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गुरुवार, 10 अक्टूबर 2013

टमाटर की फसल हुई चौपट

अधिक बारिश से गलने लगी टमाटर की फसल
 टमाटर किसानों के लिए नहीं है फसल बीमा
भास्कर न्यूज/ पत्थलगांव/   रमेश शर्मा   
       करोड़ों रूपये कर्ज लेकर टमाटर की फसल लगाने वाले किसान प्राकृतिक आफत से बेहाल हो गए हैं। बीते एक पखवाड़े से लगातार हो रही झमाझम बारिश के चलते टमाटर की तैयार और नई फसल के फूल को नुकसान पहुंचाया है। इन दिनो खेतों में पक कर तैयार हो चुकी टमाटर की फसल को तोड़ने से पहले ही अति वृष्टि से यह फसल गलने लगी है। किसानों का कहना है कि इसके साथ टमाटर की नई फसल पर आए फूल भी झड़ कर खेतों में बिखरने लगे हैं। यहां पर टमाटर फसल लेने वालों को एक साथ दोहरा नुकसान उठाना पड़ रहा है।
    पाकरगांव में लगभग पांच एकड़ भूमि में टमाटर की उपज लेने वाले किसान गणेशचन्द्र बेहरा ने बताया कि इस फसल के लिए बीज,खाद और मजदूरी पर अच्छी खासी राशि व्यय करने के बाद अब टमाटर के खेतों में कुछ नहीं बचा है। इस किसान की ज्यादातर फसल अधिक बारिश के कारण खेतों में ही गलने लगी है। इस किसान के खेतों में टमाटर के पौधे भी बारिश के चलते गलने लगे हैं। इसके पहले भी यहां के किसानों व्दारा ग्रीष्म ऋतु में लगाई गई टमाटर की पहली फसल भी अधिक बारिश से खराब हो गई थी।
     नगद फसल के रूप में यहां पर 100 से अधिक गांवों के किसान टमाटर की दोहरी फसल लेने लगे हैं। सिंचाई के साधन नहीं होने के बाद भी अनुकूल जलवायु से टमाटर की खेती करने वाले किसानों का अच्छा मुनाफा मिल जाता है। इसी वजह यहंा के किसान अपने खेतों में दो से तीन बार टमाटर की फसल लेने लगे हैं। जून, जूलाई माह में टमाटर पहली फसल के साथ अक्टूबर माह में आने वाली फसल के अच्छे दाम मिलने के कारण किसानों का इस काम में ज्यादा रूझान हुआ है। पर इस वर्ष मौसम साथ नहीं मिल पाने के चलते किसानों को अपना कर्ज चूकाने की चिंता हो गई है।
   ग्राम पंचायत मुड़ापारा के किसान निरंजन साय नाग ने बताया कि जिन किसानों ने थरहा तैयार कर टमाटर की फसल तैयार की थी इस फसल में इन दिनो फूल आने लगे थे। अधिक बारिश ने इस फसल के फूलों को चैपट कर डाला है।मुड़ापारा के अलावा पंगशुवा, गाला, डूड़ुंगजोर, बुढ़ाडाड सहित अन्य गांव के किसानों ने सैकड़ो एकड़ भूमि पर इन दिनो टमाटर की फसल लगा रखी है।पालिडीह के किसान डमरूधर यादव ने बताया कि इन दिनो टमाटर फसल की लागत में डेढ़ से दो गुना वृध्दि हो गई है। श्री यादव ने कहा कि पहले की अपेक्षा अब टमाटर का बीज के दाम बढ़ कर 15 से 25 हजार रू.प्रति किलो पहुंच गए हैं।इसी तरह खाद और मजदूरी देने में किसानों को अच्छी खासी रकम व्यय करनी पड़ रही है। किसानों का कहना प्राकृतिक आपदा ने इस फसल पर विपरित प्रभाव डाला है।
       भाव अच्छे पर उपज नदारद
 आस पास के साप्ताहिक बाजारों में इन दिनो टमाटर के दाम में तेजी का रूख बना हुआ है।इन दिनो बाजार में टमाटर की आवक कम हो जाने से खरीददारों व्दारा 800 से 1000 रू.कांवर के भाव बोले जा रहे हैं।पर किसानों की टमाटर फसल उनके खेतों में ही गल कर खराब हो जाने से उन्हे इस बार की तेजी का लाभ नहीं मिल रहा है।
               टमाटर किसानों के लिए नहीं है फसल बीमा योजना
   यहंा के उद्यान अधीक्षक प्रकाश सिंह भदौरिया ने बताया कि टमाटर की अधिक मात्रा में पैदावार लेने वाले किसानों के लिए फसल बीमा की कोई योजना नहीं है। उन्होने कहा कि बीते एक पखवाड़े से अनवतरत हो रही बारिश के चलते यहंा पर टमाटर और उड़द की फसल को काफी नुकसान होने की संभावना है।उन्होने बताया कि लगातार बारिश से टमाटर की नई फसल के भी फूल झड़ने लगे हैं।श्री भदौरिया ने कहा कि इस बार नवम्बर माह में आने वाली टमाटर की फसल बाजार में विलंब से पहुंचेगी।

