व्यवस्था कराई थी। इस शोभायात्रा में सीतापुर, धर्मजयगढ़, कांसाबेल से भी सिक्ख संगत काफी बड़ी संख्या में शामिल हुई थी। 
                                               दिखा सांप्रदायिक सौहार्द
 गुरुग्रथ्ंा साहिब की शोभायात्रा एवं नगर कीर्तन के कार्यक्रम में सांप्रदायिक सौहार्द के साथ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सफाई का संदेशके प्रति जागरूकता का दृष्य भी दिखाई दिए। यहां  बस स्टैण्ड का इंदिरा चैराहा के समीप अग्रवाल सभा के युवकों ने गुरुग्रंथ साहेब का स्वागत करने के पश्चात पूरी संगत के लिए जलपान की व्यवस्था की थी।रायगढ़ रोड़ ,जशपुर रोड़ और अम्बिकापुर रोड़ में भी कई जगह विभिन्न समुदाय के लोगों ने शोभा यात्रा के साथ पंज प्यारों का स्वागत कर सभी के लिए जलपान की व्यवस्था कराई थी। सरदार हरपेज सिंह भाटिया ने शोभायात्रा के दौरान सभी वर्ग के लोगों को प्रसाद वितरण किया गया।


बुधवार, 22 अक्टूबर 2014

जज्बे से छँट गया अंधेरा

महिला मंडल की सदस्य दृष्टिबाधित बच्चों के साथ दीपावली का पर्व मनाते हुए

दूसरों से मिलती हैं त्योहार की खुशियॉं
दृष्टिबाधित बच्चों के चेहरों पर फैली खुशियॉं
   रमेश शर्मा/  पत्थलगांव/     
       अपनी जिन्दगी में रोशनी के उजाले से दूर रहने वालों के चेहरों पर यदि खुशियां लाई जाए, तो यह क्षण दीपोत्सव के अवसर पर तरह तरह के स्वादिष्ट व्यंजन का स्वाद से भी अधिक प्रभावशाली साबित होता है। जीवन की तेज भागदौड़ की व्यस्तता के बीच पत्थलगांव महिला मंडल की सदस्यों ने बुधवार को यहां दृष्टि बाधित गरीब बच्चों को ढेर सारे उपहार भेंट कर ऐसी ही खुशियों का आनंद लिया।
    यहां की समाज सेवी संस्था राहा व्दारा ग्रामीण अचंल में रहने वाले 20 दृष्टिबाधित बच्चों को पत्थलगांव का शक्ति सेवा केन्द्र में पढ़ा लिखा कर आत्म निर्भर बनाने की पहल शुरू की है। इन 20 बच्चों के लिए आवास भोजन की निशुल्क व्यवस्था के साथ ब्रेल लिपि के प्रशिक्षित शिक्षक इन्हे जीवन में आत्मनिर्भर बनाने में जुटे हुए हैं। बताया जाता है कि इन बच्चों की बचपन से ही आंखों की रोशनी नहीं रहने से इनके अभिभावक अपनी गरीबी के कारण इन बच्चों को केवल बोझ की तरह ढो रहे थे। ऐसे बच्चों को यहां ब्रेल लिपि से पढ़ाने के साथ अन्य बच्चों के साथ खेल तथा पढ़ाई लिखाई कराने से इन्हे अपने जीवन में कुछ कर दिखाने के लिए नई डगर मिल गई है।
    पत्थलगांव की महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती चन्दा राजकुमार गर्ग ने बताया कि गरीब तबका के दृष्टिबाधित इन बच्चों के बारे में जब उन्हे जानकारी मिली तो वे महिला मंडल की अन्य सदस्यों के साथ किसी भी तीज त्योहार के समय इन बच्चों के लिए विभिन्न उपहार लेकर उनके बीच पहुंच जाती हैं। दृष्टिबाधित इन बच्चों व्दारा गीत संगीत के साथ खेल कूद और पढ़ने में अपनी काबिलियत का लोहा मनवा दिया है। सभी बच्चे प्रातः खेल कूद में भाग लेने से पहले योग का भी शानदार प्रदर्शन करना सीख गए हैं। यहां के कई बच्चे जब मधुर संगीत के साथ गीतों का स्वर निकालते हैं तो किसी को विश्वास ही नहीं होता कि इनकी जिन्दगी में अंधेरा फैला हुआ है। दृष्टिबाधित बच्चों ने ब्रेल लिपि लिखने एवं पढ़ने की गति बढ़ाकर सामान्य लोगों की तरह चलने फिरने ,सार्वजनिक स्थलों में बिना किसी के सहयोग के चलने के अलावा अपने कार्यो को करने में सक्षम हो रहे हैं। राहा की निदेशक सिस्टर एलिजाबेथ ने बताया कि दृष्टि बाधित इन बच्चों में सीखने का जज्बा के साथ उनमें रूचि के साथ ध्यानपूर्वक कठिन अभ्यास करने की लगन है। इसी वजह इन बच्चों ने अपने जीवन से अधंकार को हटाने सफलता हासिल की है।
             
