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मंगलवार, 13 अगस्त 2013

बारिश से धुली आलू की फसल



आलू रोपण की तैयारी में ग्राम कामारिमा का किसान
पत्थलगांव/    रमेश शर्मा
   जशपुर जिले में पण्डरापाठ क्षेत्र में लगातार एक पखवाड़े से हो रही बारिश के चलते आलू की पैदावार लेने वाले किसानों की परेशानी बढ़ गई है। यहाँ बारिश के चलते दो दर्जन से अधिक गांव के किसान अपने खेतों में आलू की बोआई का काम शुरू नहीं कर पाए हैं। इन किसानों के घरों में रखा हुआ आलू बीज भी अब खराब होने के कगार में पहुंच गया है। किसानों का कहना है कि इस बार बाजार में देरी से आलू की फसल पहुंचने के कारण अच्छी कीमत मिलने की सम्भावना नहीं है।
     पण्डारापाठ क्षेत्र में आलू की पैदावार के लिए अनुकूल जलवायु होने के कारण यहाँ बम्फर पैदावार होती है। इसी वजह उत्‍तर प्रदेश के आलू व्यवसायियों व्दारा यहाँ पर आलू बीज के माध्यम से लगभग दो करोड़ से अधिक का दांव लगाया जाता है। उद्यान विभाग के सूत्रों का कहना है कि पण्डरापाठ क्षेत्र में 1 हजार हेक्टेयर भूमि पर आलू की पैदावार ली जाती है। पर स्थानीय लोगों का कहना था कि यहाँ पर 2 से 3 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल ली जाती है। जुलाई माह के दूसरे सप्ताह में आलू की रोपाई के बाद इन दिनो आलू की फसल पर मांदा चढ़ाने का काम पूरा कर लिया जाता है। पर इस बार मौसम का साथ नहीं मिल पाने से पण्डरापाठ क्षेत्र के किसान अपने खेतों में आलू बीज रोपण का काम भी शुरू नहीं कर पाए हैं। गायबुड़ा के किसान मोहन यादव ने बताया कि पिछले 20 दिनों से रिमझिम बरसात के चलते यहाँ पर आलू रोपण की तैयारी के बाद भी काम नहीं हो पा रहा है। इस किसान का कहना था कि कुछ गांवों में किसानों ने जल्द आलू की फसल रोपण कर ली थी। अब केवल ऐसे ही किसानों को आलू की फसल का लाभ मिल पाएगा। पण्डरापाठ क्षेत्र में आलू की अच्छी पैदावार के मददेनजर यहाँ पर उत्‍तर प्रदेश के आलू व्यापारियों ने काफी मात्रा में आलू बीज का भंडारण करा दिया था। किसानों का कहना है कि यहाँ एक पखवाड़ा पहले लाकर रखा गया आलू बीजों की गुणवत्‍ता में कमी आसकती है।
      ग्राम भड़िया, देवडाढ़ ,कामारिमा, सुलेशा, सन्ना क्षेत्र के अनेक गांव के किसान आज भी आलू के बीज रोपण के लिए मौसम खुलने का इंतजार कर रहे हैं। ग्राम कामारिमा में रहने वाला मंगला कोरवा का कहना था कि उसने आलू की खेती के लिए बगीचा के साहुकार से कर्ज लिया है।पर अब आलू रोपण का काम नहीं हो पाने से उसकी चिंता बढ़ने लगी है। पण्डरापाठ क्षेत्र में मंगला कोरवा की तरह सैकड़ों किसान साहूकारों से कर्ज लेकर आलू की खेती करते हैं। बाद में ये किसान अपनी फसल बेच कर साहूकार का कर्ज अदा करते हैं।
                लगातार बारिश से बीज रोपण में देरी
      बगीचा के उद्यान अधीक्षक सी आर चैहान ने बताया कि इस क्षेत्र में एक पखवाड़े से लगातार हो रही बारिश के चलते आलू की पैदावार लेने वाले किसानों पर विपरित असर पड़ा है। मौसम नहीं खुल पाने से यहाँ पर 50 प्रतिशत किसान आलू बीज रोपण का काम में पिछड़ गए हैं। उन्होने बताया कि इस अंचल में थोडे़ से ही किसानों ने समय पर आलू की खेती का काम पूरा किया है! शेष किसान यहाँ पर बारिश के थमने का इंतजार कर रहे हैं। उन्होने बताया कि यहाँ पर किसानों को कम समय में तैयार होने वाली आलू की फसल लेने की सलाह दी जा रही है।
    

