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शुक्रवार, 1 नवंबर 2013

बेमौसम बारिश:पटाखा व्यापारी मायूस



पत्थलगांव/  रमेश शर्मा
         एक पखवाड़े से लगातार हो रही बारिश ने धान उड़द की फसल चौपट करने के बाद अब पटाखा के थोक दुकानदारों के चेहरों पर भी चिन्ता की लकीरें बढ़ा दी हैं। दीपावली पर्व के समय मौसम खराब हो जाने से पटाखा के फुटकर दुकानदार माल खरीदने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।
    यहां पर पटाखा के थोक विक्रेताओं ने दीपावली के साथ चुनावी माहौल को देखते हुए इस वर्ष पटाखों की विभिन्न वेरायटियों का बम्फर स्टॉक रख लिया है पर लगातार हो रही रिमझिम बारिश से इन दुकानदारों ने अभी तक बिक्री की शुरूवात नहीं की है।
     दीपावली पर्व के लिए इस साल नई वेरायटियों के अनेक पटाखे आए हैं।यहां पर पटाखों के थोक विक्रेता ब्रम्हप्रकाश अग्रवाल ने बताया कि ग्राहकों की मांग को देखते हुए पटाखे बनाने वाली नामचीन कम्पनियों ने अलग अलग अंदाज के पटाखों की भरमार कर दी है। इसमें कई पटाखे आसमान में धमाकों के साथ नकली नोटों की बारिश करेंगे, कुछ पटाखे जलाते ही सायरन की आवाज के साथ सतरंगी रोशनी बिखेरेंगे।
    पत्थलगांव का पटाखा बाजार में एक पटाखा ऐसा भी आया है, जो आसमान में फटने के बाद नकली नोटों की बरसात करेगा। तमता के फटाका व्यवसायी ने बताया कि यूं तो हर साल दीपावली के दौरान कुछ न कुछ नए तरह के पटाखे बाजार में आते हैं। पर अब जमीन में जोरदार आवाज के पटाखों का चलन कम होने लगा है। इसके स्थान पर आसमान में फूटने वाले फैंसी पटाखों की मांग बढ़ गई है। 
           पटाखों से मिलेगा बधाई संदेश
पत्थलगांव के थोक पटाखा बाजार में ग्राहकों की बदलती हुई मांग के अनुरूप फैंसी पटाखों की दर्जन भर से भी अधिक वेराइटियां आ गई हैं। इसमें छोटे बच्चों के लिए भी फैंसी पटाखों का अच्छा खासा रेंज मंगाया गया है। फैंसी पटाखों में एक नामचीन कम्पनी ने धमाल के नाम से स्पेशल पटाखा पेश किया है।इसमें रंग बिरंगी रोशनी के साथ जगमग दीपावली के बधाई सन्देश भी मिलेगे।
         पटाखा विक्रेताओं का कहना है कि देवी देवताओं के चित्र वाले पटाखों का विरोध को देखते हुए इस बार ऐसे पटाखे नहीं आए हैं। ग्राहकों की पसंद के अनुसार कई कम्पनियों ने इस साल सायरन वाले पटाखों की ही अधिक रेंज प्रस्तुत की है।इनमें से एक पटाखा डिस्को सायरन वाला भी है। इसकी बाती को जलाते ही यह सायरन की तेज आवाज के साथ आसमान की उंचाइयों में पहंुच जाता है और फूटते ही आसमान में सतरंगी रोशनी का आकर्षक नजारा दिखने लगता है। इस पटाखा में सायरन की चार अलग अलग आवाजें भरी गई हैं। इस नामचीन कम्पनी ने छोटे बच्चों को रोमांचित करने के लिए डिस्को चकरी, अनार तथा रोशनी की भी कई वेराइटी प्रस्तुत की हैं।यहां के एक दुकानदार ने बताया कि पिछली बार चाईनीज पटाखों को ग्राहकों व्दारा नापसंद कर देने से इस बार भारतीय पटाखा कम्पनियों का ही बाजार में बोलबाला रहेगा। चाइनीज कम्पनी की असली पिस्तौल की तरह बच्चों का खिलौना इस बार चुनाव की आचार संहिता के चलते बाजार में उपलब्ध नहीं है।
पटाखा बाजार की रौनक गायब
   पटाखा बाजार में खराब मौसम का भय ने दुकानदारों को काफी मायुस कर दिया है। पटाखा बिक्री के लिए पत्थलगांव में 10 , तमता में 1 तथा बागबहार में 2 व्यापारियों ने लाईसेस ले रखा है। इस बार बारिश का मौसम बन जाने से किसी भी व्यापारी ने अपना लाईसेंस का नवीनीकरण नहीं कराया है।बताया जाता है कि लाईसेंस नवीनीकरण का आवेदन तो सभी ने दिया है पर खराब मौसम के बाद इनके चेहरों पर चिंता की लकीरें स्पष्ट दिखने लगी हैं।तहसरल कार्यालय के सूत्रों के अनुसार 26 अक्टूबर तक किसी भी व्यापारी का पटाखा लायसेंस का नवीनीकरण नहीं हो पाया हैं