जीने का जज्बे से छंट गया अंधेरा
                            छलके खुशी के आंसू
  महिला मंडल की सदस्यों ने दृष्टिबाधित इन बच्चों को दीपावली के अवसर पर नए कपड़े, मिठाई और खिलौने भेंट किए तब सभी बच्चों ने हंसते हुए एक साथ थैक्स आंटी कहा तो वहंा उपस्थित अन्य लोगों की आंखों में भी आंसू निकल पड़े थे। महिला मंडल की सह सचिव श्रीमती अर्चना अग्रवाल का कहना था कि दृष्टिबाधित इन बचचों ने अपनी लगन और मेहनत से ईश्वर के कोप को भी निरर्थक बना दिया है। उन्होने कहा कि ऐसे बच्चों की खुशियों से ही त्योहार की सच्ची खुशी मिलती है। इस अवसर पर वरिष्ठ पत्रकार रमेश शर्मा, जिला कांग्रेस अध्यक्ष पवन अग्रवाल, सिविल अस्पताल के बीएमओ डा.जेम्स मिंज, सेंट जेवियर स्कूल के प्राचार्य फादर पंखरासियुस सहित अनेक लोग उपस्थित थे।


गुरुवार, 7 अगस्त 2014

प्यार के संदेश की पूरी सुरक्षा



   सात समंदर पार पहुंचेगी रेशम की डोर
  रमेश शर्मा /पत्थलगांव /
       बारिश के बाद भी बहनों व्दारा भेजा गया आत्मीय और पवित्र रिश्ते का संदेश को भाइयों के पास पूरी हिफाजत के साथ पहुंचाने के लिए इस वर्ष डाक विभाग ने राखियों के लिए विशेष लिफाफों का इंतजाम किया है। प्लास्टिक कोटेड होने के कारण डाक विभाग का राखी के लिए विशेष लिफाफा बरसात के दिनों में पानी से भीगने का कोई डर नहीं है।
   यहां के डाक घर में राखी के लिए पहंचे इन विशेष लिफाफे को बहनों व्दारा काफी पसंद किया जा रहा है। यहां की रजनी दुबे ने बताया कि वह प्रति वर्ष अपने भाई के पास आस्ट्रेलिया में राखी भेजती है। रजनी का कहना था कि वह इस बात का ध्यान रखती है कि उसका भेजा हुआ प्यार का संदेश भाई के हाथों में समय पर पहुंच जाए। इस बार यहां डाक विभाग के प्लास्टिक कोटेड लिफाफे से उसकी बरसात में पानी से बचाने की चिंता कम हो गई है। यहां डाक विभाग के सूत्रों के अनुसार राखी के अवसर पर कई बहनों व्दारा सरहद में तैनात अपने भाइयों के पास राखी भेजी जाती है। इसके अलावा चेन्नई, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा तथा राजस्थान के दूरस्थ क्षेत्र में यहां से राखियां पोस्ट की जाती हैं। ऐसे लोगों के लिए डाक विभाग के विशेष लिफाफे काफी कारगर साबित हो रहे हैं। यहां अम्बेडकर नगर में रहने वाले सारांश अग्रवाल का कहना था कि उसकी बहन प्रीति उसे प्रति वर्ष कनाडा से राखी भेजती है। उसे बहन की राखी का बेसब्री से इंतजार रहता है।
                 पवित्र रिश्‍ते की मध्यस्थता गर्व की बात
     यहां उप डाक पाल श्रीमती रजनी तिग्गा का कहना था कि हमारे लिए यह गर्व की बात है कि इस पवित्र रिश्ते की मध्यस्थता हमारा विभाग करता है। बहनों व्दारा भेजा गया प्यार का संदेश के लिफाफों को सुरक्षित व सतर्कता से भेजने के पूरे प्रयास किए जाते हैं। इसी कड़ी में यहां अत्याधुनिक व आकर्षक राखी के लिफाफे उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होने बताया कि राखी के विशेष लिफाफे की कीमत मात्र 7.50 रू. है। इन लिफाफों में बरसात के बावजूद आत्मीय और पवित्र रिश्ते का संदेश के साथ इसमें रेशम की डोर सुरक्षित पहुंच रही है।  

बुधवार, 6 अगस्त 2014

जीर्णोद्धार की बाट जोहता मुक्तिधाम


सीसी रोड़ का घटिया निर्माण के चलते
 सड़क पर भी उग गई घास
 संकल्प लेने वाले भूल जाते हैं वायदा