सोमवार, 12 अगस्त 2013

अधिकारियों की लापरवाही किसानों पर पड़ी भारी

पत्थलगाँव /  रमेश शर्मा
  अखबारों में प्रकाशित विज्ञापनों की कटिंग एकत्रित नहीं हो पाने से घरजियाबथान जलाषय की नहरों के लिए भूमि अधिग्रहण के बाद प्रभावित किसानों को मुआवजा देने की कार्रवाई अधर में लटक गई है।
     लगभग 17 करोड़ रुपयों की लागत से बनने वाला घरजियाबथान जलाषय की नहरों का निर्माण कराने के लिए जल संसाधन विभाग ने  चार साल पहले ग्राम बेलडेगी, घरजियाबथान , हिरापुर, सूरजगढ़, डूमरबहार  के 150 से अधिक किसानों की भूमि का अधिग्रहण किया था। इस महत्वपूर्ण जलाषय में एक्वाडेक्ट का निर्माण नहीं हो पाने से इन नहरों में आज तक पानी नहीं छोड़ा गया हैं।
    घरजियाबथान जलाषय से 2100 हेक्टेयर क्षेत्र में दोहरी फसल का लाभ मिलने की सुविधा को देखते हुए यहां के किसानों ने भूमि का मुआवजा मिले बगैर ही जल संसाधन विभाग को नहर निर्माण करने की सहमति दे दी थी। पर अब इन किसानों को न तो अपनी भूमि का मुआवजा मिल पा रहा है और न ही उनके खेतों में सिचांई के लिए पानी पहुंच पाया हैं । जल संसाधन विभाग के अधिकारियों पर भरोसा करने के बाद अब सैकड़ों किसान हर सप्ताह पत्थलगांव जल संसाधन कार्यालय के चक्कर लगा रहे हैं। वर्ष 2008, 09 में घरजियाबथान जलाषय योजना का काम शुरू कर के जल संसाधन विभाग ने प्रभावित किसानो को डूबान भूमि का मुआवजा दिलाने के लिए धारा 4 के तहत सूचना प्रकाषित कराई थी। डूबान में प्रभावित किसानों के नाम की सूचना प्रकाषन करने के बाद अगली कड़ी में विभाग व्दारा भूमि का रकबा और खसरा की विस्तृत जानकारी को पुनः धारा 6 के तहत सूचना का प्रकाषन कराना था। जल संसाधन अनुविभागीय अधिकारी सुनिल धमिजा ने बताया कि घरजियाबथान जलाषय योजना में नहरों का मुआवजा के लिए घारा 4 की सूचना प्रकाषन होने के बाद अखबारों की पेपर कटिंग एकत्रित नहीं हो पाने से आगे की कार्रवाई ठहर गई है। उन्होने बताया कि घरजियाबथान जलाषय की नहरों से संबधित अखबार में प्रकाषित विज्ञापन को एकत्रित करके अब धारा 6 का प्रकाषन की तैयारी शुरू की गई है।
     घरजियाबथान के किसान डेमूराम यादव ने बताया कि किसानों की परेषानी को लेकर जल संसाधन विभाग के अधिकारी आज भी गम्भीर नहीं हैं। उन्होने बताया कि विभाग के अधिकारी किसानों का मुआवजा की बात पर उन्हे भ्रम में डाले हुए हैं।यहंा बेलडेगी के किसान सबल साय ने बताया कि नहरों का मुआवजा के लिए वे एक साल स ेजल संसाधन अधिकारियों के पास चक्कर लगा रहे हैं पर उनकी परेषानी को लेकर किसी को भी चिन्ता नहीं हैं। घरजियाबथान जलाषय योजना की बेलडेगी क्षेत्र में बनाई गई नहरो का काम पूरा हो जाने के बाद भी किसान यहां पानी का इंतजार कर रहे हैं।