शनिवार, 5 अक्टूबर 2013

खतरें में तालाबों का अस्तित्व

 विधायक रामपुकार के निवास के
समीप वर्षो पुराना बेल तालाब
 
     पत्थलगांव/    रमेश शर्मा
   शहर के तालाबों को प्रदूषण से बचाने के लिए नगर पंचायत व्दारा कोई पहल नहीं करने से यहाँ के ज्यादातर तालाब अब लुप्त होने के कगार में पहुंच गए हैं। सरोवर धरोवर योजना के नाम पर लाखों रुपयों का फर्जीवाड़ा होने से यहाँ के नागरिकों के सामने निस्तारी तालाब की समस्या खड़ी हो गई है।
     कभी स्वच्छ जल से लबालब भरा रहने वाला यहाँ का सूता तालाब, बैगा तालाब, रानीगंज तालाब और बेल तालाब में अब केवल घांस और कचरे का ढ़ेर दिखाई पड़ता है। इन तालाबों का सौंदर्यीकरण के नाम पर नगर पंचायत व्दारा लाखों रूपए व्यय करने के बाद भी यहाँ के ज्यादातर तालाबों का अस्तित्व समाप्त होने के कगार पर पहुंच गया है। शहर के नागरिकों व्दारा नगर पंचायत के प्रभारी सीएमओ नारायण प्रसाद सिंह को बार बार निस्तारी तालाबों का अस्तित्व बचाने की मांग के बाद भी इस काम के लिए कोई सार्थक पहल नहीं हो पाई है।
   यहाँ तालाबों की साफ सफाई और उन्हे प्रदूषण से बचाने के लिए नगर पंचायत व्दारा कोई पहल नहीं करने से नागरिकों में जगह जगह आक्रोश पनपने लगा है। यहाँ पर सूता तालाब और बेल तालाब के आस पास साफ सफाई के काम को अनदेखा कर देने से इन निस्तारी तालाबों में अब केवल कचरे का ढेर और घांस दिखाई पड़ती है।
सरोवर धरोहर योजना से 30 लाख
 व्यय करने के बाद सूता तालाब की बदहाली
  सरोवर धरोवर योजना के साथ पार्षद मद से लाखों रुपयों का व्यय करने के बाद भी यहाँ का सबसे बड़ा सूता तालाब का अब केवल नाम भर बच गया है। शहर के मध्य में स्थित सूता तालाब के चारों ओर गंदगी एवं इसका पानी प्रदूषित हो जाने से इसका उपयोग बन्द हो गया है। सूता तालाब के अलावा पुरानी बस्ती का रानीगंज तालाब की खुबसुरती के स्थान पर यहाँ भी चारो ओर गदंगी दिखाई देने लगी है। शहर के तालाबों के आस पास नगर पंचायत व्दारा साफ सफाई का काम बन्द कर देने के बाद आस पास का वातावरण दूषित होने लगा है।