    अव्यवस्था से होती है परेशानी

 रमेश शर्मा /पत्थलगांव

         शहर में दानदाता और समाज सेवियों की लम्बी कतार के बाद भी यहां का मुक्तिधाम की बदहाली सुधारने की कोई पहल नहीं हो रही है। अपने प्रियजनों का अंतिम संस्कार के वक्त यहां पहुंच कर अक्सर मुक्तिधाम का कायाकल्प करने का संकल्प तो लिया जाता है, लेकिन इस परिसर से बाहर निकलते ही लोग अपने वादे को भुलकर व्यवसाय तथा अन्य गैर जरूरी कार्यो में उलझ जाते हैं।
               दो वर्ष पहले यहां अन्तरराष्ट्रीय समाज सेवी संस्था ने मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार करने का बीड़ा उठाया था, लेकिन मुक्तिधाम में दरवाजा लगाने के बाद इस संस्था के पदाधिकारियों ने भी अपने हाथ खींच लिए हैं। शहर का मुक्तिधाम पर चोरों की नजर पड़ जाने के बाद यहां अंतिम संस्कार करने वाले लोहे के गटर काट कर गायब कर दिए गए हैं। बताया जाता है कि आस पास कबाड़ का व्यवसाय करने वाले यहां का लोहा ,दरवाजे तथा अन्य सामान खरीद लेने से मुक्तिधाम में अक्सर चोरो का डेरा लगा रहता है। यहां शव दाह स्थल से चोरों ने कई बार लोहे के मोटे गटर काट कर गायब कर देने से बरसात के दिनों में अंतिम संस्कार करने वालों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। मुक्तिधाम परिसर में चारों ओर घांस और गंदगी का साम्राज्य बन जाने से यहां मृतक का अंतिम संस्कार की प्रक्रिया भी बेहद कठिन काम हो गया है। इस परिसर में पानी की खाली बोतल और अन्य कचरे का ढ़ेर से लोगों को दो घड़ी बैठ कर श्रध्दाजंलि देने के लिए भी जगह नहीं मिल पाती है।
यहां बने नवनिर्मित भवन के दरवाजे भी गायब
         नगर पंचायत ने इस परिसर में सीसी रोड़ बनवाने की पहल की थी लेकिन ठेकेदारी प्रथा का भ्रष्टाचार यहां भी अछूता नहीं रहा। सीसी रोड का निर्माण कार्य में गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देने से इस सड़क पर बरसात के बाद जगह जगह घास उग गई है। सीसी रोड का बेहद घटिया कार्य को लेकर लोग अक्सर यहां चर्चा करने लग जाते हैं। लेकिन सीसी रोड़ का निर्माण में भ्रष्टाचार करने वाले ठेकेदार के प्रति लोगों का आक्रोश चाय के उबाल की तरह रहता है। यहां मुक्तिधाम परिसर में बनाई गई सीसी सड़क अब जर्जर हालत में जा पहुंची है। मुक्तिधाम परिसर में ही पोस्ट मार्टम भवन