शनिवार, 10 अगस्त 2013

सरकारी स्कूलों में अभी भी कीड़ेयुक्त भोजन



ग्राम ईला स्कूल के प्रधान
पाठक के साथ पूरे स्कूल के 10 विद्यार्थी
 पत्थलगांव/ रमेश शर्मा
 जशपुर जिले के सरकारी स्कूलों में व्याप्त अव्यवस्था के चलते ज्यादातर स्कूलों में डेढ़ माह के बाद भी पढ़ाई का वातावरण नहीं बन पाया है। कुछ स्कूलों में षिक्षकों की अनुपस्थिति के चलते भी विद्यार्थियों की दर्ज संख्या पर भी विपरित असर पड़ रहा है।गांव के अभिभावकों का कहना है कि षिक्षा अधिकारियों व्दारा स्कूलों का आकस्मिक निरीक्षण के नाम पर केवल औपचारिकता की जाती है। इस वजह षिक्षकों में दंडात्मक कार्रवाई का भय समाप्त हो गया है। यहाँ ग्रामीण अचंल के स्कूलों में प्रधान पाठकों को मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए बार बार चेतावनी देने के बाद भी ज्यादातर स्कूलों में बेहद घटिया खाद्य सामग्री का उपयोग किया जा रहा है।
  यहाँ से 8 कि.मी.दूर ग्राम ईला का प्राथमिक स्कूल में बुधवार को मात्र 10 विद्यार्थी ही उपस्थित थे। यहंा के प्रधान पाठक वासुदेव सिंह सिदार ने बताया कि उनके स्कूल में कुल 15 विद्यार्थियों की ही दर्ज संख्या है। विडंबना की बात यह है कि ग्राम ईला का सरकारी प्राथमिक स्कूल की कक्षा पांचवी में एक भी छात्र नहीं है। स्कूल में विद्यार्थियों की बेहद कम दर्ज संख्या होने के कारण सभी छात्रों को एक ही कमरे में बैठा दिया जाता है। इस स्कूल के दो षिक्षकों में से जयराम बंजारा की अनुपस्थिति के संबंध में प्रधान पाठक का कहना था कि उन्हे प्रषिक्षण के लिए संकुल केन्द्र में बुलाया गया है।
स्कूल अव्यवस्था की ग्रामीणों ने भी की पड़ताल
  घटिया मध्यान भोजन देख कर
 भड़के गांव के अभिभावक 
   बुधवार को इस स्कूल में पदस्थ स्वीपर भी अनुपस्थित था। बाद में प्रधान पाठक ने स्कूली बच्चों को भेज कर स्वीपर को बुला लिया गया था इस स्कूल में मध्यान्ह भोजन की सबसे अधिक दयनीय स्थिति देखने को मिली । मंहंगाई के कारण स्कूली बच्चों को हरी सब्जी नहीं दी जा रही है। ईला स्कूल की पड़ताल के दौरान यहंा कार्यरत महिला रसोइया से जब आज की सब्जी दिखाने को कहा तो कीड़ेयुक्त मटर दिखाई गई। एक बर्तन में रखी गई इस मटर को स्कूल के समीप रहने वाले विद्याधर यादव एवं घनश्‍याम यादव ने अवलोकन किया तो इन ग्रामीणों का कहना था कि ऐसी मटर को मवेषी भी खाना पसंद नहीं करेंगे। स्कूल की अव्यवस्था देखने के लिए ग्रामीणों की भीड़ इकटठा हो जाने के बाद यहाँ के प्रधान पाठक वासुदेव सिंह सिदार ने भविष्य में इस तरह की गलती नहीं करने का आष्वासन देकर क्षमा याचना की है। सरकारी स्कूलों की पड़ताल के दौरान किलकिला प्राथमिक षाला में भी इसी तरह की अव्यवस्था देखने को मिली। यहां पदस्थ षिक्षिका अंजना लकड़ा को राजनैतिक दबाव के कारण शहर के समीप के स्कूल में संलग्न कर देने से इस स्कूल में भी विद्यार्थियों की उपस्थिति पर विपरित प्रभाव पड़ा है।
 राजनैतिक प्रभाव से शिक्षकों का अटैचमैंट
  किलकिला स्कूल की कक्षा 5 में मात्र 3 विद्यार्थी उपस्थित
   किलकिला प्राथमिक स्कूल में बुधवार को 62 विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के विरुद्ध मात्र 20 विद्यार्थी उपस्थित पाए गए। इस स्कूल की ि‍शक्षिका बीना खेस ने बताया कि प्रधान पाठक श्रीमती बलमदीना लकड़ा ने दो दिन के लिए अवकाश लिया था। पर वे बुधवार को भी बगैर छुटटी के पाठषाला में अनुस्थित हैं। इस स्कूल में भी कक्षा पांचवी के विद्यार्थियों की उपस्थिति चिंताजनक देखने को मिली। यहां के षिक्षक रत्नाकर खुंटिया नेबताया कि 14 विद्यार्थियों की दर्ज संख्या के के मुकाबले मात्र तीन विद्यार्थी ही उपस्थित हैं। किलकिला प्राथमिक शाला में स्कूल भवन की जर्जर हालत के चलते भवन में जगह जगह पानी टपक रहा है। यहां की अव्यवस्था के बारे में कई बार संबधित अधिकारियों को पत्र लिखा जा चुका है। पर अभी तक स्कूल की अव्यवस्था में सुधार नहीं किया जा सका है।