गुरुवार, 31 अक्टूबर 2013

विलुप्ति के कगार पर कार्तिक स्नान की परम्परा



शहर के मध्य में स्थित गंदगी से पटा सुता तालाब
पत्थलगांव/ रमेश शर्मा
         बदलते दौर में युवाओं के साथ बुजुर्गो ने भी भोर के समय कार्तिक स्नान की पुरानी परम्परा को भुला दिया है।
   कस्बे और गांवों में तालाबों का अस्तित्व गुम हो जाने के कारण ज्यादातर लोग चाहते हुए भी इस परम्परा का निर्वहन नहीं कर पा रहे हैं। यहां की बुजुर्ग महिला राधा बाई पटेल का कहना था कि कार्तिक मास में दिन के पहले पहर में स्नान कर भगवान षिव की पूजा अर्चना का काम को अब भुला दिया गया है। पहले शरद पूर्णिमा से लेकर कार्तिक पूर्णिमा तक पूरे एक माह तक प्रतिदिन नदी और सरोवर में स्नान कर जल में दीप प्रज्ज्वलित किए जाते थें। आधुनिकता के दौर में वर्षो पुरानी यह परम्परा धीरे धीरे विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई है।
    कस्बों के साथ गांवों में भी तालाबों का अस्तित्व नहीं बच पाने से वहां के लोग कार्तिक स्नान की धार्मिक परम्परा में रूचि नहीं दिखा रहे हैं। पुराने बुजुर्ग कार्तिक स्नान की परम्परा को आज भी याद तो करते हैं पर आस पास में तालाब और नदी का अभाव के चलते वे केवल याद करके ही रह जाते हैं। यहां के व्यवसायी सुरेश अग्रवाल का कहना था कि पहले कार्तिक का महीना प्रारम्भ होते ही सुबह 4 बजे लोग अपने घर से स्नान के लिए निकल पड़ते थे। उस दौरान ठंडे पानी में स्नान के बाद जल में दीप प्रज्ज्वलित करने का नजारा देखते ही बनता था। भोर के समय कार्तिक स्नान के लिए तालाब में दूर दूर के लोग पहुंचकर दीपदान करके तालाब के आस पास मनोरम दृष्य बन जाता था।
             स्वस्थ जीवन की अच्छी परम्परा       
     यहां के नवीन होत्ता ने बताया कि आधुनिकता के चलते अब पुरानी परंपरा को विलुप्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कार्तिक स्नान की परम्परा के पीछे धार्मिक कारण से अधिक अच्छे स्वास्थ्य पर ध्यान देने की आदत बनती थी।श्री होत्ता ने कहा कि गुलाबी ठंड में प्रातः का स्नान स्वास्थ्य की दृष्टि से भी बेहतर रहता था। तालाब अथवा नदी में दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद चावल आदि से भगवान षिव की पूजा अर्चना करने से आसपास के जीव जन्तुओं को भोजन मिलता था। इससे तालाब का पानी भी स्वच्छ रहता था। भोर में कार्तिक स्नान के बहाने लोगों को जल्दी उठने की आदत बन जाती थी पर अब आधुनिकता ने बुजुर्गो व्दारा दी गई अच्छी परम्पराओं को भुला दिया जा रहा है।उन्होने कहा कि अच्छे स्वास्थ्य के लिए इन परम्पराओं को जीवित रखना बेहद जरूरी है।