के दरवाजे और खिड़कियों को भी चोरो ने निकाल कर इस भवन को बदनुमा बना दिया है। इसका सुधार कराने के बजाए नगर पंचायत ने मुक्तिधाम परिसर में बगैर जरूरत के फिर से लाखों रूपयों की लागत से नया भवन निर्माण कार्य का ठेका दे दिया गया है। इस निर्माण कार्य की देख रेख नहीं होने से इस नए भवन की गुणवत्ता पर सवालिया निशान लग गया है।
    यहां पर अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों के सामने घास,कूड़ा से जीव जन्तु निकल कर सामने आ जाने से अक्सर जान के लाले पड़ जाते हैं। ऐसे वक्त यहां पर हर बार की तरह इस स्थल का कायाकल्प करने का संकल्प तो लेते हैं, लेकिन मुक्तिधाम से बाहर निकलते ही अपना वायदा को भूल जाते हैं।   
              मिलजुल कर दें जिम्मेदारी
   यहां के प्रमुख व्यवसायी श्रवण अग्रवाल का कहना है कि शहर में जनहित के कार्य कराने के लिए यहां दानदाताओं की कमी नहीं है। ऐसे कार्यो के लिए आपस में मिलजुल कर जिम्मेदारी बांटनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मुक्तिधाम का कायाकल्प करने के लिए रोटरी क्लब के डिस्ट्रीक्ट गवर्नर सहित यहां दानदाता रामअवतार अग्रवाल, अनिल मित्तल, सुशील रामदास ने लाखों रू.उपलब्ध कराए हैं। उन्हांेने कहा कि समाजसेवियों में दृढ इच्छाशक्ति के अभाव के चलते मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार आज भी अधूरा पड़ा है।                   
 मुक्तिधाम परिसर में चारों ओर उग गई घास       
रोटरी क्लब करेगा पुनः पहल
     रोटरी क्लब के पूर्व अध्यक्ष महेन्द्र अग्रवाल पेटू ने बताया कि संस्था की ओर से इस मुक्तिधाम का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया था लेकिन संस्था के अन्य पदाधिकारियों का सहयोग नही मिल पाने से उनका सपना अधूरा रह गया। यहां मुख्य द्वार लगाने के बाद इस परिसर में छायादार वृक्षारोपण, विद्युत व्यवस्था की योजना आज भी अधूरी पड़ी है। श्री अग्रवाल का कहना था कि यहां पर साफ सफाई का अभाव और प्रकाश व्यवस्था का अभाव के चलते बरसात के दिनों में मुष्किलें और बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि मुक्तिधाम का जीर्णोद्धार के लिए शहर के समाजसेवी व दानदाताओं की मदद से एक बार फिर जीर्णोद्धार का प्रयास किया जाएगा ताकि इस महत्वपूर्ण स्थल को बेहतर बनाया जा सके।