शुक्रवार, 9 अगस्त 2013

बारिश में नहाकर रजपुरी और हुआ मोहक

हरियाली और फॉल का नजारा  
रजपुरी जलप्रपात में दुर्ग रायपुर के पर्यटक
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा
    जषपुर जिले में पंडरापाठ की तराई  स्थित रजपुरी जल प्रपात में काफी उंचाई से गिरने वाली जल की तेज धारा के साथ आस पास की पहाड़ियों में वनों से आच्छादित हरियाली दूर दूर के पर्यटकों के आकर्षण का केन्द्र बन गई है।  बगीचा पहुंचने के बाद दूर दूर तक दिखने वाली खेतों की हरियाली और उंचे पर्वतों में सुरम्य वनों से आच्छादित यहंा की हसीन वादियों को देखने के बाद बाहर से आने वाले पर्यटकों को अमरकंटक के कपिल धारा की याद आ जाती है।
    एक पखवाड़े से लगातार हो रही रिमझिम और तेज बारिष से बगीचा के समीप रजपुरी जलप्रपात का सौंदर्य बढ़ गया है।पण्डरापाठ की उंची नीची पहाड़ियों से बह कर आने वाला बरसात का पानी घुघरी नदी में आकर मिलने के बाद रजपुरी जलप्रपात की धार तेज हो गई है।बारिश के मौसम में बगीचा के चारों ओर हरियाली के साथ पषु ,पक्षियों का कलरवों के बीच रजपुरी डरने का सौंदर्य में कई गुना इजाफा हो गया है।पहाड़ की उचंाई से गिरने वाला इस झरना को देखने के लिए इन दिनों दूर दूर के पर्यटक रजपुरी पहुंच रहे हैं।
       रजपुरी की सुन्दरता में खो जाते हैं पर्यटक
 बगीचा मुख्यालय के समीप इस पर्यटक स्थल तक पक्का सड़क मार्ग होने के कारण बाहर से आने वाले लोगों को थकान का अहसास नहीं होता है।रजपुरी पहुंचने के बाद इस खूबसूरत व प्रसिध्द प्राकृतिक पर्यटन स्थल को देखने वाले यहंा की सुन्दरता में ही खो जाते हैं। यहंा दुर्ग के संजय चैबे ने बताया कि उन्हे बगीचा क्षेत्र का सुखद वातावरण देख कर अमरकंटक की कपिल धारा की याद ताजा हो गई। श्री चौबे के साथ रायगढ़ से पहुंचे महेश शर्मा ने भी बगीचा का रजपुरी जलप्रपात को बेहतर और रमणीक पर्यटन स्थल बताया है।महेष शर्मा का कहना था कि यहंा की सुखद जलवायु तथा पहाड़ों के साथ चारों तरफ फैली हरियाली को विकसित करने के लिए ठोस उपाय किए जाने चाहिए।यहंा पहुंचने वाले पर्यटकों का कहना था कि बगीचा क्षेत्र के अन्य पर्यटन स्थलों को विकसित करके यहंा होटल तथा अन्य सुविधा मुहैया करानी चाहिए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार मिलने के साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ेगा।
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सोमवार, 5 अगस्त 2013