    यहाँ विधायक रामपुकार सिंह के निवास के समीप वर्षो पुराना बेल तालाब की साफ सफाई के काम से नगर पंचायत के प्रभारी सीएमओ नारायण सिंह व्दारा मुंह फेर लेने के बाद यह तालाब नागरिकों के लिए परेषानी का सबब बन गया है। पुरानी बस्ती का बेल तालाब में कचरा की सफाई नहीं होने से यहाँ चारों ओर बदबू का वातावरण बना रहता है।इस तालाब में भारी मात्रा में घांस उग जाने से यह तालाब अब विलुप्त होने की कागार पर पहुंच गया है।
                प्रदूषित तालाब का नाम सड़ा तालाब
   पुरानी बस्ती में प्राथमिक पाठषाला के समीप वर्षो पुराना तालाब का पानी प्रदूषित हो जाने के बाद मुहल्ले के नागरिकों ने इसका नामकरण सड़ा तालाब कर दिया है। इस तालाब के आस पास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहाँ व्याप्त गंदगी की वजह इस पानी से नहाने पर खुजली तथा अन्य चर्म रोग होने लगता है। पुरानी बस्ती में निस्तारी तालाबों की दुर्दषा को लेकर लोगों में काफी आक्रोश व्याप्त हैं।
                  जनसहयोग की राशि गायब
      यहाँ मुक्तिधाम के समीप बैगा तालाब का जीर्णोद्धार के लिए शहर के लोगों ने चन्दा एकत्रित कर यह राषि नगर पंचायत अधिकारी को सौंपी थी। मुक्तिधाम के समीप तालाब की आवष्यकता के मद्देनजर सबसे पहले जनसहयोग की राषि कलेक्टर ने उपलब्ध कराई थी।बैगा तालाब का जिर्णोध्दार के काम में भी भ्रष्टाचार अछुता नहीं रहा। जनसहयोग की राशि से इस तालाब के लिए साइज पत्थर खरीदी में व्यापक गोलमाल होने के बाद इसका काम को बीच में ही बन्द कर दिया गया। नगर पंचायत अधिकारी की लापरवाही के चलते बैगा तालाब के लिए एकत्रित लाखों रुपयों का हिसाब किताब ही गायब कर दिया गया है। नगर पंचायत उपाध्यक्ष श्रीमती स्नेहलता शर्मा का कहना है कि यहाँ प्रभारी सीएमओ का मनमाना रवैया के चलते शहर के नागरिकों को सभी कार्यो में परेशानी का सामना करना पड़ रहा हैं। 

 शहर में कई तालाबों का जीर्णोद्धार करना आवश्‍यक हो गया है। इसके लिए तालाबों की साफ सफाई के प्राक्कलन तैयार कर राज्य सरकार के पास आबंटन की मांग की जाएगी।
           नारायण सिंह प्रभारी सीएमओ नगर पंचायत पत्थलगांव



     



शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2013

19 परिवार के 109 की हिन्दू धर्म में वापसी

  धर्मान्तरण से युवा पीढ़ी पर विपरित असर   
पत्थलगांव/   रमेश शर्मा
    आदिवासियों का धर्मान्तरण रोकने के लिए भाजपा के दिवंगत नेता दिलीप सिंह जूदेव की तरह भाजपा के पूर्व अजाक मंत्री गणेश राम भगत ने भी इस कार्यक्रम को शुरू करने का बीड़ा उठाया है। श्री भगत ने हिन्दू धर्म में वापस लौटने के कार्यक्रम का नाम जात भीतर देकर शुक्रवार से इसकी पत्थलगांव में शुरूवात की।
   श्री भगत ने कहा कि प्रदेष के आदिवासी बहुल जिलों में वनवासियों को प्रलोभन देकर उनका धर्मान्तरण के साथ साथ आदिवासियों की प्राचीन संस्कृति को भी विलुप्त करने की कुचेष्टा की जा रही है। इससे वनवासियों की युवा पीढ़ी पर विपरित असर पड़ रहा है। वनवासियों का धर्मान्तरण रोकने के काम में सभी को अपनी भागीदारी निभाने की जरूरत है। पत्थलगांव के समीप ग्राम पंचायत जामजुनवनी का आश्रित ग्राम नरवाटिकरा में आयोजित जात भीतर के इस कार्यक्रम में 19 परिवार के 109 लोग हिन्दू धर्म में वापसी की। । श्री भगत ने इस कार्यक्रम में आदिवासियों की सभा में कहा कि वनवासियों का तेजी से धर्मान्तरण के बाद इस वर्ग के युवक शराब और जघन्य अपराधों की ओर प्रेरित होने लगे हैं। विकास की राह से भटकने वाले इन युवकों को अच्छे रास्ते पर ले जाने के लिए जात भीतर का यह कार्यक्रम आदिवासियों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा । यहॉं पर सरना स्थल में एकत्रित ग्रामवासियों ने अपना धर्मान्तरण को लेकर पष्चाताप किया। 
     इस कार्यक्रम में हिन्दू धर्म में वापसी करने वाला परिवार कोरोंजो एक्का,कपील एक्का, संजय लकड़ा बीरबल मिंज का कहना था कि उनके पुरखों व्दारा अपनाया गया हिन्दू धर्म से धर्मान्तरण कर लेने के बाद वे दूसरे धर्म में रह कर बेहद घुटन और अकेलापन महसूस कर रहे थे। इन लोगों का कहना था कि जिस तरह वे पहले गांव के लोगों के साथ आपसी भाई चारा और एक जुटता के साथ अपने त्यौहारों में मिल जुल कर आनंद उठाते थे वह सब बाते समाप्त हो गई थी। इनका कहना था कि वनवासियों का आपसी भाईचारा में जो ताकत रहती है उससे वे लोग दूर हो गए थे।जूलु राम का कहना था कि हिन्दू धर्म से भटकने के बाद उनकी युवा पीढ़ी अपराध की दुनिया में भटकने लगी थी। अपने प्राचीन त्यौहार और समाज की रीति रिवाजों से दूर चले जाने के कारण ही उन्होने अपना मूल हिन्दू धर्म में लौटने का फैसला लिया है। इस गांव में जात भीतर का कार्यक्रम आयोजित होने से पूरे गांव के लोग खुषी में झूमने लगे थे। पुराने हिन्दू परिवार के लोगों ने इन्हे एक दिन पहले सरना स्थल पर बैठा कर उन्हे हिन्दू धर्म अपनाने का संकल्प दिलाया था। इस गांव में आज विषाल जनसभा का भी आयोजन किया गया । इस कार्यक्रम में गांव के लोगों ने पूर्व अजाक मंत्री गणेश राम भगत का भव्य स्वागत किया। वनवासियों की सभा को सम्बोधित करते हुए श्री भगत ने कहा कि जब भी मनुष्य अपनी भूल को जब भी समझ लेता है उसी दिन से उसका नया सबेरा शुरू हो जाता है। उन्होने कहा कि जामजुनवानी का नरवाटिकरा के लोगों ने पाष्चात संस्कृति को छोड़ने का जो साहस दिखाया है इससे अन्य सैकड़ों लोगों को भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ने में मदद मिलेगी। उन्हाने कहा कि अपने समाज को मजबूत रखने से ही विकास के कार्यो को नई दिशा दी जा सकती है। श्री भगत ने कहा कि हम लोग अपने दिवंगत नेता दिलीप सिंह जूदेव के दिखाए मार्ग पर चल कर उनके सपनों को साकार करने का प्रयास कर रहे हैं।श्री भगत ने कहा कि श्री जूदेव ने भी आपरेशन घर वापसी का कार्यक्रम चला कर हजारों वनवासियों को नया सबेरा में अच्छी राह का रास्ता दिखाया था। इस कार्यक्रम में जशपुर के प्रमुख कट्टरवादी हिन्दू नेता रामप्रकाश पाण्डेय, सत्यप्रकाश तिवारी, डा.आजाद, रम्मू शर्मा, बिशु शर्मा, रोशन साय पैंकरा, बलदेव जोशी सहित वनवासी कल्याण आश्रम के अनेक प्रमुख लोग उपस्थित थे।