बुधवार, 23 जुलाई 2014

खेल खेल में पढ़ाने की पद्धति पर लगा ग्रहण

           एमजीएमएल शिक्षा पद्धति की
 सामग्री हुई अनुपयोगी
 कबाड़ में बदली शिक्षा सामग्री
 रेडियो से अंग्रेजी पढ़ाना भी बंद
  रमेश शर्मा/   पत्थलगांव/  
         प्राथमिक स्कूल के बच्चों को भारी भरकम बस्ते का बोझ से छुटकारा दिलाने के लिए शुरू की गई एमजीएमएल अर्थात खेल खेल में शिक्षा देने की पद्धति अब दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकारी स्कूलों में इस पद्धति के तहत खरीदी गई लाखों रू.की सामग्री अब कचरे के ढ़ेर में बदलने लगी है। इसके पहले प्राथमिक स्कूलों में रेड़ियों के माध्यम से अंग्रेजी पढ़ाने की शुरूवात की गई थी। बगैर सोच विचार के नन्हे बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर बार बार प्रयोग करने से बच्चों पर विपरित असर पड़ रहा है।
      साल भर पहले तक सरकारी स्कूलों में छोटे बच्चों को खेल खेल में पढ़ाई का काम शुरू किया गया था। शिक्षक शिक्षिकाओं व्दारा स्कूली बच्चों को महापुरूष व पशु पक्षी के चित्र तथा गिनती के साथ शिक्षाप्रद बातें सिखाई जाती थी। सरकारी स्कूलों में खेल खेल की पद्धति को सफल बनाने के लिए शासन ने भारी भरकम राशि खर्च की थी। स्कूल के बच्चों को खेल खिलौने की इस सामग्री को व्यवस्थित ढंग से सहेज कर रखने के लिए मंहगी प्लास्टिक की ट्रे के अलावा लकड़ी का फर्नीचर भी उपलब्ध कराया गया था। इस शिक्षा पद्धति के माध्यम से छोटे बच्चों को बेहतर तरीके से समझा कर ज्ञानवर्धन कराने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण देने के नाम पर लाखों रूपयों का खर्च भी किया गया था। लेकिन विडंबना यह है कि अब खेल खेल में पढ़ाने वाली समूची सामग्री  को कमरों में बंद कर वहंा ताला जड़ दिया गया है। इस शिक्षा सामग्री को छोटे बच्चे याद तो करते हैं लेकिन शिक्षक इस पद्धति को अधिकारियों का तुगलकी फरमान बता कर चुप्पी साध लेते हैं।
                  अंग्रेजी शिक्षा के रेडियो भी बेकार
          एमजीएमएल शिक्षा पद्धति की
 सामग्री हुई अनुपयोगी
     शिक्षकों का कहना है कि इसके पहले भी स्कूल में छोटे बच्चों को अंग्रेजी की शिक्षा देने के लिए दोपहर रेडियो के माध्यम से पढ़ाने की व्यवस्था कराई गई थी। सभी स्कूलों में खरीदे गए रेडियो अब कचरे के ढेर में पड़े हैं। शिक्षकों का कहना है छोटे बच्चों की पढ़ाई लिखाई पर बार बार प्रयोग करने से उन पर विपरित असर पड़ रहा है।
    प्राथमिक स्कूल के बच्चों के लिए लागू की गई एमजीएमएल पद्धति को स्कूल के कमरे में बंद कर देने के बाद अब फिर से बच्चों को बस्ता लेकर स्कूल पहुंचना पड़ रहा है। खेल खेल में पढ़ाई के लिए खरीदी गई सामग्री पर धूल की मोटी परत जम चुकी है। ज्यादातर स्कूलों में एमजीएमएल पद्धति की पढ़ाई के लिए आकर्षक साज सज्जा के साथ पेंटिग के नाम पर भी भारी भरकम खर्च किया गया था। इन सब सामग्रियों का अब पढ़ाई में उपयोग नहीं हो पाने से स्कूल के शिक्षकों ने उन कमरों पर ताला जड़ रखा है।
       एमजीएमएल पद्धति से छोटे बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षक शिक्षिकाओं का कहना था कि यह पद्धति जल्द बाजी में तैयार की गई थी। इस पद्धति से बच्चों को पढ़ाने पर उनका मानसिक विकास सही तरिके से नहीं हो पा रहा था। खेल खेल में बताई गई शिक्षा की बातों को बच्चे अगले ही क्षण भूल कर दूसरे सवाल करने लगते थे। खेल खेल की पद्धति में शिक्षकों को अधिक मेहनत करने की वजह से शिक्षकों ने बगैर किसी आदेश के इस शिक्षा व्यवस्था को कमरों में बंद करना शुरू कर दिया था। 
            खेल खेल के बजाए सतत व व्यापक मूल्यांकन
     ब्लॅाक शिक्षा अधिकारी बरसाय पैंकरा ने बताया कि छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए अब सतत एवं व्यापक मूल्याकंन पद्धति शुरू की गई है। इसमें बच्चों की प्रत्येक गतिविधि पर नजर रख कर उसे फार्म में दर्ज करना है। श्री पैंकरा का कहना था कि स्कूलों में रेडियो के माध्यम से अंग्रेजी की पढ़ाई और खेल खेल में पढ़ाई का काम बंद हर दिया गया है।इसके बदले अब स्कूली बच्चों का सतत एवं व्यापक मूल्यांकन की नई शिक्षा पद्धति पर बेहतर क्रियान्वयन कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