नलों से बँटती बीमारियॉं

किलकिला के फिल्‍टर प्‍लांट का एसडीएम ने किया औचक निरीक्षण्‍ा


           पत्थलगांव/
       जशपुर जिले के पत्थलगांव में नल जल योजना से मटमैला पानी की आपूर्ति होने से घर घर में मौसमी बीमारी ने पैर पसार दिए हैं। नगर पचंायत की उदासीनता के चलते शहर के सभी 15 वार्डो में पेट दर्द, बुखार तथा अन्य बीमारियों के मरीजों को बेवजह महँगा इलाज कराना पड़ रहा है।नगर पचंायत के प्रभारी सीएमओं नारायण प्रसाद सिंह की इस लापरवाही को लेकर नागरिकों के साथ पार्षदों में भी आक्रोष व्याप्त है।यहंा के भाजपा औ कांग्रेस के पार्षदों ने नगर पंचायत के सीएमओ की निष्यक्रियता के मामले में मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की विकास यात्रा में पूरजोर विरोध करने की चेतावनी दी है।
     शहर में नगर पंचायत व्दारा मटमैले पानी की लगातार आपूर्ति होने की षिकायतों के बाद एसडीएम रामानंदन सिंह ने किलकिला स्थित फिल्टर प्लांट का औचक निरीक्षण किया। यहाँ पर मांड नदी का तट पर विद्युत पंप को रस्सियों से बाँधकर रखा गया है। फिल्टर प्लांट में मटमैले पानी को साफ करने के लिए पर्याप्त मात्रा में केमिकल का उपयोग नहीं करने तथा जल स्रोत के आसपास स्वच्छता का अभाव देखा गया।जल आपूर्ति के महत्वपूर्ण काम में जगह जगह लापरवाही का आलम देख कर एसडीएम ने चिंता व्यक्त की है।
      श्री सिंह ने लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के उप अभियंता सीबी सिंह के साथ किलकिला जल संग्रहण केन्द्र और फिल्टर प्लांट का बारीकी से निरीक्षण किया। शहर की जल प्रदाय योजना के काम की देख रेख को गम्भीरता से नहीं करने पर नगर पंचायत के प्रभारी सीएमओ नारायण सिंह को कड़े निर्देष दिए गए हैं। श्री सिंह ने कहा कि नल जल योजना का फिल्टर प्लांट को मजदूरों के भरोसे नहीं छोड़ना चाहिए। एसडीएम का औचक निरीक्षण के दौरान मांड नदी से विद्युत पंप के माध्यम से पानी निकालने तथा पानी को स्वच्छ करने का काम के लिए यहंा कोई भी तकनीकी जानकार नहीं मिला। मांड नदी के तट पर लगाया गया विद्युत पम्प को रस्सियों से बांध कर रखा गया है। इससे कभी भी बड़ी दुर्धटना होने का अंदेषा बना रहता है।