शुक्रवार, 25 अक्टूबर 2013

कीमती क्वार्ट्ज पत्थर का धड़ल्ले से उत्खनन


कंटगजोर में क्वार्ट्ज पत्थर का अवैध संग्रहण

 बेजा अवैध उत्खनन से खतरे में अस्तित्व
 पत्थलगांव/
          जशपुर जिले की पत्थलगांव तहसील के दर्जन भर गांवों में कीमती क्वार्ट्ज  पत्थर का अवैध उत्खनन के नाम पर जगह जगह प्रकृति का स्वरूप बीगाड़ा जा रहा है।पत्थरों का अवैध उत्खनन पर गांवों में पदस्थ राजस्व अमला की चुप्पी से गांव के आस पास पहाड़ तथा अन्य हरियाली पर खतरा मंडराने लगा है।
     पत्थलगांव विकास खंड में इन दिनों दर्जन भर से अधिक गांवों के आस पास क्वार्ट्ज पत्थर और गिटटी तोड़ने का काम कराया जा रहा है।गांव के आसपास बेजा अवैध उत्खनन से जगह जगह गडडे बन गए हैं। प्रकृति का स्वरूप बदलने से अब लोगों में चिंता व्याप्त होने लगी है।यहांपर कटंगजोर, बनंगांव, पालिडीह, किलकिला, पाकरगांव  तथा अन्य गांवों के आस पास क्वार्ट्ज पत्थर का अवैध उत्खनन का काम जोरों से चल रहा है।
    शासन की अनुमति के बगैर क्वार्ट्ज पत्थर निकाल कर गिटटी तोड़ी जा रही है।क्वार्ट्ज पत्थर के धन्धे में रायल्टी की चोरी करके प्रति दिन लाखों रूपयों के राजस्व की चोरी की जा रही है। बताया जाता है कि यहांपर क्वार्ट्ज पत्थर का अवैध उत्खनन कराने में बड़ा माफिया काम कर रहा है। ट्रेक्टर और अन्य वाहनों से क्वार्ट्ज पत्थर को निकाल कर इसे रायगढ़,चांपा तथा उड़ीसा राज्य के उद्योग धन्धो में आपूर्ति की जा रही हैं।यहांपर पगंषुवा, कंटगजोर गांव के आस पास भी काफी बड़े भू भाग में अवैध क्वार्ट्ज पत्थरों का ढ़ेर लगा हुआ है। इस ढ़ेर से ट्रेक्टर के माध्यम से धड़ल्ले से अवैध परिवहन के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।पत्थलगांव क्षेत्र में क्वार्ट्ज पत्थर उत्खनन के लिए मात्र 2 लीज अधिकृत हैं। पर बगैर स्वीकृति के भी यहा ंजगह जगह क्वार्ट्ज पत्थर का अवैध उत्खनन कराया जा रहा है।गांवों में पदस्थ राजस्व अमला व्दारा क्वार्ट्ज पत्थर का अवैध उत्खनन को अनदेखा कर देने से इस धंधा को करने वाले लोगों के हौंसले बुलंद हो गए हैं।
            क्वार्ट्ज पत्थर भंडारण में शर्तो का उल्लंघन
    पत्थलगांव क्षेत्र में क्वार्ट्ज पत्थर उत्खनन के लिए दो लोगों को लीज दी गई है।वर्तमान में दोनो स्थान पर क्वार्ट्ज उत्खनन का कार्य बन्द है। इसके अलावा पत्थलगांव तहसील अन्तर्गत पगंशुवा और बनगांव में क्वार्ट्ज पत्थर भंडारण करने के लिए दो व्यवसायियों को अनुमति दी गई है।दोनो भंडारण स्थल का निरीक्षण के बाद वहंा शासन की शर्तो का उलंघन की बात सामने आई है।इस वजह दोनो भंडारणकर्ताओं को कारण बताओ नोटिश दिया गया है।नोटिश का जवाब संतोषप्रद नहीं मिलने से दोनो के विरूध्द विधि के अनुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
                  मुनेन्द्र जोशी  जिला खनिज अधिकारी


बुधवार, 23 अक्टूबर 2013

नक्सली समस्या दूर रखने सुदृढ़ नेतृत्व की जरूरत


गणेश राम भगत के समर्थकों की बगीचा में विशाल रैली
  गणेशराम के समर्थन में विशाल रैली व जनसभा

पार्टी गुटबाजी पर ग्रामीणों का विरोध तेज

  पत्थलगॉंव/

       छत्तीसगढ़ का जशपुर जिले में भारतीय जनता पार्टी ने विधानसभा की टिकट वितरण करने में नेताओं की गुटबाजी को महत्व दे देने से यहाँ की सुदृढ़ता पर अब सवालिया निशान लग गया है।जशपुर जिले के अलावा सरगुजा और रायगढ़ जिले में ग्रामीणों के बीच खासे लोकप्रिय रहने वाले जुझारू आदिवासी नेता गणेश राम भगत को इस बार पार्टी नेताओं की आपसी गुटबाजी के चलते विधानसभा चुनाव में टिकिट से वंचित रख दिया है। मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह की सरकार में पूर्व अजाक मंत्री गणेश राम भगत को भारतीय जनता पार्टी ने जशपुर विधानसभा से टिकिट नहीं दिए जाने पर यहाँ जशपुर,बगीचा पंड्रापाठ क्षेत्र के हजारों ग्रामीणों ने रैली निकाल कर विरोध का स्वर तेज कर दिया है।