सोमवार, 21 जुलाई 2014

सर्पदंश से डरने की जरुरत नहीं

 108 संजीवनी सेवा के स्टॉफ को दिया 
बीएमओ डा.जे मिंज ने दिया 
एनटी स्नेक वेनम उपचार का प्रशिक्षण
  अच्छी पहलः 
   108 संजीवनी सेवा में एनटी स्नेक वेनम भी उपलब्ध
   रमेश शर्मा/पत्थलगांव/
    108 संजीवनी सेवा वाहन में सर्पदंश के मरीजों को बचाने वाली जीवन रक्षक एनटी स्नेक वेनम दवा रखने की पहल ऐसे मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। सर्पदंश के गंभीर मरीजों को अस्पताल लाने से पहले एनटी स्नेक वेनम का उपचार मिल जाने से ऐसे मरीजों को बचाने में चिकित्सकों को भी मदद मिलने लगी है। बीते सप्ताह दूरस्थ गांव काडरो और बालाझर के दो अलग अलग सर्पदंश पीड़ित मरीजों को त्वरित एनटी स्नेक वेनम लग जाने से दोनो मरीजों को उपचार के बाद बचा लिया गया।
    कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता ने पिछले दिनो यहां सिविल अस्पताल का औचक निरीक्षण के बाद यहां सर्पदंश के अधिक प्रकरण देखने के बाद 108 संजीवनी सेवा वाहन में सर्पदंश की पर्याप्त मात्रा में दवा रखने के निर्देश दिए थे। श्री गुप्ता की इस पहल से ग्रामीण अचंल के लोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर प्रसन्नता व्यक्त की है। ग्राम काडरो के अगरसाय को करैत नाम जहरीले सर्प के डस लेने के बाद उसके परिजनों ने 108 संजीवनी सेवा को मदद के लिए बुलाया था। इस वाहन के गांव में पहुंचने के बाद सर्प दंश पीड़ित मरीज की गंभीर हालत को देख कर संजीवनी सेवा के कर्मचारियों ने उसे मौके पर ही एनटी स्नेक वेनम देकर उसका उपचार प्रारम्भ कर देने के बाद इस मरीज को सिविल अस्पताल में भर्ति कराया गया था। यहां पर सर्पदंश के मरीज का उपचार कर उसे बचाने में कामयाबी मिली है। इसके पहले सर्पदंश के मरीजों को सिविल अस्पताल में भर्ती कराने के बाद ही एनटी स्नेक वेनम मुहैया हो पाती थी।इस अचंल में सर्पदंश पीड़ित मरीजों को नीयत समय के भीतर एनटी स्नेक वेनम का उपचार मिल जाने से ज्यादातर मरीजों को बचाने में सफलता मिली है। लेकिन कई बार मरीजों को झाड़ फूंक कराने के चक्कर में उसे अस्पताल तक पहुंचाने में विलंब कर देने से उस मरीज के बच पाने की संभावना कम हुई हैं। 
               जागरूकता से मौतों में आई कमी