     फिल्टर प्लांट की देख रेख करने वाले दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों व्दारा ही नदी का मटमैले पानी को एकत्रित करने के बाद साफ किया जाता है। नल जल योजना का किलकिला स्थित फिल्टर प्लांट के आस पास गंदगी का ढे़र देख कर श्री सिंह ने यहंा साफ सफाई के कड़े निर्देश दिए। पानी साफ करने वाले टैंक में मिटटी और काई जम जाने के बाद कई दिनों से इसकी सफाई नहीं की गई थी। यहंा फिल्टर प्लांट परिसर में नगर पंचायत व्दारा पानी साफ करने वाला कालातित ब्लिचिंग पाउडर का ढेर जमा किया गया था। सीएमओ ने बताया कि पानी साफ करने के काम में कालातीत ब्लिचिंग पाउडर का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। पर इसी ढेर के साथ नया पाउडर की बोरियों को भी रखा गया था। श्री सिंह ने यहाँ की अव्यवस्था देख कर काफी अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जल प्रदाय योजना का महत्वपूर्ण काम में जगह जगह लापरवाही बरती जा रही है।श्री सिंह ने नगर पचंायत के प्रभारी सीएमओ को नल जल व्यवस्था को दो दिनों के भीतर ठीक करके नागरिकों को स्वच्छ जल आपूर्ति करने के कड़े निर्देष दिए हैं।
            प्रभारी सीएमओ के चलते अव्यवस्था का आलम
    नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती स्नेहलता शर्मा ने बताया कि शहर में नल योजना की पाइप लाइन कई जगह से टूट जाने की षिकायतों के संबंध में प्रभारी सीएमओ को अवगत कराने के बाद भी इस दिषा में सुधार नहीं किया जा रहा है। उन्होने बताया कि कई जगह पाइप लाईन टूट जाने के कारण बरसात का पानी के साथ अन्य गंदगी भी पाइप में प्रवेष कर रही है। इसी वजह शहर में लगातार मटमैले पानी आपूर्ति की षिकायतें मिल रही है। श्रीमती शर्मा ने बताया कि नल जल योजना से मटमैले पानी की आपूर्ति होने से ही कई मुहल्लों में जल जनित बीमारियां बढ़ रही हैं।उन्होंने बताया कि शहर में व्याप्त गंदगी तथा अन्य अव्यवस्था के कारण ही उन्हे नागरिकों के कोप भाजन का षिकार होना पड़ रहा है।
     यहाँ के वरिष्ठ पार्षद वेदप्रकाष मिश्रा का भी कहना था कि नगर पंचायत के प्रभारी सीएमओ के चलते ही पूरे शहर में अव्यवस्था का आलम बना हुआ है।श्री मिश्रा ने कहा कि यहंा विभिन्न मुहल्लों में साफ सफाई नहीं होने से नागरिकों को काफी परेषानी का सामना करना पड़ रहा है। यहंा सार्वजनिक कुओं तथा हेंडपंप में ब्लिचिंग पाउडर डालने के बजाए इसे फिल्टर प्लांट में रख कर बर्बाद किया जा रहा है। उन्होने कहा कि प्रभारी सीएमओ की लापरवाही से ही नगर पचंायत क्षेत्र के नागरिकों को उनकी मूलभुत सुविधाओं का भी टोटा हो गया है।नगर पचंायत के ज्यादातर पार्षदों ने प्रभारी सीएमओ के विरोध में मोर्चा खोल दिया है।नगर पंचायत के पार्षदों ने बताया कि मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की विकास यात्रा के दौरान उन्हे प्रभारी सीएमओं के कारनामों के पुष्ट प्रमाण के साथ लिखित षिकायत की जाएगी।