   दूर दराज के गांवों से पैदल चल कर ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंच कर पार्टी के नेताओं के सामने अपना विरोध दर्ज करा रहे हैं। गणेश राम भगत के समर्थकों का कहना था कि भारतीय जनता पार्टी को अपने नेताओं की गुटबाजी के चलते हजारों लोगों को नक्सली समस्या से सुरक्षित रखने वाले जनप्रतिनिधि को अनदेखा नहीं करना चाहिए। 23 अक्टूबर को गणेश राम भगत के समर्थन में रैली निकालने आए ग्रामीणों ने भाजपा के इस निर्णय को जनभावनाओं से अलग निर्णय करार देते हुए इस पर तत्काल पुनर्विचार करने की मांग की है।

   बगीचा मुख्यालय में दोपहर 1 बजे झमाझम बारिश के बाद भी दूर दराज के गांवों से पैदल चल कर आए हजारों ग्रामीणों ने भारतीय जनता पार्टी के इस निर्णय को अनुचित करार दिया है। बगीचा के बस स्टैण्ड पर एकत्रित इस भीड़ ने विशाल रैली निकाल कर जमकर विरोध प्रदर्षन किया। रैली में नक्सली समस्या से सुरक्षा दो,गणेश राम संघर्ष करो, गणेश राम नामांकन भरो, जैसे जोषीले नारे लगाए जा रहे थे। इस रैली में ग्रामीणों का गुस्सा स्पष्ट दिखाई पड़ रहा था। भाजपा के पूर्व जिला उपाध्यक्ष मुकेश शर्मा तथा बगीचा जनपद के पूर्व अध्यक्ष नेयुराम भगत इस रैली का नेतृत्व कर रहे थे। इस रैली में उपस्थित महिलाओं ने मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह के इस निर्णय को पूरी तरह बेतुका निर्णय करार दिया। बगीचा में हाई स्कूल चौक तक भ्रमण करने के बाद एक जनसभा का भी आयोजन किया गया।

     जनसभा में पूर्व जनपद सदस्य मुलासो बाई ने तीखे तेवर दिखाते हुए गणेश राम भगत को ग्रामीणों का सबसे बड़ा हितैषी बताया। मुलासो बाई का कहना था साल के 365 दिन गरीबों के बीच में रहने वाले इस जनप्रतिनिधि को पार्टी भले अनदेखा कर सकती है पर पूरे अंचल का गरीब तबका उनके साथ में डटा रहेगा। भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष केशव यादव का कहना था कि गणेश राम भगत ने प्रदेश का सरहदी जिला में नक्सली तथा अन्य बदमाशों की आवाजाही पर रोक लगाने के लिए इस अचंल के ग्राम वासियों को एकजुट करने में अहम भूमिका निभाई है। इसी की बदौलत यहाँ व्यावसायी और आम जनता सुकून के साथ रह रही है।

    पूर्व जनपद अध्यक्ष नेयु राम भगत ने कहा कि इस अंचल के लोगों को गुटबाजी में उलझने वाले के बजाए सुदृढ़ नेतृत्व देने वाले गणेश राम भगत की जरूरत है।उन्होने कहा कि इस अचंल के लोग अपनी भलाई बुराई को भलि भांति समझ रहे हैं। पार्टी की अनदेखी के बाद भी वे अपने नेता को अलग थलग नहीं रहने देंगे। जनसभा में सभी ने एक स्वर में गणेश राम भगत को चुनाव में जिताने का संकल्प दोहराया। बगीचा की रैली में सरहदी क्षेत्र के कोने कोने से ग्रामीण स्वतः पहुंचे थे। यहाँ पर दनगरी,रोकड़ापाठ,सुलेशा, महनई आदि बीहड़ अचंल से आने वाले लोगों का कहना था कि इस जिले में नक्सली समस्या को दूर रखना है तो सुदृढ़ नेतृत्व के बगैर यह काम सम्भव नहीं है। दनगरी से यहाँ पहुंचे जुगनु यादव का कहना था कि इस अचंल के लोगों अब थोपा हुआ उम्मीदवार नहीं चाहिए। जुगनू राम का कहना था कि जमीन से जुड़े लोगों के दुख सुख में सदैव शामिल रहने वाले जनप्रतिनिधि को ही वे अपना नेता चुनना पंसद करेंगे।