यहां मेडिसन विशेषज्ञ डा.पी.सुथार का कहना है कि सर्पदंश के मामलों में अब ग्रामीण अचंल के लोगों में काफी जागरूकता आई है। यहां पर सर्पदंश की घटना के बाद सिविल अस्पताल में मरीज के बच जाने से गांव के लोग अब झाड़ फूंक के चक्कर में नहीं रहते हैं। उन्होने कहा कि ऐसे मरीजों को बगैर समय गवांए अस्पताल में भर्ति करा देने से ऐसे मरीजों को असमय मौत की गोद में जाने से बचा लिया जा रहा है। कलेक्टर हिमशिखर गुप्ता की पहल के बाद अब सर्पदंश के मरीज को उनके गांव में ही प्रारम्भिक उपचार मिल जाने से अनेक गंभीर मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलेगा ।
           संजीवनी सेवा के स्टॅाफ को दिया सर्पदंश उपचार का प्रशिक्षण
    बीएमओ डा.जे मिंज ने बताया कि यहां 108 संजीवनी सेवा में पदस्थ महिला मेडिकल टेक्निश्यिन संगीता गुप्ता और पुरूष मेडिकल टेक्निशयन चंड़ामणी सिंग को एनटी स्नेक वेनम का उपयोग करने का समुचित प्रशिक्षण दे दिया गया है। इनके अलावा वाहन चालक अमित टोप्पो भी स्वास्थ्य सेवाओं का प्रशिक्षित होने से गम्भीर मरीजों को इनका लाभ मिल रहा है। डा.मिंज ने बताया कि सर्पदंश के मरीजों को आपात सेवा का लाभ देने के लिए 108 संजीवनी वाहन में 10 नग एनटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराए गए हैं। इस दवा का उपयोग करने के बाद उन्हे पर्याप्त मात्रा में पुनः एनटी स्नेक वेनम उपलब्ध कराई जा रही है। डा.मिंज ने कहा कि बरसात के दिनों में इस अचंल में सर्पदंश की अधिक घटनाओं को देखते हुए यहां सिविल अस्पताल में सर्पदंश से पीड़ित मरीजों की संख्या में खासी वृध्दि हो जाती है।
                    सर्पदंश के बाद बचाए गए 27 मरीज
      यहां सिविल अस्पताल में इस वर्ष सर्पदंश की घटना के बाद 27 मरीजों को उपचार के बाद उन्हे मौत के चंगुल से बचाने में स्वास्थ्य अमला को सफलता मिली है। बीएमओ  डा. मिंज ने बताया कि यहां पर मार्च महिने में 2 मरीज, मई महिने में 9 मरीज, जून महिने में 14 मरीज  तथा जूलाई माह मे ं2 मरीजों को उपचार के बाद बचा लिया गया है। डा.मिंज का कहना था कि 108 संजीवनी वाहन में मरीजों को तत्काल उपचार की यह व्यवस्था काफी कारगर साबित हुई है। उन्होने कहा कि दूर दराज के गांवों में रहने वाले लोगों को सर्पदंश की घटना के बाद उनके घर पर ही जीवन रक्षक दवा से उपचार प्रारंभ हो जाने से गंभीर मरीजों को नया जीवन देने में आसानी को सकती है।