 ,मांड नदी का पानी निकालने के लिए रस्सी से बंधा हुआ विद्युत पंप, फिल्टर प्लांट में सफाई के बाद भी मटमैला पानी, जलस्रोत के आस पास गंदगी का ढेर  

   

शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

वैदिक शिक्षा ग्रहण करेंगी पत्थलगाँव की बेटियाँ

पत्थलगांव / 
                वैदिक शिक्षा की चाहत रखने वाली नौ नन्ही बालिकाऐं राजस्थान के श्री गंगानगर स्थित फतूही कन्या गुरुकुल वैदिक आश्रम में रह कर शास्त्री तक विद्या अध्ययन करेंगी। ग्रामीण अंचल में रहने वाली इन बालिकाओं की वैदिक शिक्षा के प्रति गहरी लगन को देख कर उनके परिजन इन्हें साथ लेकर राजस्थान रवाना हुए हैं।
    समीप ग्राम पालिडीह के यशकुमार ने बताया कि उसकी दो बेटी ज्योति 12 वर्ष और किरण 10 वर्ष की वैदिक षिक्षा में रूचि है। दोनो बालिकाओं की इच्छा को देख कर उसने कन्या वैदिक आश्रम की जानकारी एकत्रित की थी। यहंा आर्य समाज के प्रधान रामकिषोर गुप्ता द्वारा राजस्थान  स्थित श्री गंगानगर के कन्या वैदिक आश्रम  की जानकारी उपलब्ध कराने पर उन्होंने वहंा जाकर कन्या आश्रम का अवलोकन किया था। बालिकाओं के लिए वैदिक षिक्षा के बेहतर इंतजाम मिलने पर ही उसने अपनी दोनो बेटियों का गुरुकुल वैदिक आश्रम भेजने का निर्णय लिया है।
     यशकुमार का कहना था कि उसके कुमेकेला के मि़त्रों को जब वैदिक षिक्षा के बारे में जानकारी दी तो वे भी अपनी बेटियों को आश्रम में भेजने के लिए तैयार हो गए। यशकुमार की दो बेटियों के साथ ग्राम कुमेकेला के बसंत कुमार लहरे भी अपनी चार बेटियों को वैदिक आश्रम लेकर जा रहे हैं। बसंत कुमार लहरे की बेटी लीना 12 वर्ष, सविता 10 वर्ष, भारती 8 वर्ष और समिता 6 वर्ष भी राजस्थान के गुरुकुल आश्रम में रह कर वैदिक षिक्षा ग्रहण करेगी। इनके अलावा ग्राम झक्कड़पुर के अमृतसाय नाग और शिवरतन नाग ने भी बैदिक षिक्षा दिलाने के लिए अपनी इकलौती बेटियों को इसी काफिले के साथ रवाना किया है। इन सभी ग्रामीणों का कहना था कि शास्त्री तक की वैदिक षिक्षा पूरी करके ये बालिकाएँ दूसरों के लिए मिसाल कायम करेंगी।
     यहॉं आर्य समाज के प्रधान रामकिशोर गुप्ता ने बताया कि बालिकाएँ प्राचीन शिक्षा के साथ सुसंस्कृत बन कर भावी पीढ़ी के लिए भी प्रेरणा का काम कर सकती हैं। उन्होने बताया कि राजस्थान के कन्या वैदिक आश्रम में वेद,दर्शन,ब्राम्हण ग्रंथ, गीता, रामायण, उपनिषद आदि के साथ गणित, अंग्रेजी, भूगोल जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत शिक्षा दी जाती है। उन्होने बताया कि बालिकाओं के चहुंमुखी विकास हेतु नैतिक शारीरिक, वैदिक, क्रीडा, व्यावहारिक एवं आध्यात्मिक षिक्षा पर विशेष ध्यान दिया जाता है।